# भागलपुर के आदमपुर में कमर तक पानी के बावजूद लगी है डेढ़ करोड़ की जमीन की बोली

> भागलपुर के सबसे महंगे आदमपुर इलाके में गंगा का पानी घुसने से लोग कमर भर पानी में रहने को मजबूर हैं, लेकिन इसके बावजूद यहां प्रति कट्ठा 1.5 करोड़ रुपये की जमीन खरीदने के लिए लोगों में होड़ मची हुई है।

**Type:** article · **Category:** बिहार · **Published:** 2026-09-12 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/bihar/bhagalpur-ke-adampur-men-kamara-taka-pani-ke-bavajuda-lagi-hai-derha-karora-ki-jamina-ki-boli-31591 · **Language:** Hindi
**Tags:** बिहार, भागलपुर, आदमपुर, रियल एस्टेट, बाढ़, गंगा नदी, स्मार्ट सिटी, जमीन की कीमत

ग्रामीण क्षेत्रों से शहरी इलाकों की ओर पलायन करने की बढ़ती प्रवृत्ति ने देश के कई शहरों में जमीन की कीमतों को बेतहाशा बढ़ा दिया है। बिहार के भागलपुर में भी कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिल रहा है, जहां एक ओर रियल एस्टेट की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर हैं, वहीं दूसरी ओर गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण ये महंगे इलाके पूरी तरह पानी में डूब गए हैं। अत्यधिक जलभराव के बावजूद इन रिहायशी इलाकों में जमीन की मांग और खरीदारों की दिलचस्पी में कोई कमी नहीं आई है।

## डेढ़ करोड़ रुपये प्रति कट्ठा की जमीन और कमर तक बाढ़
भागलपुर जिले के सबसे वीआईपी और पॉश इलाकों में शुमार आदमपुर में स्थिति काफी चिंताजनक है। यहां सीएमएस स्कूल के समीप स्थित बैंक कॉलोनी जैसे क्षेत्रों में मानसून के मौसम में कमर तक पानी भर जाता है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, इस इलाके में जमीन की कीमतें इतनी अधिक हैं कि महज एक कट्ठा यानी 720 स्क्वायर फीट जमीन के लिए भी डेढ़ करोड़ रुपये से ज्यादा की बोली लगती है। इसके बावजूद, हर साल गंगा का पानी रिहायशी इलाकों में घुसने से करोड़ों की यह कीमती जमीन पूरी तरह जलमग्न हो जाती है।

## स्मार्ट सिटी परियोजना और प्रशासनिक लापरवाही
इस पॉश इलाके में रहने वाले लोगों का दर्द है कि वे बचपन से ही इसी तरह के हालातों का सामना कर रहे हैं। सबसे विडंबना की बात यह है कि यह पूरा क्षेत्र सरकार की स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत आता है, लेकिन बुनियादी ढांचे के नाम पर यहां पानी की निकासी का कोई ठोस इंतजाम नहीं है। निवासियों का आरोप है कि बाढ़ के दिनों में उन्हें स्थानीय नगर निगम से भी किसी तरह की कोई मदद नहीं मिलती है। बिहार के सबसे महंगे इलाकों में से एक होने के बावजूद ऐसी बदहाली प्रशासनिक उदासीनता और नाकामी को दर्शाती है।

## भारी जलभराव के बाद भी खरीदारों में होड़
सामान्य तौर पर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लोग निवेश करने से बचते हैं, लेकिन आदमपुर में इसका बिल्कुल उल्टा असर देखा जा रहा है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, आज भी अगर इस क्षेत्र में कोई अपनी जमीन बेचने की बात करता है, तो कई खरीदार तुरंत सामने आ जाते हैं। खरीदारों की भारी भीड़ के कारण जमीन के सौदे के लिए अक्सर बोली लगाने जैसी नौबत आ जाती है। एक तरफ जहां खाली जमीन का मिलना ही बेहद दुर्लभ है, वहीं दूसरी तरफ जलभराव के जोखिम को नजरअंदाज कर लोग करोड़ों रुपये का निवेश करने को तैयार बैठे हैं।

## इसका आप पर असर
इस खबर से स्पष्ट होता है कि बिना बुनियादी ढांचे के विकास के केवल महंगे इलाकों में निवेश करना वित्तीय नुकसान का कारण बन सकता है।

- **देशभर में (रियल एस्टेट सुरक्षा):** केवल वीआईपी टैग देखकर प्रॉपर्टी खरीदना भारी पड़ सकता है। निवेशकों को जमीन लेने से पहले वहां के जलभराव और जल निकासी के इतिहास की पूरी जानकारी लेनी चाहिए।
- **देशभर में (स्मार्ट सिटी दावों की सच्चाई):** स्मार्ट सिटी घोषित होने के बाद भी बुनियादी ढांचे का अभाव देखने को मिलता है। खरीदारों को कागजी दावों के बजाय जमीन पर मौजूद सुविधाओं को देखकर ही निवेश का फैसला करना चाहिए।
- **भागलपुर में (संपत्ति के मूल्य का नुकसान):** आदमपुर और बैंक कॉलोनी के निवासियों को हर साल मानसून के दौरान भारी संपत्ति के नुकसान का सामना करना पड़ेगा। यहां निवेश करने वालों को जलभराव से निपटने के लिए अतिरिक्त खर्च उठाना होगा।
- **बिहार में (प्रशासनिक जवाबदेही):** राज्य के बाढ़ प्रभावित शहरी क्षेत्रों के नागरिकों को स्थानीय नगर निगमों पर जल निकासी व्यवस्था सुधारने का दबाव बनाना होगा। बिना ठोस कदम के मानसून में जलभराव की समस्या का कोई समाधान नहीं होगा।

## ऐसा क्यों हुआ
भागलपुर के इस प्रीमियम इलाके में जलभराव की मुख्य वजह प्राकृतिक कारकों और शहरी नियोजन की विफलता का एक जटिल संयोजन है।

- **गंगा नदी का बढ़ता जलस्तर:** मानसून के दौरान भारी बारिश के कारण गंगा नदी उफान पर आ जाती है। इसके परिणामस्वरूप पास के निचले शहरी क्षेत्रों में नदी का पानी प्रवेश कर जाता है।
- **जल निकासी की अनुपलब्धता:** यद्यपि यह क्षेत्र स्मार्ट सिटी परियोजना के अंतर्गत आता है, लेकिन यहां पानी के सुचारू बहाव के लिए कोई ठोस ड्रेनेज सिस्टम नहीं बनाया गया है।
- **अत्यधिक और अनियोजित शहरीकरण:** गांवों से शहरों की ओर हो रहे तेज पलायन के कारण कंक्रीट का दायरा बढ़ गया है। इससे प्राकृतिक जल निकासी के रास्ते बंद हो गए हैं और बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।

## सवाल-जवाब

### 1. भागलपुर में बाढ़ से प्रभावित यह सबसे महंगा इलाका कौन सा है?
यह इलाका भागलपुर जिले के सबसे पॉश क्षेत्र आदमपुर में स्थित बैंक कॉलोनी और सीएमएस स्कूल के समीप का है।

### 2. इस बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में जमीन की कीमत क्या है?
यहां जमीन की कीमत लगभग 1.50 करोड़ रुपये प्रति कट्ठा है।

### 3. इस क्षेत्र में एक 'कट्ठा' जमीन का आकार कितना होता है?
इस इलाके में एक कट्ठा जमीन का आकार 720 स्क्वायर फीट होता है।

### 4. बाढ़ के समय इस पॉश इलाके में पानी का स्तर कितना रहता है?
मानसून के समय जब गंगा का जलस्तर बढ़ता है, तो इस इलाके में कमर भर पानी जमा हो जाता है।

### 5. क्या जलभराव के दौरान निवासियों को नगर निगम से सहायता मिलती है?
स्थानीय निवासियों के अनुसार, बाढ़ की इस विकट स्थिति में उन्हें नगर निगम की तरफ से कोई मदद नहीं मिलती है।

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