# भूटान में नरेंद्र मोदी के सम्मान में 76वां स्तूप समर्पित, दोनों देशों के रिश्तों में जुड़ा नया अध्याय

> भूटान के गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी में निर्मित 108 पवित्र स्तूपों में से 76वां स्तूप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम किया गया है। 1 नवंबर को आयोजित विशेष पट्टिका अनावरण समारोह में भूटान नरेश और केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू शामिल हुए।

**Type:** article · **Category:** बिहार · **Published:** 2026-11-03 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/bihar/bhutan-men-narendra-modi-ke-sammana-men-76van-stupa-samarpita-donon-deshon-ke-rishton-men-jura-naya-adhyaya-55953 · **Language:** Hindi
**Tags:** नरेंद्र मोदी, भूटान, गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी, किरेन रिजिजू, जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक, भारत भूटान संबंध, सांस्कृतिक कूटनीति

पड़ोसी देश भूटान ने एक अत्यंत विशिष्ट कदम उठाते हुए भारत के साथ अपनी अटूट मित्रता को एक नया आध्यात्मिक आयाम प्रदान किया है। गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी में तैयार किए गए कुल 108 पवित्र स्तूपों की श्रृंखला में से 76वें स्तूप को आधिकारिक तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सम्मान में समर्पित किया गया है। यह पहल दोनों राष्ट्रों के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक संपर्कों और द्विपक्षीय साझेदारी के प्रभाव को दर्शाती है।

## समारोह में पट्टिका का विधिवत अनावरण
इस ऐतिहासिक उपलक्ष्य पर 1 नवंबर को एक गरिमापूर्ण आयोजन संपन्न हुआ, जिसमें इस विशेष समर्पण को चिह्नित करने वाली पट्टिका जनता के सामने रखी गई। इस अहम क्षण पर भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहे। भारतीय पक्ष का प्रतिनिधित्व करते हुए देश के संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू इस अनावरण समारोह का हिस्सा बने। दोनों नेताओं की मौजूदगी ने इस आयोजन के द्विपक्षीय महत्व को और अधिक उजागर किया।

भूटानी राजशाही का यह भाव दोनों मुल्कों के बीच सिर्फ सरकारी या कूटनीतिक औपचारिकताओं तक सीमित संबंधों से आगे बढ़कर एक पारिवारिक आत्मीयता को दर्शाता है। गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी जैसी महत्वाकांक्षी परियोजना को धरातल पर लाने के लिए भारत की ओर से लगातार मिले रचनात्मक और व्यावहारिक सहयोग के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने के उद्देश्य से यह सम्मान दिया गया है।

## प्रधानमंत्री की ओर से कृतज्ञता का संदेश
इस अद्वितीय सम्मान की घोषणा के पश्चात भारतीय प्रधानमंत्री ने भूटान के नरेश तथा वहां के नागरिकों के प्रति हार्दिक धन्यवाद प्रकट किया। उन्होंने अपने संदेश में स्पष्ट किया कि यह स्तूप महज पत्थर या गारे से गढ़ी गई कोई इमारत नहीं है। उनके शब्दों में, यह दोनों पड़ोसी समाजों की साझा दार्शनिक विरासत और लंबे समय से चली आ रही स्थायी मैत्री का जीवंत प्रतीक बनकर उभरेगा।

## साझा मूल्यों और भविष्य की साझेदारी का प्रतीक
गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी की संकल्पना एक ऐसे भावी नगरीय केंद्र के रूप में की जा रही है, जो पर्यावरणीय संतुलन, सस्टेनेबिलिटी और मानसिक शांति के सिद्धांतों पर आधारित हो। इस प्रकार के दूरदर्शी शहरी विकास अभियान के केंद्र में भारतीय नेतृत्व के प्रति ऐसा आदर व्यक्त किया जाना क्षेत्रीय कूटनीति में आध्यात्मिक सौहार्द की मिसाल पेश करता है। दोनों देशों के बीच सहयोग का यह दृष्टिकोण आने वाले दशकों में सीमा पार शांति, विकास और जन-जन के आपसी जुड़ाव को नई मजबूती देगा।

## इसका आप पर असर
यह पहल भारत और भूटान के द्विपक्षीय संबंधों में जन-जन के आपसी विश्वास और सीमाई स्थिरता को और मजबूत करती है।

- **भारत में:** दोनों पड़ोसी देशों के मजबूत सामरिक और सांस्कृतिक संबंध पूर्वोत्तर भारत की सीमाओं पर दीर्घकालिक शांति सुनिश्चित करते हैं। इस तरह के नजदीकी सहयोग से सीमावर्ती व्यापार, आधारभूत ढांचे और साझा परियोजनाओं के विस्तार में तेजी आती है।
- **कूटनीतिक स्तर पर:** पर्यावरण और शांति पर केंद्रित भूटानी परियोजनाओं में भारतीय भागीदारी से अंतरराष्ट्रीय पटल पर देश की सद्भावना बढ़ती है। यह साझेदारी दक्षिण एशिया में रचनात्मक विकास और आपसी विश्वास का एक सशक्त मॉडल प्रस्तुत करती है।
- **आध्यात्मिक पर्यटन:** 108 पवित्र स्तूपों का यह परिसर भविष्य में दोनों देशों के तीर्थयात्रियों और यात्रियों के लिए एक बड़ा केंद्र बन सकता है। इससे सीमा पार आवागमन, सांस्कृतिक संवाद और स्थानीय आजीविका को सकारात्मक गति मिलेगी।
- **नागरिक संपर्क:** दोनों देशों के बीच मैत्रीपूर्ण माहौल भारतीय छात्रों, श्रमिकों और पेशेवरों के लिए पड़ोसी मुल्क में भरोसेमंद कार्य वातावरण प्रदान करता है। इससे द्विपक्षीय समझौतों और विकास कार्यों को धरातल पर सुगमता से लागू करने में मदद मिलती है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह सम्मान भूटान द्वारा अपने सबसे भरोसेमंद पड़ोसी भारत के प्रति कृतज्ञता जताने और दोनों देशों के साझा मूल्यों को रेखांकित करने के लिए दिया गया है।

- **गेलेफू परियोजना में भारतीय सहयोग:** भूटान की महत्वाकांक्षी गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी को आकार देने में भारत ने व्यापक समर्थन प्रदान किया है। इसी सहयोग और निरंतर मार्गदर्शन के सम्मान स्वरूप 76वां स्तूप समर्पित किया गया।
- **साझा आध्यात्मिक परंपरा:** दोनों राष्ट्र सदियों से बौद्ध दर्शन, शांति और सह-अस्तित्व के मूल्यों से गहराई से जुड़े रहे हैं। 108 स्तूपों की शृंखला में भारतीय नेतृत्व को स्थान देना इसी साझी विरासत का प्रमाण है।
- **उच्च स्तरीय कूटनीतिक निकटता:** दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच लगातार घनिष्ठ संवाद और सद्भाव बना रहा है। 1 नवंबर को आयोजित पट्टिका अनावरण कार्यक्रम में दोनों पक्षों की उच्चस्तरीय उपस्थिति ने इसी दीर्घकालिक रिश्ते को औपचारिक रूप दिया।

## सवाल-जवाब

### 1. गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी में कौन सा स्तूप नरेंद्र मोदी को समर्पित किया गया है?
कुल 108 पवित्र स्तूपों में से ठीक 76वें नंबर का स्तूप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सम्मान में समर्पित किया गया है।

### 2. इस समर्पण की पट्टिका का अनावरण कब और किसके द्वारा किया गया?
पट्टिका का अनावरण 1 नवंबर को भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक और भारत के मंत्री किरेन रिजिजू की मौजूदगी में हुआ।

### 3. भूटान ने यह विशेष सम्मान भारत को क्यों प्रदान किया है?
गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी के विकास में भारत के खुले सहयोग के प्रति आभार जताने और द्विपक्षीय आत्मीयता को दर्शाने के लिए यह सम्मान दिया गया।

### 4. इस सम्मान पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने क्या प्रतिक्रिया दी?
प्रधानमंत्री मोदी ने भूटान नरेश और जनता का आभार जताते हुए कहा कि यह स्तूप दोनों देशों की साझा आध्यात्मिक विरासत और अमर दोस्ती का स्थायी प्रतीक है।

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