श्रीलंकाई बाजार में रेनो की दोबारा एंट्री, भारत से भेजी गई कारों की पहली खेप रेनो इंडिया ने श्रीलंका के लिए वाहनों का निर्यात फिर शुरू कर दिया है। चेन्नई बंदरगाह से 100 कारों का पहला जत्था कोलंबो रवाना किया गया है। फ्रांसीसी कार निर्माता रेनो की भारतीय शाखा ने श्रीलंका के ऑटोमोबाइल बाजार में एक बार फिर कदम रख दिया है। कंपनी ने भारत में तैयार की गई 100 गाड़ियों का पहला लॉट तमिलनाडु के चेन्नई बंदरगाह से कोलंबो के लिए रवाना किया है। इस ताजा खेप में कंपनी की जानी-मानी हैचबैक क्विड, सब-कॉम्पैक्ट एसयूवी काइगर और ट्राइबर शामिल हैं। इस नए कदम के साथ ही भारत से रेनो के वैश्विक निर्यात नेटवर्क में अब कुल 16 देश शामिल हो चुके हैं। स्थानीय स्तर पर बिक्री बढ़ाने के लिए एएमडब्ल्यू मोटर्स से करार पड़ोसी मुल्क में अपनी उपस्थिति को मजबूती देने और वाहनों के वितरण को सुगम बनाने के लिए रेनो ने श्रीलंका के प्रमुख ऑटोमोटिव डिस्ट्रीब्यूटर एएमडब्ल्यू मोटर्स के साथ समझौता किया है। यह व्यावसायिक साझेदारी द्वीप राष्ट्र में रेनो के परिचालन ढांचे को मजबूत करेगी। स्थानीय स्तर पर एएमडब्ल्यू मोटर्स के बड़े नेटवर्क का सीधा लाभ ग्राहकों तक कारों की उपलब्धता और सर्विस पहुंचाने में मिलेगा। साथ ही यह कदम दोनों पड़ोसी देशों के बीच ऑटोमोबाइल क्षेत्र में व्यापारिक गतिविधियों को नई गति प्रदान करेगा। ओरागादम संयंत्र से निकली गाड़ियां, निर्यात केंद्र बना भारत श्रीलंका भेजी गई सभी 100 कारों का निर्माण तमिलनाडु में चेन्नई के पास स्थित ओरागादम विनिर्माण संयंत्र में किया गया है। यह विशाल फैसिलिटी भारत के घरेलू बाजार की मांग पूरी करने के साथ-साथ विदेशी बाजारों की जरूरतें पूरी करने में भी केंद्रीय भूमिका निभा रही है। रेनो के लिए भारत एक भरोसेमंद आपूर्ति केंद्र साबित हुआ है। कंपनी अब तक अपने भारतीय संयंत्रों से दुनिया के विभिन्न हिस्सों में लगभग 2,00,000 गाड़ियों का सफल निर्यात पूरा कर चुकी है। इन विदेशी गंतव्यों में दक्षिण अफ्रीका और सऊदी अरब जैसे प्रमुख ऑटोमोबाइल बाजार भी शामिल हैं, जहां मेड इन इंडिया रेनो कारों को खरीदारों से सकारात्मक रिस्पॉन्स मिला है। वैश्विक विस्तार योजना पर कंपनी का रुख रेनो इंडिया के वाइस प्रेसिडेंट (सेल्स एंड मार्केटिंग) फ्रांसिस्को हिडाल्गो ने इस कदम को कंपनी की अंतरराष्ट्रीय वृद्धि रणनीति का एक अहम पड़ाव बताया। फ्रांसिस्को हिडाल्गो के अनुसार, स्थानीय साझेदारों के सहयोग और खरीदारों की पसंद के मुताबिक उत्पाद देकर लंबे समय तक टिकने वाला कारोबार खड़ा करना ही प्राथमिकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत में डिजाइन और असेंबल हो रही गाड़ियों के लिए दुनिया भर में बड़ी संभावनाएं मौजूद हैं, जो देश को वैश्विक ऑटोमोटिव नक्शे पर एक मजबूत विनिर्माण और निर्यात आधार के रूप में स्थापित करती हैं। आने वाले समय में पोर्टफोलियो में जुड़ेगी नई डस्टर कंपनी का इरादा श्रीलंकाई बाजार में केवल वर्तमान तीन मॉडलों तक सीमित रहने का नहीं है। आने वाले महीनों में अपने लाइनअप का विस्तार करते हुए रेनो वहां न्यू डस्टर को भी उतारने की योजना बना रही है। इस नए और आधुनिक मॉडल की पेशकश से कंपनी को श्रीलंका के अलग-अलग कार सेगमेंट्स में अपनी पकड़ मजबूत करने और नए ग्राहकों को जोड़ने में सीधी मदद मिलेगी। इसका आप पर असर इस कदम से भारत के विनिर्माण क्षेत्र और पड़ोसी मुल्क के वाहन बाजार में व्यापारिक गतिविधियां तेज होंगी। • भारत में उत्पादन और रोजगार: चेन्नई के ओरागादम संयंत्र से निर्यात बढ़ने से स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग और ऑटो कंपोनेंट सप्लाई चेन को मजबूती मिलेगी। इससे कारखानों में उत्पादन क्षमता और कार्यकुशलता में सुधार देखने को मिलेगा। • श्रीलंका में कार खरीदारों के लिए: स्थानीय खरीदारों को किफायती बजट और सब-कॉम्पैक्ट सेगमेंट में रेनो के तीन मॉडलों का सीधा विकल्प उपलब्ध होगा। एएमडब्ल्यू मोटर्स के जरिए इन वाहनों की आधिकारिक बिक्री और आफ्टर-सेल्स सपोर्ट मिल सकेगा। • द्विपक्षीय व्यापार: भारत और श्रीलंका के बीच समुद्री बंदरगाहों के जरिए ऑटोमोबाइल आयात-निर्यात को नई दिशा मिलेगी। चेन्नई बंदरगाह से कोलंबो के बीच लॉजिस्टिक्स संचालन को बढ़ावा मिलेगा। • आगामी नए विकल्प: श्रीलंकाई ग्राहकों को आने वाले दिनों में न्यू डस्टर जैसी लोकप्रिय एसयूवी खरीदने का अवसर मिलेगा। इससे वहां मध्यम श्रेणी के एसयूवी खरीदारों को नई पसंद मिलेगी। ऐसा क्यों हुआ रेनो ने अपनी अंतरराष्ट्रीय वृद्धि योजना के तहत श्रीलंकाई बाजार में दोबारा प्रवेश करने और भारत को प्रमुख निर्यात केंद्र बनाने के लिए यह कदम उठाया है। • अंतरराष्ट्रीय विस्तार की रणनीति: कंपनी दुनिया भर के बाजारों में भारत में बनी कारों की मांग को पूरा करने के लिए अपने एक्सपोर्ट नेटवर्क का दायरा बढ़ाना चाहती है। श्रीलंका को दोबारा जोड़कर रेनो का निर्यात नेटवर्क अब 16 देशों तक पहुंच गया है। • स्थानीय वितरण नेटवर्क की साझेदारी: द्वीप राष्ट्र में पूर्व में बंद या धीमी पड़ी गतिविधियों को व्यवस्थित करने के लिए मजबूत डिस्ट्रीब्यूटर की जरूरत थी। एएमडब्ल्यू मोटर्स के विशाल नेटवर्क ने कंपनी को दोबारा कदम जमाने का व्यावहारिक आधार दिया। • चेन्नई संयंत्र की उत्पादन क्षमता: ओरागादम प्लांट पहले ही 2 लाख गाड़ियां विदेशों में भेजकर एक भरोसेमंद केंद्र बन चुका है। घरेलू मांग के साथ-साथ विदेशी शिपमेंट संभालने की क्षमता ने इस विस्तार को संभव बनाया। सवाल-जवाब 1. श्रीलंका के लिए भेजी गई पहली खेप में कितनी गाड़ियां शामिल हैं? रेनो इंडिया ने पहली खेप में कुल 100 कारों को चेन्नई बंदरगाह से कोलंबो के लिए रवाना किया है। 2. इस खेप में रेनो के कौन-कौन से मॉडल शामिल हैं? इस खेप में ट्राइबर, हैचबैक क्विड और सब-कॉम्पैक्ट एसयूवी काइगर शामिल हैं। 3. श्रीलंका में रेनो कारों का वितरण कौन सी कंपनी करेगी? श्रीलंका में वाहनों की बिक्री और वितरण के लिए रेनो ने स्थानीय ऑटोमोटिव डिस्ट्रीब्यूटर एएमडब्ल्यू मोटर्स के साथ साझेदारी की है। 4. इन सभी गाड़ियों का निर्माण कहां हुआ है? इन सभी गाड़ियों का निर्माण तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई के निकट स्थित ओरागादम प्लांट में किया गया है। 5. भारत से रेनो अब तक कितने वाहनों का अंतरराष्ट्रीय निर्यात कर चुकी है? कंपनी भारतीय संयंत्रों से अब तक लगभग 2,00,000 वाहनों का निर्यात विभिन्न विदेशी बाजारों में पूरा कर चुकी है। 6. रेनो आने वाले समय में श्रीलंका में कौन सा नया मॉडल पेश करेगी? कंपनी आने वाले महीनों में अपने लाइनअप का विस्तार करते हुए न्यू डस्टर को श्रीलंकाई बाजार में पेश करेगी। https://trendkia.com/auto/sri-lanka-bajara-men-renault-ki-dobara-entri-bharata-se-bheji-gai-karon-ki-pahali-khepa-33586 TrendKia — Har trend, sabse pehle.