# बिहार के बांका से पकड़ा गया डिजिटल अरेस्ट गिरोह का सदस्य प्रिंस कुमार, नौ राज्यों में फैले थे साइबर ठगी के तार

> मुजफ्फरपुर पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट कर लाखों रुपये हड़पने वाले अंतरराज्यीय साइबर गिरोह के शातिर आरोपी प्रिंस कुमार को बांका से गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी के बैंक खाते पर 9 राज्यों से 14 साइबर शिकायतें दर्ज हैं और पुलिस ने पीड़िता की बड़ी रकम फ्रीज करा दी है।

**Type:** article · **Category:** बिहार · **Published:** 2026-10-19 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/bihar/bihar-ke-banka-se-pakara-gaya-dijitala-aresta-giroha-ka-sadasya-prince-kumar-nau-rajyon-men-phaile-the-saibara-thagi-ke-tara-49437 · **Language:** Hindi
**Tags:** डिजिटल अरेस्ट, मुजफ्फरपुर पुलिस, साइबर ठगी, प्रिंस कुमार, बांका, बिहार पुलिस, सीबीआई फ्रॉड

बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में कानून प्रवर्तन अधिकारियों ने डिजिटल अरेस्ट के जरिए मासूम नागरिकों को चूना लगाने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय साइबर गिरोह के खिलाफ महत्वपूर्ण कामयाबी हासिल की है। मुजफ्फरपुर के वरीय पुलिस अधीक्षक कांतेश कुमार मिश्रा के दिशा-निर्देश पर तैयार विशेष जांच दल ने केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई और पुलिस अधिकारी का स्वांग रचकर लोगों को धमकाने वाले एक सक्रिय शातिर को बांका जिले से हिरासत में लिया है। पुलिस द्वारा पकड़े गए इस अभियुक्त की पहचान प्रिंस कुमार के तौर पर हुई है, जो दूसरे राज्यों के जालसाजों के साथ मिलकर धोखाधड़ी के पैसों का लेनदेन अपने खातों के जरिए संभाल रहा था।

## सीबीआई और पुलिस अधिकारी बनकर की गई थी 3.47 लाख रुपये की ठगी
साइबर डीएसपी हिमांशु कुमार के मुताबिक इस पूरे षड्यंत्र का शिकार वादिनी रागिनी देवी बनी थीं। साइबर ठगों ने 14 और 15 जुलाई को भारतीय और अंतरराष्ट्रीय व्हाट्सएप नंबरों के माध्यम से उनसे संपर्क साधा था। फोन करने वाले जालसाजों ने खुद को वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और सीबीआई अफसर बताते हुए महिला को झूठे मामलों में फंसाने की धमकी दी। उन्होंने महिला पर गंभीर आरोप लगाए और डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर कुल 3,47,999 रुपये अलग-अलग खातों में जमा करवा लिए। जब पीड़िता को अपने साथ हुए धोखे का अहसास हुआ, तब मुजफ्फरपुर साइबर थाने में साइबर कांड संख्या 140/26 के तहत औपचारिक प्राथमिकी दर्ज की गई।

## उत्तर प्रदेश के देवरिया से बांका तक फैला मिला नेटवर्क
मामले की गंभीरता और वित्तीय धोखाधड़ी के फैलाव को भांपते हुए नगर पुलिस अधीक्षक और साइबर थाने के पुलिस उपाधीक्षक-सह-थानाध्यक्ष की अगुवाई में विशेष अनुसंधान टीम का गठन किया गया था। इस दल ने तकनीकी सर्विलांस, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और बैंक म्यूल अकाउंट्स के डिजिटल ट्रेल का बारीकी से विश्लेषण किया। इस तकनीकी पड़ताल से सबसे पहले सुराग मिला कि गिरोह की सक्रिय जड़ें उत्तर प्रदेश के देवरिया में मौजूद हैं। पुलिस ने देवरिया के बरियारपुर इलाके में दबिश देकर दीपू कुशवाहा को पहले ही गिरफ्तार कर लिया था। दीपू से मिले डिजिटल साक्ष्यों और बैंक लेन-देन की कड़ियों को जोड़ते हुए जांच टीम बिहार के बांका पहुंची, जहां से प्रिंस कुमार के खाते में ठगी की रकम ट्रांसफर होने के पुख्ता प्रमाण मिले और छापेमारी कर उसे धर दबोचा गया। इस प्रकरण में अब तक कुल दो अभियुक्तों की गिरफ्तारी दर्ज की जा चुकी है।

## नौ राज्यों में दर्ज हैं प्रिंस के खाते से जुड़े 14 मामले
पुलिस जांच में सामने आया कि प्रिंस कुमार का बैंक खाता देशभर में साइबर फ्रॉड के पैसे ठिकाने लगाने के लिए इस्तेमाल हो रहा था। देश के 9 अलग-अलग राज्यों से कुल 14 साइबर अपराध संबंधी शिकायतें पहले से ही प्रिंस के बैंक खाते के खिलाफ दर्ज पाई गई हैं, जिससे इस गिरोह के विशाल नेटवर्क का पर्दाफाश होता है। त्वरित वित्तीय कार्रवाई करते हुए पुलिस ने पीड़िता से ऐंठी गई 3,47,999 रुपये की राशि में से 2,64,748 रुपये बैंक स्तर पर फ्रीज करा दिए हैं। वर्तमान में इस फ्रीज की गई धनराशि को कानूनी प्रक्रिया के तहत अदालत की अनुमति से पीड़िता रागिनी देवी के बैंक खाते में वापस स्थानांतरित कराने की कार्रवाई तेजी से की जा रही है। मुजफ्फरपुर पुलिस की टीमें इस नेटवर्क में शामिल अन्य सहयोगियों को चिन्हित कर उनके संभावित ठिकानों पर लगातार छापेमारी कर रही हैं।

## इसका आप पर असर
अज्ञात नंबरों से सरकारी एजेंसी बनकर आने वाले फोन कॉल्स से सावधान रहकर और तुरंत शिकायत दर्ज कराकर नागरिक ठगी से बच सकते हैं और अपना पैसा वापस पा सकते हैं।

- **भारत में:** किसी भी सरकारी एजेंसी द्वारा कभी भी वीडियो कॉल या डिजिटल अरेस्ट के जरिए पैसे की मांग नहीं की जाती है। यदि कोई संदिग्ध कॉल आए तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल 1930 पर संपर्क करें ताकि जालसाजों के खातों में रकम तुरंत रोकी जा सके।
- **बिहार में:** मुजफ्फरपुर और बांका जैसे जिलों में सक्रिय साइबर गिरोहों के स्थानीय बैंक खातों पर नजर रखी जा रही है। किसी भी तरह की धमकी भरी कॉल आने पर स्थानीय साइबर थाने में अविलंब प्राथमिकी दर्ज कराएं ताकि धन वापसी की कानूनी प्रक्रिया शुरू हो सके।
- **खाताधारकों के लिए:** किसी भी अनजान व्यक्ति को कमीशन या झांसे में आकर अपना बैंक खाता इस्तेमाल करने न दें। किराए पर दिए गए बैंक खातों के कारण निर्दोष नागरिक भी सीधे अंतरराज्यीय आपराधिक मुकदमों और गिरफ्तारी की जद में आ सकते हैं।
- **ऑनलाइन सुरक्षा पर:** अंतरराष्ट्रीय या राष्ट्रीय नंबरों से आने वाली व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर अपनी निजी या वित्तीय जानकारी साझा न करें। वास्तविक जांच एजेंसियां हमेशा कानूनी नोटिस जारी करती हैं, कभी भी सोशल मीडिया ऐप पर पैसों के निपटारे की मांग नहीं करतीं।

## ऐसा क्यों हुआ
यह घटना संगठित साइबर अपराधियों द्वारा आम लोगों के मन में पुलिस और जांच एजेंसियों के डर का अनुचित लाभ उठाने के कारण घटित हुई। पीड़ितों को गंभीर मुकदमों में फंसाने का मनोवैज्ञानिक खौफ दिखाकर उनके जीवनभर की जमापूंजी हड़पी जा रही थी।

- **सीबीआई का फर्जी भय:** जालसाजों ने व्हाट्सएप कॉल्स के जरिए खुद को पुलिस और सीबीआई का आला अधिकारी बताकर पीड़िता पर झूठे आरोप लगाए। तत्काल गिरफ्तारी का डर दिखाकर पीड़िता को डिजिटल रूप से बंधक महसूस कराया गया जिससे वह घबराकर पैसे ट्रांसफर करने को मजबूर हो गई।
- **म्यूल बैंक खातों का नेटवर्क:** साइबर अपराधियों ने उत्तर प्रदेश के देवरिया और बिहार के बांका तक बैंक खातों की एक श्रृंखला तैयार की थी। इन खातों की मदद से ठगी की रकम को तेजी से कई स्तरों पर घुमाया जाता था ताकि मुख्य अपराधियों तक पहुंचना कठिन हो सके।
- **अंतरराज्यीय सिंडिकेट का फैलाव:** पूर्व में गिरफ्तार दीपू कुशवाहा और बांका से पकड़े गए प्रिंस कुमार जैसे संचालक विभिन्न राज्यों में सक्रिय थे। आरोपी प्रिंस के खाते से 9 राज्यों की 14 शिकायतें जुड़ी होने से यह प्रमाणित होता है कि गिरोह देशव्यापी स्तर पर लोगों को अपना शिकार बना रहा था।

## सवाल-जवाब

### 1. मुजफ्फरपुर पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट मामले में किसे गिरफ्तार किया है?
पुलिस ने बांका से प्रिंस कुमार को गिरफ्तार किया है, जो इस अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का सक्रिय सदस्य है।

### 2. पीड़िता से कितनी रकम की साइबर ठगी की गई थी?
वादिनी रागिनी देवी से खुद को सीबीआई और पुलिस अधिकारी बताकर कुल 3,47,999 रुपये ठगे गए थे।

### 3. पुलिस ने ठगी गई राशि में से कितने रुपये फ्रीज कराए हैं?
पुलिस ने आरोपी के खाते से ठगी गई रकम में से 2,64,748 रुपये बैंक स्तर पर सफलतापूर्वक फ्रीज करा दिए हैं।

### 4. प्रिंस कुमार के खिलाफ देश में कितने राज्यों से शिकायतें दर्ज हैं?
आरोपी प्रिंस कुमार के बैंक खाते पर देश के 9 अलग-अलग राज्यों से कुल 14 साइबर शिकायतें दर्ज पाई गई हैं।

### 5. इस मामले में पहले किस आरोपी की गिरफ्तारी हुई थी?
जांच टीम ने इससे पहले उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के बरियारपुर से दीपू कुशवाहा को गिरफ्तार किया था।

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