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  "type": "article",
  "title": "बिहार के रोहतास में सोन नदी उफान पर, सरैयां गांव जलमग्न होने से 100 लोगों को नाव से सुरक्षित निकाला गया",
  "summary": "बिहार के रोहतास जिले के तिलौथू में सोन नदी का जलस्तर बढ़ने और तुतला भवानी धाम से आए पानी के कारण सरैयां गांव में बाढ़ आ गई। ग्रामीणों ने नाव के जरिए महिलाओं और बच्चों समेत 100 लोगों का रेस्क्यू किया।",
  "content": "बिहार के रोहतास जिले के अंतर्गत आने वाले तिलौथू प्रखंड में लगातार हो रही वर्षा और सोन नदी के तेजी से बढ़ते जलस्तर के कारण बाढ़ का संकट अत्यंत गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। तिलौथू प्रखंड कार्यालय के बिल्कुल समीप स्थित सरैयां गांव में बाढ़ का पानी रिहायशी बस्तियों में प्रविष्ट हो गया है, जिससे आम जनजीवन बुरी तरह अस्त-व्यस्त हो चुका है। सरैयां गांव के लगभग 50 मकान बाढ़ के पानी की चपेट में आ चुके हैं, जिनमें से 30 से भी अधिक घर पूरी तरह जलमग्न बताए जा रहे हैं। मंगलवार और बुधवार की दरमियानी रात स्थिति इतनी विकट हो गई कि दर्जनों परिवारों को बिना किसी बाहरी मदद के पूरी रात अपने-अपने घरों के भीतर पानी से घिरे रहकर खौफ के साये में बितानी पड़ी।\n\n \n\nस्थानीय स्तर पर नाव की व्यवस्था और 100 लोगों का सुरक्षित रेस्क्यू\n\nबाढ़ के विकराल रूप को देखते हुए बुधवार की सुबह उप प्रमुख जोखन पासवान और स्थानीय ग्रामीणों ने स्वयं पहल करते हुए निजी नावों की व्यवस्था की। पानी के तेज बहाव के बीच ग्रामीणों ने मुस्तैदी दिखाते हुए सरैयां गांव में फंसे लगभग 100 लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने का काम किया। रेस्क्यू किए गए लोगों में मुख्य रूप से महिलाएं, छोटे बच्चे और बुजुर्ग शामिल थे। कई ग्रामीण अपने जीवन-यापन के आधार बने पालतू मवेशियों को भी पानी से बचाकर सुरक्षित टीलों और ऊंचे स्थानों की ओर ले जाते देखे गए। अचानक रिहायशी इलाकों में पानी घुसने के कारण ग्रामीणों के सामने खुद की जान बचाने के साथ-साथ अपने जरूरी सामान, राशन, कागजात और वस्त्रों को जलमग्न होने से बचाने की दोहरी चुनौती खड़ी हो गई। ग्रामीणों के अनुसार, तुतला भवानी धाम की दिशा से आ रहे तेज बहाव और सोन नदी के उफान के संयुक्त असर से सरैयां समेत आसपास के इलाकों में बाढ़ का प्रकोप बढ़ा है। सरैयां गांव इस प्राकृतिक आपदा से सर्वाधिक प्रभावित हुआ है, जहां घरों में कई फीट तक पानी भर जाने के कारण लोग अपनी गृहस्थी का अधिकांश सामान छोड़कर सुरक्षित स्थलों की ओर पलायन करने को मजबूर हुए हैं।\n\n \n\nनिकटवर्ती गांवों में तबाही और धान की फसलों का भारी नुकसान\n\nसोन नदी और पहाड़ी रास्तों से आ रहे पानी का असर केवल सरैयां गांव तक सीमित नहीं रहा है। इससे सटे फारूकगंज, शिवाला, मदारीपुर और तिलौथू पूर्वी समेत अनेक गांवों में भी बाढ़ का पानी तेजी से दाखिल हो चुका है। इन सभी ग्रामीण बस्तियों में चारों तरफ पानी भर जाने से लोगों की आवाजाही ठप पड़ गई है। इसके अतिरिक्त, खेतों में तैयार हो रही धान की लहलहाती फसलें पूरी तरह से जलमग्न हो चुकी हैं, जिससे स्थानीय किसानों को भारी आर्थिक क्षति का सामना करना पड़ रहा है। जो लोग अपने घरों को छोड़कर ऊंचे और सुरक्षित स्थानों पर पहुंचे हैं, वे भी लगातार हो रही बारिश और जलस्तर में और बढ़ोतरी की आशंका से लगातार भयभीत हैं। ग्रामीणों की चिंता इस बात से भी बढ़ गई है कि बाढ़ के गंदे पानी के साथ जहरीले सांप, बिच्छू और अन्य खतरनाक जीव-जंतु घरों में प्रविष्ट हो रहे हैं, जिससे बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है।\n\n \n\nचार महीने से ध्वस्त पुल ने बढ़ाई 1000 लोगों की आवागमन समस्या\n\nबाढ़ आपदा के बीच सरैयां और तिलौथू के बीच आवागमन की स्थिति भी बेहद चिंताजनक हो गई है। नए पुल के निर्माण कार्य के सिलसिले में लगभग चार महीने पहले पुराने पुल को तोड़ा गया था, जिसके चलते दोनों गांवों का सीधा संपर्क पहले से ही टूटा हुआ था। ग्रामीणों के अनुसार, सरैयां और आसपास की लगभग एक हजार की आबादी को तिलौथू बाजार और मुख्य मार्ग तक पहुंचने के लिए कई किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ रहा था। अब बाढ़ का पानी मुख्य मार्ग के दोनों तरफ भर जाने के कारण आवागमन पूरी तरह से ठप होने के कगार पर पहुंच गया है। ऐसी विषम परिस्थिति में आपातकालीन चिकित्सा की जरूरत वाले मरीजों, वृद्धों और गर्भवती महिलाओं को बाहर निकालना अत्यंत चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। ग्रामीणों ने यह भी उल्लेख किया कि वर्ष 2015 की बाढ़ के दौरान भी सरैयां के रिहायशी क्षेत्र के साथ-साथ कोडर और मदारीपुर गांव जलमग्न हुए थे। 9 साल बाद दोबारा वही त्रासदी झेल रहे ग्रामीणों ने प्रशासन से अविलंब राहत सामग्री, स्वच्छ पेयजल, दवाएं और सरकारी नावों का प्रबंध करने की मांग की है।\n\n \n\nप्रशासनिक उदासीनता पर ग्रामीणों का गुस्सा और बीडीओ की प्रतिक्रिया\n\nबाढ़ के इस भीषण संकट के बीच स्थानीय ग्रामीणों ने जिला और प्रखंड प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कड़ा आक्रोश प्रकट किया है। ग्रामीणों का आरोप है कि बाढ़ की स्थिति लगातार बिगड़ने के बावजूद बुधवार शाम तक कोई भी प्रशासनिक अधिकारी जमीनी हालात का जायजा लेने या पीड़ितों की सुध लेने गांव नहीं पहुंचा। राहत और बचाव कार्य में प्रशासनिक सहायता प्राप्त करने के लिए ग्रामीणों ने अंचलाधिकारी (सीओ) और अनुमंडल अधिकारी (एसडीएम) सहित कई वरीय अधिकारियों से फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन किसी भी अधिकारी से बातचीत संभव नहीं हो सकी। निवासियों का कहना है कि प्रशासन की ओर से केवल लाउडस्पीकर के माध्यम से चेतावनी जारी कर लोगों को सतर्क रहने की औपचारिकता पूरी की गई, जबकि जमीन पर प्रभावित परिवारों को तत्काल नाव, पके हुए भोजन, तिरपाल, पेयजल और सुरक्षित आश्रय स्थल की सख्त जरूरत है। इस संबंध में पूछे जाने पर प्रखंड विकास अधिकारी (बीडीओ) अंकित जैन ने बताया कि वे फिलहाल एक महत्वपूर्ण बैठक में शामिल हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि प्रशासनिक स्तर से बाढ़ से निपटने और पीड़ितों को सहायता प्रदान करने के लिए जो भी आवश्यक कदम संभव होंगे, वे उठाए जाएंगे। फिलहाल सरैयां गांव के लोग सरकारी मदद की प्रतीक्षा कर रहे हैं।\n\nइसका आप पर असर\nरोहतास जिले में सोन नदी के बढ़ते जलस्तर और जलभराव से स्थानीय ग्रामीणों की सुरक्षा, कृषि उत्पादन और दैनिक आवागमन पर सीधा असर पड़ा है।\n\n• रोहतास और तिलौथू में: सरैयां, फारूकगंज और आसपास के गांवों में 50 से अधिक घर और धान की फसलें डूब गई हैं। प्रभावित ग्रामीण तुरंत सुरक्षित स्थानों पर शरण लें और बाढ़ के पानी में जहरीले जीवों की आशंका के कारण सतर्क रहें।\n\n• स्थानीय यात्रियों और कारोबारियों के लिए: चार महीने पहले टूटे पुल और जलमग्न सड़कों के कारण तिलौथू बाजार की तरफ जाना मुश्किल हो गया है। आपातकालीन स्थिति के अलावा इस क्षेत्र की मुख्य सड़कों पर यात्रा करने से बचें।\n\n• भारत भर के ग्रामीण क्षेत्रों में: मानसून के मौसम में नदियों के जलस्तर पर लगातार निगरानी रखना आवश्यक है। नदी तटीय क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों को पहले से ही आपातकालीन राहत सामग्री तैयार रखनी चाहिए।\n\n• प्रशासनिक तैयारियों पर असर: केवल लाउडस्पीकर चेतावनियों के बजाय धरातल पर नावों और राहत सामग्री का पहले से भंडारण आवश्यक है। स्थानीय निकायों को आपातकालीन दूरभाष लाइनों को क्रियाशील रखना चाहिए।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. रोहतास के सरैयां गांव में बाढ़ आने का मुख्य कारण क्या है?\nलगातार बारिश के कारण सोन नदी का जलस्तर बढ़ने और तुतला भवानी धाम की ओर से आए पानी के तेज बहाव के चलते सरैयां गांव में बाढ़ आ गई।\n\n2. बाढ़ से सरैयां में कितने मकान प्रभावित हुए हैं?\nसरैयां गांव के लगभग 50 मकान बाढ़ के पानी से प्रभावित हुए हैं, जिनमें से 30 से अधिक घर पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं।\n\n3. फंसे हुए ग्रामीणों का रेस्क्यू किसने और कैसे किया?\nबुधवार सुबह उप प्रमुख जोखन पासवान और स्थानीय ग्रामीणों ने नावों का प्रबंध करके लगभग 100 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया।\n\n4. सरैयां और तिलौथू के बीच आवागमन में क्या समस्या आ रही है?\nचार महीने पहले निर्माण के लिए पुराना पुल तोड़े जाने और मुख्य मार्ग पर बाढ़ का पानी भरने से आवागमन पूरी तरह ठप हो गया है।\n\n5. बाढ़ के कारण कृषि क्षेत्र को कितना नुकसान हुआ है?\nसरैयां, फारूकगंज और आसपास के इलाकों में खेतों में लगी धान की फसल पूरी तरह जलमग्न हो गई है।\n\n6. प्रशासनिक मदद को लेकर ग्रामीणों की क्या शिकायत है?\nग्रामीणों का आरोप है कि शाम तक कोई भी अधिकारी जायजा लेने नहीं पहुंचा और दूरभाष पर सीओ व एसडीएम से बात नहीं हो सकी।",
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  "category": "बिहार",
  "publishedAt": "2026-09-03",
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