# बिहार में मानसून का असमंजस: 19 जिलों में आज बारिश और वज्रपात का यलो अलर्ट, बाकी इलाके उमस की चपेट में

> मौसम विभाग ने बिहार के 19 जिलों में सोमवार को बारिश, तेज हवा और वज्रपात की चेतावनी दी है, जबकि बाकी हिस्सों में लोग चिपचिपी गर्मी और उमस से जूझ रहे हैं।

**Type:** article · **Category:** बिहार · **Published:** 2026-06-15 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/bihar/bihar-men-manasuna-ka-assam-njasa-19-jilon-men-aja-barisha-aura-vajrapata-ka-yal-888 · **Language:** Hindi
**Tags:** बिहार मौसम, यलो अलर्ट, मानसून, वज्रपात, पटना मौसम, उमस गर्मी, खरीफ फसल, मौसम विभाग

बिहार में दक्षिण-पश्चिम मानसून के पहुँचने के बाद भी मौसम लोगों को राहत देने के बजाय उलझन में डाल रहा है। एक तरफ कई जिलों में बादल बरसने की तैयारी है, तो दूसरी तरफ बड़े हिस्से में लोग पसीने से तर-बतर हैं। मौसम विज्ञान केंद्र ने सोमवार को राज्य के 19 जिलों के लिए ‘यलो अलर्ट’ घोषित किया है, जिसमें मध्यम से भारी बारिश, झोंकेदार हवाओं और बिजली गिरने की आशंका जताई गई है। विभाग का कहना है कि इन इलाकों में मौसम अचानक करवट ले सकता है।

## किन 19 जिलों में बरती जाए सावधानी
चेतावनी मुख्य रूप से उत्तर-पश्चिम और दक्षिण-पश्चिम बिहार के जिलों पर केंद्रित है। अलर्ट की सूची में पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सीवान, सारण, बक्सर, भोजपुर, अरवल, जहानाबाद, पटना, नालंदा, शेखपुरा, लखीसराय, बेगूसराय, नवादा, गया, औरंगाबाद, रोहतास और कैमूर शामिल हैं। मौसम वैज्ञानिकों ने इन जिलों के निवासियों से खराब मौसम के दौरान खास एहतियात बरतने को कहा है। बाकी जिलों में फिलहाल मौसम सामान्य रहने का अनुमान है, जहाँ धूप और बादलों की आँख-मिचौली के बीच लोगों को तेज उमस झेलनी पड़ सकती है, हालाँकि बीच-बीच में चलने वाली हल्की हवाएँ थोड़ी राहत दे सकती हैं।

## शेखपुरा सबसे तपा, पारा 40 डिग्री तक
मानसून के दस्तक देने के बावजूद राज्य के कई हिस्सों में गर्मी का तेवर नरम नहीं पड़ा है। पिछले 24 घंटों में शेखपुरा जिला 40 डिग्री सेल्सियस अधिकतम तापमान के साथ सबसे गर्म रहा। इसके पीछे-पीछे मोतिहारी और कैमूर का पारा भी करीब 39 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच गया। मानसून आ जाने के बाद भी तापमान का इतना ऊँचा बने रहना और बारिश का बिखरा-बिखरा वितरण लोगों की परेशानी और बढ़ा रहा है।

## बारिश आ गई, फिर उमस क्यों सता रही है
आमतौर पर मानसून के आते ही पारा गिरता है और मौसम सुहाना हो जाता है, मगर इस बार बिहारवासियों को चिपचिपी गर्मी ने जकड़ रखा है। मौसम विशेषज्ञ इसकी मुख्य तकनीकी वजह वातावरण में नमी का अचानक बढ़ जाना बता रहे हैं।

दरअसल, मानसूनी हवाएँ बंगाल की खाड़ी से बड़ी मात्रा में नमी समेटकर बिहार के आसमान तक पहुँच रही हैं, लेकिन अभी राज्य के हर हिस्से में जमकर बारिश नहीं हुई है। जब हवा में जलवाष्प की मात्रा बहुत ज्यादा हो जाती है और आसमान बादलों से ढका रहता है, तो शरीर का पसीना जल्दी नहीं सूखता। यही कारण है कि अधिकतम तापमान 36 से 40 डिग्री सेल्सियस रहने के बावजूद लोगों को असल पारे से कहीं अधिक तीखी गर्मी महसूस हो रही है।

## राजधानी पटना का हाल
पटना और आसपास के क्षेत्रों में सोमवार को आसमान आंशिक रूप से बादलों से घिरा रह सकता है। दोपहर या शाम के समय गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है, और कुछ जगहों पर तेज हवाओं तथा वज्रपात की भी आशंका है। राजधानी का अधिकतम तापमान 36 से 38 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है। विभाग का मानना है कि बारिश होने पर पारा थोड़ा नीचे आएगा, पर हवा में नमी का ऊँचा स्तर बने रहने की वजह से उमस से तुरंत पूरी राहत मिलने के आसार कम हैं।

## आगे क्या: धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ेगा मानसून
मौसम विभाग के ताजा बुलेटिन के मुताबिक अगले कुछ दिनों में मानसून पूरे बिहार में क्रमशः पूरी तरह सक्रिय हो जाएगा। इसके असर से उत्तर और मध्य बिहार के जिलों में बारिश की गतिविधियाँ तेज होंगी और कई स्थानों पर रुक-रुक कर भारी बारिश तथा आँधी-तूफान की स्थिति बन सकती है। व्यापक बारिश होने के बाद ही तापमान में बड़ी गिरावट आएगी, तभी लोगों को इस चिपचिपी गर्मी से स्थायी राहत मिल पाएगी। विभाग ने आगाह किया है कि इस दौरान वज्रपात की घटनाएँ बढ़ सकती हैं, इसलिए बिजली कड़कने के समय लोग सुरक्षित स्थानों पर ही रहें।

## खरीफ की खेती के लिए राहत की बौछार
आम लोग भले ही उमस से बेहाल हों, लेकिन मानसून की यह सक्रियता बिहार के किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी है। जून का यह दौर धान की नर्सरी (बिचड़ा) तैयार करने और खरीफ फसलों के लिए खेतों की जुताई-बुवाई के लिहाज से बेहद अहम होता है। कृषि विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर अगले कुछ दिन राज्य में नियमित और संतुलित बारिश होती रही, तो खेती-किसानी के कामों को जबरदस्त गति मिलेगी। इससे किसानों की सिंचाई पर होने वाली लागत घटेगी और आने वाली फसल का उत्पादन भी बेहतर रहने की उम्मीद है। हालाँकि कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि किसान तेज हवा और वज्रपात के दौरान खेतों में जाने से बचें और मौसम साफ होने पर ही खेती के काम करें।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._