# वाहन बीमा में डीलरों के ऊंचे कमीशन पर लगेगी लगाम, नियामक ने तैयार किया नया मसौदा

> बीमा विनियामक इरडा ने मोटर इंश्योरेंस नियमों में व्यापक सुधार का प्रस्ताव पेश किया है, जिससे डीलरशिप पर महंगे प्रीमियम और भारी कमीशन के दबाव से वाहन खरीदारों को राहत मिल सकेगी।

**Type:** article · **Category:** ऑटो · **Published:** 2026-09-24 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/auto/vahana-bima-men-dilaron-ke-unche-kamishana-para-lagegi-lagama-niyamaka-ne-taiyara-kiya-naya-masauda-37972 · **Language:** Hindi
**Tags:** मोटर बीमा, इरडा, बीमा सुगम, कार इंश्योरेंस, थर्ड पार्टी बीमा, वाहन खरीद

नई गाड़ी खरीदते वक्त शोरूम पर ही महंगा मोटर बीमा खरीदने की मजबूरी जल्द खत्म हो सकती है। भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण यानी इरडा ने वाहन बीमा से जुड़े मौजूदा तौर-तरीकों को पूरी तरह बदलने का मसौदा तैयार किया है। नियामक की योजना ग्राहकों को डीलरशिप के एकाधिकार से बाहर निकालने और 'बीमा सुगम' जैसे डिजिटल माध्यमों से सीधे पॉलिसी चुनने की आजादी देने की है। अनिवार्य थर्ड-पार्टी बीमा पर कमीशन की दरों को सीमित कर पॉलिसी की लागत घटाने और समूची प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की तैयारी चल रही है। वित्तीय आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2023 से लेकर वित्त वर्ष 2025 के बीच कुल मोटर इंश्योरेंस प्रीमियम संग्रह में 34 प्रतिशत का इजाफा हुआ, मगर इसी दौरान बीमा वितरण पर चुकाया जाने वाला कमीशन 259 प्रतिशत तक उछल गया।

## कमीशन का गणित और डीलरों की कमाई
वित्त वर्ष 2025 के दौरान बीमा बाजार में औसत कमीशन करीब 24 प्रतिशत दर्ज किया गया, जिसकी दर अलग-अलग मामलों में 13 प्रतिशत से लेकर 50 प्रतिशत तक पहुंच गई थी। वाहन निर्माता ब्रोकरों (ओईएम ब्रोकर्स) और मोटर इंश्योरेंस सर्विस प्रोवाइडर्स (एमआईएसपी) की कुल बाजार हिस्सेदारी लगभग 30 प्रतिशत रही। इन दोनों माध्यमों ने मिलकर करीब 29,000 करोड़ रुपये का सकल प्रीमियम जुटाया और करीब 7,050 करोड़ रुपये कमीशन के तौर पर हासिल किए। आंकड़ों के मुताबिक, नए वाहनों की बिक्री पर ओईएम को औसतन 27 प्रतिशत और एमआईएसपी को 38 प्रतिशत तक का भारी कमीशन मिला। इसके उलट पुरानी गाड़ियों के सौदों में एमआईएसपी का कमीशन केवल 12 प्रतिशत रहा। नियामक का मानना है कि नए वाहन का अनिवार्य थर्ड-पार्टी कवर बेचने में लगभग कोई मशक्कत नहीं लगती, इसलिए इसे बिना मेहनत वाला उत्पाद माना गया है, जबकि ओन-डैमेज और व्यापक (कॉम्प्रिहेंसिव) पॉलिसियों को कम मेहनत वाली श्रेणी में रखा गया है।

## बीमा सुगम और क्यूआर कोड का सीधा विकल्प
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत नए और पुराने दोनों प्रकार के वाहनों के लिए मोटर इंश्योरेंस बीमा सुगम जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराया जाना जरूरी होगा। शोरूम या डीलरशिप परिसर में ग्राहकों के सामने यह विकल्प प्रमुखता से प्रदर्शित करना होगा। इसके लिए बाकायदा क्यूआर कोड लगाए जाएंगे, ताकि कोई भी ग्राहक अपने फोन से स्कैन करके घर बैठे या शोरूम में खड़े-खड़े अपनी पसंद की कंपनी से डिजिटल पॉलिसी ले सके। डीलर के लिए यह अनिवार्य होगा कि वह गाड़ी खरीदने वाले को इस स्वतंत्र विकल्प की पूरी जानकारी दे। इस प्रकार के गैर-लाभकारी (नॉट-फॉर-प्रॉफिट) प्लेटफॉर्म की अधिकतम फीस प्रीमियम राशि के 5 प्रतिशत से ज्यादा नहीं रखी जा सकेगी, जिससे ग्राहकों की डीलर नेटवर्क पर निर्भरता काफी घट जाएगी।

## डीलर नेटवर्क के नियमन में बदलाव
नए मसौदे में व्यवस्था की गई है कि जो वाहन डीलर इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन एंटिटी (आईडीई) के तय मानकों को पूरा करेंगे, उन्हें आईडीई के रूप में सीधे पंजीकरण कराना होगा। जो डीलर इन मानकों पर खरे नहीं उतरेंगे, उन्हें किसी पंजीकृत आईडीई के पॉइंट ऑफ सेल्स पर्सन (पीओएसपी) या फिर किसी एक चुनिंदा बीमा कंपनी के अधिकृत एसोसिएट के तौर पर जुड़ना पड़ेगा। नियामक ने यह भी स्पष्ट किया है कि पॉलिसीधारकों के हितों के खिलाफ जाने वाली किसी भी प्रोत्साहन योजना, जैसे टारगेट या परफॉर्मेंस-लिंक्ड इंसेंटिव, को आगे जारी रखने की अनुमति नहीं होगी। इससे ग्राहकों पर एक खास महंगी पॉलिसी थोपने का अनुचित दबाव खत्म होगा।

## कैशलेस मरम्मत की सुविधा और डिजिटल ट्रैकिंग
अक्सर देखा गया है कि बाहर से बीमा कराने पर वाहन डीलरों की तरफ से सहयोग न मिलने की शिकायतें आती हैं। नए प्रस्ताव के तहत अगर ग्राहक डीलरशिप से बीमा नहीं भी खरीदता है, तब भी अधिकृत डीलर या सर्विस सेंटर उसे कैशलेस क्लेम और मरम्मत सेवा देने से इनकार नहीं कर सकेगा। सुरक्षा के लिहाज से ग्राहक का पंजीकृत मोबाइल नंबर पॉलिसी इश्यूएंस रिक्वेस्ट (पीआईआर) के साथ साझा किया जाएगा, जिसका मिलान सीधे सरकारी 'वाहन' (VAHAN) डेटाबेस से होगा। पुष्टि होते ही ग्राहक को तत्काल एक कन्फर्मेशन मैसेज भेजा जाएगा, जिससे बीमा रिकॉर्ड सुरक्षित और पूरी तरह ट्रैक करने योग्य बन जाएगा।

## थर्ड-पार्टी बीमा की लागत कम होने की उम्मीद
सड़क पर वाहन उतारने के लिए अनिवार्य थर्ड-पार्टी कवर पर कमीशन पहले 4.3 प्रतिशत से बढ़कर 22 प्रतिशत के स्तर तक पहुंच गया था। नियामक का इरादा इस कमीशन को काफी नीचे लाने का है, जिसका सीधा फायदा वाहन मालिक को मिलेगा और नई गाड़ी की कुल ऑन-रोड लागत कम हो सकेगी। ध्यान रहे कि ये सभी प्रावधान अभी विमर्श और परामर्श के स्तर पर हैं, जिन्हें सभी पक्षों और हितधारकों की प्रतिक्रिया मिलने के बाद अंतिम रूप दिया जाएगा।

## इसका आप पर असर
अगर आप नई कार या दोपहिया वाहन खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो इन नए नियमों से आपका बीमा खर्च काफी कम हो सकता है।

- **सीधी बचत:** थर्ड-पार्टी बीमा पर कमीशन सीमित होने और बीमा सुगम जैसे प्लेटफॉर्म के 5 प्रतिशत फीस कैप से नई गाड़ी का कुल इंश्योरेंस प्रीमियम सस्ता पड़ेगा। इससे गाड़ी की ऑन-रोड डिलीवरी लागत में हजारों रुपये की बचत संभव होगी।
- **पसंद की आजादी:** डीलरशिप पर क्यूआर कोड के जरिए अपनी मर्जी की पॉलिसी चुनने का अधिकार मिलेगा। डीलर किसी महंगी विशिष्ट बीमा कंपनी की पॉलिसी लेने के लिए आप पर अनुचित दबाव नहीं बना सकेंगे।
- **कैशलेस रिपेयर की गारंटी:** बाहर से बीमा लेने पर भी अधिकृत वर्कशॉप आपको कैशलेस सर्विस देने से मना नहीं कर सकेंगे। आपका क्लेम सामान्य प्रक्रिया की तरह शोरूम या वर्कशॉप पर बिना किसी बाधा के प्रोसेस किया जाएगा।
- **फर्जीवाड़े से सुरक्षा:** मोबाइल नंबर का सीधा मिलान सरकारी वाहन पोर्टल से होने के बाद कन्फर्मेशन एसएमएस आएगा। इससे जाली पॉलिसी या अधूरी जानकारी वाली पॉलिसी जारी होने का खतरा पूरी तरह टल जाएगा।

## ऐसा क्यों हुआ
मोटर बीमा वितरण में डीलरों और बिचौलियों के अनियंत्रित कमीशन और ग्राहकों पर डाले जाने वाले अनावश्यक दबाव को समाप्त करने के लिए नियामक ने यह कदम उठाया है।

- **कमीशन में बेतहाशा उछाल:** वित्त वर्ष 2023 से 2025 के बीच बीमा प्रीमियम में 34 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि एजेंटों और डीलरों का कमीशन 259 प्रतिशत तक बढ़ गया। इस भारी अंतर के चलते ग्राहकों को महंगे प्रीमियम का बोझ उठाना पड़ रहा था।
- **शोरूम स्तर पर एकाधिकार:** नए वाहन की खरीद पर डीलरों को 38 प्रतिशत तक का ऊंचा कमीशन मिल रहा था, जिसके चलते वे ग्राहकों को बाहर से बीमा लेने का विकल्प नहीं देते थे। विनियामक इस अनुचित एकाधिकार को समाप्त करना चाहता है।
- **प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना:** नियामक ने पाया कि अनिवार्य थर्ड-पार्टी कवर बेचने में किसी अतिरिक्त सेवा की जरूरत नहीं होती, फिर भी उस पर 22 प्रतिशत तक कमीशन वसूला जा रहा था। डिजिटल प्लेटफॉर्म लाकर वितरण लागत घटाना ही इस सुधार का मुख्य आधार है।

## सवाल-जवाब

### 1. इरडा के नए प्रस्ताव का वाहन खरीदारों पर क्या असर पड़ेगा?
ग्राहकों को डीलरशिप पर अपनी पसंद का बीमा डिजिटल तरीके से चुनने की सुविधा मिलेगी और थर्ड-पार्टी कवर पर कमीशन घटने से पॉलिसी सस्ती हो सकती है।

### 2. डीलरशिप पर बीमा सुगम का विकल्प कैसे मिलेगा?
शोरूम में क्यूआर कोड लगाया जाएगा, जिसे स्कैन करके ग्राहक सीधे ऑनलाइन पोर्टल पर नई या पुरानी गाड़ी के लिए पारदर्शी दरों पर पॉलिसी खरीद सकेंगे।

### 3. अगर बीमा डीलर से न लें, तो क्या कार की कैशलेस रिपेयर मिलेगी?
हां, नए नियमों के अनुसार डीलर या अधिकृत सर्विस सेंटर किसी भी वैध पॉलिसीधारक को कैशलेस मरम्मत और क्लेम की सुविधा देने से इनकार नहीं कर सकते।

### 4. थर्ड-पार्टी बीमा पर कमीशन कितना बढ़ा था?
अनिवार्य थर्ड-पार्टी मोटर बीमा पर कमीशन पहले 4.3 प्रतिशत था, जो बढ़कर 22 प्रतिशत तक पहुंच गया था और अब इसे घटाने का प्रस्ताव है।

### 5. क्या ये नियम तुरंत प्रभाव से लागू हो चुके हैं?
नहीं, ये अभी इरडा द्वारा जारी किए गए मसौदा प्रस्ताव हैं और सभी पक्षों से राय लेने के बाद ही इन्हें अंतिम रूप से लागू किया जाएगा।

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