# चित्रकूट: पहली बरसात में ही बरदहा नदी बनी आफत, हजारों लोग घरों में कैद

> चित्रकूट के पाठा क्षेत्र में पहली ही बारिश से बरदहा नदी उफान पर है, जिससे चमरौहा और सकरौहा गांव का संपर्क तहसील मुख्यालय से कट गया है। इस समस्या से करीब 5 हजार लोग प्रभावित हैं, जो वर्षों से एक स्थायी पुल की मांग कर रहे हैं।

**Type:** article · **Category:** बिहार · **Published:** 2026-07-09 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/bihar/chitrakoot-pahali-barasata-men-hi-bardaha-nadi-bani-aphata-hajaron-loga-gharon-men-kaida-6230 · **Language:** Hindi
**Tags:** चित्रकूट, बाढ़, बरदहा नदी, मानसून, उत्तर प्रदेश, योगी आदित्यनाथ

चित्रकूट जिले में मानसून की दस्तक के साथ ही पाठा क्षेत्र के निवासियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। सीजन की पहली ही जोरदार बारिश ने चमरौहा और सकरौहा गांवों को मुख्य मार्ग से अलग-थलग कर दिया है। बरदहा नदी का जलस्तर बढ़ते ही स्थानीय लोगों का तहसील मुख्यालय तक जाने का रास्ता पूरी तरह बंद हो जाता है, जिसका सीधा असर शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और बाजार से जुड़ी दैनिक गतिविधियों पर पड़ रहा है।

## बरसात में ग्रामीण जीवन पर संकट
जब नदी का जलस्तर बढ़ता है, तो निवासियों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों को बुनियादी सरकारी कार्यों के लिए भी बाहर निकलना दुश्वार हो जाता है। ऐसी स्थिति में, लोग या तो जान जोखिम में डालकर नदी पार करने को मजबूर होते हैं, या फिर उन्हें नदी किनारे घंटों और कई बार पूरी रात पानी के घटने का इंतजार करना पड़ता है। यह बरदहा नदी उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमा पर स्थित है, जो दोनों राज्यों के कई गांवों को आपस में जोड़ती है। सामान्य दिनों में इस मार्ग से हजारों लोग रोजाना आवाजाही करते हैं, लेकिन बारिश के तीन महीने उनके लिए किसी कठोर परीक्षा से कम नहीं होते हैं।

## दशकों पुरानी पीड़ा और अधूरी उम्मीदें
स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि चुनाव के दौरान हर बार राजनेता पुल निर्माण का वादा करते हैं, लेकिन चुनाव बीत जाने के बाद ये वादे केवल कागजों तक ही सीमित रह जाते हैं। चमरौहा निवासी आनंद कुमार द्विवेदी ने बताया कि बरसात का मौसम उनके लिए साल का सबसे कष्टदायक समय होता है। उन्होंने याद दिलाया कि पहले यह पूरा इलाका डकैतों के आतंक से जूझ रहा था, और अब यह नदी उनके लिए सबसे बड़ा खतरा बन गई है। यदि गांव में कोई व्यक्ति गंभीर रूप से बीमार हो जाता है, तो उसे समय पर अस्पताल ले जाना एक असंभव चुनौती बन जाती है। कई बार तो मरीज को समय पर चिकित्सा न मिल पाने के कारण गांव में ही दम तोड़ना पड़ता है, या फिर ग्रामीण घरेलू उपचार के भरोसे रहने को विवश होते हैं।

## पांच हजार लोगों पर सीधा असर
मिथलेश नामक एक स्थानीय निवासी ने बताया कि चमरौहा और सकरौहा समेत उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कई गांवों की कुल मिलाकर पांच हजार की आबादी इस समस्या की चपेट में है। बरसात के दौरान पूरा क्षेत्र एक तरह से बंधक बन जाता है, और लोग अपने ही गांव में कैद होकर रह जाते हैं। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि यह समस्या कोई नई नहीं है, बल्कि पिछले करीब 50 वर्षों से लगातार बनी हुई है। हालांकि, अब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा पुल निर्माण की घोषणा के बाद से लोगों में उम्मीद की एक नई किरण जगी है। फिलहाल ग्रामीणों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि यह घोषणा कब धरातल पर हकीकत बनकर उतरेगी और उन्हें इस शाश्वत समस्या से स्थायी निजात मिलेगी।

## इसका आप पर असर
**भारत में:** पहाड़ी और मैदानी इलाकों के नदी-तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को मानसून के दौरान जलभराव और कटाव के प्रति सतर्क रहना चाहिए।

**चित्रकूट में:** चमरौहा और सकरौहा के निवासियों को नदी का जलस्तर बढ़ने पर अनावश्यक यात्रा से बचना चाहिए और स्थानीय प्रशासन की चेतावनी का पालन करना चाहिए।

## सवाल-जवाब

### 1. बरदहा नदी का किन गांवों से संपर्क टूटा है?
बरदहा नदी के उफान पर आने से चमरौहा और सकरौहा गांवों का तहसील मुख्यालय से संपर्क टूट गया है।

### 2. इस समस्या से कितने लोग प्रभावित हैं?
इस समस्या से लगभग पांच हजार की आबादी प्रभावित हो रही है।

### 3. ग्रामीणों की मुख्य मांग क्या है?
ग्रामीण पिछले करीब 50 वर्षों से नदी पर एक स्थायी पुल निर्माण की मांग कर रहे हैं।

### 4. क्या इस समस्या का कोई समाधान होने वाला है?
हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वहां पुल निर्माण की घोषणा की है, जिससे ग्रामीणों को काम शुरू होने की उम्मीद है।

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