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  "title": "70 किलोमीटर तक दुश्मन को भांपकर मार गिराएगा भारत का नया एयर डिफेंस हथियार MRSAM",
  "summary": "भारत और इजरायल ने मिलकर बनाया MRSAM एयर डिफेंस सिस्टम, जो आकाश मिसाइल से ज्यादा ताकतवर होकर S-400 जैसी क्षमता की तरफ बढ़ता है। डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल ने इसके मास प्रोडक्शन को मंजूरी दे दी है।",
  "content": "चीन और पाकिस्तान की सीमाओं पर हवा से मंडराते खतरों को देखते हुए भारत ने अपनी हवाई सुरक्षा को और पुख्ता करने का बड़ा कदम उठाया है। भारत और इजरायल की साझा मेहनत से तैयार मीडियम रेंज सरफेस टू एयर मिसाइल यानी MRSAM सिस्टम अब आसमान में दुश्मन के किसी भी मंसूबे को नाकाम करने के लिए तैयार है। रक्षा जानकार इसे कम दूरी की आकाश मिसाइल का बड़ा भाई बता रहे हैं, क्योंकि यह रेंज और मारक क्षमता दोनों में उससे कहीं आगे है, भले ही रूस के दमदार S-400 एयर डिफेंस सिस्टम जितनी ताकत इसमें अभी नहीं है।\n\nआकाश और S-400 के बीच की खाली जगह भरने वाला हथियार\nभारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी डीआरडीओ और इजरायल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज यानी आईएआई ने मिलकर इस सिस्टम को खड़ा किया है। खासियत यह है कि यह भारत के एयर डिफेंस नेटवर्क में आकाश मिसाइल और S-400 के बीच जो बड़ा गैप था, उसे पूरी तरह पाट देता है। डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल ने इसके बड़े पैमाने पर उत्पादन को हरी झंडी दे दी है, यानी अब यह सिस्टम सेनाओं में बड़ी तादाद में शामिल होने के लिए तैयार है। दिलचस्प बात यह है कि यह सिस्टम तीनों सेनाओं, यानी थल सेना, वायुसेना और नौसेना के पास अपने अपने कस्टमाइज्ड रूप में मौजूद है। नौसेना में इसे LRSAM या बराक आठ के नाम से जाना जाता है।\n\n70 किलोमीटर तक मार, 52 हजार फीट ऊंचाई तक निशाना\nइस मिसाइल की सबसे बड़ी ताकत इसकी रेंज है। यह महज 0.5 किलोमीटर की नजदीकी दूरी से लेकर 70 किलोमीटर दूर तक मौजूद किसी भी हवाई खतरे को मार गिरा सकती है। ऊंचाई के मामले में भी यह कम प्रभावी नहीं है, क्योंकि यह हवा में करीब 16 किलोमीटर यानी लगभग 52,000 फीट तक ऊपर जाकर दुश्मन को निशाना बना सकती है। रफ्तार की बात करें तो MRSAM ध्वनि की गति से दोगुनी यानी मैक 2 की स्पीड से उड़ती है, जो करीब 2,469 किलोमीटर प्रति घंटा बैठती है। इतनी तेज गति की वजह से दुश्मन के पास बचने या पैंतरा बदलने का समय ही नहीं बचता।\n\n60 किलो का वॉरहेड, प्रॉक्सिमिटी फ्यूज से तबाही\nमारक क्षमता की बात करें तो यह मिसाइल करीब 60 किलोग्राम वजनी प्री फ्रेगमेंटेड हाई एक्सप्लोसिव वॉरहेड लेकर उड़ती है। इसमें लगा प्रॉक्सिमिटी फ्यूज टारगेट के बेहद करीब पहुंचते ही अपने आप फट जाता है, जिससे लक्ष्य के बचने की गुंजाइश लगभग खत्म हो जाती है।\n\nतीन बड़े हिस्सों पर टिका है यह सुरक्षा तंत्र\nMRSAM सिस्टम मुख्य रूप से तीन अहम हिस्सों से मिलकर बना है। पहला है कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम, जो हवा में मंडराते खतरे को भांपकर तुरंत फैसला लेता है। दूसरा है मल्टी फंक्शन सर्विलांस ट्रैकिंग रडार यानी MF-STAR, जो इजरायली रडार तकनीक पर बना है और 360 डिग्री दायरे में 300 किलोमीटर से ज्यादा दूर तक एक साथ कई खतरों पर नजर रख सकता है। तीसरा हिस्सा है मोबाइल लॉन्चर सिस्टम, जो वर्टिकल लॉन्च तकनीक की मदद से मिसाइल को किसी भी दिशा में पलक झपकते दागने की क्षमता देता है।\n\nदागने के बाद खुद टारगेट का पीछा करती है मिसाइल\nइस मिसाइल की एक और खासियत इसका एक्टिव रडार सीकर है। लॉन्च होने के शुरुआती चरण में इसे रडार से मिड कोर्स मार्गदर्शन मिलता रहता है, लेकिन हमले के आखिरी पलों में इसका अपना रडार सीकर सक्रिय हो जाता है और यह खुद ही टारगेट को लॉक कर लेती है। दुश्मन का विमान चाहे कितनी भी तेजी से दिशा बदले, यह मिसाइल उसका पीछा नहीं छोड़ती। यही वजह है कि इसे काफी हद तक दागो और भूल जाओ तकनीक पर आधारित माना जाता है।\n\nइसका आप पर असर\nयह खबर सीधे तौर पर देश की सुरक्षा तैयारियों से जुड़ी है।\n\n• देश के लिए: MRSAM के मास प्रोडक्शन को मंजूरी मिलने से भारत की हवाई सुरक्षा प्रणाली और मजबूत होगी, जिससे एयरपोर्ट, परमाणु संयंत्रों और सैन्य ठिकानों जैसे संवेदनशील स्थानों पर दुश्मन के हवाई हमलों का खतरा कम होगा और आम नागरिकों की सुरक्षा भी बढ़ेगी।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. MRSAM किन-किन खतरों को हवा में नष्ट कर सकती है?\nMRSAM एक साथ कई खतरों से निपट सकती है और दुश्मन के लड़ाकू विमानों, मानवरहित विमानों, गाइडेड बमों, हेलीकॉप्टरों और लो फ्लाइंग क्रूज मिसाइलों को बेहद सटीकता से मार गिरा सकती है।\n\n2. क्या MRSAM दागो और भूल जाओ तकनीक पर काम करता है?\nहां, काफी हद तक। लॉन्च के बाद शुरुआती चरण में इसे रडार से मिड कोर्स अपडेट मिलते हैं, लेकिन हमले के आखिरी पलों में इसका अपना एक्टिव रडार सीकर टारगेट को खुद लॉक करके नष्ट कर देता है।\n\n3. भारतीय सेना के लिए MRSAM का क्या महत्व है?\nयह हवाई अड्डों, परमाणु संयंत्रों और सैन्य टुकड़ियों जैसे अहम ठिकानों को दुश्मन के हवाई हमलों से अभेद्य सुरक्षा देता है और आकाश मिसाइल तथा S-400 के बीच के गैप को पूरी तरह भरता है।\n\n4. MRSAM को किसने विकसित किया है?\nइसे भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी डीआरडीओ और इजरायल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज यानी आईएआई ने संयुक्त रूप से विकसित किया है।\n\n5. MRSAM की रेंज और ऊंचाई कितनी है?\nयह 0.5 किलोमीटर से लेकर 70 किलोमीटर तक की दूरी पर मौजूद खतरों को मार गिरा सकती है और हवा में करीब 16 किलोमीटर यानी लगभग 52,000 फीट की ऊंचाई तक निशाना साध सकती है।\n\n6. MRSAM की रफ्तार कितनी है?\nयह मैक 2 यानी ध्वनि की गति से दोगुनी रफ्तार से उड़ती है, जो लगभग 2,469 किलोमीटर प्रति घंटा है।",
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  "category": "बिहार",
  "publishedAt": "2026-07-05",
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    "MRSAM मिसाइल",
    "आकाश मिसाइल",
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