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  "type": "article",
  "title": "बिहार दारोगा मुख्य परीक्षा में पर्चा लीक कराने वाला कंप्यूटर शिक्षक धराया, सॉल्वर गिरोह से ली थी 1 लाख रुपये की पेशगी",
  "summary": "बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग की दारोगा भर्ती मुख्य परीक्षा में प्रश्नपत्र की फोटो खींचकर सॉल्वर गैंग तक पहुंचाने वाले अनुबंध कंप्यूटर शिक्षक वीरेंद्र कुमार को आर्थिक अपराध इकाई की विशेष जांच टीम ने दबोच लिया है।",
  "content": "बिहार में दारोगा भर्ती मुख्य परीक्षा में सेंधमारी करने वाले एक बड़े नेटवर्क के खिलाफ आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की विशेष जांच टीम (SIT) को बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। परीक्षा केंद्र के भीतर से प्रश्नपत्र की तस्वीर खींचकर सॉल्वर गिरोह तक पहुंचाने के गंभीर आरोप में एक अनुबंध कंप्यूटर शिक्षक वीरेंद्र कुमार को गिरफ्तार किया गया है। जांच पड़ताल में सामने आया है कि प्रश्नपत्र बाहर भेजने के इस पूरे खेल के लिए आरोपी को पहली किस्त के तौर पर एक लाख रुपये का अग्रिम भुगतान किया गया था।\n\nगया कॉलेज के केंद्र से जुड़ा है पूरा मामला\nयह मामला गया जिले के रामपुर थाना क्षेत्र में दर्ज कांड की तहकीकात के दौरान उजागर हुआ है। बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग द्वारा पुलिस अवर निरीक्षक (दारोगा) पद के लिए 27 मई 2026 को दो पालियों में मुख्य लिखित परीक्षा का आयोजन किया गया था। इस परीक्षा के दौरान कुछ तत्वों द्वारा ब्लूटूथ और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का इस्तेमाल करके अभ्यर्थियों को अवैध तरीके से नकल कराने का प्रयास किया गया था। पुलिस ने इस नेटवर्क से जुड़े एक आरोपी को पूर्व में ही अपनी गिरफ्त में ले लिया था।\n\nसोशल मीडिया पर वायरल प्रश्नपत्र की पड़ताल\nमामले की गंभीरता को देखते हुए आगे का अनुसंधान आर्थिक अपराध इकाई की विशेष जांच टीम को सौंपा गया था। छानबीन के दौरान जांच अधिकारियों को सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हुए कुछ प्रश्नपत्रों की जानकारी मिली। इसके बाद तकनीकी टीमों ने वायरल पर्चे को ट्रैक करते हुए अपनी जांच की सुई गया कॉलेज स्थित परीक्षा केंद्र की ओर मोड़ी। विशेष जांच टीम ने गया कॉलेज केंद्र के भीतर लगे सभी सीसीटीवी कैमरों के फुटेज का बारीकी से विश्लेषण किया और तकनीकी साक्ष्यों का मिलान बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग से हासिल आधिकारिक रिकॉर्ड से किया। इस विस्तृत पड़ताल में पता चला कि सोशल मीडिया पर वायरल हुआ प्रश्नपत्र वास्तव में गया कॉलेज के कमरा नंबर 49 के लिए आवंटित था। उस कमरे में जिस अभ्यर्थी के लिए वह पर्चा तय था, वह उस दिन परीक्षा में शामिल होने केंद्र पर नहीं पहुंचा था।\n\nदस मिनट के भीतर खींची गई थी पर्चे की तस्वीर\nजांच के दौरान पूरी साजिश की परतें खुलकर सामने आईं। 27 मई 2026 को दूसरी पाली की मुख्य परीक्षा दोपहर 2:30 बजे शुरू हुई थी। परीक्षा आरंभ होने के ठीक 10 मिनट के भीतर आरोपी वीरेंद्र कुमार ने अलग-अलग परीक्षा कक्षों से एकत्र किए गए प्रश्नपत्रों की तस्वीर ले ली। इस काम में परीक्षा केंद्र पर तैनात एक बायोमेट्रिक कर्मचारी की मदद ली गई थी। पूर्व निर्धारित साजिश के तहत बायोमेट्रिक कर्मी के सहयोग से प्रश्नपत्र की तस्वीरें खींची गईं और तुरंत सॉल्वर गिरोह को भेज दी गईं। इस गोपनीय दस्तावेज को लीक कराने के एवज में वीरेंद्र कुमार को एक लाख रुपये का भुगतान किया गया था।\n\nऑनलाइन परीक्षा कंपनी से भी जुड़ा रहा है आरोपी\nगिरफ्तार वीरेंद्र कुमार साल 2025 से गया कॉलेज में अनुबंध पर बतौर कंप्यूटर शिक्षक सेवा दे रहा था। दारोगा मुख्य परीक्षा के दिन उसकी प्रतिनियुक्ति कार्यालय कर्मी के रूप में की गई थी, जिसका फायदा उठाकर उसने इस वारदात को अंजाम दिया। जांच में यह तथ्य भी उजागर हुआ है कि वह साल 2021 से ऑनलाइन परीक्षा संचालित करने वाली निजी कंपनी बाइट्स सॉफ्टेक प्राइवेट लिमिटेड (BYTES Softech Pvt. Ltd.) से भी जुड़ा हुआ था। पुलिस हिरासत में पूछताछ और जब्त डिजिटल उपकरणों की पड़ताल के आधार पर अधिकारियों को पिछली कुछ परीक्षाओं में भी उसकी संदिग्ध गतिविधियों के सुराग मिले हैं। फिलहाल जांच एजेंसी पूरे नेटवर्क, डिजिटल साक्ष्यों और इस गिरोह के बाकी तारों को खंगालने में जुटी हुई है।\n\nइसका आप पर असर\nइस कार्रवाई से भर्ती परीक्षाओं की शुचिता और सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा असर पड़ेगा।\n\n• भारत में: प्रतियोगी परीक्षाओं में तकनीक और आंतरिक कर्मचारियों की मदद से होने वाली नकल पर कानूनी शिकंजा कसा जा रहा है। जांच एजेंसियों की इस सख्ती से सॉल्वर गिरोहों और उनके मददगारों के खिलाफ देश भर में निगरानी कड़ी होगी।\n• बिहार में: दारोगा भर्ती परीक्षा में शामिल हुए हजारों वास्तविक अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा के लिए जांच में तेजी लाई गई है। केंद्रों पर तैनात अनुबंध कर्मियों और बायोमेट्रिक ऑपरेटरों के सत्यापन के नियम अब और सख्त किए जाएंगे।\n• परीक्षा केंद्रों के लिए: कॉलेज और स्कूलों में परीक्षा ड्यूटी पर तैनात गैर-शिक्षण और कंप्यूटर स्टाफ की गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी। बिना अनुमति परीक्षा सामग्री के पास जाने वाले कर्मचारियों पर तत्काल बर्खास्तगी और कानूनी कार्रवाई का जोखिम बढ़ गया है।\n• अभ्यर्थियों के लिए: अनुचित साधनों या सॉल्वर गैंग के संपर्क में आने वाले उम्मीदवारों की उम्मीदवारी स्थायी रूप से रद्द की जा सकती है। युवाओं को केवल अपनी मेहनत पर भरोसा करने और ऐसे किसी भी संदिग्ध दलाल की सूचना तुरंत पुलिस को देने की सलाह दी जाती है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह घटना परीक्षा केंद्र के कर्मचारियों की मिलीभगत और सुरक्षा में गंभीर चूक के कारण घटी।\n\n• आंतरिक कर्मियों की मिलीभगत: परीक्षा केंद्र पर कंप्यूटर और बायोमेट्रिक ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों ने नियमों का उल्लंघन कर प्रश्नपत्र तक सीधी पहुंच बनाई। परीक्षा कक्ष में अनुपस्थित अभ्यर्थी के खाली पर्चे की फोटो खींचकर उसे तुरंत केंद्र के बाहर भेज दिया गया।\n• आर्थिक प्रलोभन: आरोपी कंप्यूटर शिक्षक को सॉल्वर गिरोह से एक लाख रुपये की पहली किस्त तुरंत मिल गई थी। भारी भरकम अवैध कमाई के लालच में योजनाबद्ध तरीके से इस साजिश को अंजाम दिया गया।\n• निजी एजेंसी से पुराना जुड़ाव: आरोपी शिक्षक साल 2021 से निजी ऑनलाइन परीक्षा कंपनी से जुड़ा हुआ था, जिससे उसे परीक्षा संचालन की खामियों की जानकारी थी। इस तकनीकी अनुभव का इस्तेमाल उसने पेपर लीक नेटवर्क से जुड़ने में किया।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. बिहार दारोगा मुख्य परीक्षा पेपर लीक मामले में किसकी गिरफ्तारी हुई है?\nइस मामले में गया कॉलेज के अनुबंध कंप्यूटर शिक्षक वीरेंद्र कुमार को आर्थिक अपराध इकाई की विशेष जांच टीम ने गिरफ्तार किया है।\n\n2. आरोपी ने प्रश्नपत्र कैसे और कब बाहर भेजा?\n27 मई 2026 की दूसरी पाली की परीक्षा शुरू होने के लगभग 10 मिनट बाद बायोमेट्रिक कर्मी की मदद से प्रश्नपत्र की तस्वीर खींचकर सॉल्वर गैंग को भेजी गई थी।\n\n3. पर्चा लीक करने के बदले शिक्षक को कितने रुपये मिले थे?\nजांच के अनुसार प्रश्नपत्र लीक कराने के सौदे में आरोपी को पहली किस्त के तौर पर एक लाख रुपये का भुगतान किया गया था।\n\n4. जांच टीम को पर्चा लीक होने का सुराग किस केंद्र से मिला?\nसोशल मीडिया पर वायरल प्रश्नपत्र की तकनीकी जांच करने पर पता चला कि वह पर्चा गया कॉलेज के कमरा नंबर 49 के अनुपस्थित अभ्यर्थी का था।\n\n5. आरोपी शिक्षक का पूर्व में किस कंपनी से संबंध रहा है?\nवीरेंद्र कुमार साल 2021 से ऑनलाइन परीक्षा कराने वाली निजी कंपनी बाइट्स सॉफ्टेक प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ा रहा है।",
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  "category": "बिहार",
  "publishedAt": "2026-09-24",
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