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  "type": "article",
  "title": "सीपीग्राम्स से 1.5 करोड़ से अधिक शिकायतों का समाधान, सरकारी विभागों में मामलों के निपटारे में अब लग रहा आधा समय",
  "summary": "केंद्र सरकार के सीपीग्राम्स पोर्टल ने 2019 से अब तक 1.5 करोड़ से ज्यादा जन शिकायतें संभाली हैं। जून 2026 तक औसत निपटान समय 28 दिन से घटकर 14 दिन रह गया है।",
  "content": "भारत में सरकारी महकमों से जुड़ी जन शिकायतों के निपटारे की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। केंद्र सरकार का केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली यानी सीपीग्राम्स पोर्टल नागरिकों की समस्याओं को सुलझाने की रफ्तार को लगातार तेज कर रहा है। प्रशासनिक दफ्तरों के बार-बार चक्कर लगाने और हफ्तों तक जवाब का इंतजार करने की पुरानी व्यवस्था के मुकाबले अब मामलों का समाधान काफी कम समय में हो रहा है। यह डिजिटल प्लेटफॉर्म न केवल शिकायतों का त्वरित निपटारा कर रहा है, बल्कि ग्रामीण और दूर-दराज इलाकों तक अपनी पहुंच भी मजबूत बना रहा है।\n\nशिकायतों के निपटारे में लगा आधा समय, घटा इंतजार\nसीपीग्राम्स प्रणाली के कामकाज की सबसे प्रमुख उपलब्धि शिकायतों को हल करने में लगने वाले समय में आई बड़ी गिरावट है। वर्ष 2019 में जहां केंद्रीय स्तर पर किसी शिकायत का समाधान होने में औसतन 28 दिन का समय लगता था, वहीं 2025 तक यह घटकर 15 दिन पर आ गया। जून 2026 के आंकड़ों के अनुसार, शिकायतों के निस्तारण का यह औसत समय अब सिमटकर केवल 14 दिन रह गया है। इसका सीधा मतलब यह है कि छह साल पहले की तुलना में अब नागरिकों की समस्याओं का समाधान लगभग दो हफ्ते पहले हो रहा है।\n\nमंत्रालयों और विभागों द्वारा मासिक आधार पर किए जा रहे काम के आंकड़े भी इस सुधार की पुष्टि करते हैं। जून 2026 के दौरान केंद्रीय सचिवालय ने करीब दो लाख शिकायतों का निपटारा किया। यह लगातार 48वां ऐसा महीना था जब एक महीने के भीतर निपटाए गए मामलों की संख्या एक लाख के आंकड़े से ऊपर रही है। लगातार चार वर्षों से बनी यह गति प्रशासनिक कार्यकुशलता को दर्शाती है।\n\nकेंद्र और राज्यों को मिलीं 1.5 करोड़ से अधिक शिकायतें\nनिपटारे की इस तेज रफ्तार का महत्व इसलिए भी अधिक बढ़ जाता है क्योंकि पोर्टल पर आने वाली नई शिकायतों की संख्या लगातार बढ़ रही है। वर्ष 2019 से लेकर अब तक केवल केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों को सीपीग्राम्स के जरिए एक करोड़ से ज्यादा शिकायतें प्राप्त हो चुकी हैं। जून 2026 के अंत तक के आंकड़ों के मुताबिक, केंद्र सरकार के पास कुल 78,793 शिकायतें लंबित बची थीं।\n\nयह शिकायत निवारण तंत्र केवल केंद्र तक सीमित न रहकर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भी व्यापक रूप से इस्तेमाल हो रहा है। साल 2019 से अब तक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को इस व्यवस्था के तहत 50 लाख से अधिक शिकायतें मिली हैं। हालिया अवधि के अंत तक इनमें से करीब दो लाख मामले लंबित थे। अगर केंद्र, राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के आंकड़ों को मिला दिया जाए तो सीपीग्राम्स ने 2019 से अब तक 1.5 करोड़ से ज्यादा शिकायतों को संभाला है।\n\nलंबित मामलों की उम्र में आई गिरावट\nसार्वजनिक शिकायतों के प्रबंधन में केवल लंबित मामलों की कुल संख्या ही महत्वपूर्ण नहीं होती, बल्कि यह देखना भी जरूरी होता है कि कोई मामला कितने समय से अनसुलझा पड़ा है। लंबित पड़े मामलों के समय-सीमा विश्लेषण से पता चलता है कि पुरानी शिकायतों का तेजी से समाधान किया जा रहा है।\n\nजून 2026 तक केंद्रीय सचिवालय में लंबित कुल शिकायतों में से 68 प्रतिशत शिकायतें 21 दिन से भी कम पुरानी थीं। इससे स्पष्ट होता है कि जो शिकायतें फिलहाल प्रक्रिया में हैं, उनमें से अधिकांश हाल ही में पोर्टल पर दर्ज की गई हैं, न कि महीनों से बिना किसी कार्रवाई के पेंडिंग पड़ी हैं। समयबद्ध तरीके से मामलों को बंद करना अब सरकारी कामकाज का एक मुख्य पैमाना बन चुका है।\n\nउपयोगकर्ताओं की बढ़ती संख्या और कॉमन सर्विस सेंटर की भूमिका\nजैसे-जैसे नागरिकों में इस डिजिटल व्यवस्था के प्रति भरोसा बढ़ रहा है, वैसे-वैसे पोर्टल पर नए पंजीकरण भी तेजी से बढ़ रहे हैं। वर्ष 2025 में सीपीग्राम्स पोर्टल पर कुल 7,43,533 नए उपयोगकर्ताओं ने अपना रजिस्ट्रेशन करवाया था, जिसमें अकेले जून महीने में 83,544 नए लोग जुड़े। 2026 में भी यह रुझान जारी है और अब तक दो लाख से अधिक नए नागरिक इस प्लेटफॉर्म पर अपना खाता बना चुके हैं।\n\nडिजिटल सेवाओं को सिर्फ इंटरनेट या स्मार्टफोन इस्तेमाल करने वाले लोगों तक सीमित न रखते हुए इसे गांव-देहात तक पहुंचाने के लिए कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) नेटवर्क की मदद ली जा रही है। केवल जून 2026 में सीएससी केंद्रों के जरिए 6,262 शिकायतें दर्ज की गईं। यह नेटवर्क ग्रामीण क्षेत्रों और कम डिजिटल कनेक्टिविटी वाले स्थानों के लोगों को सरकारी व्यवस्था तक आसानी से अपनी बात पहुंचाने की सुविधा देता है।\n\nनागरिक फीडबैक से समाधान की गुणवत्ता पर जोर\nसीपीग्राम्स की एक बड़ी खासियत यह भी है कि इसमें केवल कागजों पर फाइल बंद करने के बजाय नागरिक की संतुष्टि को तरजीह दी जा रही है। सरकारी विभागों द्वारा दी गई प्रतिक्रिया वास्तव में आवेदक की समस्या का समाधान करती है या नहीं, इसे परखने के लिए नागरिक प्रतिक्रिया यानी फीडबैक की व्यवस्था बनाई गई है।\n\nवर्ष 2025 में सीपीग्राम्स ने शिकायतों के निपटारे के बाद नागरिकों से 10.7 लाख से अधिक फीडबैक रिस्पॉन्स दर्ज किए। इनमें से लगभग दो-तिहाई फीडबैक समर्पित फीडबैक कॉल सेंटर के माध्यम से जुटाए गए। यह फीडबैक तंत्र विभागों द्वारा दी गई कार्रवाई की गुणवत्ता जांचने और व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने में अहम भूमिका निभा रहा है।\n\nइसका आप पर असर\nनागरिकों के लिए: सरकारी विभागों से जुड़ी समस्याओं और शिकायतों का निपटारा अब 28 दिन के बजाय औसतन 14 दिन में हो रहा है।\n\nग्रामीण क्षेत्रों में: इंटरनेट की सीधी सुविधा न होने पर भी ग्रामीण नागरिक नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर पर जाकर आसानी से अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. सीपीग्राम्स क्या है?\nसीपीग्राम्स केंद्र सरकार का एक ऑनलाइन पोर्टल है जिसके माध्यम से नागरिक विभिन्न सरकारी मंत्रालयों और विभागों के खिलाफ अपनी शिकायतें दर्ज करा सकते हैं।\n\n2. अब सरकारी शिकायत सुलझाने में औसतन कितना समय लगता है?\nजून 2026 के आंकड़ों के अनुसार, केंद्रीय स्तर पर शिकायतों के समाधान का औसत समय 14 दिन रह गया है, जो 2019 में 28 दिन था।\n\n3. क्या ग्रामीण क्षेत्र के लोग बिना इंटरनेट के शिकायत दर्ज कर सकते हैं?\nहां, ग्रामीण और कम कनेक्टिविटी वाले क्षेत्रों के नागरिक कॉमन सर्विस सेंटर पर जाकर आसानी से अपनी शिकायत दर्ज करवा सकते हैं।\n\n4. 2019 से अब तक सीपीग्राम्स पर कुल कितनी शिकायतें आई हैं?\nकेंद्र, राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों को मिलाकर 2019 से अब तक 1.5 करोड़ से ज्यादा शिकायतें सीपीग्राम्स के माध्यम से संभाली गई हैं।",
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  "category": "बिहार",
  "publishedAt": "2026-08-24",
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    "सीपीग्राम्स",
    "जन शिकायत",
    "केंद्र सरकार",
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    "प्रशासनिक सुधार"
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  "site": "TrendKia"
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