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  "title": "बालाघाट कृषि विशेषज्ञ राजेश कुमार खोबरागड़े ने बताया खाद की बचत और बेहतर उपज का 4R फॉर्मूला",
  "summary": "जुलाई के महीने में देरी से हुई बारिश और खाद संकट के बीच किसानों के लिए संतुलित उर्वरक प्रयोग बेहद जरूरी हो गया है। बालाघाट के कृषि सहायक संचालक राजेश कुमार खोबरागड़े ने 4R तकनीक और बेसल डोज की सही समय सारणी साझा की है।",
  "content": "जुलाई के महीने की शुरुआत के साथ ही देश भर में खरीफ फसलों का कृषि सीजन जोर पकड़ लेता है। इस दौरान किसान दिन-रात खेतों में कड़ी मेहनत करके बेहतर पैदावार की उम्मीद में जुट जाते हैं। हालांकि इस साल मानसून के अनिश्चित मिजाज और समय पर बारिश न होने के कारण किसानों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई क्षेत्रों में बारिश में देरी के कारण बुआई देर से शुरू हो सकी है। इसके अलावा, ऐन वक्त पर खाद और रासायनिक उर्वरकों की किल्लत ने किसानों की चिंता को और बढ़ा दिया है। ऐसी स्थिति में उपलब्ध उर्वरकों का वैज्ञानिक और सही तरीके से इस्तेमाल करना बेहद आवश्यक हो गया है। अगर सही तकनीक अपनाई जाए तो न केवल खेती की लागत कम होगी, बल्कि मिट्टी का स्वास्थ्य सुधरेगा और पौधों को संतुलित पोषक तत्व प्राप्त होंगे।\n\nउर्वरकों के अत्यधिक इस्तेमाल से नुकसान और सही प्रबंधन की आवश्यकता\nपिछले कुछ वर्षों के रुझान पर नजर डालें तो पैदावार बढ़ाने की अंधी दौड़ में रासायनिक खाद का इस्तेमाल अप्रत्याशित रूप से बढ़ा है। अधिकांश किसान भाई अधिक उत्पादन हासिल करने की लालसा में खेतों में जरूरत से ज्यादा उर्वरक छिड़क देते हैं। बालाघाट के कृषि विभाग में पदस्थ सहायक संचालक राजेश कुमार खोबरागड़े के अनुसार, अनियंत्रित तरीके से खाद डालना वित्तीय नुकसान का बड़ा कारण बनता है। इससे किसानों की जेब पर भारी बोझ पड़ता है और साथ ही भूमि की प्राकृतिक संरचना तथा फसलों की गुणवत्ता पर भी बहुत प्रतिकूल असर पड़ता है। वर्तमान परिस्थितियों में यह जरूरी हो गया है कि किसान अपनी जमीन की मिट्टी के स्वास्थ्य और फसल की वास्तविक जरूरतों को समझें। उर्वरकों का विवेकपूर्ण छिड़काव न केवल अनावश्यक लागत को रोकता है बल्कि कृषि से पर्यावरण को होने वाली क्षति को भी काफी हद तक कम करता है।\n\nयूरिया प्रयोग का 4R फॉर्मूला और उसके मुख्य स्तंभ\nखेतों में यूरिया या किसी अन्य उर्वरक का छिड़काव करने से पहले किसानों को 4R के बुनियादी सिद्धांतों को अच्छी तरह समझ लेना चाहिए। सहायक संचालक राजेश कुमार खोबरागड़े ने स्पष्ट किया कि 4R फॉर्मूला चार मुख्य बातों पर केंद्रित है: खाद की सही मात्रा, सही समय पर प्रयोग, डालने का सही तरीका और उर्वरक का सही स्रोत। जब किसान इन चारों पहलुओं का सही तालमेल बिठाकर यूरिया का प्रयोग करते हैं, तो पोषक तत्वों का नुकसान न्यूनतम होता है। इसका सीधा लाभ पौधों की जड़ों को मिलता है, जिससे उनका वानस्पतिक विकास तेजी से होता है और अंततः पैदावार में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की जाती है।\n\nधान की फसल में बेसल डोज देने की सही विधि\nकृषि विशेषज्ञ राजेश कुमार खोबरागड़े के मुताबिक, धान की खेती में पहली खुराक यानी बेसल डोज का समय और संरचना बेहद महत्वपूर्ण होती है। किसानों को बेसल डोज खेत तैयार करते समय यानी कीचड़ मचाते वक्त या धान का रोपा लगाते समय ही देनी चाहिए। इस शुरुआती चरण में नाइट्रोजन की आपूर्ति के लिए 20:20:13 उर्वरक और DAP का उपयोग किया जाना चाहिए। इसके साथ ही पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और तने को मजबूती देने के लिए पोटाश का प्रयोग भी अनिवार्य रूप से किया जाना चाहिए। शुरुआती दौर में यह संतुलित खुराक मिलने से पौधे मिट्टी में अपनी पकड़ तेजी से मजबूत बनाते हैं।\n\nएक एकड़ खेत में यूरिया की चरणबद्ध डोज और समय सारणी\nयूरिया के इस्तेमाल की समय सारणी समझाते हुए कृषि विशेषज्ञ ने बताया कि यदि एक एकड़ खेत में कुल एक बोरी यूरिया की खपत मानी गई है, तो उसे एक साथ डालने के बजाय तीन अलग-अलग किस्तों में दिया जाना चाहिए। फसल की बुआई या रोपाई के समय पहली खुराक के रूप में केवल आधा बोरी यूरिया दिया जाना चाहिए। इसके बाद दूसरी खुराक के तौर पर कुल मात्रा का 25 प्रतिशत (यानी आधी बोरी का भी आधा हिस्सा) पहली खुराक के 25 से 30 दिनों के बाद छिड़कना चाहिए। अंत में शेष बचा हुआ यूरिया कुछ समय के अंतराल पर फसल की आवश्यकता के अनुसार देना चाहिए। इस चरणबद्ध प्रणाली से पौधों को निरंतर पोषण मिलता रहता है और खाद बहकर या उड़कर बर्बाद नहीं होती।\n\nइसका आप पर असर\n• भारत में: उर्वरकों का संतुलित प्रयोग करके किसान खेती की इनपुट लागत कम कर सकते हैं और मिट्टी की दीर्घकालिक उर्वरता को नष्ट होने से बचा सकते हैं।\n• बालाघाट में: देरी से बुआई करने वाले धान उत्पादक किसान यूरिया की डोज को तीन चरणों में बांटकर सीमित संसाधनों में भी अधिकतम उपज हासिल कर सकते हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. खाद प्रबंधन में 4R फॉर्मूला का क्या अर्थ है?\n4R फॉर्मूले का मतलब खाद की सही मात्रा, सही समय, सही तरीका और सही स्रोत का ध्यान रखना है ताकि पौधे को सभी पोषक तत्व संतुलित रूप में मिल सकें।\n\n2. धान की फसल में पहली डोज या बेसल डोज कब दी जानी चाहिए?\nबेसल डोज खेत में कीचड़ मचाते समय या धान का रोपा लगाते वक्त देनी चाहिए, जिसमें 20:20:13, DAP और पोटाश का इस्तेमाल किया जाता है।\n\n3. एक एकड़ खेत में यूरिया की पहली खुराक कितनी देनी चाहिए?\nयदि एक एकड़ में एक बोरी यूरिया की आवश्यकता है, तो बुआई या रोपाई के समय पहली बार में केवल आधी बोरी यूरिया दी जानी चाहिए।\n\n4. यूरिया की दूसरी डोज कितने दिनों के बाद और कितनी मात्रा में देनी चाहिए?\nदूसरी खुराक पहली खुराक के 25 से 30 दिनों के बाद दी जानी चाहिए, जो कुल आवश्यकता का 25 प्रतिशत (यानी बची हुई आधी बोरी का आधा) होना चाहिए।\n\n5. ज्यादा रासायनिक उर्वरक डालने से फसलों और जमीन पर क्या प्रभाव पड़ता है?\nआवश्यकता से अधिक उर्वरक डालने से किसानों का पैसा बर्बाद होता है, मिट्टी की गुणवत्ता खराब होती है और पर्यावरण तथा फसलों पर नकारात्मक असर पड़ता है।",
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  "category": "बिहार",
  "publishedAt": "2026-07-31",
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    "खाद प्रबंधन",
    "यूरिया का इस्तेमाल",
    "4R तकनीक",
    "धान की खेती",
    "बालाघाट कृषि",
    "उर्वरक बचत"
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  "site": "TrendKia"
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