आरक्षण में क्रिमी लेयर का नियम OBC पर लागू होने और SC-ST को इससे अलग रखने के संवैधानिक कारण भारत में OBC आरक्षण के लिए 8 लाख रुपये की आय सीमा के साथ क्रिमी लेयर की व्यवस्था लागू है, जबकि SC और ST वर्ग में सामाजिक भेदभाव की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के कारण आय सीमा का नियम शामिल नहीं किया गया है। भारतीय संविधान में आरक्षण का मुख्य ध्येय उन सभी समुदायों को मुख्यधारा में शामिल करना और समान अवसर प्रदान करना है जो सामाजिक या शैक्षणिक रूप से पिछड़े रहे हैं। देश के भीतर सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में नामांकन के लिए अलग-अलग वर्गों के हिसाब से कोटा तय किया गया है। लेकिन इन नियमों के बीच अन्य पिछड़ा वर्ग यानी OBC के लिए क्रिमी लेयर की व्यवस्था की गई है, जो कि अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के आरक्षण में देखने को नहीं मिलती। इस फर्क को समझने के लिए भारत के आरक्षण ढांचे, उसके संवैधानिक आधार और विभिन्न श्रेणियों के नियमों को विस्तार से जानना जरूरी है। आरक्षण व्यवस्था का गणित और विभिन्न वर्गों के पैमाने भारत की मौजूदा आरक्षण प्रणाली में अनुसूचित जाति यानी SC वर्ग के लिए 15 प्रतिशत कोटा निर्धारित किया गया है। वहीं अनुसूचित जनजाति यानी ST समुदाय के लिए 7.5 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है। साल 1990 में मंडल कमीशन की सिफारिशें लागू होने के साथ ही अन्य पिछड़ा वर्ग यानी OBC को 27 प्रतिशत आरक्षण प्रदान किया गया। इसके अलावा, साल 2019 में 103वें संविधान संशोधन के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी EWS के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था जोड़ी गई थी। इन सभी श्रेणियों में आरक्षण का आधार अलग-अलग तय किया गया है। EWS श्रेणी का आरक्षण पूरी तरह से आर्थिक स्थिति पर आधारित है। इसके उलट, SC और ST वर्गों के लिए दिया गया आरक्षण सामाजिक पिछड़ेपन को ध्यान में रखकर दिया गया है। OBC वर्ग की बात करें तो इसमें सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन के साथ-साथ आर्थिक स्थिति को भी एक मापदंड बनाया गया है। यही वजह है कि OBC आरक्षण के भीतर ही आर्थिक स्थिति के आधार पर दो श्रेणियां बनाई गई हैं। क्रिमी लेयर और नॉन-क्रिमी लेयर का वास्तविक अर्थ OBC आरक्षण के सही वितरण के लिए सरकार ने क्रिमी लेयर और नॉन-क्रिमी लेयर का वर्गीकरण लागू किया है। क्रिमी लेयर का सीधा अर्थ OBC समुदाय के उन परिवारों से है जो आर्थिक, प्रशासनिक और सामाजिक स्तर पर काफी हद तक सक्षम और समृद्ध हो चुके हैं। केंद्र सरकार समय-समय पर इस वर्ग को तय करने के लिए आय और अन्य मानक तय करती है। वर्तमान मानकों के अनुसार, जिन OBC परिवारों की सालाना कमाई 8 लाख रुपये या उससे अधिक है, उन्हें क्रिमी लेयर की श्रेणी में रखा जाता है। क्रिमी लेयर में आने वाले अभ्यर्थियों को OBC आरक्षण का लाभ नहीं मिलता है। सरकार का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि आरक्षण की मदद की जरूरत वास्तव में सबसे निचले और वंचित स्तर पर जीवन यापन करने वाले परिवारों तक ही पहुंचे। दूसरी ओर, नॉन-क्रिमी लेयर में वे OBC परिवार शामिल होते हैं जिनकी वार्षिक आय सरकार द्वारा तय की गई 8 लाख रुपये की सीमा के भीतर होती है। ऐसे अभ्यर्थी शैक्षणिक संस्थानों में दाखिले और सरकारी नौकरियों में मिलने वाले 27 प्रतिशत OBC आरक्षण के पात्र होते हैं। इसके लिए आवेदन प्रक्रिया के दौरान उम्मीदवार को नॉन-क्रिमी लेयर का प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य होता है। एससी और एसटी आरक्षण से क्यों अलग है क्रिमी लेयर का नियम? यह प्रश्न बार-बार सामने आता है कि यदि OBC में आर्थिक स्थिति के आधार पर क्रिमी लेयर का नियम लागू है, तो फिर SC और ST वर्गों के आरक्षण में ऐसा नियम क्यों नहीं जोड़ा गया। इसका मूल कारण इन वर्गों को दिए गए आरक्षण की संवैधानिक पृष्ठभूमि में छिपा हुआ है। SC और ST समुदायों को आरक्षण देने का प्रमुख उद्देश्य सदियों से चले आ रहे जातीय भेदभाव, सामाजिक छुआछूत, दमन और ऐतिहासिक रूप से उन्हें समाज से बेदखल रखे जाने की क्षतिपूर्ति करना है। संवैधानिक विशेषज्ञों और व्यवस्था के अनुसार, SC और ST वर्ग के लोगों के साथ होने वाला सामाजिक भेदभाव केवल उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार आने से खत्म नहीं हो जाता। यदि कोई SC या ST परिवार आर्थिक रूप से संपन्न भी हो जाता है, तब भी समाज में उसकी जातिगत पहचान के आधार पर भेदभाव का सामना करने की आशंका बनी रहती है। यही कारण है कि SC और ST आरक्षण में आय या वित्तीय स्थिति को पात्रता का पैमाना नहीं बनाया गया है, क्योंकि वहां मुख्य लड़ाई सामाजिक समानता हासिल करने की है। इसके विपरीत, OBC आरक्षण का मुख्य आधार सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ापन है, जिसमें समय के साथ आए आर्थिक सुधारों को ध्यान में रखना जरूरी माना गया। संविधान की भावना और भविष्य में बदलाव की बहस SC और ST आरक्षण व्यवस्था में क्रिमी लेयर का प्रावधान शामिल किया जाए या नहीं, इस पर देश की अदालतों, कानूनी जानकारों और नीति निर्माताओं के बीच लंबी बहस चलती रही है। एक पक्ष का तर्क है कि SC और ST वर्गों के भीतर भी जो परिवार आर्थिक और प्रशासनिक रूप से मजबूत स्थिति हासिल कर चुके हैं, उन्हें आरक्षण के दायरे से बाहर किया जाना चाहिए। इससे उन परिवारों को आगे आने का मौका मिलेगा जो आज भी बेहद गरीब और वंचित स्थिति में हैं। हालाँकि, दूसरे पक्ष के विशेषज्ञों का मानना है कि SC और ST समुदायों की मुख्य समस्या सामाजिक पूर्वाग्रह और जातिगत दंश है, जिसे केवल पैसों से दूर नहीं किया जा सकता। इसलिए इन वर्गों पर क्रिमी लेयर का नियम थोपना संविधान निर्माताओं की मूल सोच और संवैधानिक गारंटी के विपरीत होगा। यही वजह है कि OBC की तर्ज पर SC और ST वर्गों में फिलहाल क्रिमी लेयर का पैमाना लागू नहीं किया गया है। इसका आप पर असर भारत में: यह नियम स्पष्ट करता है कि केवल 8 लाख रुपये तक की वार्षिक पारिवारिक आय वाले OBC उम्मीदवार ही शिक्षा और सरकारी नौकरियों में 27% आरक्षण के पात्र हैं, जबकि SC और ST कोटा में ऐसी कोई आय सीमा लागू नहीं होती। आवेदकों के लिए: OBC श्रेणी के अभ्यर्थियों को आरक्षण का लाभ पाने के लिए आवेदन प्रक्रिया के समय अपना वैध नॉन-क्रिमी लेयर प्रमाण पत्र जमा करना अनिवार्य है। सवाल-जवाब 1. OBC में क्रिमी लेयर तय करने के लिए वर्तमान आय सीमा क्या है? वर्तमान में जिस OBC परिवार की वार्षिक आय 8 लाख रुपये या उससे अधिक है, उसे क्रिमी लेयर माना जाता है और वह आरक्षण का लाभ नहीं ले सकता। 2. OBC आरक्षण के लिए मंडल कमीशन की सिफारिशें कब लागू हुई थीं? मंडल कमीशन की सिफारिशों को साल 1990 में लागू किया गया था जिसके तहत OBC वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण दिया गया। 3. SC और ST वर्गों के आरक्षण में क्रिमी लेयर का नियम क्यों लागू नहीं है? SC और ST आरक्षण का मूल उद्देश्य ऐतिहासिक सामाजिक भेदभाव और छुआछूत को समाप्त करना है, जो केवल आर्थिक स्थिति बेहतर होने से खत्म नहीं होता। 4. 103वें संविधान संशोधन के जरिए किसे आरक्षण मिला? साल 2019 में 103वें संविधान संशोधन के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था की गई। 5. नॉन-क्रिमी लेयर श्रेणी का लाभ प्राप्त करने के लिए क्या आवश्यक है? सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में आरक्षण का लाभ लेने के लिए उम्मीदवार को सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी नॉन-क्रिमी लेयर प्रमाण पत्र देना अनिवार्य है। https://trendkia.com/bihar/arakshana-men-krimi-leyara-ka-niyama-obc-para-lagu-hone-aura-sc-st-ko-isase-alaga-rakhane-ke-snvaidhanika-karana-13229 TrendKia — Har trend, sabse pehle.