बिहार में एक दिसंबर से शुरू होगा विशेष अभियान, संपन्न और करदाताओं से बिजली सब्सिडी छोड़ने की होगी अपील बिहार सरकार आर्थिक रूप से मजबूत परिवारों और आयकरदाताओं से स्वेच्छा से 125 यूनिट मुफ्त बिजली का लाभ छोड़ने की अपील करने जा रही है। एक दिसंबर से शुरू होने वाले इस अभियान के तहत बचाए गए पैसों को राज्य के विकास कार्यों में लगाया जाएगा। बिहार में आर्थिक रूप से सक्षम नागरिकों और आयकर चुकाने वाले परिवारों से बिजली सब्सिडी का लाभ त्यागने का आग्रह किया जाएगा। राज्य प्रशासन ने इस बाबत एक विशेष मुहिम की रूपरेखा तैयार कर ली है जो आने वाली पहली दिसंबर से धरातल पर उतरेगी। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस पहल की जानकारी देते हुए स्पष्ट किया कि जो लोग खुद बिजली का बिल चुकाने में समर्थ हैं, उन्हें स्वेच्छा से इस सरकारी रियासत से पीछे हटना चाहिए ताकि जरूरतमंदों को इसका लाभ मिल सके। इस योजना की घोषणा राजधानी पटना में उस वक्त की गई जब मुख्यमंत्री दीपावली के मौके पर वहां की झुग्गी-बस्तियों में रहने वाले वंचित तबके के बीच पहुंचे थे। बस्तियों का दौरा करते हुए उन्होंने स्थानीय निवासियों में मिठाइयां बांटी और उनके साथ पर्व की खुशियां साझा कीं। सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि राज्य की जनता को बिजली पर रियायत देने के एवज में सरकार को हर साल लगभग 23 हजार करोड़ रुपये खर्च करने पड़ते हैं। यदि संपन्न वर्ग इस सुविधा को स्वेच्छा से छोड़ देता है, तो इस भारी-भरकम राशि का उपयोग बुनियादी ढांचे और अन्य विकास कार्यों को गति देने में किया जा सकेगा। इस मुहिम के पीछे की परिकल्पना को स्पष्ट करते हुए मुख्यमंत्री ने अतीत के एक बड़े राष्ट्रीय उदाहरण का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जिस तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से एलपीजी पर मिलने वाली सब्सिडी का त्याग करने की अपील की थी, ठीक उसी तर्ज पर बिहार में यह कदम उठाया जा रहा है। वर्तमान व्यवस्था के तहत राज्य सरकार प्रत्येक परिवार को सालाना लगभग 10 हजार रुपये की बिजली सब्सिडी मुहैया करा रही है। जो लोग आगे आकर इस रियासत को छोड़ेंगे, उन्हें सरकार की तरफ से सम्मानित भी किया जाएगा। इससे पहले पिछले सप्ताह पटना में संपन्न हुए युवा संसद कार्यक्रम के दौरान भी इस प्रकार का आह्वान किया गया था। वंचितों के साथ दीपोत्सव मनाने पर जोर आम जनता के साथ-साथ जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक महकमे के नुमाइंदों के लिए भी एक विशेष संदेश दिया गया है। मुख्यमंत्री ने सभी अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से आग्रह किया है कि वे आदिवासी बहुल इलाकों का रुख करें और वहां दलित तथा अत्यंत पिछड़े समुदायों के बीच जाकर दीपावली का पर्व मनाएं। उनका कहना था कि प्रशासनिक अमले को इन उपेक्षित तबकों के सुख-दुख में साझीदार बनना चाहिए ताकि समाज के आखिरी पायदान पर खड़े व्यक्ति को यह अहसास हो सके कि वह भी इस मुख्यधारा का हिस्सा है। त्योहार का असली आनंद तभी है जब समाज का कोई भी नागरिक इससे अछूता न रहे। खुद उनका झुग्गी-बस्तियों में जाना इसी सामाजिक समरसता की एक बानगी है। प्रधानमंत्री का आगामी दौरा और सुरक्षा बलों की सराहना इस दौरान देश की सीमाओं की सुरक्षा में जुटे जवानों के प्रति भी सम्मान प्रकट किया गया। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बस्तर दौरे का जिक्र करते हुए वहां सुरक्षा बलों के बीच दीपोत्सव मनाने के कदम की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का इस तरह सैनिकों के साथ त्योहार मनाना पुरानी परंपरा रही है और वे लगातार सीमा पर तैनात प्रहरियों का हौसला बढ़ाते रहे हैं। इसके साथ ही एक महत्वपूर्ण राजनीतिक और प्रशासनिक घटनाक्रम के तहत यह जानकारी सामने आई है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आगामी 21 नवंबर को बिहार के दौरे पर आने वाले हैं। राज्य प्रशासन को पूरी उम्मीद है कि इस यात्रा के दौरान बिहार के विकास और कई बड़े बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट्स के लिए बड़ी घोषणाएं की जा सकती हैं। इसका आप पर असर बिहार में शुरू होने वाले इस नए अभियान का सीधा असर राज्य के संपन्न नागरिकों और करदाताओं की जेब तथा जीवनशैली पर पड़ेगा। • आम नागरिकों पर प्रभाव: मध्यम और उच्च आय वर्ग के परिवारों से स्वेच्छा से बिजली रियायतें छोड़ने का आग्रह किया जाएगा, जिससे स्वेच्छा से योगदान देने वालों का मासिक खर्च बढ़ सकता है। • राज्य की अर्थव्यवस्था: संपन्न वर्ग द्वारा सब्सिडी त्यागने से बचने वाले फंड को सरकार बुनियादी ढांचे और विकास कार्यों में लगाएगी, जिससे दीर्घकालिक लाभ मिल सकता है। • सम्मान और मान्यता: स्वेच्छा से इस सुविधा का त्याग करने वाले नागरिकों को प्रशासन की तरफ से सार्वजनिक रूप से सम्मानित किया जाएगा। • सार्वजनिक वितरण: सरकार का उद्देश्य इस बचत के जरिए राज्य के जरूरतमंद और गरीब तबके तक योजनाओं का लाभ बेहतर तरीके से पहुंचाना है। ऐसा क्यों हुआ बिजली सब्सिडी छोड़ने का यह विशेष अभियान राज्य के वित्तीय संसाधनों को अधिक प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने के उद्देश्य से शुरू किया जा रहा है। सरकार चाहती है कि जो लोग अपने बिजली बिल खुद चुकाने में सक्षम हैं, वे स्वेच्छा से इस राहत को छोड़ दें ताकि उन पैसों का उपयोग जनहित और विकास कार्यों में हो सके। • वित्तीय दबाव: राज्य सरकार को वर्तमान में बिजली सब्सिडी के मद में सालाना लगभग 23 हजार करोड़ रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं, जिससे खजाने पर भारी बोझ पड़ रहा है। • सक्षम वर्ग की पहचान: आर्थिक रूप से मजबूत और आयकर देने वाले परिवारों को इस रियासत की आवश्यकता नहीं है, इसलिए प्रशासन उनसे स्वेच्छा से पीछे हटने का अनुरोध कर रहा है। • पूर्व की मिसाल: एलपीजी सब्सिडी छोड़ने की तर्ज पर ही इस व्यवस्था को भी स्वैच्छिक आधार पर लागू किया जा रहा है ताकि नागरिकों में नैतिक भागीदारी की भावना जागे। सवाल-जवाब 1. बिहार में बिजली सब्सिडी छोड़ने का विशेष अभियान कब से शुरू होगा? यह विशेष अभियान 1 दिसंबर से शुरू किया जाएगा। 2. इस अभियान के तहत किससे सब्सिडी छोड़ने की अपील की जाएगी? आर्थिक रूप से संपन्न परिवारों और आयकरदाताओं से स्वेच्छा से 125 यूनिट मुफ्त बिजली का लाभ छोड़ने की अपील की जाएगी। 3. राज्य सरकार वर्तमान में बिजली सब्सिडी पर सालाना कितना खर्च कर रही है? राज्य सरकार बिजली सब्सिडी पर सालाना करीब 23 हजार करोड़ रुपये खर्च कर रही है। 4. सब्सिडी छोड़ने वाले नागरिकों को क्या मिलेगा? स्वेच्छा से इस सुविधा का त्याग करने वाले लोगों को उनके योगदान के लिए सम्मानित किया जाएगा। 5. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बिहार का दौरा कब करेंगे? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 21 नवंबर को बिहार के दौरे पर आएंगे। https://trendkia.com/bihar/bihar-me-ek-december-se-shuru-hoga-vishesh-abhiyan-sampann-aur-kardataon-se-bijli-subsidy-chhodne-ki-hogi-appeal-57976 TrendKia — Har trend, sabse pehle.