चंपारण की गुप्त फैक्ट्री से नेपाल और तीन राज्यों तक पहुंच रहे थे अवैध कारतूस बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के चकिया में पकड़ी गई एक मिनी कारतूस फैक्ट्री की सप्लाई चेन नेपाल, उत्तर प्रदेश, झारखंड और पश्चिम बंगाल तक फैली मिली, पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है. बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में पकड़ी गई एक अवैध कारतूस फैक्ट्री ने पुलिस को हैरान कर दिया है, क्योंकि इसकी सप्लाई चेन सिर्फ बिहार तक नहीं बल्कि नेपाल, उत्तर प्रदेश, झारखंड और पश्चिम बंगाल तक फैली मिली है. चार राज्यों और एक देश तक फैला जाल पुलिस की शुरुआती पड़ताल में सामने आया है कि यहां तैयार होने वाले कारतूस केवल स्थानीय खरीदारों के लिए नहीं थे. जांच अधिकारियों को कई आपराधिक गिरोहों से जुड़े सुराग भी मिले हैं, और गिरफ्तार आरोपियों से लगातार पूछताछ करके पूरे नेटवर्क की परतें खोली जा रही हैं. सीमा से सटा इलाका होने के चलते जांच एजेंसियों की चिंता और बढ़ गई है, क्योंकि पूर्वी चंपारण की सरहद नेपाल से मिलती है और वहां से खेप पड़ोसी राज्यों तक आसानी से पहुंच सकती है. शायद यही वजह है कि यह फैक्ट्री इतने लंबे समय तक किसी की नजर में नहीं आई. ओझा टोला के किराये के मकान में चल रहा था कारोबार यह अवैध कारोबार चकिया थाना क्षेत्र के ओझा टोला गांव में एक किराये के मकान से चलाया जा रहा था. इसे संचालित करने वाला शख्स फेनहारा थाना क्षेत्र के मड़पा मोहन गांव का निवासी श्रीकांत सिंह बताया गया है. यहीं कारतूस तैयार किए जाते थे, जिसके बाद उन्हें अलग-अलग राज्यों और सीमावर्ती इलाकों में भेजा जाता था. चार गिरफ्तार, भारी बरामदगी छापेमारी के दौरान पुलिस ने श्रीकांत सिंह के साथ रामबाबू पासवान, बाली आलम और रहमत मियां को भी गिरफ्तार कर लिया. मौके से तैयार कारतूसों की बड़ी खेप, निर्माण में काम आने वाला सामान, केमिकल और मशीनरी बरामद हुई है. बरामदगी की मात्रा देखकर अंदाजा लगाया जा रहा है कि यह फैक्ट्री काफी समय से चल रही थी और अवैध हथियार बाजार को लगातार कारतूस सप्लाई कर रही थी. मोबाइल और लेन-देन के रिकॉर्ड खंगाल रही पुलिस यह पता लगाने के लिए कि तैयार कारतूसों की खेप किन लोगों और गिरोहों तक पहुंचाई जाती थी, पुलिस अब आरोपियों के मोबाइल फोन, संपर्क सूत्रों और बैंकिंग लेन-देन की भी जांच कर रही है. इस पड़ताल से यह भी साफ हो सकेगा कि नेटवर्क कितना बड़ा है और कौन-कौन इसकी फंडिंग या आगे की सप्लाई में शामिल था. एसडीपीओ बोले, नेटवर्क की हर कड़ी तलाशी जाएगी चकिया के एसडीपीओ संतोष कुमार सिंह के मुताबिक, गिरफ्तार चारों आरोपियों का संबंध कारतूस बनाने, जमा करने और बेचने के एक संगठित नेटवर्क से है. उन्होंने बताया कि पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि गिरोह ने अब तक कितने कारतूस बनाकर अलग-अलग राज्यों और सीमावर्ती इलाकों में भेजे थे. जांच अभी जारी है और पूछताछ से मिल रहे हर सुराग की तस्दीक की जा रही है, जिसके आधार पर इस नेटवर्क से जुड़े और लोगों की गिरफ्तारी भी हो सकती है. इसका आप पर असर अवैध हथियार और गोला-बारूद बनाने के ऐसे नेटवर्क सीधे तौर पर आम लोगों की सुरक्षा से जुड़ते हैं. • भारत में: कई राज्यों तक फैली सप्लाई चेन दिखाती है कि अवैध कारतूस आसानी से सीमा पार कर सकते हैं, जिससे देशभर में कानून-व्यवस्था और सुरक्षा एजेंसियों की चुनौती बढ़ती है. • बिहार/पूर्वी चंपारण में: स्थानीय स्तर पर ऐसी फैक्ट्रियों का पर्दाफाश होने से इलाके में पुलिस की सतर्कता और तलाशी अभियान बढ़ सकते हैं, जिसका असर आम निवासियों के दैनिक जीवन पर भी पड़ सकता है. सवाल-जवाब 1. यह अवैध कारतूस फैक्ट्री कहां पकड़ी गई? बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के चकिया थाना क्षेत्र के ओझा टोला गांव में एक किराये के मकान से यह फैक्ट्री चलाई जा रही थी. 2. फैक्ट्री का मास्टरमाइंड कौन बताया गया है? फेनहारा थाना क्षेत्र के मड़पा मोहन गांव का निवासी श्रीकांत सिंह इसका संचालन करता था. 3. अब तक कुल कितने आरोपी गिरफ्तार हुए हैं? अब तक चार आरोपी गिरफ्तार हुए हैं, श्रीकांत सिंह, रामबाबू पासवान, बाली आलम और रहमत मियां. 4. यहां से बने कारतूसों की सप्लाई कहां-कहां होती थी? बिहार के अलावा नेपाल, उत्तर प्रदेश, झारखंड और पश्चिम बंगाल तक इनकी सप्लाई की जाती थी. 5. छापेमारी में मौके से क्या-क्या बरामद हुआ? तैयार कारतूसों की बड़ी खेप, निर्माण सामग्री, केमिकल और मशीनरी जब्त की गई है. 6. पुलिस आगे किस दिशा में जांच कर रही है? आरोपियों के मोबाइल फोन, संपर्क सूत्रों और वित्तीय लेन-देन की जांच कर पुलिस पूरे नेटवर्क और संभावित सहयोगियों का पता लगा रही है. https://trendkia.com/bihar/champaran-ki-gupta-phaiktri-se-nepal-aura-tina-rajyon-taka-pahuncha-rahe-the-avaidha-karatusa-9042 TrendKia — Har trend, sabse pehle.