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  "title": "पशुपालकों के लिए बड़ी खबर, सुल्तानपुर में मुफ्त मिलेगी नैपियर घास और 4000 रुपये की मदद, जानें आवेदन का तरीका",
  "summary": "सुल्तानपुर में चार हेक्टेयर क्षेत्र में नैपियर घास उगाने के लिए 20 लाभार्थियों का चयन होगा, जिन्हें मुफ्त गांठें और 4 हजार रुपये की सहायता राशि दी जाएगी।",
  "content": "सुल्तानपुर में पशुपालन करने वाले किसानों के लिए एक अच्छी खबर है। जिले में पौष्टिक और तेजी से बढ़ने वाली बहुवर्षीय नैपियर घास की खेती को बढ़ावा देने के लिए एक खास योजना शुरू की गई है, जिसमें चुने गए किसानों को मुफ्त घास की गांठें और नकद सहायता दोनों मिलेंगी।\n\nचार हेक्टेयर में होगा उत्पादन, 20 लाभार्थी होंगे चयनित\nमुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर प्रमोद कुमार शर्मा ने बताया कि इस योजना के तहत जिले में कुल चार हेक्टेयर क्षेत्र में नेपियर घास का उत्पादन कराया जाएगा। इसके लिए 20 लाभार्थियों का चयन किया जाएगा। यह पूरी कवायद चारा नीति योजना के अंतर्गत चलाई जा रही है, जिसका मकसद जिले में पशुओं के लिए हरे चारे की उपलब्धता बढ़ाना है।\n\nकैसे और कहां करें आवेदन\nजो किसान और पशुपालक नेपियर चारा बोना चाहते हैं, वे अपने नजदीकी पशु चिकित्सा अधिकारी से संपर्क कर आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा सुल्तानपुर के विकास भवन में स्थित मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी के कार्यालय में भी सीधे आवेदन जमा किया जा सकता है। इच्छुक किसानों से आवेदन मांगे गए हैं और चयन प्रक्रिया इसी आधार पर पूरी की जाएगी।\n\nमुफ्त गांठ के साथ मिलेगी 4 हजार रुपये की सहायता\nचयनित होने वाले किसानों को नेपियर घास की गांठें पूरी तरह निःशुल्क दी जाएंगी। इसके अलावा 0.2 हेक्टेयर क्षेत्र में इन गांठों की रोपाई और देखभाल के लिए हर लाभार्थी को 4 हजार रुपये की सहायता राशि भी दी जाएगी। इससे किसानों की शुरुआती लागत काफी कम हो जाएगी और उन्हें अपने पशुओं के लिए चारा तैयार करने में आसानी होगी।\n\nमहिलाओं और एससी-एसटी वर्ग को मिलेगी प्राथमिकता\nइस योजना में महिलाओं, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के आवेदकों को प्राथमिकता दी जाएगी। ऐसे में अगर इन वर्गों से जुड़े किसान पशुपालन करते हैं, तो उनके लिए यह एक बेहतरीन मौका साबित हो सकता है। आवेदन करते समय किसानों को आधार कार्ड, खतौनी और पासपोर्ट साइज फोटो साथ लानी होगी, तभी उनका आवेदन स्वीकार किया जाएगा।\n\nक्यों खास है नेपियर घास\nनेपियर घास एक बहुवर्षीय और तेजी से बढ़ने वाली चारा फसल है। इसमें पोषक तत्वों की भरपूर मात्रा होती है और एक बार लगाने के बाद यह कई सालों तक लगातार हरा चारा देती रहती है। यही वजह है कि डेयरी और पशुपालन का काम करने वाले किसानों के लिए यह घास बेहद फायदेमंद मानी जाती है। जो किसान इस योजना का लाभ लेना चाहते हैं, उन्हें समय रहते आवेदन कर देना चाहिए ताकि वे अपने पशुओं के लिए सालभर पौष्टिक हरे चारे की व्यवस्था कर सकें।\n\nइसका आप पर असर\nभारत में: इस तरह की चारा योजनाएं दिखाती हैं कि सरकारें दुधारू पशुओं के लिए पौष्टिक हरे चारे की उपलब्धता बढ़ाने पर ध्यान दे रही हैं, जिससे दूध उत्पादन और डेयरी किसानों की आमदनी में मदद मिल सकती है।\n\n• सुल्तानपुर में: यहां के 20 चयनित किसानों को मुफ्त नैपियर घास की गांठें और 4 हजार रुपये की सीधी सहायता मिलने से उनकी शुरुआती लागत काफी कम हो जाएगी।\n• पात्र किसानों के लिए: महिलाओं और अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के पशुपालकों को प्राथमिकता मिलने से इन वर्गों के आवेदकों के चयन की संभावना बढ़ जाती है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. इस योजना के तहत कितने लाभार्थी चुने जाएंगे?\nइस योजना के तहत कुल 20 लाभार्थियों का चयन किया जाएगा।\n\n2. नैपियर घास का उत्पादन कितने क्षेत्र में होगा?\nजिले में कुल चार हेक्टेयर क्षेत्र में नेपियर घास का उत्पादन कराया जाएगा।\n\n3. किसानों को कितनी आर्थिक सहायता मिलेगी?\nहर लाभार्थी को 0.2 हेक्टेयर क्षेत्र में रोपाई और देखभाल के लिए 4 हजार रुपये की सहायता राशि दी जाएगी।\n\n4. आवेदन कहां जमा किया जा सकता है?\nआवेदन नजदीकी पशु चिकित्सा अधिकारी के पास या सुल्तानपुर के विकास भवन स्थित मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी के कार्यालय में जमा किया जा सकता है।\n\n5. आवेदन के लिए कौन से दस्तावेज चाहिए?\nआवेदन के लिए आधार कार्ड, खतौनी और पासपोर्ट साइज फोटो की जरूरत होगी।\n\n6. इस योजना में किसे प्राथमिकता दी जाएगी?\nमहिलाओं, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के आवेदकों को प्राथमिकता दी जाएगी।\n\n7. नैपियर घास किसानों के लिए क्यों फायदेमंद है?\nयह एक बहुवर्षीय, तेजी से बढ़ने वाली और पोषक तत्वों से भरपूर चारा फसल है, जो एक बार लगाने पर सालों तक हरा चारा देती है।",
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  "category": "बेनिफिट्स",
  "publishedAt": "2026-07-04",
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    "नैपियर घास योजना",
    "सुल्तानपुर पशुपालन",
    "चारा नीति योजना",
    "पशुपालक सहायता राशि",
    "मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी",
    "हरा चारा उत्पादन"
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  "site": "TrendKia"
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