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  "type": "article",
  "title": "मछली पालन में दोगुना उत्पादन, सरकार दे रही है 50 से 60 प्रतिशत सब्सिडी",
  "summary": "मत्स्य विभाग की नई योजना के तहत High Density Culture अपनाने वाले मत्स्य पालकों को ₹50,000 के एरेशन सिस्टम पर 50 से 60 प्रतिशत सब्सिडी मिलेगी। आवेदन की अंतिम तिथि 28 जून है।",
  "content": "परंपरागत तरीके की सीमाएं\nमत्स्य अधिकारी Vinod Verma ने TrendKia से बात करते हुए बताया कि जिले में अधिकांश मत्स्य पालक अभी भी पुरानी पद्धतियों पर निर्भर हैं। इस परंपरागत विधि में एक एकड़ तालाब में 1500 से 20000 मत्स्य बीज डाले जाते हैं, जिससे उत्पादन 20 से 25 कुंतल के बीच रहता है और अधिक से अधिक 40 कुंतल तक ही पहुंच पाता है। इस सीमित उत्पादन में अच्छा मुनाफा कमाना बेहद मुश्किल हो जाता है।\n\nHigh Density Culture से होगी बड़ी कमाई\nमत्स्य विभाग अब किसानों को आधुनिक तकनीक की ओर ले जाना चाहता है। High Density Culture पद्धति अपनाने पर एक हेक्टेयर में 60 से 80 कुंतल तक मछली का उत्पादन संभव है, जो परंपरागत तरीके से कहीं ज्यादा है। हालांकि इस तकनीक में ज्यादा मत्स्य बीज की जरूरत होती है और घनत्व बढ़ने से तालाब में ऑक्सीजन की मांग भी तेजी से बढ़ जाती है। इस जरूरत को पूरा करने का समाधान एरेशन सिस्टम है।\n\n₹50,000 के एरेशन सिस्टम पर सरकारी सहायता\nतालाब में ऑक्सीजन की जरूरत पूरी करने के लिए जो एरेशन सिस्टम लगाया जाता है, उसकी लागत करीब ₹50,000 होती है। सरकार इस खर्च में सब्सिडी देकर मत्स्य पालकों की मदद कर रही है। सामान्य वर्ग के मत्स्य पालकों को लागत का 50 प्रतिशत सब्सिडी के रूप में दिया जाएगा, जबकि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के मत्स्य पालकों को 60 प्रतिशत सब्सिडी मिलेगी। इस सिस्टम में 2 हॉर्स पावर का एरेशन यूनिट होता है, जिसमें एक पैडल लेटरल पर चार पैडल लगे होते हैं।\n\nमऊ जनपद के लिए कितने लक्ष्य तय हैं\nमऊ जनपद में सामान्य वर्ग के लिए 4 लक्ष्य और अनुसूचित जाति वर्ग के लिए 2 लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं।\n\nयोजना के लिए पात्रता\nइस योजना का फायदा उठाने के लिए मत्स्य पालक के पास आधा हेक्टेयर से लेकर 1 हेक्टेयर तक का तालाब होना जरूरी है। अगर किसी के पास 1 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल का तालाब है, तो उसे एक व्यक्ति के रूप में 2 यूनिट का लाभ दिया जा सकता है।\n\n28 जून से पहले करें आवेदन\nइस योजना के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 28 जून तय की गई है। इच्छुक मत्स्य पालकों को मत्स्य विभाग के विभागीय पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। आवेदन के साथ आधार कार्ड, बैंक पासबुक और पट्टे का कागज या जमीन की खतौनी जमा करनी होगी।\n\nइसका आप पर असर\n• मत्स्य पालकों के लिए: High Density Culture और सरकारी सब्सिडी के जरिए मत्स्य पालक ₹50,000 के एरेशन सिस्टम पर 50 से 60 प्रतिशत की बचत कर सकते हैं और उत्पादन को अधिकतम 40 कुंतल से बढ़ाकर 80 कुंतल प्रति हेक्टेयर तक ले जा सकते हैं।\n• मऊ जनपद में: यहां के पात्र मत्स्य पालक 28 जून से पहले आवेदन कर इस योजना का सीधा लाभ उठा सकते हैं, लेकिन लाभार्थियों की संख्या सीमित है इसलिए जल्दी आवेदन करना जरूरी है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. इस योजना के तहत कितनी सब्सिडी मिलती है?\nसामान्य वर्ग के मत्स्य पालकों को 50 प्रतिशत और अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति वर्ग को 60 प्रतिशत सब्सिडी मिलती है।\n\n2. High Density Culture से कितना उत्पादन होता है?\nइस तकनीक से एक हेक्टेयर में 60 से 80 कुंतल मछली का उत्पादन संभव है, जबकि परंपरागत तरीके से अधिकतम 40 कुंतल ही हो पाता है।\n\n3. आवेदन की अंतिम तिथि क्या है?\nइस योजना के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 28 जून है।\n\n4. एरेशन सिस्टम की कुल लागत कितनी है?\nएरेशन सिस्टम की कुल लागत लगभग ₹50,000 है।\n\n5. योजना का लाभ लेने के लिए कितना बड़ा तालाब होना चाहिए?\nआधा हेक्टेयर से 1 हेक्टेयर तक का तालाब होना जरूरी है।\n\n6. आवेदन के लिए कौन-कौन से दस्तावेज जरूरी हैं?\nआधार कार्ड, बैंक पासबुक और पट्टे का कागज या जमीन की खतौनी जमा करनी होगी।\n\n7. मऊ जनपद में इस योजना के कितने लाभार्थी चुने जाएंगे?\nमऊ जनपद में सामान्य वर्ग के लिए 4 और अनुसूचित जाति वर्ग के लिए 2 लाभार्थी चुने जाएंगे।\n\n8. 1 हेक्टेयर से बड़े तालाब वाले किसान को क्या लाभ मिलेगा?\n1 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल का तालाब होने पर एक व्यक्ति को 2 यूनिट का लाभ दिया जा सकता है।",
  "url": "https://trendkia.com/benefits/machhali-palana-men-doguna-utpadana-sarakara-de-rahi-hai-50-se-60-pratishata-sab-1678",
  "category": "बेनिफिट्स",
  "publishedAt": "2026-06-19",
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    "मछली पालन",
    "सरकारी सब्सिडी",
    "मत्स्य विभाग",
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    "SC ST सब्सिडी"
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  "site": "TrendKia"
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