यूनिफाइड पेंशन स्कीम की अधिसूचना जारी, जानिए भारतीय रेलवे के कर्मचारियों को कैसे मिलेगा सुनिश्चित पेंशन का लाभ रेलवे मंत्रालय ने एनपीएस में शामिल कर्मचारियों के लिए यूपीएस के विस्तृत नियम अधिसूचित किए हैं, जिसमें न्यूनतम दस हजार रुपये और पच्चीस साल की सेवा पर पचास फीसदी गारंटीड पेंशन तय की गई है। भारतीय रेलवे में कार्यरत नेशनल पेंशन सिस्टम यानी एनपीएस के दायरे में आने वाले कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित करने के उद्देश्य से एक बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया गया है। रेलवे मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर यूनिफाइड पेंशन स्कीम यानी यूपीएस को लागू करने से जुड़े विस्तृत नियमों का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इस नए आदेश के तहत कर्मचारियों को मिलने वाली सुनिश्चित पेंशन, न्यूनतम पेंशन सीमा, रिटायरमेंट पर देय वित्तीय लाभ, स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति यानी वीआरएस से जुड़े प्रावधानों और एनपीएस में दोबारा लौटने के विकल्पों को पूरी तरह स्पष्ट किया गया है। यह व्यवस्था उन रेल कर्मियों के लिए एक नया ढांचा तैयार करती है जो लंबे समय से तय पेंशन लाभ की मांग कर रहे थे। सेवा अवधि और सुनिश्चित पेंशन के गणितीय नियम जारी अधिसूचना के अनुसार यूपीएस का लाभ उठाने वाले पात्र रेल कर्मचारियों के लिए सेवा अवधि के अलग-अलग स्लैब तय किए गए हैं। ऐसे कर्मचारी जिन्होंने अपने सेवाकाल के कम से कम 10 वर्ष पूरे कर लिए हैं, उन्हें सेवानिवृत्ति के उपरांत हर महीने कम से कम ₹10,000 की सुनिश्चित न्यूनतम पेंशन प्रदान की जाएगी। यह व्यवस्था छोटे सेवाकाल वाले कर्मचारियों के लिए भी एक बुनियादी सामाजिक सुरक्षा कवच प्रदान करती है। वहीं दूसरी ओर, जिन रेल कर्मियों की कुल सेवा अवधि 25 वर्ष या उससे अधिक होगी, उन्हें पूरी सुनिश्चित पेंशन का लाभ मिलेगा। इस पूर्ण पेंशन की गणना कर्मचारी के रिटायर होने से ठीक पहले के अंतिम 12 महीनों के दौरान प्राप्त किए गए औसत बेसिक पे के 50% हिस्से के बराबर की जाएगी। यदि किसी कर्मचारी का कुल सेवाकाल 10 वर्ष से अधिक परंतु 25 वर्ष से कम रहता है, तो उसे मिलने वाली पेंशन की राशि इसी अनुपात यानी प्रो-राटा आधार पर कम कर दी जाएगी। मासिक योगदान और सरकार की अतिरिक्त हिस्सेदारी यूपीएस की वित्तीय संरचना को मजबूत बनाए रखने के लिए कर्मचारी और नियोक्ता दोनों का योगदान निर्धारित किया गया है। योजना को चुनने वाले प्रत्येक रेल कर्मचारी के मासिक वेतन से उसके बेसिक पे और डीए का 10% काटकर उसके यूपीएस खाते में जमा कराया जाएगा। ठीक इतनी ही राशि यानी बेसिक पे और डीए का 10% मैचिंग योगदान रेलवे प्रशासन की ओर से भी कर्मचारी के खाते में जमा किया जाएगा। इसके अलावा, सेवानिवृत्ति के समय तयशुदा पेंशन की गारंटी सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष पूल कॉर्पस की स्थापना की गई है। इस केंद्रीय पूल कॉर्पस में केंद्र सरकार अपनी तरफ से कर्मचारी के बेसिक पे और डीए का अनुमानित 8.5% अतिरिक्त योगदान जमा कराएगी। सरकार की यह अतिरिक्त वित्तीय मदद सुनिश्चित करती है कि बाजार के उतार-चढ़ाव के बावजूद कर्मचारियों की तय पेंशन में कोई रुकावट न आए। बीस साल की नौकरी पर वीआरएस और पेंशन भुगतान की शर्त अधिसूचित नियमों में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति का प्रावधान भी शामिल किया गया है। यदि कोई रेल कर्मचारी अपनी नियमित सेवा के 20 साल पूरे कर लेता है, तो वह वीआरएस लेने के लिए पात्र होगा। हालांकि इस व्यवस्था में पेंशन के भुगतान को लेकर एक स्पष्ट शर्त रखी गई है कि वीआरएस स्वीकार होते ही तुरंत पेंशन की शुरुआत नहीं होगी। कर्मचारी को मासिक पेंशन का भुगतान केवल उसी तय तारीख से शुरू किया जाएगा, जिस दिन वह सामान्य सेवा नियमों के तहत अपनी तय उम्र पूरी करके औपचारिक रूप से रिटायर होने वाला था। यदि वीआरएस लेने वाले कर्मचारी ने 25 साल की सेवा पूरी कर ली थी, तो उसे नियमों के मुताबिक अंतिम 12 महीनों के औसत बेसिक पे के 50% के बराबर पूरी सुनिश्चित पेंशन दी जा सकेगी। एनपीएस में दोबारा जाने का विकल्प और महंगाई राहत का प्रावधान कर्मचारियों की सुविधा के लिए इस व्यवस्था में एक बार पाला बदलने की छूट भी दी गई है। यूपीएस का चयन करने वाले रेल कर्मचारी को अपनी पूरी सेवा अवधि के दौरान केवल एक बार वापस एनपीएस में लौटने का मौका दिया जाएगा। हालांकि यह विकल्प बेहद सोच-समझकर चुनना होगा, क्योंकि यह निर्णय पूरी तरह अंतिम होगा और एक बार एनपीएस में लौटने के बाद कर्मचारी दोबारा कभी यूपीएस में शामिल नहीं हो सकेगा। इसके साथ ही, सेवानिवृत्ति के बाद जीवनयापन की बढ़ती लागत से निपटने के लिए पेंशन राशि पर महंगाई राहत यानी डियरनेस रिलीफ (डीआर) का स्पष्ट प्रावधान किया गया है। पात्र पेंशनभोगियों के अलावा फैमिली पेंशन प्राप्त करने वाले आश्रितों को भी सरकार द्वारा समय-समय पर जारी दरों और नियमों के अनुसार डीआर का नकद लाभ प्रदान किया जाएगा। किन कर्मियों को मिलेगा लाभ और कौन रहेंगे बाहर यह योजना केवल 1 जनवरी 2004 या उसके बाद भारतीय रेलवे में नियुक्त हुए और वर्तमान में एनपीएस के तहत कवर्ड पात्र नियमित कर्मचारियों के लिए ही उपलब्ध कराई गई है। इसके विपरीत, रेलवे में काम करने वाले कैजुअल कर्मी, दैनिक वेतनभोगी, अनुबंध पर कार्यरत कर्मचारी तथा किसी विशिष्ट पेंशन व्यवस्था के अंतर्गत आने वाली अन्य श्रेणियां इस नई यूपीएस अधिसूचना के दायरे से बाहर रहेंगी। इसका आप पर असर रेलवे में नियमित पदों पर कार्यरत लाखों कर्मचारियों के लिए रिटायरमेंट के बाद आय की अनिश्चितता पूरी तरह खत्म हो जाएगी। • नियमित कर्मचारियों के लिए: 1 जनवरी 2004 के बाद नियुक्त कर्मियों को बाजार पर निर्भरता के बिना तय मासिक पेंशन की कानूनी सुरक्षा मिल गई है। इससे सेवानिवृत्ति के बाद वित्तीय योजना बनाना बहुत आसान हो जाएगा। • दस साल की नौकरी पूरी करने वालों के लिए: कम से कम 10 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके कर्मचारियों को ₹10,000 की न्यूनतम मासिक पेंशन सुनिश्चित की गई है। यह कम समय तक नौकरी करने वाले कर्मियों के लिए भी नियमित गुजारा भत्ता तय करता है। • पच्चीस साल की सेवा वालों के लिए: 25 वर्ष की सेवा पूरी करने पर पिछले 12 महीनों के औसत बेसिक पे का आधा हिस्सा मासिक पेंशन बनेगा। लंबे समय तक सेवा देने वाले कर्मचारियों को पूरी राशि का सीधा लाभ मिलेगा। • महंगाई से सुरक्षा के लिए: पेंशन के साथ सरकारी दरों के अनुसार नियमित डीआर यानी महंगाई राहत का भुगतान किया जाएगा। इससे जीवनयापन का खर्च बढ़ने पर भी पेंशन की वास्तविक क्रय शक्ति बनी रहेगी। • अनुबंध व दैनिक कर्मियों के लिए: कैजुअल, दैनिक वेतन और कॉन्ट्रैक्ट कर्मियों को इस योजना के दायरे में शामिल नहीं किया गया है। इन कर्मियों को रिटायरमेंट लाभ के लिए अपने मौजूदा नियमों पर ही निर्भर रहना होगा। ऐसा क्यों हुआ यह नीतिगत बदलाव कर्मचारियों की लंबे समय से चली आ रही सुनिश्चित पेंशन की मांग और नेशनल पेंशन सिस्टम की बाजार-निर्भर अनिश्चितताओं के समाधान के रूप में सामने आया है। • निश्चित सामाजिक सुरक्षा की मांग: पुरानी पेंशन व्यवस्था की तरह एक तय आय की गारंटी न होने से एनपीएस में शामिल कर्मियों में असंतोष था। सरकार ने कर्मचारियों को बाजार जोखिम से बचाने और निश्चित पेंशन का भरोसा देने के लिए यह ढांचा तैयार किया। • साझा अंशदान और सरकारी सुरक्षा: एनपीएस के तहत मिलने वाली पेंशन पूरी तरह बाजार के रिटर्न पर निर्भर थी। नई व्यवस्था में सरकार ने अतिरिक्त 8.5% अंशदान का अलग पूल बनाकर कर्मचारियों को गारंटीड रिटर्न का आधार दिया है। • स्वैच्छिक विकल्प की सुविधा: कर्मियों की प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए नियमों में लचीलापन रखा गया है। इसके तहत कर्मचारियों को यूपीएस चुनने के बाद भी पूरे सेवाकाल में एक बार एनपीएस में लौटने की कानूनी छूट दी गई है। सवाल-जवाब 1. रेलवे में न्यूनतम पेंशन पाने के लिए कितने साल की नौकरी जरूरी है? यूपीएस के तहत कम से कम ₹10,000 की मासिक न्यूनतम पेंशन पाने के लिए कर्मचारी का 10 वर्ष की नियमित सेवा पूरी करना अनिवार्य है। 2. पूरी 50 प्रतिशत पेंशन पाने के लिए कितनी सेवा अवधि होनी चाहिए? रिटायरमेंट से पहले के 12 महीनों के औसत बेसिक पे की पूरी 50% पेंशन पाने के लिए कर्मचारी को 25 साल की सेवा पूरी करनी होगी। 3. कर्मचारी और रेलवे को हर महीने कितना अंशदान देना होगा? कर्मचारी और रेलवे दोनों अपने-अपने हिस्से से बेसिक पे और डीए का 10-10% योगदान देंगे, जबकि सरकार पूल कॉर्पस में अतिरिक्त 8.5% जमा करेगी। 4. 20 साल की सेवा के बाद वीआरएस लेने पर क्या तुरंत पेंशन शुरू हो जाएगी? नहीं, वीआरएस लेने पर पेंशन का भुगतान तुरंत शुरू नहीं होगा, बल्कि उस तिथि से मिलेगा जब कर्मचारी सामान्य आयु नियमों के तहत रिटायर होता। 5. क्या यूपीएस चुनने के बाद दोबारा एनपीएस में जाया जा सकता है? हां, कर्मचारी को पूरी सेवा के दौरान केवल एक बार वापस एनपीएस चुनने की छूट मिलेगी, लेकिन यह निर्णय पूरी तरह अंतिम होगा। 6. किन रेलवे कर्मचारियों को इस नई योजना का लाभ नहीं मिलेगा? कैजुअल कर्मचारी, दैनिक वेतनभोगी, कॉन्ट्रैक्ट वर्कर और अन्य अलग पेंशन नियमों में आने वाले कर्मचारी इस योजना के दायरे में नहीं हैं। https://trendkia.com/benefits/yuniphaida-penshana-skima-ki-adhisuchana-jari-janie-indian-railways-ke-karmachariyon-ko-kaise-milega-sunishchita-penshana-ka-labha-37254 TrendKia — Har trend, sabse pehle.