अनंत सिंह और नीरज कुमार के टकराव पर राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह बोले, दोनों पक्ष तैयार हों तो सुलह करा सकते हैं जनता दल यूनाइटेड के दो प्रमुख चेहरों के बीच गहराते विवाद पर मुंगेर सांसद राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने संकेत दिया है कि दोनों के राजी होने पर वे बातचीत करा सकते हैं। बिहार की सत्ताधारी पार्टी जनता दल यूनाइटेड के भीतर मोकामा के विधायक अनंत सिंह और विधान परिषद सदस्य नीरज कुमार के बीच राजनीतिक तल्खी चरम पर पहुंच गई है। लखीसराय के दौरे पर पहुंचे केंद्रीय मंत्री एवं मुंगेर के सांसद राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया दी। दोनों नेताओं का सीधा नाम लिए बिना उन्होंने स्पष्ट शब्दों में संकेत दिया कि जब विवाद में शामिल दोनों पक्ष अपने ही मतदाता हों, तो किसी एक के पक्ष में वकालत करने का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने यह भी साफ किया कि यदि दोनों नेता आपसी सहमति से समाधान की मेज पर बैठने को राजी हों, तो वे मध्यस्थ की भूमिका निभाते हुए समझौते की पहल करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। संजय झा ने मुंगेर सांसद को सौंपा था गतिरोध दूर करने का जिम्मा पार्टी संगठन के भीतर मचे इस घमासान को लेकर जनता दल यूनाइटेड के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने दो दिन पहले शुक्रवार को अपनी बात रखी थी। उन्होंने संवाददाताओं को बताया था कि अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच गहराते मतभेदों से पार्टी नेतृत्व पूरी तरह अवगत है। चूंकि पूरा विवाद मुंगेर लोकसभा क्षेत्र के दायरे में आने वाले मोकामा और आसपास के इलाकों से जुड़ा है, इसलिए पार्टी ने इस पूरे झगड़े को जल्द से जल्द शांत करने की जिम्मेदारी मुंगेर के सांसद राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह के कंधों पर डाली है। संगठन का मानना था कि स्थानीय सांसद और वरिष्ठ नेता होने के नाते वे दोनों नेताओं को साधने में अधिक सक्षम हैं। जन सुराज उम्मीदवार के नामांकन में शामिल होकर अनंत सिंह ने दिखाई बगावत इस विवाद ने बृहस्पतिवार को उस समय खुला रूप ले लिया जब अनंत कुमार सिंह ने पार्टी लाइन से अलग हटकर बागी तेवर अपना लिए। वे बिहार विधान परिषद चुनाव के दौरान जन सुराज पार्टी के प्रत्याशी अनुज सिंह के नामांकन जुलूस में खुले तौर पर शामिल हुए। नामांकन पत्र दाखिल किए जाने के वक्त अनंत सिंह के साथ उनके समर्थकों का भारी हुजूम भी मौजूद था। मोकामा के विधायक ने यह भी खुलकर कह दिया कि वे पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से एक बार फिर चुनाव लड़ रहे अपनी ही पार्टी के विधान परिषद सदस्य नीरज कुमार की चुनावी शिकस्त देखना चाहते हैं। इस मौके पर जन सुराज उम्मीदवार के पक्ष में विशाल जुलूस निकालने के बाद अनंत सिंह ने संवाददाताओं से मुखातिब होते हुए कहा कि पार्टी के रुख से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता और चूंकि उनके विरोधी ने कई बार उनके खिलाफ मोर्चा खोला है, इसलिए वे भी उसी अंदाज में जवाब दे रहे हैं। 2015 के चुनावी संग्राम से चली आ रही है दोनों नेताओं की अदावत अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच की यह राजनीतिक खटास कोई तात्कालिक मामला नहीं है, बल्कि इसकी जड़ें साल 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव तक जाती हैं। उस समय अनंत सिंह ने जनता दल यूनाइटेड से अपना नाता तोड़कर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनावी मैदान में ताल ठोंकी थी। तब पार्टी ने उनके खिलाफ नीरज कुमार को मोकामा विधानसभा सीट से अपना अधिकृत उम्मीदवार बनाया था। उस चुनाव में अनंत सिंह ने बेहद मजबूत प्रदर्शन करते हुए भारी मतों के अंतर से अपनी सीट बचाई थी। तब से दोनों नेताओं के बीच शुरू हुई तल्खी लगातार बढ़ती रही है। आगामी विधान परिषद चुनाव में एनडीए का गणित बिहार विधान परिषद की आठ सीटों पर इस महीने के अंत में मतदान होना तय है। सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के तहत सीटों का बंटवारा पूरा हो चुका है। इस व्यवस्था के अनुसार जनता दल यूनाइटेड ने चार सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे हैं, जबकि सहयोगी दल भारतीय जनता पार्टी के खाते में भी चार सीटें गई हैं। पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र जनता दल यूनाइटेड के हिस्से वाली सीटों में शामिल है, जहां पार्टी के मौजूदा एमएलसी नीरज कुमार उम्मीदवार हैं और उन्हीं की सीट पर पार्टी विधायक अनंत सिंह जन सुराज के प्रत्याशी के समर्थन में प्रचार कर रहे हैं। इसका आप पर असर बिहार विधान परिषद चुनाव से ठीक पहले सत्ताधारी दल के भीतर उपजी इस बगावत का सीधा असर चुनावी समीकरणों और स्थानीय मतदाताओं पर पड़ना तय है। • बिहार में: विधान परिषद की आठ सीटों पर होने वाले चुनाव में गठबंधन का अनुशासन दांव पर लग गया है। सत्तारूढ़ दल के दो बड़े चेहरों की आपसी जंग से पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के मतदाताओं के बीच भ्रम की स्थिति बन गई है। • मुंगेर और मोकामा में: स्थानीय स्तर पर पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों का ध्रुवीकरण तेज हो सकता है। यदि शीर्ष स्तर पर सुलह नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में स्थानीय स्तर पर राजनीतिक खींचतान और तेज देखने को मिलेगी। • एनडीए गठबंधन पर: चार सीटों पर लड़ रही जदयू के वोट बैंक में बिखराव का सीधा खतरा पैदा हो गया है। सहयोगी भाजपा के साथ समन्वय बनाए रखने के लिए इस अंतर्कलह को जल्द शांत करना पार्टी नेतृत्व के लिए जरूरी हो गया है। • मतदाताओं के विकल्प: जन सुराज पार्टी के मैदान में आ जाने और उसे जदयू के बागी धड़े का समर्थन मिलने से मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है। स्नातक मतदाताओं के पास अब केवल पारंपरिक गठबंधनों तक सीमित रहने के बजाय नया विकल्प भी उपलब्ध है। ऐसा क्यों हुआ यह तनातनी हालिया विधान परिषद चुनाव में टिकट वितरण और दोनों नेताओं के बीच एक दशक पुरानी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के चलते भड़की है। • तात्कालिक कारण: पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से जनता दल यूनाइटेड ने नीरज कुमार को दोबारा मैदान में उतारा है, जिसके विरोध में अनंत सिंह ने खुलकर जन सुराज उम्मीदवार अनुज सिंह का समर्थन कर नामांकन जुलूस निकाला। • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: दोनों नेताओं के बीच टकराव साल 2015 के विधानसभा चुनाव से जारी है, जब पार्टी छोड़कर निर्दलीय लड़े अनंत सिंह के खिलाफ जदयू ने नीरज कुमार को मोकामा सीट से उतारा था। • क्षेत्रीय प्रभुत्व की लड़ाई: मोकामा विधानसभा क्षेत्र मुंगेर लोकसभा के अंतर्गत आता है, जहां स्थानीय प्रभाव और सियासी वर्चस्व को लेकर दोनों नेताओं के समर्थकों के बीच लंबे समय से खींचतान चल रही है। • पार्टी का प्रयास: संगठन के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने स्थानीय सांसद राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह को दोनों नेताओं के बीच बातचीत कराकर विवाद सुलझाने की औपचारिक जिम्मेदारी दी है। सवाल-जवाब 1. ललन सिंह ने अनंत सिंह और नीरज कुमार के विवाद पर क्या कहा? ललन सिंह ने कहा कि दोनों पक्ष उनके वोटर हैं इसलिए वे किसी की तरफदारी नहीं करेंगे, लेकिन अगर दोनों सहमत हों तो वे सुलह करा सकते हैं। 2. जदयू नेतृत्व ने विवाद सुलझाने की जिम्मेदारी किसे दी है? पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने केंद्रीय मंत्री और मुंगेर सांसद राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह को यह मामला सुलझाने का जिम्मा सौंपा है। 3. अनंत सिंह ने पार्टी से बगावत कैसे दिखाई? अनंत सिंह ने विधान परिषद चुनाव में जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार अनुज सिंह के नामांकन में भाग लिया और उनके समर्थन में जुलूस निकाला। 4. अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच विवाद कब शुरू हुआ था? यह विवाद 2015 के विधानसभा चुनाव से चल रहा है, जब निर्दलीय लड़े अनंत सिंह के खिलाफ जदयू ने नीरज कुमार को मोकामा से उम्मीदवार बनाया था। 5. बिहार विधान परिषद चुनाव में जदयू और भाजपा कितनी सीटों पर लड़ रही हैं? इस महीने के अंत में होने वाले आठ सीटों के चुनाव में जदयू चार और भाजपा चार सीटों पर चुनाव लड़ रही है। https://trendkia.com/bihar/anant-singh-aura-neeraj-kumar-ke-takarava-para-rajiv-ranjan-singh-urpha-lalan-singh-bole-donon-paksha-taiyara-hon-to-sulaha-kara-s-42726 TrendKia — Har trend, sabse pehle.