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  "type": "article",
  "title": "सूरत से चेन्नई का सड़क सफर होगा सुपरफास्ट, नए 6-लेन एक्सप्रेसवे से 20 घंटे की होगी बचत",
  "summary": "भारतमाला परियोजना के अंतर्गत बन रहा 900 किलोमीटर लंबा छह लेन का नया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे सूरत और चेन्नई के बीच यात्रा के समय को 36 घंटे से घटाकर मात्र 16 घंटे कर देगा। 2027 के अंत तक पूरा होने वाला यह कॉरिडोर पांच राज्यों को जोड़ेगा।",
  "content": "पश्चिमी भारत के औद्योगिक केंद्र गुजरात से दक्षिण भारत के प्रमुख व्यापारिक हब चेन्नई तक सड़क मार्ग से सफर करने वाले मुसाफिरों और मालवाहकों के लिए एक बड़ा बदलाव जमीन पर उतरने जा रहा है। पारंपरिक राष्ट्रीय राजमार्गों पर लगने वाले भारी जाम और थकाऊ रास्तों की वजह से जहां इस दूरी को तय करने में करीब 36 घंटे का लंबा समय लग जाता था, वहीं अब नए एक्सप्रेसवे के चालू होने के बाद यह यात्रा सिमटकर केवल 16 घंटे की रह जाएगी। भारतमाला परियोजना के तहत आकार ले रहा यह छह लेन का ग्रीनफील्ड कॉरिडोर देश के पांच प्रमुख राज्यों के बीच लॉजिस्टिक्स और दैनिक आवाजाही की पूरी व्यवस्था को नया रूप देने के लिए तैयार किया जा रहा है।\n\nरूट में संशोधन और 900 किलोमीटर का दायरा\nइस आधुनिक राजमार्ग परियोजना की रूपरेखा को समय और संसाधन के लिहाज से अधिक प्रभावी बनाने के लिए हाल ही में अहम प्रशासनिक फैसले लिए गए हैं। शुरुआत में यह संपूर्ण एक्सप्रेसवे 1271 किलोमीटर का प्रस्तावित किया गया था। प्रशासनिक और तकनीकी स्तर पर रूट संशोधन करते हुए इसके सूरत-नासिक खंड को अलग कर दिया गया, जिसके बाद इस परियोजना की कुल संशोधित लंबाई घटकर लगभग 900 किलोमीटर रह गई है। इस खंडीय बदलाव के बावजूद यह नया कॉरिडोर गुजरात के सूरत से लेकर तमिलनाडु के चेन्नई तक निर्बाध और पूरी कनेक्टिविटी देने के लिए डिजाइन किया गया है, जिससे लंबी दूरी के सफर में करीब 20 घंटे की भारी बचत होगी।\n\nपांच राज्यों के प्रमुख शहरों को जोड़ेगा 6-लेन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर\nयह छह लेन का ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे पांच राज्यों के बीच माल ढुलाई और अंतरराज्यीय व्यापार को रफ्तार देने में बड़ी भूमिका निभाएगा। रास्ते में पड़ने वाले कई प्रमुख आर्थिक और धार्मिक नगरों को इस कॉरिडोर के जरिए सीधा संपर्क मिलेगा\n\n• महाराष्ट्र: राज्य के भीतर यह एक्सप्रेसवे नासिक, अहमदनगर, सोलापुर और अक्कलकोट जैसे प्रमुख व्यापारिक व सांस्कृतिक केंद्रों से होकर गुजरेगा।\n• आंध्र प्रदेश: इस राज्य में यह मार्ग कुरनूल, कडप्पा और प्रसिद्ध धार्मिक नगरी तिरुपति को तेज सड़क नेटवर्क से जोड़ेगा।\n\nइन क्षेत्रों के जुड़ने से स्थानीय कृषि उपज, औद्योगिक माल और तीर्थयात्रियों की आवाजाही पहले की तुलना में बेहद सुगम और समय बचाने वाली हो जाएगी।\n\nनिर्माण प्रगति और 2027 तक का लक्ष्य\nइस मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पर विभिन्न राज्यों में अलग-अलग चरणों के तहत तेजी से काम को आगे बढ़ाया जा रहा है। महाराष्ट्र मंत्रिमंडल ने अपने दायरे में आने वाले 374 किलोमीटर लंबे नासिक-सोलापुर-अक्कलकोट ग्रीनफील्ड खंड को पहले ही मंजूरी दे दी है, जिसके निर्माण पर लगभग 19 हजार 142 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। वहीं दूसरी तरफ, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश की सीमा से जुड़े 177 किलोमीटर लंबे खंड पर जमीनी काम शुरू कर दिया गया है तथा वहां भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को भी गति दी गई है। नेशनल हाईवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने इस संपूर्ण 900 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर को साल 2027 के आखिर तक पूरा करने का कड़ा लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके तैयार होते ही गुजरात से तमिलनाडु के बीच की सड़क यात्रा बेहद तेज और सुगम हो जाएगी।\n\nइसका आप पर असर\nइस नए छह-लेन एक्सप्रेसवे के शुरू होने से पश्चिमी और दक्षिणी भारत के बीच सड़क यात्रा का समय 20 घंटे कम होकर 16 घंटे रह जाएगा।\n\n• देशभर में: गुजरात के बंदरगाहों और औद्योगिक बेल्ट से तमिलनाडु के बीच माल ढुलाई की लागत और समय में भारी कमी आएगी। लॉजिस्टिक्स कंपनियों और लंबी दूरी के ट्रांसपोर्टरों के लिए टर्नअराउंड समय आधा होने से जरूरी सामानों की आपूर्ति तेज होगी।\n• महाराष्ट्र में: नासिक, अहमदनगर, सोलापुर और अक्कलकोट के उद्योगों और कृषि मंडियों को सीधे तेज सड़क संपर्क मिलेगा। इससे 19 हजार 142 करोड़ रुपये के निवेश से बन रहे 374 किलोमीटर लंबे हिस्से के आसपास स्थानीय व्यापार और रोजगार को बढ़ावा मिलेगा।\n• आंध्र प्रदेश में: कुरनूल, कडप्पा और तिरुपति के लोगों को दोनों दिशाओं में जाने के लिए बिना रुकावट का हाई-स्पीड नेटवर्क मिलेगा। प्रसिद्ध धार्मिक स्थल तिरुपति जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए लंबी दूरी की यात्रा बेहद आसान और कम समय वाली हो जाएगी।\n• वाहन चालकों और मुसाफिरों के लिए: 900 किलोमीटर लंबे ग्रीनफील्ड मार्ग पर पुराना जाम खत्म होगा जिससे ईंधन और समय की भारी बचत होगी। 2027 के आखिर तक काम पूरा होने पर यात्रियों को 36 घंटे के बजाय केवल 16 घंटे में सुरक्षित सफर का विकल्प मिलेगा।\n\nऐसा क्यों हुआ\nपारंपरिक राष्ट्रीय राजमार्गों पर बढ़ते यातायात के दबाव और गुजरात से तमिलनाडु के बीच माल ढुलाई में लगने वाले अत्यधिक समय को कम करने के लिए इस नए कॉरिडोर की योजना बनाई गई।\n\n• लॉजिस्टिक्स में लगने वाला भारी समय: पुराने राष्ट्रीय राजमार्गों पर भारी जाम के चलते सूरत से चेन्नई की दूरी तय करने में करीब 36 घंटे बर्बाद हो जाते थे। माल की ढुलाई को किफायती और तेज बनाने के लिए एक निर्बाध छह लेन के एक्सप्रेसवे की सख्त जरूरत थी।\n• भारतमाला परियोजना के तहत विकास: केंद्र सरकार की भारतमाला परियोजना के तहत अंतरराज्यीय आर्थिक गलियारों को ग्रीनफील्ड रूट से जोड़ने की योजना बनाई गई। इसी पहल के तहत पांच राज्यों को आपस में जोड़ने वाले इस रणनीतिक कॉरिडोर को मंजूरी दी गई।\n• रूट संशोधन का फैसला: पहले यह परियोजना 1271 किलोमीटर के लिए सोची गई थी, लेकिन प्रशासनिक दक्षता और योजना के आधार पर सूरत-नासिक खंड को अलग कर कुल दूरी 900 किलोमीटर की गई। इससे परियोजना के क्रियान्वयन को अधिक व्यावहारिक बनाया जा सका।\n• बजट और जमीनी मंजूरी: महाराष्ट्र सरकार ने 19 हजार 142 करोड़ रुपये की लागत से 374 किलोमीटर लंबे खंड को मंजूरी दी, जबकि कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में 177 किलोमीटर के खंड पर भूमि अधिग्रहण तेज कर काम शुरू कराया गया।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. सूरत-चेन्नई एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई कितनी है?\nप्रशासनिक और रूट संशोधन के बाद इस छह-लेन एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई घटकर करीब 900 किलोमीटर रह गई है।\n\n2. इस नए एक्सप्रेसवे से यात्रा के समय में कितनी बचत होगी?\nपारंपरिक राजमार्ग पर लगने वाले 36 घंटे के समय की तुलना में इस एक्सप्रेसवे पर सफर केवल 16 घंटे में पूरा होगा, जिससे लगभग 20 घंटे की बचत होगी।\n\n3. यह एक्सप्रेसवे देश के कितने राज्यों से होकर गुजरेगा?\nयह नया ग्रीनफील्ड कॉरिडोर देश के पांच प्रमुख राज्यों से होकर गुजरेगा, जिनमें गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु शामिल हैं।\n\n4. महाराष्ट्र में इस परियोजना की लागत और लंबाई कितनी है?\nमहाराष्ट्र में 374 किलोमीटर लंबे नासिक-सोलापुर-अक्कलकोट खंड को मंजूरी मिल चुकी है, जिसकी लागत करीब 19,142 करोड़ रुपये होगी।\n\n5. सूरत-चेन्नई एक्सप्रेसवे का निर्माण कब तक पूरा होने का लक्ष्य है?\nनेशनल हाईवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने इस पूरे एक्सप्रेसवे को 2027 के आखिर तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया है।",
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  "category": "ऑटो",
  "publishedAt": "2026-09-22",
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    "भारतमाला परियोजना",
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