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  "type": "article",
  "title": "सीमावर्ती इलाकों में सोलर और विंड पावर प्लांट लगाने के लिए अनिवार्य हुई सुरक्षा क्लीयरेंस, केंद्र सरकार ने जारी किए सख्त नियम",
  "summary": "गृह मंत्रालय ने नियंत्रण रेखा, वास्तविक नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा के आसपास सौर, पवन और हाइब्रिड ऊर्जा परियोजनाओं के लिए सुरक्षा नियम जारी किए हैं। सीमा से एक किलोमीटर के भीतर नए प्रोजेक्ट्स पर रोक लगा दी गई है और 50 किलोमीटर तक के इलाके को संवेदनशील घोषित किया गया है।",
  "content": "भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं की सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने एक व्यापक नीतिगत ढांचा तैयार किया है। गृह मंत्रालय के आंतरिक सुरक्षा प्रभाग ने नियंत्रण रेखा (LoC), वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) और अंतरराष्ट्रीय सीमा (IB) के निकट सौर, पवन और हाइब्रिड नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं की स्थापना और संचालन के लिए कड़े सुरक्षा दिशानिर्देश जारी किए हैं। इस नई सुरक्षा नीति के तहत सीमा से सटे संवेदनशील क्षेत्रों में ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट्स लगाने वाली कंपनियों के लिए गृह मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय से अनुमति लेना अनिवार्य कर दिया गया है।\n\nशून्य से 50 किलोमीटर तक के क्षेत्रों के लिए त्रिस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था\nमंत्रालय की ओर से जारी दिशानिर्देशों में सीमावर्ती क्षेत्रों को अलग-अलग सुरक्षा क्षेत्रों में बांटा गया है। अंतरराष्ट्रीय सीमा, LoC या LAC से ठीक एक किलोमीटर तक के दायरे में किसी भी प्रकार की नई सौर, पवन या हाइब्रिड ऊर्जा परियोजना स्थापित करने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। इस नो-गो जोन में परियोजना निर्माण या उससे जुड़ी किसी भी गतिविधि की इजाजत नहीं होगी।\n\nसीमा रेखा से 1 किलोमीटर से लेकर 50 किलोमीटर तक के संपूर्ण क्षेत्र को आधिकारिक तौर पर संवेदनशील क्षेत्र घोषित किया गया है। इस 50 किलोमीटर के दायरे में आने वाले किसी भी नए सोलर या विंड प्रोजेक्ट के विकासकर्ताओं को निर्माण कार्य शुरू करने से पहले गृह मंत्रालय से अनिवार्य सुरक्षा क्लीयरेंस प्राप्त करनी होगी।\n\nइसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय सीमा से 1 से 20 किलोमीटर के दायरे में प्रस्तावित प्रोजेक्ट्स के लिए रक्षा मंत्रालय से अलग से अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) प्राप्त करना होगा। गृह मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय प्रत्येक परियोजना के आवेदनों की सुरक्षा समीक्षा केस-टू-केस आधार पर करेंगे, जिसके बाद ही निर्माण की अंतिम स्वीकृति दी जाएगी।\n\nपड़ोसी देशों के श्रमिकों और विदेशी निवेश पर कड़े प्रतिबंध\nराष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सरकार ने सीमावर्ती ग्रीन एनर्जी परियोजनाओं में मानव संसाधन के चयन और विदेशी नागरिकों की नियुक्ति पर भी सख्त नियम लागू किए हैं। भारत के साथ जमीनी सीमा साझा करने वाले देशों, विशेष रूप से पाकिस्तान, चीन और बांग्लादेश के इंजीनियरों, तकनीशियनों, अधिकारियों और श्रमिकों को केंद्र सरकार की पूर्व अनुमति के बिना इन परियोजनाओं में नियुक्त नहीं किया जा सकेगा।\n\nपरियोजना स्थल पर काम करने वाले सभी कर्मचारियों की पृष्ठभूमि का पहले पूर्ण सत्यापन किया जाएगा। कर्मचारियों को कार्यस्थल पर तैनात रहने के दौरान स्थानीय पुलिस और बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) द्वारा समय-समय पर जारी सुरक्षा निर्देशों का पालन करना अनिवार्य होगा। परियोजना परिसर में आने वाले विदेशी नागरिकों की हर गतिविधि पर सुरक्षा एजेंसियां नजर रखेंगी।\n\nजमीन के मालिकाना हक और विदेशी पूंजी निवेश को लेकर भी नियम कड़े किए गए हैं। परियोजना के विकासकर्ता गृह मंत्रालय की मंजूरी के बिना किसी भी विदेशी कंपनी या संस्था को परियोजना की जमीन हस्तांतरित या लीज पर नहीं दे सकेंगे। यदि परियोजना में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) शामिल है, तो आवेदक को भारत की FDI नीति के तहत उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) के समक्ष अलग से आवेदन करना होगा।\n\nएंटी-ड्रोन सुरक्षा और सैन्य उपयोग वाली बुनियादी ढांचा शर्तें\nसीमावर्ती रिन्यूएबल एनर्जी प्लांट्स की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए परियोजना परिसर में अत्याधुनिक सुरक्षा उपकरण लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। कंपनियों को अपने खर्च पर प्रोजेक्ट साइट पर एंटी-ड्रोन सिस्टम स्थापित करना होगा। इस एंटी-ड्रोन तकनीक का संचालन और नियंत्रण केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) या संबंधित राज्य की पुलिस द्वारा किया जाएगा।\n\nप्रत्येक प्रोजेक्ट साइट पर एक समर्पित पुलिस चौकी की स्थापना की जाएगी। यह पुलिस चौकी निर्माण चरण से लेकर चालू प्लांट के दैनिक संचालन तक हर गतिविधि पर निगरानी रखेगी। इसके अतिरिक्त, परियोजना परिसर के भीतर बनाई जाने वाली सड़कें पर्याप्त चौड़ी होनी चाहिए ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति में BSF या भारतीय सशस्त्र बलों की गाड़ियां और सैन्य वाहन उनका आसानी से उपयोग कर सकें।\n\nइमारतों की ऊंचाई और आवासीय परिसरों पर तय सीमाएं\nसुरक्षा एजेंसियों की निगरानी क्षमताओं को बनाए रखने के लिए बुनियादी ढांचे की ऊंचाई और रिहायशी सुविधाओं के स्थान को भी सीमित किया गया है। सीमावर्ती संवेदनशील क्षेत्रों में भीड़भाड़ वाले आवासीय परिसरों, श्रमिक कॉलोनियों या होटलों के निर्माण पर रोक रहेगी।\n\nनियमों के अनुसार, परियोजना से जुड़े आवास और होटल सीमा रेखा से कम से कम 5 किलोमीटर दूर स्थित होने चाहिए। हालांकि, संयंत्र परिसर के अंदर कर्मचारियों के लिए केवल एक छोटे कैफे या कैफेटेरिया की अनुमति होगी, ताकि अवांछित भीड़ या अनावश्यक आवाजाही को रोका जा सके।\n\nसंवेदनशील जोन में निर्मित होने वाली संरचनाओं की ऊंचाई भी निर्धारित की गई है। सीमा से 1 से 8 किलोमीटर के दायरे में ऑपरेशन और मेंटेनेंस से जुड़ी इमारतों की ऊंचाई अधिकतम 3 मीटर रखी जा सकती है। 8 से 20 किलोमीटर के क्षेत्र में यह सीमा 5 मीटर और 20 से 50 किलोमीटर के दायरे में अधिकतम 15 मीटर तक सीमित रहेगी। इन परियोजनाओं के लिए सभी आवेदन केवल नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) के सिंगल-विंडो पोर्टल के माध्यम से ही स्वीकार किए जाएंगे।\n\nइसका आप पर असर\nभारत भर में: सीमावर्ती राज्यों में काम करने वाले रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपर्स को नई परियोजनाओं के लिए गृह और रक्षा मंत्रालय से अतिरिक्त सुरक्षा मंजूरियां लेनी होंगी, जिससे प्रोजेक्ट स्वीकृति समय सीमा बढ़ सकती है।\n\nसीमावर्ती राज्यों (राजस्थान, गुजरात, पंजाब, लद्दाख, जम्मू-कश्मीर) में: सीमा से 50 किमी के दायरे में आने वाले विंड और सोलर प्रोजेक्ट्स पर सख्त पुलिस निगरानी, एंटी-ड्रोन सिस्टम का खर्च और विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति पर कड़े नियम लागू होंगे।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. सीमा से कितने किलोमीटर के दायरे में नए सोलर या विंड प्रोजेक्ट पर पूरी तरह रोक है?\nLoC, LAC या अंतरराष्ट्रीय सीमा से 1 किलोमीटर के दायरे में किसी भी नई सौर, पवन या हाइब्रिड ऊर्जा परियोजना के निर्माण या गतिविधि पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा।\n\n2. सीमा से 1 से 50 किलोमीटर तक के प्रोजेक्ट्स के लिए क्या नियम हैं?\n1 से 50 किलोमीटर के क्षेत्र को संवेदनशील घोषित किया गया है, जहां प्रोजेक्ट लगाने के लिए गृह मंत्रालय की सुरक्षा क्लीयरेंस अनिवार्य होगी। इसके अलावा 1 से 20 किमी के दायरे में रक्षा मंत्रालय से भी NOC लेना होगा।\n\n3. क्या पाकिस्तान या चीन के नागरिकों को सीमावर्ती प्रोजेक्ट्स में काम पर रखा जा सकता है?\nनहीं, भारत के साथ जमीनी सीमा साझा करने वाले देशों जैसे पाकिस्तान, चीन और बांग्लादेश के नागरिकों को केंद्र सरकार की पूर्व अनुमति के बिना इन परियोजनाओं में नियुक्त नहीं किया जा सकता।\n\n4. प्रोजेक्ट परिसर में सुरक्षा और एंटी-ड्रोन सिस्टम का खर्च कौन उठाएगा?\nएंटी-ड्रोन सिस्टम लगाने का पूरा खर्च परियोजना प्रस्तावक या कंपनी को उठाना होगा, जबकि इसका संचालन CISF या राज्य पुलिस करेगी।\n\n5. सीमावर्ती क्षेत्रों में प्रोजेक्ट की इमारतों की ऊंचाई के क्या नियम हैं?\nसीमा से 1-8 किमी के दायरे में इमारतों की अधिकतम ऊंचाई 3 मीटर, 8-20 किमी के दायरे में 5 मीटर और 20-50 किमी के दायरे में अधिकतम 15 मीटर रखी जा सकती है।",
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  "category": "बिहार",
  "publishedAt": "2026-08-08",
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