वाहनों के प्रदूषण नियमों में होगा बड़ा बदलाव, अप्रैल 2029 से बीएस-7 लागू करने की तैयारी सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने यात्री कारों के लिए 1 अप्रैल 2029 से तीन चरणों में बीएस-7 मानक लागू करने का मसौदा जारी किया है। नए नियमों में टेलपाइप उत्सर्जन के अलावा ईवी बैटरी की उम्र और टायर-ब्रेक से होने वाले प्रदूषण पर भी कड़े मानक तय होंगे। देश में यात्री कारों से फैलने वाले प्रदूषण पर लगाम कसने के लिए केंद्र सरकार ने कड़े उत्सर्जन मानक लागू करने की योजना तैयार की है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में आवश्यक संशोधन करने के लिए एक मसौदा अधिसूचना जारी की है। इस प्रस्ताव के तहत 1 अप्रैल 2029 से नए भारत स्टेज-7 यानी बीएस-7 मानकों को पेश करने की तैयारी है। मंत्रालय ने इस नए नियमन पर सभी हितधारकों और आम जनता से 30 दिनों के भीतर सुझाव एवं आपत्तियां मांगी हैं। यह व्यवस्था मुख्य रूप से कारों सहित 'एम1' श्रेणी के यात्री वाहनों पर प्रभावी होगी, जिसमें न केवल साइलेंसर से निकलने वाले धुएं बल्कि वाहन के पूरे जीवनकाल के दौरान वास्तविक उत्सर्जन स्तर की कड़ी निगरानी की जाएगी। तीन अलग-अलग चरणों में लागू होंगे बीएस-7 मानक सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के मसौदे के अनुसार, नए बीएस-7 नियम ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए अचानक नहीं बल्कि क्रमिक तरीके से तीन चरणों में प्रभावी किए जाएंगे। पहला चरण 1 अप्रैल 2029 से शुरू होगा, जबकि दूसरा चरण अप्रैल 2031 और तीसरा चरण अप्रैल 2035 से लागू करने की समय-सीमा तय की गई है। सरकार के इस अग्रिम कदम से ऑटोमोबाइल विनिर्माण कंपनियों को पहले चरण के अनुरूप तकनीक विकसित करने और उत्पादन प्रणाली बदलने के लिए करीब ढाई साल का समय मिल जाएगा। पहले चरण के अंतर्गत वाहनों के निकास उत्सर्जन यानी टेलपाइप धुएं की सीमाओं को बेहद सख्त किया जाएगा। इसके साथ ही पेट्रोल और डीजल की वास्तविक खपत, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों में बिजली की खपत और बैटरी के चलने की क्षमता के प्रावधान तय होंगे। अप्रैल 2031 से शुरू होने वाले दूसरे चरण में एक नया तकनीकी पहलू जुड़ेगा, जिसमें ब्रेक लगाने पर निकलने वाले सूक्ष्म कणों और सड़कों पर टायरों के घिसने से होने वाले वायु प्रदूषण पर भी सख्त नियंत्रण सीमाएं तय की जाएंगी। वहीं, अप्रैल 2035 के तीसरे चरण में सभी श्रेणियों की कारों के लिए ब्रेक कण उत्सर्जन की एकसमान सीमा पूरी तरह अनिवार्य कर दी जाएगी। इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनों की बैटरी के लिए कड़े मानक नए मसौदे में केवल पारंपरिक ईंधन आधारित वाहनों को ही नहीं समेटा गया है, बल्कि तेजी से बढ़ते इलेक्ट्रिक और प्लग-इन हाइब्रिड वाहनों के लिए भी कड़े गुणवत्ता पैमाने तय किए गए हैं। इलेक्ट्रिक गाड़ियों में इस्तेमाल होने वाली बैटरी की दीर्घायु और टिकाऊ क्षमता को लेकर स्पष्ट नियम बनाए गए हैं। इसके तहत वाहन निर्माताओं को यह सुनिश्चित करना होगा कि ईवी की बैटरी कम से कम 5 साल या 1 लाख किलोमीटर के संचालन के बाद भी 75 प्रतिशत क्षमता बरकरार रखे। वहीं, 8 साल या 1.6 लाख किलोमीटर के सफर के बाद बैटरी की क्षमता कम से कम 67 प्रतिशत बची रहनी चाहिए। इस कदम से ईवी खरीदारों को बैटरी की विश्वसनीयता और रीसेल वैल्यू को लेकर बेहतर सुरक्षा मिलेगी। सड़क पर वास्तविक टेस्टिंग और पर्यावरण वाहन पासपोर्ट नए नियमों के तहत प्रयोगशाला परीक्षणों के बजाय वाहनों के सड़क पर चलने के वास्तविक हालातों में उत्सर्जन की जांच अनिवार्य होगी। इसके लिए कारों में ऑन-बोर्ड निगरानी प्रणाली लगाई जाएगी जो ईंधन और बिजली की वास्तविक खपत पर लगातार नजर रखेगी। ग्राहकों के हितों और पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिए 'पर्यावरण वाहन पासपोर्ट' देने का भी प्रस्ताव है, जिससे खरीदार को वाहन के उत्सर्जन स्तर, माइलेज और बैटरी की वास्तविक सेहत का ब्योरा मिल सकेगा। इसके अलावा पेट्रोल और डीजल से चलने वाली कारों के लिए भू-सीमा यानी जियोफेंसिंग तकनीक आधारित 'बीएस-7-जी' श्रेणी में अनुमोदन का विकल्प भी रखा गया है। साथ ही जिन वाहनों के इंजन ई20 से अधिक एथनॉल मिश्रित पेट्रोल पर चलने के अनुकूल होंगे, वाहन निर्माताओं को गाड़ियों पर इसका स्पष्ट रूप से उल्लेख करना अनिवार्य होगा। भारत में वर्तमान में अप्रैल 2020 से बीएस-6 मानक लागू हैं, जिन्हें बीएस-4 के बाद बिना बीएस-5 लाए सीधे छलांग लगाकर लागू किया गया था और जिनमें कम सल्फर वाले विशेष ईंधन का उपयोग अनिवार्य किया गया था। इसका आप पर असर नया बीएस-7 मसौदा भविष्य में कार खरीदने वालों और मौजूदा वाहन उद्योग की कार्यप्रणाली में कई जमीनी बदलाव लेकर आएगा। • भारत में कार खरीदारों पर: नए उत्सर्जन नियमों के चलते ऑटोमोबाइल कंपनियों की विनिर्माण लागत बढ़ेगी, जिसका सीधा असर भविष्य में नई कारों की कीमतों पर पड़ सकता है। हालांकि, कड़े परीक्षणों से खरीदारों को बेहतर ईंधन दक्षता और कम प्रदूषण करने वाली गाड़ियां मिलेंगी। • ईवी खरीदारों की सुरक्षा पर: इलेक्ट्रिक कार की बैटरी के लिए 5 और 8 साल की न्यूनतम क्षमता सीमा तय होने से बैटरी की गुणवत्ता सुनिश्चित होगी। इससे उपभोक्ताओं को बैटरी जल्दी खराब होने की चिंता से मुक्ति मिलेगी और रीसेल मूल्य भी स्थिर रहेगा। • पारदर्शिता के मामले में: पर्यावरण वाहन पासपोर्ट मिलने से ग्राहक गाड़ी खरीदने से पहले ही उसके वास्तविक प्रदूषण और ईंधन खपत का सही हिसाब देख सकेंगे। इससे कार कंपनियों के माइलेज और प्रदूषण के दावों की सीधी पुष्टि संभव होगी। • ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए: विनिर्माताओं को 2029 से पहले इंजन और तकनीक में भारी बदलाव के लिए करीब ढाई साल का समय मिलेगा। कंपनियों को एथनॉल-अनुकूल इंजन और गैर-उत्सर्जन प्रदूषण रोकने वाली प्रणालियों पर निवेश बढ़ाना होगा। ऐसा क्यों हुआ यह नीतिगत बदलाव भारत में वाहनों से होने वाले वायु प्रदूषण को कम करने और ऑटोमोबाइल मानकों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के उद्देश्य से लाया गया है। • सीधा कारण: सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधन करने के लिए मसौदा अधिसूचना जारी कर नए प्रदूषण मानक तय किए हैं। इसका मुख्य उद्देश्य कारों से निकलने वाले निकास धुएं के साथ ब्रेक और टायरों से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करना है। • बदलाव की पृष्ठभूमि: भारत ने वायु प्रदूषण के स्तर को तेजी से घटाने के लिए अप्रैल 2020 में बीएस-4 के बाद सीधे बीएस-6 मानक लागू किए थे। मौजूदा तकनीक को और अधिक प्रभावी बनाने और वास्तविक सड़क परिस्थितियों में सटीक निगरानी के लिए बीएस-7 की रूपरेखा तैयार की गई है। • ईवी बाजार की जरूरतें: सड़कों पर इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड गाड़ियों की बढ़ती संख्या के साथ बैटरी की गुणवत्ता और टिकाऊपन के नियमन की आवश्यकता महसूस की गई। प्रयोगशाला आंकड़ों के स्थान पर वास्तविक सड़क उपयोग के दौरान ऊर्जा और प्रदूषण स्तर की पड़ताल सुनिश्चित करने के लिए यह मसौदा पेश किया गया है। • अगले कदम: सरकार ने मसौदे पर आम जनता और वाहन उद्योग से 30 दिनों के भीतर सुझाव मांगे हैं। इन आपत्तियों और समीक्षाओं के बाद अंतिम नियमों को अधिसूचित किया जाएगा। सवाल-जवाब 1. बीएस-7 उत्सर्जन मानक कब से लागू करने का प्रस्ताव है? प्रस्ताव के अनुसार बीएस-7 मानकों को 1 अप्रैल 2029 से तीन अलग-अलग चरणों में लागू करने की योजना है। 2. बीएस-7 मानकों के तीन चरण कौन-कौन से हैं? पहला चरण अप्रैल 2029, दूसरा चरण अप्रैल 2031 और तीसरा चरण अप्रैल 2035 से लागू करने का प्रस्ताव रखा गया है। 3. यह प्रस्ताव मुख्य रूप से किस श्रेणी के वाहनों पर लागू होगा? यह मसौदा प्रस्ताव मुख्य रूप से यात्री कारों सहित एम1 श्रेणी के वाहनों पर लागू किया जाएगा। 4. इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी के लिए क्या नियम तय किए गए हैं? ईवी बैटरी को 5 साल या 1 लाख किमी पर कम से कम 75 प्रतिशत और 8 साल या 1.6 लाख किमी पर कम से कम 67 प्रतिशत क्षमता बनाए रखनी होगी। 5. टायर और ब्रेक से होने वाले प्रदूषण पर नियम कब से लागू होंगे? ब्रेक के घिसने से निकलने वाले कणों और टायरों से होने वाले प्रदूषण की सीमाएं अप्रैल 2031 के दूसरे चरण से लागू करने का प्रस्ताव है। 6. पर्यावरण वाहन पासपोर्ट क्या है? यह एक दस्तावेज होगा जो कार खरीदार को वाहन के वास्तविक उत्सर्जन, ईंधन खपत और बैटरी की स्थिति की स्पष्ट जानकारी देगा। 7. भारत में वर्तमान में कौन से उत्सर्जन मानक लागू हैं? भारत में अप्रैल 2020 से बीएस-6 उत्सर्जन मानक प्रभावी हैं, जिन्हें बीएस-4 के बाद सीधे लागू किया गया था। https://trendkia.com/auto/vahanon-ke-pradushana-niyamon-men-hoga-bara-badalava-apraila-2029-se-bs-7-lagu-karane-ki-taiyari-47633 TrendKia — Har trend, sabse pehle.