भागलपुर में गंगा नदी के घाटों पर बढ़ी डॉल्फिन की हलचल, नावों में बजर लगाने की तैयारी भागलपुर में सुल्तानगंज से बटेश्वर स्थान तक गंगा में डॉल्फिन की मौजूदगी बढ़ गई है, जहां इनके बचाव के लिए नावों में विशेष बजर लगाने और वाचिंग सेंटर बनाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। बिहार के भागलपुर क्षेत्र में गंगा का जलस्तर बढ़ते ही जलीय जीवों की सक्रियता तेज हो गई है। सुल्तानगंज से लेकर बटेश्वर स्थान तक फैले गंगा जलक्षेत्र में विलुप्तप्राय श्रेणी में शामिल डॉल्फिन लगातार पानी की सतह पर आकर हलचल करती देखी जा रही हैं। नदी के किनारे जुटने वाले स्थानीय लोग और पर्यटक इन जलीय जीवों की एक झलक पाने के लिए घंटों इंतजार करते हैं। भारत के दूसरे गंगा अभयारण्य क्षेत्र के रूप में विख्यात भागलपुर में इन दिनों अलग-अलग घाटों पर डॉल्फिन का नजारा आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। किन घाटों पर और किस समय दिखती हैं डॉल्फिन नदी किनारे आने वाले दर्शकों के लिए डॉल्फिन का दीदार करने के कुछ खास समय और स्थान निर्धारित हैं। दिन के समय सूर्योदय से लेकर सुबह 10 बजे तक और फिर दोपहर बाद 3 बजे के बाद गंगा के बहाव में इनकी हलचल सबसे अधिक दर्ज की जाती है। आम तौर पर डॉल्फिन हर 2 से 5 मिनट के अंतराल पर सांस लेने और पानी की सतह पर अठखेलियां करने ऊपर आती हैं। भागलपुर के जिन प्रमुख घाटों पर सबसे ज्यादा डॉल्फिन देखने को मिलती हैं, उनमें सुल्तानगंज, तिलकपुर, बूढ़ानाथ, आदमपुर, सीढ़ी घाट, बरारी घाट, बाबूपुर घाट और बटेश्वर घाट शामिल हैं। इन सभी स्थानों पर लोगों का जमावड़ा केवल इसलिए लग रहा है ताकि वे पानी की लहरों के बीच से उछलती डॉल्फिन को नजदीक से देख सकें। नावों में सेंसर आधारित बजर तकनीक का प्रस्ताव डॉल्फिन को जल परिवहन से होने वाले खतरों से बचाने के लिए वन विभाग ने एक अनूठी योजना तैयार की है। वन पदाधिकारी के अनुसार, भागलपुर में पहली बार इस तरह की आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करने की तैयारी है, जिसका औपचारिक प्रस्ताव संबंधित विभाग को भेजा जा चुका है। योजना के तहत गंगा में चलने वाली नावों में बजर नामक एक विशेष यंत्र लगाया जाएगा। यह उपकरण सेंसर तकनीक पर काम करेगा। जैसे ही कोई नाव डॉल्फिन के करीब पहुंचेगी, यह सेंसर तुरंत उसकी मौजूदगी पहचान लेगा और तेज आवाज के साथ बजर बजने लगेगा। बजर की आवाज सुनते ही नाविक सचेत हो जाएगा। इसके बाद नाविक या तो अपनी नाव की दिशा बदल सकेगा अथवा नाव की गति बेहद धीमी करके उसे वहां से सुरक्षित निकाल सकेगा। इस व्यवस्था से जलीय जीवों को नावों के टकराने या इंजनों के पंखों से होने वाले नुकसान से पूरी तरह बचाया जा सकेगा। भागलपुर में बढ़ रही संख्या और ताजा सर्वे आंकड़ों पर नजर डालें तो इस अभयारण्य क्षेत्र में डॉल्फिन की आबादी में लगातार सुधार देखा गया है। वर्ष 2018 में हुई गणना के दौरान यहां करीब 178 डॉल्फिन दर्ज की गई थीं। इसके बाद संरक्षण के प्रयासों के चलते 2022 की गणना में यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 210 तक पहुंच गया, जिसमें डॉल्फिन और उनके बच्चे दोनों शामिल थे। डीएफओ आशुतोष राज के मुताबिक, इस वर्ष फरवरी में डॉल्फिन का ताजा सर्वे कराया गया है। हालांकि इस सर्वे की अंतिम रिपोर्ट अभी सार्वजनिक नहीं हुई है और उसके आने के बाद ही सटीक आधिकारिक संख्या सामने आ पाएगी, लेकिन शुरुआती आकलनों से स्पष्ट है कि नदी में काफ यानी डॉल्फिन के बच्चों की तादाद में उत्साहजनक इजाफा हुआ है। डॉल्फिन वाचिंग सेंटर और आपात सूचना की अपील पर्यटन को बढ़ावा देने और लोगों को व्यवस्थित रूप से यह नजारा दिखाने के लिए वन प्रमंडल पदाधिकारी आशुतोष राज ने डॉल्फिन वाचिंग सेंटर स्थापित करने का प्रस्ताव भी शासन को भेजा है। इस केंद्र के बनने से लोग बिना किसी परेशानी और सुरक्षित तरीके से प्राकृतिक माहौल में डॉल्फिन को निहार सकेंगे। इसके साथ ही वन विभाग ने आम जनता से भी संरक्षण अभियान में सहयोग करने का आग्रह किया है। गंगा किनारे या पानी में यदि कोई डॉल्फिन अथवा अन्य जलीय जीव घायल या संकटग्रस्त अवस्था में दिखाई दे, तो उसकी सूचना तत्काल वन विभाग को देने की सलाह दी गई है। समय पर सूचना मिलने से घायल जीव का तुरंत उपचार किया जा सकेगा और उसकी जान बचाना संभव होगा। इसका आप पर असर भागलपुर और आसपास के गंगा घाटों पर आने वाले पर्यटकों और स्थानीय नाविकों के लिए नदी में सुरक्षा और भ्रमण के नए नियम लागू होंगे। • भागलपुर में: स्थानीय नाविकों को जल्द ही अपनी नावों में सेंसर वाले बजर उपकरण लगाने होंगे। इससे नदी में नाव चलाते समय डॉल्फिन दिखने पर अलर्ट मिलेगा और दुर्घटनाओं से बचाव के लिए नाविकों को गति धीमी रखनी होगी। • पर्यटकों और दर्शकों के लिए: सुल्तानगंज से बटेश्वर स्थान तक बनाए जाने वाले डॉल्फिन वाचिंग सेंटर से लोग सुरक्षित ढंग से डॉल्फिन देख सकेंगे। सुबह 10 बजे से पहले और दोपहर 3 बजे के बाद घाटों पर जाने से लोगों को 2 से 5 मिनट के भीतर डॉल्फिन दिखने की संभावना सबसे अधिक रहेगी। • नागरिकों की जिम्मेदारी: गंगा तट पर किसी भी घायल डॉल्फिन या जलीय जीव को देखने पर तुरंत वन विभाग को सूचित करने का निर्देश दिया गया है। त्वरित सूचना देने से विशेषज्ञ टीम मौके पर पहुंचकर जीव का तत्काल प्राथमिक उपचार कर सकेगी। • भारत में: देश के दूसरे गंगा अभयारण्य में डॉल्फिन संरक्षण के सफल प्रयोग अन्य राज्यों के नदी तटीय क्षेत्रों के लिए एक मॉडल बन सकते हैं। इससे राष्ट्रीय जलीय जीव के संरक्षण प्रयासों को नई दिशा मिलेगी। ऐसा क्यों हुआ गंगा नदी में जलस्तर में मौसमी बदलाव और वर्षों से चल रहे सुनियोजित संरक्षण प्रयासों के कारण डॉल्फिन की सक्रियता और संख्या में यह वृद्धि दर्ज की गई है। • मौसमी और प्राकृतिक कारण: गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने से जलीय जीवों की हलचल और तैराकी के लिए अनुकूल जलक्षेत्र का विस्तार हुआ है। पर्याप्त पानी उपलब्ध होने से डॉल्फिन भोजन और सांस लेने के लिए सतह के करीब बार-बार आ रही हैं। • संरक्षण और सुरक्षा उपाय: भागलपुर स्थित गंगा अभयारण्य क्षेत्र में सुरक्षा उपायों के चलते डॉल्फिन की संख्या 2018 में 178 से बढ़कर 2022 में 210 दर्ज की गई। निरंतर निगरानी के परिणामस्वरूप वर्तमान में डॉल्फिन के नवजात बच्चों यानी काफ की संख्या में भी बढ़ोतरी देखी जा रही है। • नावों से संभावित खतरा: जलमार्गों पर चलने वाली पारंपरिक नावों से डॉल्फिन के टकराने का जोखिम हमेशा बना रहता है। इसी खतरे को स्थायी रूप से टालने के लिए विभाग को नावों में सेंसर आधारित बजर लगाने का प्रस्ताव तैयार करना पड़ा है। सवाल-जवाब 1. भागलपुर में डॉल्फिन देखने के लिए सबसे बेहतर समय कौन सा है? डॉल्फिन को देखने के लिए सबसे मुफीद समय सूर्योदय से सुबह 10 बजे तक और दोपहर बाद 3 बजे के बाद का माना जाता है। 2. भागलपुर के किन प्रमुख घाटों पर सबसे अधिक डॉल्फिन दिखाई देती हैं? सुल्तानगंज, तिलकपुर, बूढ़ानाथ, आदमपुर, सीढ़ी घाट, बरारी घाट, बाबूपुर घाट और बटेश्वर घाट पर सबसे अधिक डॉल्फिन देखी जाती हैं। 3. नावों में बजर लगाने की क्या योजना है और यह कैसे काम करेगा? नावों में सेंसर युक्त बजर लगाया जाएगा, जो डॉल्फिन के नजदीक आते ही बजने लगेगा ताकि नाविक नाव की दिशा बदल सके या गति धीमी कर सके। 4. भागलपुर में पिछली गणनाओं के अनुसार डॉल्फिन की संख्या कितनी है? वर्ष 2018 में यहां डॉल्फिन की संख्या लगभग 178 थी, जो 2022 की गणना में बढ़कर करीब 210 तक पहुंच गई। 5. डीएफओ आशुतोष राज ने पर्यटकों के लिए क्या प्रस्ताव भेजा है? डीएफओ आशुतोष राज ने लोगों को सुरक्षित और सुलभ तरीके से जलीय जीव दिखाने के लिए डॉल्फिन वाचिंग सेंटर का प्रस्ताव भेजा है। 6. यदि किसी को घायल डॉल्फिन दिखाई दे तो उसे क्या करना चाहिए? घायल डॉल्फिन या जलीय जीव दिखने पर तुरंत वन विभाग को सूचना देनी चाहिए ताकि उसका त्वरित उपचार कराया जा सके। https://trendkia.com/bihar/bhagalpur-men-gnga-nadi-ke-ghaton-para-barhi-dolphin-ki-halachala-navon-men-buzzer-lagane-ki-taiyari-45390 TrendKia — Har trend, sabse pehle.