# बहराइच और बेमेतरा के हादसों के बीच कतर्नियाघाट वन विभाग की सलाह, मानसून में मगरमच्छ से बचाव के लिए अपनाएं ये जरूरी कदम

> मानसून में घाघरा नदी का जलस्तर बढ़ने से बहराइच और तराई क्षेत्रों में मगरमच्छों का ख़तरा बढ़ गया है। कतर्नियाघाट के वन अधिकारी अपूर्व दीक्षित ने सुरक्षा और बचाव के लिए महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए हैं।

**Type:** article · **Category:** बिहार · **Published:** 2026-08-02 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/bihar/bahraich-aura-bemetara-ke-hadason-ke-bicha-katarniaghat-vana-vibhaga-ki-salaha-manasuna-men-magaramachchha-se-bachava-ke-lie-apana-12986 · **Language:** Hindi
**Tags:** बहराइच, मगरमच्छ सुरक्षा, कतर्नियाघाट वन विभाग, अपूर्व दीक्षित, बेमेतरा समाचार, घाघरा नदी, मानसून जलभराव

मानसून की बारिश शुरू होते ही नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ने लगता है, जिसके कारण तराई और तटीय इलाकों में जलीय जीवों की हलचल बढ़ जाती है। उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में बीते 16 जुलाई को एक दर्दनाक हादसा देखने को मिला था, जहां नदी किनारे हाथ धोने गए 12 वर्षीय सुनील को मगरमच्छ ने अपना निवाला बना लिया और जिंदा चबा गया। दूसरी तरफ, छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले के बावा मोहतरा गांव से एक बिल्कुल अलग तस्वीर भी सामने आती रही है। वहां गंगाराम नाम का एक मगरमच्छ करीब 130 वर्षों तक गांव के तालाब में रहा, लेकिन उसने कभी किसी इंसान को नुकसान नहीं पहुंचाया। इन दोनों उदाहरणों के बीच सवाल उठता है कि आखिर मगरमच्छों के व्यवहार में ऐसा अंतर क्यों होता है और मानसून के दौरान नदियों के आसपास रहने वाले लोगों को अपनी सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाने चाहिए। इस स्थिति को देखते हुए कतर्नियाघाट वन विभाग के अधिकारी अपूर्व दीक्षित ने ग्रामीणों और तटीय निवासियों के लिए जरूरी सुरक्षा निर्देश जारी किए हैं।

## मानसून की बाढ़ और आबादी में मगरमच्छों का बढ़ता ख़तरा
मानसून के मौसम में घाघरा और अन्य तराई नदियों का जलस्तर अचानक बहुत ऊपर आ जाता है। जब नदियों का पानी उफान पर होता है, तो वह छिछला होकर आसपास के किसानों के खेतों, नालों और रिहायशी गांवों तक फैल जाता है। पानी के इस तेज बहाव के साथ नदियों में रहने वाले जीव जैसे मछलियां और मगरमच्छ भी बहकर नए इलाकों में पहुंच जाते हैं। जलभराव के कारण जब पानी धान के खेतों, ऊंची घास और घनी जलकुंभी में जमा होता है, तो मगरमच्छों को छिपने के लिए सुरक्षित ठिकाना मिल जाता है। ऐसे में वे आबादी के मुहाने पर छिछले पानी में घात लगाकर बैठ जाते हैं और मौका मिलते ही इंसानों या मवेशियों पर हमला कर देते हैं।

## मगरमच्छों की सक्रियता के मुख्य कारण
जलस्तर बढ़ने के साथ ही मगरमच्छ भोजन की तलाश और सुरक्षित आश्रय की खोज में अधिक सक्रिय हो जाते हैं। नदियों से निकलकर नालों और खेतों तक उनका पहुंचना बेहद आसान हो जाता है। मटमैले पानी, घनी झाड़ियों और जलकुंभी का फायदा उठाकर वे खुद को इस तरह छिपा लेते हैं कि दूर से उनका अंदाजा लगाना नामुमकिन सा हो जाता है। मगरमच्छ पानी के अंदर या किनारे पर खड़े शिकार पर अचानक और अत्यधिक तेजी से झपटने की क्षमता रखते हैं। यही वजह है कि मानसून के दिनों में इनके संपर्क में आने से जान का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।

## कतर्नियाघाट वन अधिकारी अपूर्व दीक्षित की सुरक्षा गाइडलाइन
कतर्नियाघाट के वन अधिकारी अपूर्व दीक्षित ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कुछ अनिवार्य सावधानियां बरतने की सलाह दी है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि यदि आसपास कहीं भी मगरमच्छ नजर आए, तो सबसे पहला नियम सुरक्षित दूरी बनाए रखना है। लोग अक्सर कौतुहल में मगरमच्छ के करीब जाने या उसकी फोटो और वीडियो बनाने की कोशिश करते हैं। वन अधिकारी के अनुसार, यह बेहद खतरनाक साबित हो सकता है क्योंकि मगरमच्छ के हमला करने और झपटने की गति इंसान के सोचने से भी तेज होती है।

## बच्चों की सुरक्षा और संवेदनशील समय का ध्यान रखें
मानसून के दौरान बच्चों की सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्कता जरूरी है। बच्चों को नदियों, जलभराव वाले गड्ढों, तालाबों या छिछले पानी के स्रोतों में नहाने या खेलने की अनुमति बिल्कुल न दें। जिन स्थानों पर पानी के किनारे ऊंची घास, घनी झाड़ियां या जलकुंभी जमा हो, वहां जाने से सख्त परहेज करना चाहिए। इसके अलावा, सुबह और शाम के समय जब रोशनी कम होती है, उस वक्त पानी के स्रोतों के पास जाना सबसे ज्यादा जोखिम भरा होता है। कम रोशनी में मटमैले पानी के अंदर छिपे मगरमच्छ को देख पाना बहुत मुश्किल होता है, इसलिए धुंधले उजाले में नदी-तालाब के किनारों से दूर रहना चाहिए।

## मगरमच्छ दिखने पर खुद भगाने की गलती न करें
गांवों में अक्सर देखा जाता है कि मगरमच्छ दिखने पर लोग लाठी-डंडे लेकर उसे खुद ही भगाने या चारों तरफ से घेरने का प्रयास करने लगते हैं। वन अधिकारी अपूर्व दीक्षित ने सख्त चेतावनी दी है कि मगरमच्छ को घेरने या छेड़ने पर वह आक्रामक होकर जानलेवा हमला कर सकता है। अगर आबादी के आसपास कोई मगरमच्छ दिखाई देता है, तो उसे खुद भगाने के बजाय तुरंत स्थानीय वन विभाग की टीम और हेल्पलाइन नंबर पर सूचना देनी चाहिए। वन विभाग की विशेषज्ञ टीम मौके पर पहुंचकर क्षेत्र को सुरक्षित करती है और मगरमच्छ को वैज्ञानिक तरीके से रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थान पर ले जाती है। पूरी सतर्कता और नियम पालन से ही मानसून में इस तरह की बड़ी घटनाओं को टाला जा सकता है।

## इसका आप पर असर
- **भारत में:** मानसून के दौरान नदियों, तालाबों और बाढ़ प्रभावित तराई क्षेत्रों के पास रहने वाले लोगों को जलीय जीवों और मगरमच्छों के खतरों के प्रति अत्यधिक सतर्क रहना चाहिए।
- **उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ में:** बहराइच और बेमेतरा जैसे तराई व ग्रामीण इलाकों में ग्रामीणों को पानी के किनारे जाने से बचना चाहिए तथा मगरमच्छ दिखने पर वन विभाग को तुरंत सूचित करना चाहिए।

## सवाल-जवाब

### 1. बहराइच में 16 जुलाई को क्या घटना घटी थी?
बहराइच में 16 जुलाई को नदी किनारे हाथ धोने गए 12 वर्षीय सुनील को मगरमच्छ ने हमला कर अपना निवाला बना लिया था।

### 2. छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले में गंगाराम मगरमच्छ का क्या उदाहरण है?
बेमेतरा के बावा मोहतरा गांव में गंगाराम नाम का मगरमच्छ करीब 130 वर्षों तक गांव के तालाब में रहा और उसने कभी किसी इंसान को नुकसान नहीं पहुंचाया।

### 3. मानसून में मगरमच्छ इंसानी बस्तियों के पास क्यों आ जाते हैं?
घाघरा जैसी नदियों का जलस्तर बढ़ने से पानी धान के खेतों और नालों में भर जाता है, जिससे भोजन और ठिकाने की तलाश में मगरमच्छ छिछले पानी के सहारे आबादी के करीब पहुंच जाते हैं।

### 4. कतर्नियाघाट के वन अधिकारी अपूर्व दीक्षित ने क्या सावधानियां बताई हैं?
वन अधिकारी अपूर्व दीक्षित ने सुरक्षित दूरी बनाए रखने, फोटो-वीडियो न लेने, बच्चों को पानी से दूर रखने और सुबह-शाम धुंधले उजाले में पानी के पास न जाने की सलाह दी है।

### 5. मगरमच्छ दिखने पर ग्रामीणों को क्या करना चाहिए?
मगरमच्छ को खुद भगाने या घेरने का प्रयास बिल्कुल न करें। तुरंत स्थानीय वन विभाग की टीम या हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क कर एक्सपर्ट रेस्क्यू की सहायता लें।

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