बिहार विधान परिषद चुनाव में बिखराव: पांच सीटों पर राजद और कांग्रेस के बीच सीधी जंग बिहार विधान परिषद की आठ सीटों पर होने वाले चुनाव में महागठबंधन के घटक दल आमने-सामने आ गए हैं, जहां राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस पांच सीटों पर एक-दूसरे के खिलाफ ताल ठोकेंगे। बिहार विधान परिषद के द्विवार्षिक चुनाव की सरगर्मियों के बीच विपक्षी महागठबंधन में दरारें पूरी तरह सतह पर आ चुकी हैं। दरभंगा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस के प्रत्याशी डॉ. मदन मोहन झा के मुकाबले राष्ट्रीय जनता दल द्वारा कुमर राय को मैदान में उतारे जाने के बाद दोनों प्रमुख सहयोगियों के बीच टकराव चरम पर पहुंच गया है। इस ताजा राजनीतिक दांवपेच के चलते अब विधान परिषद की कुल 8 सीटों में से 5 सीटों पर राजद और कांग्रेस के उम्मीदवार एक-दूसरे के खिलाफ सीधे मुकाबले में उतर चुके हैं। सीटों का गणित और राष्ट्रीय जनता दल का पलटवार इस पूरे चुनावी घटनाक्रम में सीटों के समीकरण तेजी से बदले हैं। राष्ट्रीय जनता दल ने पहले गठबंधन के तहत कांग्रेस को एक सीट और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी को एक सीट देने की योजना बनाई थी। हालांकि, कांग्रेस की ओर से पांच सीटों पर अपने प्रत्याशियों के नाम घोषित किए जाने से नाराज होकर राजद ने बेहद आक्रामक रुख अपनाया। राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. मदन मोहन झा की उम्मीदवारी के जवाब में राजद शिक्षक प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष कुमर राय को पार्टी का सिंबल सौंप दिया। इसके साथ ही राजद अब 8 में से 7 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े कर चुका है, जबकि सिर्फ एक तिरहुत शिक्षक सीट को उसने सीपीआई के लिए छोड़ा है। तेजस्वी यादव और कांग्रेस नेतृत्व का रुख राजद के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने इस स्थिति पर विवाद की बातों को नकारते हुए ऐतिहासिक संदर्भ दिया। तेजस्वी यादव ने कहा, "चाहे वह स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव हों, शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के या स्थानीय निकायों में जनप्रतिनिधियों के चुनाव हों, वाम दल, कांग्रेस और राजग हमेशा अलग-अलग लड़ते रहे हैं।" उन्होंने भरोसा जताया कि विधान परिषद के इस चुनाव में उनकी पार्टी काफी मजबूत प्रदर्शन करेगी। दूसरी ओर, कांग्रेस के बिहार अध्यक्ष राजेश राम ने भी किसी आंतरिक टकराव से इनकार करते हुए स्पष्ट किया कि पार्टी ने अपने कार्यकर्ताओं की भावनाओं और जनता के बीच कांग्रेस के मुख्य चुनौती बनने की धारणा को देखते हुए यह फैसला लिया है। पुराने चुनावी ढर्रे पर अखिलेश प्रसाद सिंह का तर्क कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह ने इस पूरे घटनाक्रम को सामान्य करार दिया। उनका कहना था कि अतीत में भी गठबंधन के सहयोगी दल विधान परिषद की एक ही सीट पर अपने अलग-अलग प्रत्याशी उतारते रहे हैं और चूंकि ये चुनाव सीधे पार्टी चुनाव चिह्नों पर नहीं लड़े जाते, इसलिए इसे विवाद के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। इसके विपरीत, कांग्रेस के कुछ अंदरूनी नेताओं ने अनौपचारिक तौर पर कहा कि गठबंधन में राजद के एकतरफा रवैये को चुनौती देना जरूरी हो गया था। इन नेताओं का आरोप था कि पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव जैसे बड़े मौकों पर भी राजद ने एकतरफा उम्मीदवार घोषित करके अपने सहयोगियों को असहज स्थिति में डाल दिया था। मतदाता पात्रता के कड़े नियम विधान परिषद के स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की चुनावी प्रक्रिया सामान्य विधानसभा चुनावों से काफी भिन्न होती है। स्नातक सीटों पर केवल वही नागरिक मतदान कर सकते हैं, जिन्होंने भारत के किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से कम से कम तीन वर्ष पूर्व स्नातक की डिग्री प्राप्त की हो और वे संबंधित निर्वाचन क्षेत्र के स्थानीय निवासी हों। इसी प्रकार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में माध्यमिक विद्यालयों, महाविद्यालयों अथवा विश्वविद्यालयों में न्यूनतम तीन वर्षों का अध्यापन अनुभव रखने वाले शिक्षक ही मतदान के पात्र माने जाते हैं। इन दोनों ही श्रेणियों में मतदान का अधिकार पाने के लिए मतदाताओं का विशेष मतदाता सूची में पहले से पंजीकृत होना अनिवार्य रहता है। सत्तारूढ़ जनता दल यू में भी बगावत महागठबंधन की आपसी खींचतान के बीच सत्तारूढ़ जनता दल यू के भीतर भी असंतोष खुलकर सामने आ रहा है। पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में जेडीयू के बाहुबली विधायक अनंत सिंह ने पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार नीरज कुमार के खिलाफ खुला मोर्चा खोल दिया है। अनंत सिंह जनसुराज पार्टी के उम्मीदवार अनुज सिंह के नामांकन जुलूस में अपनी खुली जीप पर समर्थकों के साथ शामिल हुए। नामांकन कार्यालय के बाहर खुली जीप में बैठकर वे मूंछों पर ताव देते और पीला गमछा लहराते नजर आए, जिससे यह साफ संकेत मिला कि सत्तारूढ़ खेमे के अंदर भी स्थानीय स्तर पर भारी बगावत की स्थिति बनी हुई है। इसका आप पर असर विधान परिषद चुनाव में सहयोगी दलों की इस आपसी लड़ाई से बिहार के स्नातक और शिक्षक मतदाताओं के सामने राजनीतिक विकल्प बंट गए हैं। • बिहार में: विपक्षी महागठबंधन के दोनों प्रमुख दलों के अलग-अलग चुनाव लड़ने से मतों का स्पष्ट विभाजन होगा। शिक्षक और स्नातक वर्ग के मतदाताओं को अब साझा उम्मीदवार के बजाय दो अलग-अलग सहयोगियों में से किसी एक को चुनना होगा। • भारत में: राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी गठबंधन की चुनावी एकजुटता को क्षेत्रीय स्तर पर इस तरह के टकराव से बड़ा झटका लगा है। अन्य राज्यों में भी सीट बंटवारे को लेकर सहयोगियों के बीच खींचतान बढ़ने की आशंका रहेगी। • राजनीतिक समीकरण: राजद और कांग्रेस के आमने-सामने आने से विपक्षी वोटों के बिखराव का सीधा चुनावी फायदा अन्य प्रतिद्वंद्वी प्रत्याशियों को मिल सकता है। चुनावी नतीजों के बाद राज्य के राजनीतिक समीकरणों में नए बदलाव देखने को मिल सकते हैं। • मतदाता सूची पंजीकरण: इन चुनावों में केवल वही पंजीकृत स्नातक और शिक्षक मत दे सकेंगे जिन्होंने संबंधित प्रक्रिया पूरी की है। यदि आप तीन वर्ष पुराने स्नातक या शिक्षक हैं, तो विशेष मतदाता सूची में नाम दर्ज होने पर ही आपका वोट मान्य होगा। ऐसा क्यों हुआ यह टकराव कांग्रेस द्वारा एकतरफा उम्मीदवार घोषित करने और उसके जवाब में राजद द्वारा अपने प्रत्याशी उतारने की वजह से शुरू हुआ। • सीटों का एकतरफा ऐलान: कांग्रेस ने बिना पूर्व सहमति के 5 सीटों पर अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी थी, जिससे नाराज होकर राजद ने उनके खिलाफ अपने प्रत्याशी मैदान में उतार दिए। राजद ने पहले कांग्रेस और सीपीआई के लिए एक-एक सीट छोड़ने की बात कही थी, लेकिन कांग्रेस के फैसले के बाद रणनीति बदल ली। • अतीत का चुनावी इतिहास: विधान परिषद के स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में दल अपने आधिकारिक चुनाव चिह्नों पर चुनाव नहीं लड़ते, इसलिए पहले भी सहयोगी दल स्वतंत्र रूप से अपने प्रत्याशी उतारते रहे हैं। दोनों पार्टियों के नेताओं ने इसी परंपरा का हवाला देकर अपने फैसलों को सही ठहराया है। • पुरानी नाराजगी: कांग्रेस नेताओं में राजद के दबदबे और पिछले विधानसभा चुनाव में एकतरफा फैसलों को लेकर असंतोष था, जिसके चलते पार्टी ने इस बार अपना स्वतंत्र प्रभाव दिखाने का फैसला किया। दूसरी ओर सत्तापक्ष में स्थानीय नेताओं की निजी प्रतिद्वंद्विता के कारण जदयू विधायक ने भी बगावत का रास्ता चुना। सवाल-जवाब 1. बिहार विधान परिषद चुनाव में राजद और कांग्रेस कितनी सीटों पर आमने-सामने हैं? कुल आठ सीटों में से पांच सीटों पर राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस के उम्मीदवार एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं। 2. दरभंगा शिक्षक सीट पर कांग्रेस के उम्मीदवार कौन हैं? दरभंगा शिक्षक सीट से कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. मदन मोहन झा हैं। 3. दरभंगा शिक्षक सीट पर राजद ने किसे मैदान में उतारा है? राजद ने अपने शिक्षक प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष कुमर राय को डॉ. मदन मोहन झा के खिलाफ चुनाव मैदान में उतारा है। 4. राजद ने कुल कितनी सीटों पर अपने प्रत्याशी घोषित किए हैं? राजद आठ में से सात सीटों पर चुनाव लड़ रही है और उसने केवल एक तिरहुत शिक्षक सीट सीपीआई के लिए छोड़ी है। 5. स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में मतदान के लिए क्या योग्यता जरूरी है? मतदाता के पास मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से कम से कम तीन वर्ष पूर्व स्नातक की डिग्री और संबंधित क्षेत्र का निवास होना अनिवार्य है। 6. पटना स्नातक सीट पर जदयू में क्या विवाद सामने आया है? जेडीयू विधायक अनंत सिंह ने पार्टी प्रत्याशी नीरज कुमार का विरोध करते हुए जनसुराज पार्टी के उम्मीदवार अनुज सिंह के नामांकन में भाग लिया। https://trendkia.com/bihar/bihar-men-vidhana-parishada-chunava-pancha-siton-para-rjd-aura-congress-amane-samane-43260 TrendKia — Har trend, sabse pehle.