रेहड़ी-पटरी वालों को पचास हजार तक का आसान कर्ज, फिरोजाबाद में महीने भर चलेगा विशेष पंजीकरण अभियान फिरोजाबाद में डूडा विभाग नगर निगम और निकायों में विशेष शिविर लगाकर स्ट्रीट वेंडरों को पीएम स्वनिधि के तहत तीन चरणों में वित्तीय सहायता उपलब्ध करा रहा है। फिरोजाबाद जिले के शहरी इलाकों में रेहड़ी, ठेला और खोमचा लगाने वाले छोटे कारोबारियों को अपनी आजीविका मजबूत करने के लिए आसान वित्तीय मदद दी जा रही है। जिला नगरीय विकास अभिकरण (डूडा) की ओर से स्थानीय नगर निगम और सभी नगर निकायों में विशेष ऋण मेलों का आयोजन किया गया है, जहां पात्र वेंडरों का मौके पर ही पंजीकरण कर उन्हें योजना से जोड़ा जा रहा है। इस पूरी व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य असंगठित क्षेत्र के बेहद कम आय वाले व्यापारियों को साहूकारों के भारी ब्याज के चंगुल से बचाकर बैंकिंग तंत्र के जरिए कार्यशील पूंजी मुहैया कराना है। सितंबर के अंत तक नगर निकायों में लगेंगे विशेष मेले डूडा की शहरी मिशन प्रबंधक सपना जोशी ने इस व्यवस्था की विस्तृत रूपरेखा साझा करते हुए स्पष्ट किया कि शिविरों का यह सिलसिला पूरे सितंबर माह तक अनवरत जारी रहेगा। जिले की सीमा में आने वाले किसी भी नगर निकाय या फिरोजाबाद नगर निगम क्षेत्र में काम करने वाले विक्रेता इन मेलों में पहुंचकर अपना पंजीकरण करा सकते हैं। सड़क किनारे फुटपाथ पर दुकान सजाने वाले, खोखा चलाने वाले अथवा हाथ ठेले पर मौसमी फल, सब्जियां और अन्य सामान बेचने वाले सभी जरूरतमंद कारोबारी इस अभियान का सीधा हिस्सा बन सकते हैं। तीन चरणों में पचास हजार रुपये तक की पूंजी का प्रावधान इस कल्याणकारी पहल के तहत कर्ज की राशि एकमुश्त बड़ी रकम के रूप में देने के बजाय चरणबद्ध तरीके से आवंटित की जाती है। सबसे पहले चरण में स्ट्रीट वेंडर को अपने छोटे व्यवसाय को पटरी पर लाने के लिए दस हजार रुपये की शुरुआती ऋण राशि स्वीकृत की जाती है। लाभार्थी को इस राशि को नियमित मासिक किस्तों के रूप में बैंक में लौटाना होता है। जब पहला कर्ज समय पर पूरी तरह चुकता कर दिया जाता है, तो दूसरे चरण में पच्चीस हजार रुपये तक की उच्च क्रेडिट सीमा खोल दी जाती है। इस दूसरे ऋण के सफल पुनर्भुगतान के पश्चात कारोबारी तीसरे चरण में पचास हजार रुपये तक का बड़ा ऋण पाने का हकदार बन जाता है। इस क्रमिक व्यवस्था से छोटे दुकानदारों का वित्तीय इतिहास भी मजबूत होता जाता है। महामारी के दौर से शुरू हुई थी यह जीवनदायिनी पहल शहरी मिशन प्रबंधक ने योजना की पृष्ठभूमि का उल्लेख करते हुए बताया कि कोरोना संकट के समय जब सख्त पाबंदियों के कारण रोज कमाने-खाने वाले तबके का कारोबार ठप पड़ गया था, तब केंद्र सरकार ने पीएम स्वनिधि योजना की शुरुआत की थी। सड़क किनारे बैठकर सामान बेचने वाले इन वेंडरों के पास कोई जमानत या गिरवी रखने योग्य संपत्ति नहीं होती, इसलिए इस योजना का ढांचा बिना किसी जटिल कागजी कार्रवाई के तैयार किया गया है। फिरोजाबाद में आयोजित हो रहे मौजूदा मेलों में केवल उन्हीं व्यक्तियों को शामिल किया जा रहा है जो निम्न आय वर्ग से आते हैं और जिनका प्राथमिक काम सड़क किनारे छोटा-मोटा व्यापार करना है। इसका आप पर असर यह पहल सड़क किनारे ठेला और दुकान लगाने वाले निम्न आय वर्ग के व्यापारियों को औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से सीधे जोड़ती है। • भारत में: देश भर के असंगठित वेंडरों को बिना किसी संपत्ति को गिरवी रखे आसान कार्यशील पूंजी मिलती है। समय पर किस्त चुकाने से वे पचास हजार रुपये तक के बड़े ऋण के पात्र बन जाते हैं। • फिरोजाबाद में: जिले के सभी नगर निगम और निकाय क्षेत्रों में सितंबर के अंत तक विशेष शिविर लग रहे हैं। स्थानीय रेहड़ी-पटरी वाले अपने नजदीकी शिविर में तुरंत पंजीकरण कराकर न्यूनतम दस हजार रुपये का पहला ऋण हासिल कर सकते हैं। • ब्याज के बोझ से राहत: साहूकारों के भारी दैनिक और साप्ताहिक ब्याज के मुकाबले बैंक का औपचारिक ऋण व्यापारियों का मुनाफा बढ़ाता है। इससे छोटे दुकानदारों की रोजाना की बचत और वित्तीय सुरक्षा दोनों बेहतर होती हैं। • क्रेडिट रिकॉर्ड का निर्माण: बैंक में नियमित किस्त भरने से छोटे कारोबारियों की साख औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था में दर्ज होती है। इससे भविष्य में अन्य सरकारी वित्तीय योजनाओं का लाभ उठाना उनके लिए आसान हो जाता है। ऐसा क्यों हुआ असंगठित क्षेत्र के बेहद छोटे व्यापारियों को वित्तीय रूप से सक्षम बनाने और उन्हें आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है। • कार्यशील पूंजी की तात्कालिक कमी: फुटपाथ और ठेले पर रोजमर्रा का सामान बेचने वाले छोटे दुकानदारों के पास थोक माल खरीदने के लिए अक्सर नकदी नहीं होती। औपचारिक बैंक ऋण के अभाव में वे निजी सूदखोरों पर निर्भर रहने को मजबूर थे। • महामारी के दौरान कारोबार पर असर: कोरोना काल की सख्त पाबंदियों के दौरान स्ट्रीट वेंडरों की दैनिक कमाई पूरी तरह रुक गई थी। इस संकट को दूर करने के लिए केंद्र सरकार ने पीएम स्वनिधि के रूप में विशेष सहायता ढांचा तैयार किया था। • पंजीकरण और पहुंच की कमी: कई पात्र दुकानदार जागरूकता या जटिल प्रक्रियाओं के डर से बैंकों तक नहीं पहुंच पाते। इसी बाधा को दूर करने के लिए डूडा विभाग ने सितंबर माह में सीधे नगर निकायों के भीतर शिविर लगाने का निर्णय लिया। सवाल-जवाब 1. फिरोजाबाद में स्ट्रीट वेंडरों के लिए यह विशेष ऋण मेला कब तक चलेगा? डूडा विभाग के अनुसार यह विशेष पंजीकरण और ऋण मेला पूरे सितंबर महीने तक नगर निगम और सभी नगर निकायों में चलेगा। 2. पीएम स्वनिधि योजना के तहत पहली बार में कितना कर्ज मिलता है? योजना के पहले चरण में स्ट्रीट वेंडर को दस हजार रुपये का शुरुआती ऋण दिया जाता है। 3. इस योजना के तहत अधिकतम कितनी ऋण राशि मिल सकती है? पहले दोनों ऋण समय पर चुकाने के बाद लाभार्थी को तीसरे चरण में अधिकतम पचास हजार रुपये तक का ऋण मिल सकता है। 4. क्या इस लोन के लिए स्ट्रीट वेंडर का पंजीकरण होना आवश्यक है? हां, योजना का लाभ उठाने के लिए वेंडर का संबंधित निकाय में विधिवत पंजीकरण होना अनिवार्य है। https://trendkia.com/benefits/rehari-patari-valon-ko-pachasa-hajara-taka-ka-asana-karja-firozabad-men-mahine-bhara-chalega-vishesha-pnjikarana-abhiyana-31149 TrendKia — Har trend, sabse pehle.