57 किलो का मंदिर पीठ पर लादकर स्केटिंग से केदारनाथ जा रहे छपरा के तीन दोस्त, वजह जान हो जाएंगे हैरान छपरा के तीन दोस्त चंदन कुमार, आकाश कुमार और गंगा स्केटर पीठ पर करीब 57 किलो वजन लादकर स्केटिंग से बाबा केदारनाथ के दर्शन के लिए निकले हैं, यह यात्रा उन्होंने अपनी मन्नत पूरी करने के लिए शुरू की है। बलिया में बाढ़ प्रभावित इलाकों की कवरेज के दौरान सड़क किनारे बने एक मंदिर के पास तीन युवा एक छोटी केदारनाथ झांकी लिए बैठे मिले। बातचीत में पता चला कि ये तीनों दोस्त छपरा से बाबा केदारनाथ के दर्शन के लिए एक लंबी और मुश्किल यात्रा पर निकले हैं, वो भी स्केटिंग करते हुए और पीठ पर करीब 57 किलो वजन लादकर। चार दिन में छपरा से बलिया तक का सफर ये तीनों युवा अपने गांव से महज 4 दिनों में स्केटिंग करते हुए बलिया पहुंच गए हैं। इनका मानना है कि इसी रफ्तार से चलते रहे तो करीब 1.5 से 2 महीने में केदारनाथ पहुंच जाएंगे। सफर के दौरान रास्ते में हर जगह लोग इनका स्वागत कर रहे हैं और आगे बढ़कर मदद कर रहे हैं, जिससे तीनों दोस्तों का हौसला और बढ़ जाता है। मन्नत पूरी करने के लिए स्केटिंग से यात्रा छपरा निवासी चंदन कुमार ने बताया कि वे अपने 2 दोस्तों के साथ स्केटिंग के जरिए केदारनाथ दर्शन के लिए निकले हैं और अपने गांव से 4 दिनों में बलिया पहुंचे हैं। चंदन ने कहा, "हम करीब 2.5 सालों से स्केटिंग का अभ्यास कर रहे हैं।" उन्होंने और उनके साथियों ने खुद 27 किलो वजन का केदारनाथ मंदिर बनाया है और इसके साथ 30 किलो का बैग पीठ पर लादकर यह सफर तय कर रहे हैं, यानी कुल मिलाकर करीब 57 किलो का बोझ लेकर वे स्केटिंग कर रहे हैं। चंदन के पिता गांव में किराने की दुकान चलाते हैं और परिवार की माली हालत सामान्य है। दूसरे साथी आकाश कुमार की मन्नत की कहानी और भी दिलचस्प है। आकाश ने बाबा केदारनाथ से मन्नत मांगी थी कि अगर उनकी स्केटिंग की प्रैक्टिस पूरी हो गई तो वे स्केटिंग के जरिए ही डोली लेकर दर्शन करने जाएंगे। आकाश फिलहाल इंटरमीडिएट के छात्र हैं और उनके पिता निजी नौकरी करते हैं। आकाश ने बताया कि वे जिस पहली प्रतियोगिता में शामिल हुए थे उसमें उनके भाई ने भी हिस्सा लिया था। दोनों भाइयों को उस मुकाबले में जीत मिली थी, जिसके इनाम के तौर पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उन्हें 2 स्केट्स भेंट किए थे। बारिश के मौसम में मंदिरों और कैंप के सहारे सफर छपरा जिले के परसा गांव के रहने वाले तीसरे साथी गंगा स्केटर ने बताया कि वे स्केटिंग के जरिए ही हरिद्वार होते हुए केदारनाथ दर्शन के लिए निकले हैं। अभी बरसात का मौसम चल रहा है, इसलिए जरूरत पड़ने पर वे कैंप लगाकर या किसी मंदिर में रुक जाते हैं। खाना बनाने के सामान से लेकर रोजमर्रा की हर जरूरी चीज उन्होंने अपने बैग में पहले से ही रख ली है, ताकि रास्ते में परेशानी न हो। गंगा स्केटर के मुताबिक रास्ते में गांव के लोग उनकी खूब मदद कर रहे हैं, कोई भोजन देता है तो कोई पानी और नाश्ता कराता है। कई ढाबा संचालक तो उनसे खाने के पैसे तक नहीं ले रहे। पैसे बचाने के लिए ये तीनों किसी खास होटल में नहीं रुकते, बल्कि जहां भी जगह मिल जाए वहीं रात गुजार लेते हैं। गंगा स्केटर पिछले 6 सालों से स्केटिंग की प्रैक्टिस कर रहे हैं, हालांकि बाबा केदारनाथ के दर्शन उनके लिए अभी बाकी हैं। आगे भी लंबा है रास्ता बलिया तक पहुंचना इस यात्रा का बस एक पड़ाव भर है। इन तीनों दोस्तों को अभी हरिद्वार होते हुए केदारनाथ तक का लंबा और चढ़ाई भरा रास्ता तय करना है। 57 किलो वजन के साथ स्केटिंग करना आसान नहीं, फिर भी रास्ते में मिल रहे सहयोग से इनका हौसला बना हुआ है और तीनों को भरोसा है कि 1.5 से 2 महीने के भीतर वे बाबा केदारनाथ के दर्शन कर लेंगे। सवाल-जवाब 1. ये तीन दोस्त कौन हैं और कहां से हैं? ये चंदन कुमार, आकाश कुमार और गंगा स्केटर हैं, तीनों छपरा जिले से हैं। 2. ये किस मन्नत को पूरा करने के लिए यात्रा कर रहे हैं? चंदन और आकाश ने बाबा केदारनाथ से मन्नत मांगी थी कि स्केटिंग की प्रैक्टिस पूरी होने पर वे स्केटिंग से ही उनके दर्शन करने जाएंगे। 3. ये पीठ पर कितना वजन लेकर चल रहे हैं? ये करीब 57 किलो वजन ले जा रहे हैं, जिसमें 27 किलो का केदारनाथ मंदिर और 30 किलो का बैग शामिल है। 4. छपरा से बलिया तक पहुंचने में इन्हें कितने दिन लगे? इन्हें अपने गांव से बलिया पहुंचने में 4 दिन लगे। 5. ये केदारनाथ कब तक पहुंचने की उम्मीद कर रहे हैं? तीनों दोस्तों को भरोसा है कि वे 1.5 से 2 महीने में केदारनाथ पहुंच जाएंगे। 6. रास्ते में ये कहां ठहरते हैं और खाना कैसे मिलता है? जरूरत पड़ने पर ये कैंप लगाकर या किसी मंदिर में रुकते हैं, और गांव वाले व ढाबा संचालक इन्हें मुफ्त में खाना-पानी उपलब्ध कराते हैं। 7. आकाश कुमार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से क्या इनाम मिला था? एक प्रतियोगिता में जीत के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आकाश और उनके भाई को इनाम के तौर पर 2 स्केट्स दिए थे। 8. ये कब से स्केटिंग की प्रैक्टिस कर रहे हैं? चंदन करीब 2.5 सालों से और गंगा स्केटर पिछले 6 सालों से स्केटिंग का अभ्यास कर रहे हैं। प्रेरणा और सबक चंदन कुमार, आकाश कुमार और गंगा स्केटर की यह यात्रा बताती है कि ठाना हुआ लक्ष्य कितनी भी मुश्किल शर्तों में पूरा किया जा सकता है। • लगातार अभ्यास का फल: बड़ा सफर शुरू करने से पहले चंदन और गंगा स्केटर सालों तक स्केटिंग की प्रैक्टिस करते रहे, तभी वे 57 किलो वजन के साथ यह यात्रा कर पा रहे हैं। • खुद के हाथों से तैयारी: इन्होंने खुद 27 किलो का केदारनाथ मंदिर बनाया, यानी बड़े इरादों के लिए बाहरी मदद का इंतजार नहीं किया। • सीमित संसाधनों में यात्रा: पैसे बचाने के लिए ये किसी खास होटल में नहीं रुकते और मंदिरों व कैंप के सहारे सफर पूरा कर रहे हैं। • दोस्ती की ताकत: अकेले नहीं, बल्कि तीन दोस्त मिलकर इस मुश्किल सफर को साझा हौसले से पूरा कर रहे हैं। • मन्नत को कर्म से जोड़ना: आकाश और चंदन ने अपनी मन्नत को सिर्फ कहने तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे स्केटिंग जैसी कठिन शर्त से जोड़कर असल जिंदगी में निभाया। https://trendkia.com/bihar/57-kilo-ka-mndira-pitha-para-ladakara-sketinga-se-kedarnath-ja-rahe-chhapra-ke-tina-dosta-vajaha-jana-ho-jaenge-hairana-9116 TrendKia — Har trend, sabse pehle.