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  "type": "article",
  "title": "बिहार के ग्रामीण कार्य विभाग के इंजीनियर पर निगरानी का शिकंजा, सिलीगुड़ी में जमीन और करोड़ों की अघोषित संपत्ति का खुलासा",
  "summary": "निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने कार्यपालक अभियंता चंद्रशेखर सिंह के पटना, सारण और कटिहार स्थित ठिकानों पर छापेमारी की, जिसमें आय से 88 फीसदी अधिक संपत्ति और 5.70 लाख रुपये नकद बरामद हुए।",
  "content": "बिहार के सरकारी महकमे में भ्रष्टाचार के विरुद्ध चल रही मुहिम के तहत निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। ग्रामीण कार्य विभाग के कार्यपालक अभियंता चंद्रशेखर सिंह के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के गंभीर आरोप में छापेमारी की गई है। जांच दल ने अधिकारी के पटना, कटिहार और सारण स्थित आवास व कार्यालय समेत कुल तीन अलग-अलग परिसरों में एक साथ तलाशी अभियान चलाया। प्रारंभिक जांच में इंजीनियर, उनकी पत्नी श्वेता कुमारी और अन्य परिजनों के नाम पर भारी संपत्ति का ब्योरा मिला है, जिसका कुल मूल्य उनकी वैध आमदनी के ज्ञात स्रोतों से करीब 88 फीसदी ज्यादा आंका गया है।\n\nसवा करोड़ रुपये के करीब पहुंचा गैर-कानूनी संपत्ति का आंकड़ा\nनिगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने पूरे साक्ष्यों का परीक्षण करने के उपरांत चंद्रशेखर सिंह के विरुद्ध कुल 1,10,96,883 रुपये यानी लगभग 1.11 करोड़ रुपये की अनुपातहीन संपत्ति का आधिकारिक मामला दर्ज किया है। एजेंसी द्वारा खंगाले गए दस्तावेजों के मुताबिक, आरोपी अफसर, उनकी धर्मपत्नी और परिवार के सदस्यों के स्वामित्व वाली कुल 14 अचल संपत्तियों की जानकारी सामने आई है। इन सभी अचल संपत्तियों का मौजूदा सरकारी मूल्यांकन 1,79,41,883 रुपये किया गया है। इसके अतिरिक्त भौतिक रूप से मिली पांच चल संपत्तियों का मूल्य 16,55,000 रुपये आंका गया है। इस प्रकार घोषित आय और वास्तविक संपत्तियों के बीच का फासला काफी व्यापक नजर आ रहा है।\n\nछापेमारी के दौरान नकदी, जेवरात और बड़े निवेश के प्रमाण\nजांच अधिकारियों की टीम ने जब विभिन्न ठिकानों पर तलाशी शुरू की, तो मौके से 5 लाख 70 हजार रुपये की नकद राशि बरामद की गई। इसके अलावा घर से भारी मात्रा में सोने एवं चांदी के आभूषण भी मिले हैं, जिनका सटीक बाजार मूल्य निकालने के लिए मूल्यांकनकर्ताओं की मदद ली जा रही है। जांचकर्ताओं को विभिन्न बैंकों में जमा पूंजी, शेयर बाजार में निवेश और भारतीय जीवन बीमा निगम यानी एलआईसी की विभिन्न पॉलिसियों में किए गए बड़े भुगतानों से जुड़े दस्तावेज भी हाथ लगे हैं। जांच एजेंसी वर्तमान में इन सभी वित्तीय प्रपत्रों का बारीकी से अध्ययन कर रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि इन निवेशों के लिए धन किस माध्यम से जुटाया गया था।\n\nसिलीगुड़ी के प्राइम इलाके में खरीदी गई 92 डिसमिल जमीन\nनिगरानी ब्यूरो की पड़ताल में सबसे चौंकाने वाला खुलासा पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी शहर में हुआ है। एजेंसी को साल 2021 के दौरान सिलीगुड़ी के एक बेहद महंगे व्यावसायिक इलाके में जमीन की खरीद से संबंधित 10 अलग-अलग डीड मिले हैं। इन आधिकारिक कागजातों के आधार पर कुल 92 डिसमिल जमीन आरोपी इंजीनियर की पत्नी श्वेता कुमारी के नाम पर दर्ज कराई गई थी। जांच एजेंसी का कहना है कि चंद्रशेखर सिंह ने इस बेशकीमती जमीन की जानकारी अपने अनिवार्य वार्षिक संपत्ति विवरण में पूरी तरह छिपा ली थी। जब यह जमीन खरीदी जा रही थी, उस दौरान वह ग्रामीण कार्य विभाग के तहत फारबिसगंज में सहायक अभियंता के पद पर कार्यरत थे।\n\nराजधानी पटना में 3 बीएचके फ्लैट और कटिहार में पैतृक मकान\nतलाशी की प्रक्रिया के दौरान एजेंसी को अचल संपत्तियों की एक लंबी फेहरिस्त मिली है। राजधानी पटना के एक रिहायशी इलाके में तीन बेडरूम, हॉल और किचन यानी 3 बीएचके का एक आलीशान फ्लैट पाया गया है। इसके साथ ही कटिहार स्थित उनके पैतृक निवास स्थान पर भी दो बेडरूम, हॉल और किचन यानी 2 बीएचके फ्लैट से संबंधित संपत्तियां मिली हैं। जांच दल को कई अन्य परिसंपत्तियों की खरीद-बिक्री से जुड़े संदिग्ध दस्तावेज भी मिले हैं। ब्यूरो के अधिकारी अब बैंकिंग लेन-देन और बैंक खातों के ब्योरे के जरिए यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि इन महंगी संपत्तियों के भुगतान के लिए पैसे किस स्रोत से ट्रांसफर किए गए थे।\n\nएक दशक के सेवाकाल में कई जिलों में अहम जिम्मेदारियां\nचंद्रशेखर सिंह का सेवा इतिहास बताता है कि वह बीते वर्षों में कई महत्वपूर्ण पदों पर आसीन रहे हैं। साल 2014 से 2017 तक उन्होंने बांका में सहायक अभियंता के पद पर सेवाएं दीं। इसके बाद वर्ष 2017 से 2020 तक उनका पदस्थापन बायसी में रहा और फिर 2020 से 2024 तक वह फारबिसगंज में सहायक अभियंता के रूप में कार्यरत रहे। इसके उपरांत फरवरी 2024 से फरवरी 2025 की अवधि में उन्हें भागलपुर में गुणवत्ता नियंत्रण लैब की जिम्मेदारी दी गई। पदोन्नति मिलने के बाद फरवरी 2025 से जून 2026 तक वह किशनगंज-2 प्रमंडल में कार्यपालक अभियंता रहे। जून 2026 से वह छपरा के गुणवत्ता नियंत्रण प्रमंडल में कार्यपालक अभियंता के पद पर तैनात थे, जहां से अब उनके खिलाफ भ्रष्टाचार की यह व्यापक जांच शुरू हुई है।\n\nइसका आप पर असर\nयह मामला सरकारी परियोजनाओं में गुणवत्ता और जवाबदेही को लेकर नागरिकों के हितों से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है।\n\n• भारत में: सार्वजनिक धन की बंदरबांट पर कड़े कानूनी कदमों से सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार के विरुद्ध स्पष्ट संदेश जाता है। इससे भविष्य में विकास परियोजनाओं के बजट का दुरुपयोग रुकने और पारदर्शी वित्तीय प्रबंधन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद बनती है।\n• बिहार में: ग्रामीण कार्य विभाग की सड़कों और ढांचागत परियोजनाओं के निर्माण की गुणवत्ता में प्रत्यक्ष सुधार देखने को मिल सकता है। गुणवत्ता नियंत्रण डिवीजन के अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई से ठेकेदारों और अधिकारियों की मिलीभगत पर अंकुश लगेगा, जिससे स्थानीय जनता को मजबूत सड़कें मिल सकेंगी।\n• नागरिक सेवाओं पर प्रभाव: सरकारी अधिकारियों द्वारा संपत्तियों के अनिवार्य खुलासे की जांच प्रक्रिया और अधिक सख्त हो सकती है। आम लोग अब निगरानी विभाग के हेल्पलाइन नंबरों और भ्रष्टाचार रोधी मंचों के जरिए संदिग्ध अधिकारियों की शिकायत दर्ज करा सकते हैं।\n• करदाताओं के पैसे की सुरक्षा: अनुचित साधनों से जुटाई गई संपत्ति की जब्ती से सरकारी राजस्व को होने वाले नुकसान की भरपाई संभव होती है। अदालती प्रक्रिया पूरी होने के बाद अवैध रूप से अर्जित संपत्तियां राज्य के पक्ष में कुर्क की जा सकती हैं।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह कार्रवाई निगरानी अन्वेषण ब्यूरो को प्राप्त विशिष्ट वित्तीय सूचनाओं और चंद्रशेखर सिंह की घोषित आय के विश्लेषण के बाद शुरू की गई। विभाग के अनुसार अधिकारी ने अपने सेवाकाल में वैध वेतन से कहीं अधिक मूल्य की संपत्तियां खड़ी कर ली थीं।\n\n• आय और व्यय में भारी अंतर: जांच में पाया गया कि अभियंता और उनके परिवार के पास मौजूद संपत्तियों का मूल्य उनकी वैध आय से करीब 88 प्रतिशत अधिक है। कुल 1.11 करोड़ रुपये के आसपास की अतिरिक्त संपत्ति का कोई वैध स्रोत न मिलने पर भ्रष्टाचार निरोधक धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई।\n• संपत्ति विवरण छिपाना: पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में साल 2021 के दौरान पत्नी के नाम से खरीदी गई 92 डिसमिल बेशकीमती जमीन का ब्योरा वार्षिक संपत्ति घोषणा में दर्ज नहीं किया गया था। इस गोपनीय खरीद की सूचना मिलने पर जांच एजेंसी की शंका पुख्ता हो गई।\n• संवेदनशील पदों पर लंबे समय तक तैनाती: गुणवत्ता नियंत्रण और ग्रामीण निर्माण प्रमंडलों में लंबे समय तक रहने के कारण अनियमितताओं और अवैध कमीशन के जरिए भारी पूंजी जुटाने का अवसर बना। इसी पृष्ठभूमि को देखते हुए तीन अलग-अलग शहरों में एक साथ तलाशी का निर्णय लिया गया।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने किस अधिकारी के ठिकानों पर छापेमारी की?\nब्यूरो ने बिहार के ग्रामीण कार्य विभाग के छपरा गुणवत्ता नियंत्रण प्रमंडल में तैनात कार्यपालक अभियंता चंद्रशेखर सिंह के परिसरों पर छापेमारी की।\n\n2. चंद्रशेखर सिंह के खिलाफ कितनी आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया गया है?\nनिगरानी ब्यूरो ने उनके खिलाफ 1,10,96,883 रुपये यानी लगभग 1.11 करोड़ रुपये की आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का केस दर्ज किया है, जो उनकी वैध आय से 88 फीसदी ज्यादा है।\n\n3. छापेमारी में कितनी नकदी और कैसी संपत्तियां बरामद हुई हैं?\nजांच टीम को 5.70 लाख रुपये नकद, 14 अचल संपत्तियां, 5 चल संपत्तियां, सोने-चांदी के गहने और शेयर व एलआईसी में निवेश के दस्तावेज मिले हैं।\n\n4. सिलीगुड़ी में किस तरह की संपत्ति का पता चला है?\nजांच में सिलीगुड़ी के एक महंगे इलाके में साल 2021 में खरीदी गई 92 डिसमिल जमीन के 10 दस्तावेज मिले हैं, जो उनकी पत्नी श्वेता कुमारी के नाम पर दर्ज हैं।\n\n5. छापेमारी किन शहरों में की गई?\nनिगरानी दल ने अभियंता के पटना, कटिहार और सारण स्थित आवास व कार्यालय समेत तीन ठिकानों पर एक साथ तलाशी ली।",
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  "category": "बिहार",
  "publishedAt": "2026-10-15",
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