वाहनों के वीआईपी नंबरों की ऑनलाइन नीलामी का नया ढांचा तय, पोर्टल से होगी सीधी बोली परिवहन विभाग ने चार पहिया और दो पहिया वाहनों के फैंसी नंबरों के लिए पारदर्शी ऑनलाइन व्यवस्था लागू की है, जिसमें चार श्रेणियों के तहत बेस प्राइस तय कर नीलामी कराई जा रही है। गाड़ियों के मनपसंद और विशिष्ट रजिस्ट्रेशन नंबर हासिल करने के इच्छुक वाहन स्वामियों के लिए परिवहन विभाग ने पूरी प्रक्रिया को डिजिटल मंच पर व्यवस्थित कर दिया है। अब किसी भी नागरिक को दफ्तरों के चक्कर काटने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि आधिकारिक वेब पोर्टल parivahan.gov.in के जरिए घर बैठे ही नंबरों का चयन और उनकी नीलामी में भाग लिया जा सकता है। विभाग ने इस प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के मकसद से दो पहिया और चार पहिया वाहनों के फैंसी नंबरों को चार स्पष्ट श्रेणियों में विभाजित किया है। किसी भी नंबर के पंजीकरण के पश्चात सात से पंद्रह दिनों की ऑनलाइन नीलामी प्रक्रिया संपन्न होती है, जिसके उपरांत सबसे बड़ी बोली लगाने वाले बोलीदाता को वह विशिष्ट नंबर जारी किया जाता है। चार पहिया और दो पहिया वाहनों के लिए बेस प्राइस का वर्गीकरण विभाग द्वारा तैयार किए गए नियमों के अनुसार प्रत्येक श्रेणी के नंबरों के लिए एक न्यूनतम बेस प्राइस तय किया गया है। उप संभागीय अधिकारी सर्वेश कुमार के अनुसार, फैंसी नंबरों को चार अलग-अलग समूहों में बांटा गया है। चार पहिया गाड़ियों के लिए यह न्यूनतम मूल्य चार स्तरों में निर्धारित है, जिसमें 1 लाख रुपये, 50 हजार रुपये, 25 हजार रुपये और 15 हजार रुपये की श्रेणियां बनाई गई हैं। यदि दो पहिया वाहनों की बात करें, तो उनके लिए न्यूनतम आधार मूल्य 3 हजार रुपये से शुरू होकर अधिकतम 20 हजार रुपये तक जाता है। दो पहिया वाहनों के चार स्तर 20 हजार रुपये, 10 हजार रुपये, 5 हजार रुपये और 3 हजार रुपये निश्चित किए गए हैं। अत्यंत लोकप्रिय एवं विशिष्ट नंबरों को सर्वोच्च स्लैब में रखा गया है। उदाहरण के तौर पर चार पहिया वाहनों में 0001 से 0009 तक के एकल अंक वाले नंबर तथा 5555 जैसे आकर्षक अंकों के संयोजन के लिए शुरुआती बोली 1 लाख रुपये रखी गई है। इसके पश्चात की श्रेणियों में आने वाले अन्य पसंदीदा नंबरों के लिए 50 हजार रुपये, 25 हजार रुपये और 15 हजार रुपये का शुरुआती आधार मूल्य जमा करना होता है। आवेदक को नीलामी में उतरने के लिए निर्धारित बेस प्राइस का तय हिस्सा पहले ऑनलाइन जमा करना अनिवार्य होता है। गाड़ी की खरीद और नाम-पते का सख्त मिलान इस व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण शर्त यह जोड़ी गई है कि फैंसी नंबर बुक करने वाले व्यक्ति का नाम और पता ठीक वही होना चाहिए, जिस नाम व पते पर नया वाहन खरीदा जा रहा है। यदि दोनों विवरणों में जरा सा भी फर्क पाया जाता है, तो नंबर का आवंटन मान्य नहीं होगा। इसके साथ ही समय सीमा को लेकर भी कड़े दिशा-निर्देश तय किए गए हैं। आवेदक को वाहन खरीदने और नंबर की बुकिंग कराने के बीच अधिकतम एक महीने की समय सीमा का पालन करना होगा। बुकिंग पूरी होने के उपरांत प्राप्त होने वाली डिजिटल रसीद को गाड़ी के अधिकृत डीलर को सौंपना आवश्यक है, ताकि वाहन पंजीकरण की प्रक्रिया को बिना किसी रुकावट के आगे बढ़ाया जा सके। नीलामी की अवधि और असफल बोलीदाताओं का रिफंड ऑनलाइन पोर्टल पर किसी विशिष्ट नंबर के लिए पंजीकरण कराने के बाद बिडिंग यानी बोली लगाने की औपचारिक शुरुआत होती है। यदि किसी एक नंबर पर एक से अधिक दावेदार अपना दावा पेश करते हैं, तो यह ऑनलाइन बिडिंग सात दिनों तक सक्रिय रहती है। यदि शुरुआती दौर में कोई अन्य प्रतियोगी भाग नहीं लेता, तो अन्य इच्छुक लोगों को मौका देने के उद्देश्य से इस समयावधि को 15 दिनों तक बढ़ाया जा सकता है। पूरी नीलामी प्रक्रिया संपन्न हो जाने के बाद पंद्रहवें दिन अंतिम परिणाम सार्वजनिक रूप से घोषित किया जाता है। जो भी व्यक्ति उस नंबर के लिए पोर्टल पर सर्वाधिक ऊंची बोली लगाता है, फैंसी नंबर उसी के नाम आवंटित कर दिया जाता है। इस व्यवस्था की सबसे बड़ी खूबी यह है कि जिन आवेदकों की बोली कम रह जाती है और वे नंबर हासिल करने से चूक जाते हैं, उनका जमा कराया गया अग्रिम पैसा परिवहन विभाग द्वारा सुरक्षित रूप से सीधे उनके खाते में वापस भेज दिया जाता है। इससे आम लोगों का पैसा पूरी तरह सुरक्षित रहता है और समूची प्रक्रिया में बिचौलियों की भूमिका पूरी तरह समाप्त हो जाती है। इसका आप पर असर इस डिजिटल प्रक्रिया से वाहन स्वामियों को बिना किसी कार्यालयीन दौड़भाग के पारदर्शी बोली के जरिए मनचाहा नंबर प्राप्त करने की सुविधा मिलती है। • भारत में: वाहन खरीदार सीधे केंद्रीय परिवहन पोर्टल पर जाकर विभिन्न श्रेणियों के बेस प्राइस की जांच कर सकते हैं। इससे नंबरों के आवंटन में बिचौलियों की मनमानी और अतिरिक्त कमीशनखोरी पूरी तरह समाप्त हो जाती है। • शाहजहांपुर में: स्थानीय क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय के चक्कर लगाए बिना नागरिक घर बैठे ऑनलाइन बिडिंग में शामिल हो सकते हैं। बोली में असफल रहने पर जमा की गई राशि सीधे और सुरक्षित तरीके से आवेदक के खाते में वापस आ जाती है। • गाड़ी खरीदारों के लिए: नंबर बुक कराने और नई गाड़ी खरीदने के बीच अधिकतम एक महीने का समय मिलता है। इस दौरान नंबर बुकिंग की रसीद अपने अधिकृत ऑटोमोबाइल डीलर को सौंपकर पंजीकरण पूरा कराना अनिवार्य होता है। • दस्तावेजी सावधानी: नंबर की बुकिंग उसी सटीक नाम और पते पर की जानी चाहिए जिस पर वाहन का बिल बन रहा हो। दोनों दस्तावेजों के विवरण में किसी भी तरह का अंतर पाए जाने पर नंबर का आवंटन निरस्त हो सकता है। ऐसा क्यों हुआ परिवहन विभाग ने विशेष और आकर्षक नंबरों के आवंटन में मानवीय हस्तक्षेप समाप्त करने और राजस्व प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए यह व्यवस्था लागू की है। • पारदर्शिता की स्थापना: पूर्व में विशेष नंबरों के आवंटन को लेकर कार्यालयों में अनियमितताओं और बिचौलियों की शिकायतें आम थीं। डिजिटल पोर्टल के जरिए खुली ऑनलाइन नीलामी शुरू होने से प्रत्येक बोलीदाता को समान अवसर और स्पष्ट जानकारी मिलती है। • राजस्व और मांग का वर्गीकरण: 0001 अथवा 5555 जैसे अत्यंत लोकप्रिय नंबरों की भारी मांग को देखते हुए चार स्तरीय बेस प्राइस ढांचा तैयार किया गया। इससे विभाग को व्यवस्थित राजस्व प्राप्त होता है और खरीदार अपनी क्षमता के अनुसार श्रेणी चुन पाते हैं। • दुरुपयोग पर रोक: नंबरों की अनधिकृत जमाखोरी रोकने के लिए वाहन खरीद और नाम-पते के शत-प्रतिशत मिलान की शर्त रखी गई है। इसके चलते कोई भी व्यक्ति केवल मुनाफा कमाने के उद्देश्य से नंबर आरक्षित करके बाद में किसी अन्य को हस्तांतरित नहीं कर सकता। सवाल-जवाब 1. फैंसी और वीआईपी नंबर बुक करने के लिए किस वेबसाइट पर जाना होगा? इसके लिए परिवहन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट parivahan.gov.in पर जाना होता है। 2. चार पहिया वाहनों के लिए बेस प्राइस की श्रेणियां क्या हैं? चार पहिया वाहनों के लिए बेस प्राइस 1 लाख रुपये, 50 हजार रुपये, 25 हजार रुपये और 15 हजार रुपये निर्धारित किया गया है। 3. दो पहिया वाहनों के लिए न्यूनतम और अधिकतम बेस प्राइस कितना है? दो पहिया वाहनों के लिए न्यूनतम बेस प्राइस 3 हजार रुपये और अधिकतम बेस प्राइस 20 हजार रुपये तय किया गया है। 4. 0001 और 5555 जैसे अति विशिष्ट नंबरों का बेस प्राइस क्या है? चार पहिया वाहनों में 0001 से 0009 और 5555 जैसे विशिष्ट नंबरों के लिए बेस प्राइस 1 लाख रुपये रखा गया है। 5. नंबर बुक करने के बाद गाड़ी खरीदने के लिए कितना समय मिलता है? नंबर बुकिंग और गाड़ी खरीदने के बीच अधिकतम एक महीने की समय सीमा तय की गई है। 6. ऑनलाइन बोली लगाने की प्रक्रिया कितने दिनों तक चलती है? एक से अधिक दावेदार होने पर बोली सात दिनों तक चलती है, जिसे अन्य प्रतिभागियों के शामिल होने के लिए 15 दिनों तक बढ़ाया जा सकता है। 7. यदि बोली में नंबर नहीं मिल पाता है तो जमा पैसे का क्या होता है? बोली में असफल रहने वाले आवेदकों का जमा किया हुआ पैसा परिवहन विभाग द्वारा सुरक्षित रूप से रिफंड कर दिया जाता है। https://trendkia.com/auto/vahanon-ke-vip-nnbaron-ki-nalaina-nilami-ka-naya-dhancha-taya-portala-se-hogi-sidhi-boli-34140 TrendKia — Har trend, sabse pehle.