उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में लहसुन और प्याज की मुफ़्त बीज योजना शुरू, 100 हेक्टेयर रकबे का मिला लक्ष्य लखीमपुर खीरी में उद्यान विभाग लहसुन और प्याज की खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को मुफ़्त बीज दे रहा है। इसके लिए dbt.uphorticulture.in पर ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू हो गई है। उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में किसानों की आमदनी बढ़ाने और बागवानी फसलों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उद्यान विभाग ने एक विशेष पहल की शुरुआत की है। इस योजना के तहत जिले के किसानों को लहसुन और प्याज की खेती के लिए बिल्कुल मुफ़्त बीज मुहैया कराए जाएंगे। विभाग का मुख्य उद्देश्य किसानों को महंगे बीज खरीदने के वित्तीय बोझ से बचाना है ताकि वे कम लागत में बेहतर पैदावार हासिल कर सकें। योजना के अंतर्गत पंजीकरण प्रक्रिया आधिकारिक रूप से प्रारंभ हो चुकी है और पात्र आवेदकों का चुनाव पूर्व-निर्धारित मापदंडों के आधार पर किया जाएगा। रकबे का लक्ष्य और निःशुल्क बीज वितरण योजना उद्यान विभाग ने लखीमपुर खीरी जिले में कुल 100 हेक्टेयर कृषि भूमि पर इन दोनों नकदी फसलों की खेती कराने की रूपरेखा तैयार की है। इसमें 50 हेक्टेयर क्षेत्रफल में लहसुन और 50 हेक्टेयर क्षेत्रफल में प्याज की बुवाई का लक्ष्य रखा गया है। खेती की शुरुआत में ही गुणवत्तापूर्ण बीजों पर किसानों का बड़ा बजट खर्च हो जाता है। ऐसे में सरकार द्वारा पूरी तरह निःशुल्क बीज उपलब्ध कराने से किसानों की शुरुआती लागत काफी घट जाएगी। इससे छोटे और सीमांत किसानों को भी पारंपरिक फसलों के अलावा लहसुन एवं प्याज जैसी नकदी फसलों की ओर रुख करने का अवसर मिलेगा। आवेदन प्रक्रिया और चयन का आधार निःशुल्क बीज का लाभ उठाने के इच्छुक किसानों को विभाग के ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन दर्ज करना होगा। लखीमपुर खीरी के जिला उद्यान प्रभारी मृत्युंजय सिंह ने जानकारी दी है कि किसानों को विभाग की आधिकारिक वेबसाइट dbt.uphorticulture.in पर जाकर अपना आवेदन पूरा करना होगा। ऑनलाइन पोर्टल पर प्राप्त आवेदनों की जांच के बाद ही पात्र किसानों की अंतिम सूची तैयार की जाएगी। योजना में लाभार्थियों का चयन 'पहले आओ, पहले पाओ' के सिद्धांत पर किया जाएगा। इसी कारण उद्यान विभाग ने इच्छुक किसानों से अपील की है कि वे समय रहते पोर्टल पर अपना पंजीकरण करा लें ताकि निर्धारित कोटा पूरा होने से पहले उन्हें योजना का लाभ मिल सके। बुवाई का उपयुक्त समय और फसल की अवधि विभाग ने किसानों की सुविधा के लिए बुवाई और रोपाई के सही समय को लेकर भी दिशा-निर्देश जारी किए हैं। प्याज और लहसुन की सफल खेती के लिए सितंबर से अक्टूबर का महीना सबसे अनुकूल माना जाता है। रबी प्याज की नर्सरी तैयार करने का काम सितंबर से अक्टूबर के दौरान किया जाता है, जिसके बाद तैयार पौध की रोपाई नवंबर से दिसंबर महीने में संपन्न होती है। रोपाई के बाद रबी प्याज की फसल लगभग 120 से 150 दिनों के भीतर पककर तैयार हो जाती है। वहीं दूसरी ओर, लहसुन की बुवाई के लिए 15 अक्टूबर से 15 नवंबर के बीच का समय सबसे उत्तम माना गया है। लहसुन की फसल को खेत में बुवाई के बाद पूर्ण रूप से तैयार होने में 150 से 180 दिनों का समय लगता है। सही समय पर बुवाई करने से फसलों में कीटों का प्रकोप कम होता है और पैदावार अधिक मिलती है। इसका आप पर असर उत्तर प्रदेश में: राज्य के किसानों को बागवानी फसलों की खेती अपनाने और बीज खरीद लागत घटाने का अवसर मिलेगा। लखीमपुर खीरी में: जिले के किसानों को कुल 100 हेक्टेयर भूमि के लिए लहसुन और प्याज के उच्च गुणवत्ता वाले बीज मुफ़्त में मिलेंगे, जिससे खेती की शुरुआती लागत में सीधी बचत होगी। सवाल-जवाब 1. लखीमपुर खीरी में मुफ्त बीज योजना के तहत किन फसलों के बीज दिए जा रहे हैं? योजना के तहत किसानों को लहसुन और प्याज की खेती के लिए उद्यान विभाग की ओर से मुफ्त बीज दिए जा रहे हैं। 2. जिले में लहसुन और प्याज के लिए कितना क्षेत्रफल निर्धारित किया गया है? विभाग ने जिले में 50 हेक्टेयर क्षेत्रफल में लहसुन और 50 हेक्टेयर क्षेत्रफल में प्याज की खेती का लक्ष्य रखा है। 3. योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन कहां करना होगा? इच्छुक किसानों को विभाग के आधिकारिक वेब पोर्टल dbt.uphorticulture.in पर जाकर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। 4. लाभार्थियों का चयन किस आधार पर किया जाएगा? किसानों का चयन 'पहले आओ, पहले पाओ' के आधार पर किया जाएगा, इसलिए जल्द आवेदन करना आवश्यक है। 5. लहसुन और प्याज की बुवाई का सही समय क्या है? प्याज की नर्सरी सितंबर-अक्टूबर में तैयार कर नवंबर-दिसंबर में रोपाई की जाती है, जो 120-150 दिन में तैयार होती है। लहसुन की बुवाई 15 अक्टूबर से 15 नवंबर के बीच करना सबसे अच्छा रहता है, जिसकी फसल 150-180 दिन में तैयार होती है। https://trendkia.com/benefits/uttar-pradesh-ke-lakhimpur-kheri-men-lahasuna-aura-pyaja-ki-mufta-bija-yojana-shuru-100-hekteyara-rakabe-ka-mila-lakshya-22166 TrendKia — Har trend, sabse pehle.