# उत्तर प्रदेश के बड़े राजमार्गों को आपस में जोड़ने के लिए चार नए लिंक एक्सप्रेसवे को मिली मंजूरी

> योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में चार लिंक एक्सप्रेसवे समेत 22 प्रस्ताव मंजूर किए गए हैं, जिससे बुंदेलखंड, पूर्वांचल, आगरा-लखनऊ और गंगा एक्सप्रेसवे आपस में जुड़ेंगे।

**Type:** article · **Category:** बेनिफिट्स · **Published:** 2026-10-29 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/benefits/uttar-pradesh-ke-bare-rajamargon-ko-apasa-men-jorane-ke-lie-chara-nae-linka-eksapresave-ko-mili-mnjuri-52891 · **Language:** Hindi
**Tags:** उत्तर प्रदेश, लिंक एक्सप्रेसवे, योगी आदित्यनाथ, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, गंगा एक्सप्रेसवे, जेवर एयरपोर्ट

उत्तर प्रदेश में सड़क कनेक्टिविटी को नई मजबूती देने के उद्देश्य से चार बड़े लिंक एक्सप्रेसवे के निर्माण को हरी झंडी मिल गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को आयोजित कैबिनेट बैठक में कुल 22 अहम प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की गई। इनमें प्रमुख एक्सप्रेसवे को आपस में जोड़कर एक एकीकृत सड़क नेटवर्क तैयार करने की योजना सबसे प्रमुख है। इन नई संपर्क सड़कों के धरातल पर उतरने के बाद आगरा-लखनऊ, बुंदेलखंड, पूर्वांचल और निर्माणाधीन गंगा एक्सप्रेसवे का आपसी जुड़ाव मजबूत होगा, जिससे आम यात्रियों, औद्योगिक इकाइयों और माल ढुलाई के संचालन में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा।

## चार लिंक एक्सप्रेसवे परियोजनाओं की विस्तृत रूपरेखा
प्रदेश सरकार का लक्ष्य विभिन्न दिशाओं में फैले एक्सप्रेसवे को जोड़कर निर्बाध यातायात गलियारा स्थापित करना है। स्वीकृत की गई चार लिंक परियोजनाओं का ब्योरा इस प्रकार है

- **आगरा-लखनऊ से पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे:** लगभग 51 किलोमीटर की लंबाई वाली इस परियोजना पर करीब 4,776 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत आएगी। यह सड़क आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे को पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से सीधा संपर्क मुहैया कराएगी। इस संपर्क मार्ग के तैयार होने से पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के बीच यात्रा का समय काफी घट जाएगा। इसके अलावा भारी वाणिज्यिक वाहनों को लखनऊ शहर के अंदरूनी रास्तों से गुजरे बिना सीधी राह मिल सकेगी।
- **फर्रुखाबाद लिंक एक्सप्रेसवे:** करीब 91 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे 7,489 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से तैयार किया जाएगा। यह मार्ग इटावा के समीप आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे से प्रारंभ होकर फर्रुखाबाद के रास्ते हरदोई के पास गंगा एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा। प्रशासन ने इस महत्वपूर्ण कॉरिडोर के निर्माण कार्य को डेढ़ साल की समय सीमा में पूरा करने का लक्ष्य रखा है।
- **झांसी लिंक एक्सप्रेसवे:** लगभग 115 किलोमीटर लंबी यह परियोजना ऐतिहासिक शहर झांसी को बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे से जोड़ेगी। इस मार्ग के बनने से बुंदेलखंड क्षेत्र में व्यापारिक और औद्योगिक गतिविधियों को तेज गति मिलने की संभावना है। इसके साथ ही झांसी के रक्षा औद्योगिक गलियारे और ओरछा जैसे प्रसिद्ध पर्यटन केंद्रों तक पहुंचना भी कहीं अधिक सुगम हो जाएगा।
- **जेवर लिंक एक्सप्रेसवे:** लगभग 74 किलोमीटर लंबे इस नए मार्ग के माध्यम से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को यमुना एक्सप्रेसवे और गंगा एक्सप्रेसवे के साथ एकीकृत करने की योजना है। इस कनेक्टिविटी से पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर पूर्वांचल के दूरदराज इलाकों तक माल और यात्रियों की आवाजाही को तीव्र गति मिलेगी।

## निर्माण मॉडल और समय सीमा की शर्तें
इन सभी संपर्क मार्गों का निर्माण इंजीनियरिंग, खरीद और निर्माण (ईपीसी) मॉडल के अंतर्गत कराया जाएगा। इस अनुबंध मॉडल की सबसे प्रमुख शर्त यह है कि निर्माण कार्य पूरा करने वाली एजेंसियों को सड़क निर्माण के बाद अगले पांच वर्षों तक उसकी मरम्मत और देखरेख की संपूर्ण जिम्मेदारी भी उठानी होगी। शासन की तरफ से इन चारों परियोजनाओं को आगामी तीन साल के भीतर पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

## इसका आप पर असर
इन चार लिंक एक्सप्रेसवे के निर्माण से राज्यभर के यात्रियों और वाणिज्यिक वाहन चालकों को सीधा यात्रा विकल्प मिलेगा।

- **भारत में:** उत्तर और पूर्वी भारत के बीच आवाजाही करने वाले मालवाहक वाहनों को शहरों के जाम से मुक्ति मिलेगी। इससे अंतरराज्यीय लॉजिस्टिक्स खर्च और ढुलाई के समय में प्रत्यक्ष कमी दर्ज होगी।
- **उत्तर प्रदेश में:** पूर्वी, पश्चिमी और बुंदेलखंड हिस्सों के बीच सीधी सड़क कनेक्टिविटी स्थापित होगी। लखनऊ जैसे बड़े शहरों में भारी ट्रैफिक का दबाव घटेगा और स्थानीय व्यापार को रफ्तार मिलेगी।
- **उद्योग और व्यापार:** रक्षा गलियारों और हवाई अड्डों के सीधे जुड़ने से क्षेत्रीय औद्योगिक इकाइयों को आपूर्ति में सुविधा होगी। विनिर्माण हब से तैयार माल तेजी से बड़े बाजारों और बंदरगाहों की दिशा में भेजा जा सकेगा।
- **स्थानीय यात्री:** ओरछा जैसे पर्यटन केंद्रों और दूरदराज के जिलों तक सफर का समय काफी कम हो जाएगा। बेहतर सड़कों से यात्रियों के ईंधन की बचत होगी और यात्रा अधिक सुरक्षित बनेगी।

## ऐसा क्यों हुआ
उत्तर प्रदेश सरकार ने यह फैसला इसलिए लिया क्योंकि मौजूदा एक्सप्रेसवे अलग-अलग दिशाओं में विकसित होने के कारण सीधे जुड़े नहीं थे, जिससे यात्रियों और मालवाहक गाड़ियों को बीच में सामान्य सड़कों पर उतरना पड़ता था।

- **सीधा कारण:** आगरा-लखनऊ, पूर्वांचल, बुंदेलखंड और गंगा एक्सप्रेसवे के बीच सीधे जुड़ाव की कमी के कारण तेज गति नेटवर्क का पूरा फायदा नहीं मिल पा रहा था। इस अंतराल को पाटने के लिए इन चार लिंक मार्गों को स्वीकृति दी गई है।
- **ट्रैफिक का दबाव:** एक एक्सप्रेसवे से दूसरे पर जाने वाले भारी वाहनों को लखनऊ और अन्य नगरीय सीमाओं से होकर गुजरना पड़ता था। इस वजह से शहरों के भीतर जाम की समस्या गंभीर हो रही थी।
- **लॉजिस्टिक्स और विकास:** जेवर में बन रहे अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और झांसी के रक्षा गलियारे को बड़े परिवहन नेटवर्क से जोड़ना जरूरी था। इन संपर्कों के बिना नए औद्योगिक केंद्रों को तेज आवागमन की सुविधा नहीं मिल पाती।
- **अनुबंध की शर्तें:** लंबे समय तक सड़कों की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए निर्माण एजेंसियों पर पांच साल के रख-रखाव की अनिवार्य जिम्मेदारी तय की गई है।

## सवाल-जवाब

### 1. कैबिनेट बैठक में कुल कितने प्रस्तावों को मंजूरी दी गई?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में कुल 22 प्रस्तावों को मंजूरी प्रदान की गई।

### 2. आगरा-लखनऊ से पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे की लंबाई और लागत कितनी है?
इस परियोजना की लंबाई लगभग 51 किलोमीटर है और इस पर 4,776 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत आएगी।

### 3. फर्रुखाबाद लिंक एक्सप्रेसवे किन दो प्रमुख मार्गों को जोड़ेगा?
यह मार्ग इटावा के पास आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे से शुरू होकर हरदोई के पास गंगा एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा।

### 4. जेवर लिंक एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई कितनी निर्धारित की गई है?
जेवर लिंक एक्सप्रेसवे परियोजना की लंबाई लगभग 74 किलोमीटर तय की गई है।

### 5. इन सभी लिंक एक्सप्रेसवे के निर्माण के लिए क्या समय सीमा तय की गई है?
सरकार ने इन परियोजनाओं को तीन साल के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा है, जबकि फर्रुखाबाद लिंक एक्सप्रेसवे को डेढ़ साल में बनाने का लक्ष्य है।

### 6. सड़क निर्माण के बाद कंपनियों को कितने समय तक रखरखाव करना होगा?
ईपीसी मॉडल के तहत निर्माण करने वाली एजेंसियों को अगले पांच साल तक सड़क की मरम्मत और रखरखाव की जिम्मेदारी निभानी होगी।

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