कर्नाटक सरकार का बड़ा फैसला, 1.23 करोड़ लाभार्थियों वाले गृह लक्ष्मी योजना में फर्जीवाड़ा रोकने की तैयारी कर्नाटक सरकार 'गृह लक्ष्मी' योजना के 1.23 करोड़ लाभार्थियों के पुनरीक्षण के लिए 1 महीने का विशेष अभियान चलाएगी। लगभग 20 करोड़ रुपये के बजट से अफसर घर-घर जाकर ऐप, फेस ऑथेंटिकेशन और बायोमेट्रिक से अयोग्य और मृत लाभार्थियों के नाम सूची से हटाएंगे। कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार की पांच प्रमुख गारंटियों में शामिल महत्वाकांक्षी 'गृह लक्ष्मी' योजना की समीक्षा प्रक्रिया तेज कर दी गई है। राज्य सरकार ने योजना के तहत वित्तीय सहायता प्राप्त कर रहे लाभार्थियों के व्यापक पुनरीक्षण और भौतिक सत्यापन का निर्णय लिया है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य उन सभी अयोग्य और अपात्र लोगों के नाम सूची से हटाना है जो योजना की शर्तों को पूरा नहीं करते हैं, ताकि 2,000 रुपये की मासिक सहायता राशि केवल उन्हीं जरूरतमंद महिलाओं तक पहुंचे जो इसके लिए पूरी तरह योग्य हैं। इस पूरे जांच अभियान को सुचारू रूप से संचालित करने और संपन्न करने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग को एक महीने की सख्त समय-सीमा सौंपी गई है, जिसके तहत जिला और तालुक स्तर पर व्यापक स्तर पर जांच कार्य किया जाएगा। मोबाइल ऐप, बायोमेट्रिक और फेस ऑथेंटिकेशन से होगी जांच सत्यापन के इस विशाल अभियान को त्रुटिहीन और पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने आधुनिक तकनीक का सहारा लेने की योजना बनाई है। इस पुनरीक्षण प्रक्रिया के प्रबंधन और क्रियान्वयन के लिए लगभग 20 करोड़ रुपये का विशेष बजट निर्धारित किया गया है। अभियान के तहत तैनात कर्मचारी प्रत्यक्ष रूप से हर लाभार्थी के घर-घर जाएंगे और एक विशेष रूप से विकसित किए गए मोबाइल ऐप के माध्यम से जानकारी दर्ज कर उसका मिलान करेंगे। पहचान की प्रामाणिकता सुनिश्चित करने के लिए कर्मचारियों द्वारा फेस ऑथेंटिकेशन और बायोमेट्रिक जांच का इस्तेमाल किया जाएगा। इस जमीनी सत्यापन कार्य में स्थानीय स्तर पर गठित गारंटी कमेटियों के सदस्यों को भी सीधे तौर पर जोड़ा जाएगा ताकि पात्र और अपात्र लाभार्थियों की पहचान सटीक तरीके से हो सके। इसके अतिरिक्त, शहरी इलाकों में सर्वे और भौतिक जांच के काम को तेज करने के उद्देश्य से राजस्व निरीक्षकों और बिल कलेक्टरों को भी तैनात किया जा सकता है। यह टीम घर-घर जाकर यह पक्का करेगी कि सहायता पाने वाली महिला जीवित है, वर्तमान में पात्रता की सभी शर्तों को पूरा करती है और उसके दस्तावेज पूरी तरह सही हैं। जीएसटी और इनकम टैक्स भरने वालों पर शिकंजा पुनरीक्षण के दौरान सरकार का विशेष ध्यान उन लोगों की पहचान करने पर रहेगा जो आर्थिक रूप से सक्षम होने के बावजूद योजना का लाभ उठा रहे हैं। इसके तहत उन लाभार्थियों के आंकड़ों का मिलान किया जाएगा जो जीएसटी का भुगतान कर रहे हैं या नियमित रूप से अपना इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करते हैं। नियमानुसार, करदाता परिवार इस योजना के तहत मिलने वाली वित्तीय मदद के हकदार नहीं हैं। इसके साथ ही, सरकारी रिकॉर्ड्स की गहन पड़ताल की जाएगी ताकि उन लाभार्थियों की पहचान की जा सके जिनकी मृत्यु हो चुकी है, लेकिन उनके नाम पर मासिक सहायता की राशि निरंतर जारी हो रही है। सरकार का स्पष्ट उद्देश्य योजना में वित्तीय पारदर्शिता बढ़ाना और सरकारी कोष से होने वाले गलत इस्तेमाल व फंड की लीकेज को पूरी तरह रोकना है। इस पूरे मामले में गारंटी कमेटी के चेयरमैन और वरिष्ठ नेता एच.एम. रेवन्ना जल्द ही मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से उनके आवास पर बैठक करेंगे, जिसके बाद इस अभियान के संबंध में प्रशासनिक स्तर पर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जाने की संभावना है। योजना का विशाल स्वरूप और अब तक का खर्च उल्लेखनीय है कि कर्नाटक सरकार ने अगस्त 2023 में 'गृह लक्ष्मी' योजना का शुभारंभ किया था। इस योजना के अंतर्गत परिवार की मुखिया मानी जाने वाली पात्र महिला को हर महीने 2,000 रुपये की सीधी आर्थिक मदद दी जाती है। समय के साथ योजना का दायरा बढ़ता गया और वर्तमान में लाभार्थियों की कुल संख्या लगभग 1.23 करोड़ तक पहुंच चुकी है। लाभार्थियों की इस बड़ी संख्या को देखते हुए सरकार अब यह सुनिश्चित करना चाहती है कि अयोग्य, मृत या फर्जी लाभार्थियों के कारण राज्य के बजट का नुकसान न हो। वित्तीय आंकड़ों पर नजर डालें तो कर्नाटक सरकार 'गृह लक्ष्मी' योजना पर हर साल लगभग 32,000 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट खर्च करती है। अगस्त 2023 में योजना की शुरुआत से लेकर अब तक सरकार कुल मिलाकर 74,000 करोड़ रुपये से लेकर 76,500 करोड़ रुपये की विशाल राशि इस कल्याणकारी कदम पर खर्च कर चुकी है। इस एक महीने के गहन जांच अभियान के जरिए सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि भविष्य में यह धनराशि केवल और केवल वास्तविक हकदार महिलाओं के खातों में ही पहुंचे। इसका आप पर असर यह निर्णय कर्नाटक की उन लाखों महिलाओं को सीधे प्रभावित करता है जो 'गृह लक्ष्मी' योजना के तहत हर महीने 2,000 रुपये की वित्तीय सहायता प्राप्त कर रही हैं। • कर्नाटक में: राज्य के लगभग 1.23 करोड़ लाभार्थियों के घर-घर जाकर अगले एक महीने में भौतिक सत्यापन किया जाएगा। जिन परिवारों में कोई सदस्य जीएसटी या इनकम टैक्स देता है या जहां लाभार्थी की मृत्यु हो चुकी है, उनके नाम योजना सूची से हटा दिए जाएंगे। • भारत में: यह अभियान दर्शाता है कि कैसे राज्य सरकारें बड़ी कल्याणकारी योजनाओं में लीकेज रोकने के लिए बायोमेट्रिक और डिजिटल सत्यापन का उपयोग कर रही हैं। इससे सार्वजनिक धन का सही उपयोग सुनिश्चित करने का एक मजबूत मॉडल तैयार होता है। सवाल-जवाब 1. गृह लक्ष्मी योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने कितनी राशि मिलती है? गृह लक्ष्मी योजना के तहत परिवार की पात्र महिला मुखिया को हर महीने 2,000 रुपये की direct वित्तीय सहायता दी जाती है। 2. कर्नाटक में गृह लक्ष्मी योजना के कुल कितने लाभार्थी हैं? वर्तमान में कर्नाटक में गृह लक्ष्मी योजना के लाभार्थियों की संख्या बढ़कर लगभग 1.23 करोड़ तक पहुंच चुकी है। 3. लाभार्थियों के घर-घर सत्यापन की प्रक्रिया किस तरह की जाएगी? सरकारी कर्मचारी लगभग 20 करोड़ रुपये के विशेष बजट से घर-घर जाकर मोबाइल ऐप, फेस ऑथेंटिकेशन और बायोमेट्रिक जांच से सत्यापन करेंगे। 4. किन लोगों के नाम गृह लक्ष्मी योजना से हटाए जाएंगे? जो लाभार्थी जीएसटी भरते हैं, इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करते हैं या जिनकी मृत्यु हो चुकी है, उनके नाम सूची से हटा दिए जाएंगे। 5. गृह लक्ष्मी योजना पर कर्नाटक सरकार सालाना कितना बजट खर्च करती है? कर्नाटक सरकार इस योजना पर हर साल लगभग 32,000 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट खर्च करती है। https://trendkia.com/benefits/karnataka-sarakara-ka-bara-phaisala-1-23-karora-labharthiyon-vale-gruha-lakshmi-yojana-men-pharjivara-rokane-ki-taiyari-25059 TrendKia — Har trend, sabse pehle.