महिला स्वरोजगार को अमेठी में नई उड़ान, दस सदस्यीय टीम गठित कर पाएं 5 लाख का ब्याज मुक्त ऋण अमेठी में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए राष्ट्रीय आजीविका मिशन के तहत 5 लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त और बिना गारंटी वाला लोन दिया जा रहा है। 18 से 40 वर्ष की महिलाएं दस सदस्यीय समूह बनाकर और आवश्यक दस्तावेज जमा कर विभिन्न रोजगार शुरू कर सकती हैं। अमेठी जिले में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उनकी आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए स्वयं सहायता समूह एक मजबूत जरिया बन रहे हैं। राष्ट्रीय आजीविका मिशन के तहत ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों की महिलाओं को स्वरोजगार स्थापित करने के लिए वित्तीय मदद और अनुदान प्रदान किया जा रहा है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य महिलाओं के सामने आने वाली वित्तीय बाधाओं को दूर करना और उन्हें स्वरोजगार के नए अवसर देना है। समूह से जुड़ने की पात्रता और आवश्यक दस्तावेज स्वयं सहायता समूह का हिस्सा बनने के लिए प्रक्रिया बेहद सरल रखी गई है। इस योजना से जुड़ने वाली महिला की उम्र 18 वर्ष से 40 वर्ष के बीच होनी अनिवार्य है। इसके अलावा आवेदन करने वाली महिला की न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता कम से कम आठवीं पास होनी चाहिए। किसी भी बेरोजगार महिला को समूह गठित करने या उसमें शामिल होने के लिए कम से कम 10 महिलाओं का एक समूह तैयार करना होता है। प्रक्रिया को पूरा करने के लिए कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेजों की आवश्यकता होती है। इसमें शामिल हैं • आवेदन करने वाली महिला का आधार कार्ड • PAN कार्ड • बैंक पासबुक की प्रति • समूह के लिए न्यूनतम 10 महिला सदस्यों का चयन इन क्षेत्रों में शुरू किए जा सकते हैं रोजगार समूह के माध्यम से महिलाएं अपनी रुचि और कौशल के अनुसार विभिन्न प्रकार के लघु उद्योग और व्यावसायिक गतिविधियां शुरू कर सकती हैं। स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ाने के लिए कई कार्य विकल्पों को शामिल किया गया है। महिलाएं निम्नलिखित प्रमुख व्यवसायों को चुनकर अपनी कमाई शुरू कर सकती हैं • मूंज क्राफ्ट और हस्तशिल्प निर्माण • घरेलू उत्पाद और खाद्य सामग्री का निर्माण • सिलाई तथा कढ़ाई का कार्य • खिलौना निर्माण उद्योग • कृषि एवं उससे जुड़ी गतिविधियां • बैंक सखी और समूह सखी के रूप में सेवा • प्रेरणा कैंटीन का संचालन बिना गारंटी और ब्याज मुक्त 5 लाख का ऋण आर्थिक तंगी से जूझ रही महिलाओं को नया काम शुरू करने के लिए 5 लाख रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराया जाता है। इस ऋण की सबसे खास बात यह है कि इसके लिए किसी भी प्रकार की गारंटी देने की आवश्यकता नहीं होती है और यह पूरी तरह से ब्याज मुक्त होता है। इसके साथ ही स्वीकृत राशि पर लगभग 20 से 25 प्रतिशत तक की छूट या अनुदान भी दिया जाता है, जिससे महिलाओं को व्यवसाय स्थापित करने में बड़ी सहूलियत मिलती है। प्रशिक्षण और जागरूकता से बन रही हैं स्वावलंबी जिला विकास अधिकारी वीरभानू सिंह ने बताया कि स्वयं सहायता समूह के माध्यम से महिलाओं को रोजगार के अनेक अवसर मिल रहे हैं और वर्तमान समय में महिलाएं विभिन्न गतिविधियों से जुड़कर अच्छी आय अर्जित कर रही हैं। उन्होंने कहा, "समूह के जरिए महिलाएं विभिन्न बेहतर काम कर अच्छी कमाई कर रही हैं और आत्मनिर्भर बन रही हैं।" प्रशासनिक स्तर पर महिलाओं को समय-समय पर प्रशिक्षण दिया जाता है और उन्हें जागरूक बनाकर स्वावलंबी बनाने का प्रयास जारी है। इसका आप पर असर भारत में: राष्ट्रीय आजीविका मिशन के तहत ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की महिलाएं स्वयं सहायता समूह से जुड़कर 5 लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त ऋण और अनुदान प्राप्त कर सकती हैं। अमेठी में: जिले की 18 से 40 वर्ष की आठवीं पास महिलाएं 10 सदस्यों का समूह बनाकर मूंज क्राफ्ट, प्रेरणा कैंटीन और सिलाई जैसे कार्यों से स्वरोजगार शुरू कर सकती हैं। सवाल-जवाब 1. स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के लिए आयु सीमा क्या है? समूह में शामिल होने के लिए महिला की आयु 18 वर्ष से 40 वर्ष के बीच होनी चाहिए। 2. स्वयं सहायता समूह बनाने के लिए कितनी महिलाओं की आवश्यकता होती है? एक समूह गठित करने के लिए कम से कम 10 महिलाओं का चयन करना अनिवार्य है। 3. आवेदन के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता क्या रखी गई है? आवेदक महिला की न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता कम से कम आठवीं पास होनी चाहिए। 4. समूह को कितना ऋण और सब्सिडी मिल सकती है? समूह को बिना किसी गारंटी और ब्याज के 5 लाख रुपये तक का ऋण तथा 20 से 25 प्रतिशत तक की छूट उपलब्ध होती है। 5. आवेदन के लिए कौन से दस्तावेज जरूरी हैं? आवेदक के पास आधार कार्ड, PAN कार्ड और बैंक पासबुक की प्रति होना आवश्यक है। 6. स्वयं सहायता समूह के तहत कौन से कार्य शुरू किए जा सकते हैं? महिलाएं मूंज क्राफ्ट, सिलाई-कढ़ाई, खिलौना निर्माण, खाद्य उत्पाद, खेती, प्रेरणा कैंटीन, बैंक सखी और समूह सखी जैसे काम शुरू कर सकती हैं। प्रेरणा और सबक मुख्य सीख और प्रेरणा: • सामूहिक प्रयास: अकेले के स्थान पर 10 महिलाओं का समूह बनाकर काम करने से बड़ी वित्तीय योजनाएं आसान हो जाती हैं। • कौशल विकास: मूंज क्राफ्ट, सिलाई और कैंटीन जैसे स्थानीय हुनर को व्यावसायिक रूप देकर आर्थिक स्वतंत्रता पाई जा सकती है। • वित्तीय जागरूकता: सरकारी अनुदान और बिना ब्याज वाले ऋण योजनाओं की सही जानकारी का उपयोग करके गरीबी दूर की जा सकती है। https://trendkia.com/benefits/mahila-svarojagara-ko-amethi-men-nai-urana-dasa-sadasyiya-tima-gathita-kara-paen-5-lakha-ka-byaja-mukta-rina-16321 TrendKia — Har trend, sabse pehle.