भागलपुर में विकसित होगा राज्य का पहला आम गांव, 500 से अधिक जर्दालू के पेड़ लगाने की तैयारी बिहार कृषि विश्वविद्यालय भागलपुर में खास जर्दालू किस्म का मैंगो विलेज तैयार कर रहा है, जहां 500 से अधिक पौधे लगाकर किसानों की आमदनी और निर्यात बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। रेशम, मंजूषा कला और विशिष्ट जर्दालू आम की विरासत समेटे भागलपुर की कृषि पहचान को अब एक नया मुकाम मिलने जा रहा है। जिले में जर्दालू आम की खेती और उत्पादन क्षमता को बड़े पैमाने पर विस्तार देने के लिए एक पूरे गांव को समर्पित मैंगो विलेज के रूप में तैयार करने की परियोजना पर काम शुरू हो चुका है। भागलपुर के लगभग हर हिस्से में इस महकदार फल की मौजूदगी पारंपरिक रूप से देखने को मिलती है, किंतु अब बिहार कृषि विश्वविद्यालय ने एक सुव्यवस्थित पहल के तहत इसे एक केंद्रीय उत्पादन केंद्र में बदलने का खाका तैयार किया है। इस विशेष योजना का मूल उद्देश्य आगंतुकों और व्यापारियों को एक ही स्थान पर सघन बागवानी दिखाना तथा फल के कुल उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हासिल करना है। सबौर के सिंदूर ग्राम के सफल प्रयोग के बाद नई पहल बिहार कृषि विश्वविद्यालय इससे पूर्व भी इस प्रारूप पर सफल कार्य कर चुका है। विश्वविद्यालय की ओर से सबौर क्षेत्र में पहले ही एक सिंदूर ग्राम विकसित किया गया था, जहां एक ही गांव की परिधि में 1,000 से अधिक सिंदूर के पौधे रोपे गए थे और उनकी वैज्ञानिक देखभाल की जा रही है। उसी तर्ज पर अब भागलपुर में जर्दालू आम का एक सघन क्लस्टर तैयार किया जा रहा है। बीएयू के जनसंपर्क अधिकारी डॉ राजेश कुमार के अनुसार विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ डी आर सिंह की मंशा ग्रामीण आबादी की आय बढ़ाने और गांवों के सतत विकास को गति देने की है। इसी सोच के तहत स्थानीय कृषि उत्पादों के रकबे और उत्पादन तंत्र का विस्तार किया जा रहा है। सप्लाई और निर्यात की चुनौतियों का समाधान बाजार में जर्दालू आम की मांग लगातार बढ़ रही है, किंतु मौजूदा उत्पादन क्षमता इस भारी मांग को पूरा करने के लिए अपर्याप्त साबित हो रही है। जब एक ही गांव पूरी तरह जर्दालू के बागानों से आच्छादित होगा, तो वहां से फल की तुड़ाई, छंटाई और दूसरे राज्यों या अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निर्यात की प्रक्रिया अत्यंत सुगम हो जाएगी। प्रस्तावित गांव में 500 से अधिक उन्नत जर्दालू पौधे लगाए जाने हैं, ताकि संबंधित गांव आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सके और फल उत्पादकों को सीधा वाणिज्यिक लाभ प्राप्त हो। मैंगो मैन अशोक चौधरी के मार्गदर्शन में तैयार होंगे बाग इस पूरे सघन पौधारोपण और संरक्षण अभियान का नेतृत्व आम विशेषज्ञ के रूप में विख्यात मैंगो मैन अशोक चौधरी करेंगे। उनकी बागवानी विशेषज्ञता और अनुभव को ध्यान में रखते हुए इस परियोजना की तकनीकी देखरेख का दायित्व उन्हें सौंपा गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि जर्दालू गांव का निर्माण पूर्ण होने पर स्थानीय ग्रामीणों और कामगारों को आजीविका की तलाश में भटकना नहीं पड़ेगा, बल्कि यह पूरा क्षेत्र रोजगार, फल व्यापार और ग्रामीण पर्यटन का एक सशक्त केंद्र बनकर उभरेगा। इसका आप पर असर भागलपुर में जर्दालू मैंगो विलेज की स्थापना से स्थानीय किसानों और फल व्यापारियों को सीधा आर्थिक संबल मिलेगा। • भारत में: देश भर के बाजारों में प्रसिद्ध सुगंधित जर्दालू आम की उपलब्धता और आपूर्ति श्रृंखला सुगम होगी। थोक खरीदारों और फल निर्यातकों को एक ही क्लस्टर से गुणवत्तापूर्ण आम का बड़ा लॉट प्राप्त करने में आसानी होगी। • भागलपुर में: स्थानीय ग्रामीणों और कृषि मजदूरों को अपने ही क्षेत्र में रोपण, तुड़ाई और पैकेजिंग से जुड़े नए रोजगार के अवसर मिलेंगे। 500 से अधिक पौधे लगने से संबंधित गांव आत्मनिर्भर कृषि हब में तब्दील हो सकेगा। • किसानों के लिए: संगठित क्लस्टर होने से फल उत्पादकों को बिचौलियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा और उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा। वैज्ञानिक मार्गदर्शन से फसलों के नुकसान में कमी आएगी और पैदावार बढ़ेगी। • कृषि पर्यटन के लिए: एक ही स्थान पर विशाल जर्दालू बागान विकसित होने से कृषि विशेषज्ञ और पर्यटक आकर्षित होंगे। इससे स्थानीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था को फल व्यापार के अलावा अन्य माध्यमों से भी मजबूती मिलेगी। ऐसा क्यों हुआ जर्दालू आम की बढ़ती बाजार मांग और सीमित आपूर्ति के बीच किसानों की आय बढ़ाने के लिए यह क्लस्टर आधारित परियोजना शुरू की गई है। • बढ़ती मांग और उत्पादन की कमी: बाजार में सुगंधित जर्दालू आम की मांग में निरंतर वृद्धि हुई है, जबकि मौजूदा बिखरा हुआ उत्पादन आपूर्ति की जरूरतों को पूरा नहीं कर पा रहा था। सघन बागवानी के जरिए इस अंतर को पाटने के लिए क्लस्टर मॉडल अपनाया गया है। • निर्यात सुगमता का लक्ष्य: अलग-अलग बिखरे पेड़ों से बड़े निर्यात ऑर्डर पूरे करना कठिन होता है। एक ही गांव में 500 से अधिक पौधे लगाने से ग्रेडिंग, पैकेजिंग और बाहरी बाजारों में फल भेजना बेहद आसान हो जाएगा। • सबौर सिंदूर ग्राम की सफलता: विश्वविद्यालय ने सबौर में 1,000 से अधिक सिंदूर के पौधे लगाकर एक समर्पित गांव सफलतापूर्वक विकसित किया था। उसी सफल प्रयोग से प्रेरणा लेकर अब जर्दालू आम के लिए विशेष गांव बनाने का फैसला लिया गया है। सवाल-जवाब 1. भागलपुर में मैंगो विलेज की स्थापना कौन कर रहा है? इस परियोजना को बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) द्वारा विकसित किया जा रहा है। 2. प्रस्तावित मैंगो विलेज में कितने पौधे लगाए जाएंगे? योजना के अंतर्गत उस गांव में 500 से अधिक जर्दालू आम के पौधे लगाए जाएंगे। 3. मैंगो विलेज के पौधों की देखरेख का जिम्मा किसे दिया गया है? इसकी तकनीकी देखरेख आम विशेषज्ञ और मैंगो मैन अशोक चौधरी के मार्गदर्शन में होगी। 4. बिहार कृषि विश्वविद्यालय ने इससे पहले कौन सा विशेष गांव विकसित किया था? विश्वविद्यालय ने इससे पूर्व सबौर में सिंदूर ग्राम विकसित किया था, जहां 1,000 से अधिक सिंदूर के पौधे लगाए गए थे। 5. मैंगो विलेज बनाने का मुख्य उद्देश्य क्या है? इसका उद्देश्य जर्दालू आम का उत्पादन बढ़ाना, निर्यात सुगम बनाना और गांव को आत्मनिर्भर बनाकर स्थानीय रोजगार देना है। https://trendkia.com/bihar/bhagalpur-men-vikasita-hoga-rajya-ka-pahala-ama-ganva-500-se-adhika-jardalu-ke-pera-lagane-ki-taiyari-55354 TrendKia — Har trend, sabse pehle.