# दुनिया भर में हर साल 1.2 करोड़ नाबालिगों की शादियां, बाल विवाह के खात्मे के लिए वैश्विक मंच पर उठी भारत की सशक्त मांग

> संयुक्त राष्ट्र के अनुसार दुनिया में हर तीन सेकंड में एक बच्ची बाल विवाह की भेंट चढ़ जाती है। इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए भारतीय बाल अधिकार कार्यकर्ता के प्रयासों से 27 नवंबर को विशेष अंतरराष्ट्रीय दिवस घोषित किया गया है।

**Type:** article · **Category:** बिहार · **Published:** 2026-10-11 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/bihar/duniya-bhara-men-hara-sala-1-2-karora-nabaligon-ki-shadiyan-child-marriage-ke-khatme-ke-lie-vaishvika-mncha-para-uthi-india-ki-sas-46244 · **Language:** Hindi
**Tags:** बाल विवाह, अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस, संयुक्त राष्ट्र, भुवन रिभु, बाल अधिकार, जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन

किताबों और खेलकूद की उम्र में गृहस्थी का बोझ उठाना आज भी दुनिया के कई इलाकों में अनगिनत मासूमों की कड़वी हकीकत बना हुआ है। जब किसी बच्ची से बिना उसकी रजामंदी जाने कम उम्र में ही शादी के बंधन में बांध दिया जाता है, तो असल में उससे उसका बुनियादी हक, स्कूली शिक्षा, बेहतर सेहत और खुद फैसले लेने की पूरी आजादी छिन जाती है। 11 अक्टूबर के दिन मनाया जाने वाला अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस समाज को इसी विकराल चुनौती की ओर देखने और ठोस कदम उठाने का संदेश देता है।

## नाबालिग उम्र में विवाह के भयावह वैश्विक आंकड़े
इस वर्ष का अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस मुख्य रूप से नाबालिगों के विवाह को पूरी तरह समाप्त करने और बेटियों के कानूनी अधिकारों में संसाधन लगाने पर केंद्रित है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा जारी किए गए तथ्य इस सामाजिक संकट की भयावहता को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं। धरती पर सालाना 1.2 करोड़ से भी अधिक कन्याओं का विवाह 18 वर्ष की आयु पूरी होने से पूर्व ही करवा दिया जाता है। इसका सीधा गणित यह निकलता है कि प्रत्येक 3 सेकंड की अवधि में एक मासूम बच्ची को जबरिया पारिवारिक जिम्मेदारियों में धकेल दिया जाता है। दुनिया के तमाम मुल्कों में बने कड़े कानूनों और नियमों के बावजूद यह कुरीति समाज में गहरी जड़ें जमाए बैठी है।

## शादी रोकने से आगे पुनर्वास और आत्मनिर्भरता की जरूरत
कम उम्र में बेटियों का ब्याह कर देना सिर्फ आर्थिक तंगी या रूढ़िवादी मान्यताओं का परिणाम भर नहीं है। कमसिन उम्र का यह बंधन युवतियों के सुनहरे कल को हमेशा के लिए छीन लेता है और उन्हें जीवन भर आर्थिक निर्भरता, अवांछित मातृत्व और घरेलू प्रताड़ना के गहरे संकट की ओर धकेल देता है। केवल रस्मों को रुकवा देना या विवाह मंडप से नाबालिग को बचा लेना ही समाधान नहीं है। असल परीक्षा उस वक्त सामने आती है जब उस कन्या के आगे के जीवन को एक सकारात्मक दिशा देनी होती है। समाज और तंत्र के सामने सबसे बड़ा सवाल यह रहता है कि क्या उस बच्ची को दोबारा स्कूल भेजा जा सका और क्या उसे स्वावलंबी बनने के जरूरी साधन मिले।

## वैश्विक पटल पर भारत की मुहिम और 27 नवंबर का फैसला
इस सामाजिक बुराई को जड़ से खत्म करने के अभियान में वैश्विक स्तर पर भारतीय प्रयासों ने एक बड़ा मुकाम हासिल किया है। जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के संस्थापक और बच्चों के अधिकारों के पैरोकार अधिवक्ता भुवन रिभु ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर इस कुप्रथा को समाप्त करने हेतु एक समर्पित दिवस तय करने की मजबूत वकालत की थी। कई राष्ट्रों के सक्रिय समर्थन और इस निरंतर पहल के फलस्वरूप संयुक्त राष्ट्र महासभा ने हर साल 27 नवंबर की तारीख को बाल और जबरन विवाह के विरुद्ध अंतरराष्ट्रीय दिवस के तौर पर मनाने का प्रस्ताव औपचारिक रूप से पारित किया।

## कानूनी सख्ती और व्यापक सामाजिक बदलाव की दिशा
अधिवक्ता भुवन रिभु का मानना है कि बाल सुरक्षा को अलग-थलग कार्रवाई के तौर पर नहीं देखा जा सकता। उनके अनुसार, “कानून का असली मकसद सिर्फ सजा देना नहीं, बल्कि बच्चों को सुरक्षित भविष्य देना है।” इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए नीतिगत फैसलों, मजबूत प्रशासनिक तंत्र, अधिकारियों की कार्यकुशलता, स्थानीय समाज की सीधी भागीदारी, आर्थिक सहायता और नई तकनीकों का समन्वित उपयोग अनिवार्य है। अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस यह याद दिलाता है कि किसी भी कन्या का भाग्य उसकी उम्र या लिंग से तय नहीं होना चाहिए। इस कुप्रथा का अंत उसी दिन मुमकिन होगा जब समाज रूढ़ियों को त्यागकर बेटियों की शिक्षा और उनके सपनों को सबसे आगे रखेगा।

## इसका आप पर असर
यह पहल बाल विवाह की रोकथाम और पीड़ित बच्चियों के सुरक्षित भविष्य के लिए कानूनी और सामाजिक तंत्र को सशक्त बनाती है।

- **भारत में:** देश में बाल अधिकारों की सुरक्षा के लिए संस्थागत उपायों और तकनीकी निगरानी को नई दिशा मिलेगी। इससे जमीनी स्तर पर अधिकारियों की जवाबदेही बढ़ेगी और बाल विवाह रोकथाम कानूनों का क्रियान्वयन अधिक प्रभावी होगा।
- **वैश्विक स्तर पर:** दुनिया भर में हर साल 1.2 करोड़ नाबालिग लड़कियों को जबरन शादी के खतरे से बचाने के लिए सामूहिक प्रयास तेज होंगे। संयुक्त राष्ट्र मंच पर 27 नवंबर की नई तारीख तय होने से अंतरराष्ट्रीय निगरानी और नीतिगत फंडिंग में तेजी आएगी।
- **शिक्षा और पुनर्वास:** शादी रोके जाने के बाद बच्चियों को दोबारा स्कूल भेजने और आर्थिक सुरक्षा देने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इससे पीड़ितों को घरेलू हिंसा और अल्पायु मातृत्व के जोखिम से सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।
- **सामुदायिक भागीदारी:** स्थानीय स्तर पर परिवारों और समाज को जागरूक कर बेटियों की पढ़ाई को शादी से अधिक प्राथमिकता देने का माहौल बनेगा। इससे समाज में बालिकाओं के अधिकारों के पक्ष में सकारात्मक बदलाव संभव हो सकेगा।

## ऐसा क्यों हुआ
कड़े कानूनों के बावजूद गरीबी, पुरानी सामाजिक कुरीतियां और संस्थागत तालमेल की कमी बाल विवाह की मुख्य वजहें बनी हुई हैं। भारत के बाल अधिकार कार्यकर्ताओं द्वारा अंतरराष्ट्रीय मंच पर लगातार आवाज उठाए जाने से यह वैश्विक पहल संभव हुई।

- **सामाजिक कुरीतियां और आर्थिक निर्भरता:** कई क्षेत्रों में परिवारों द्वारा बेटियों को आर्थिक बोझ समझना और बिना उनकी सहमति लिए शादी तय कर देना इस समस्या को बढ़ावा देता है। इसी मानसिकता के कारण दुनिया में हर 3 सेकंड में एक बच्ची की शादी कर दी जाती है।
- **पुनर्वास के पुख्ता उपायों का अभाव:** केवल विवाह रुकवा देना पर्याप्त नहीं होता, बल्कि आगे की शिक्षा और आर्थिक सहायता न मिलने से लड़कियां दोबारा उसी चक्र में फंस जाती हैं। तंत्र में संस्थागत सहयोग की इसी कमी को दूर करने की मांग उठाई गई।
- **वैश्विक मंच पर भारतीय पहल:** अधिवक्ता भुवन रिभु और जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक समर्पित दिवस की औपचारिक मांग उठाई। अनेक देशों के एकजुट समर्थन के बाद संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 27 नवंबर को इस दिवस के रूप में मान्यता दी।

## सवाल-जवाब

### 1. अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस किस तारीख को मनाया जाता है?
अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस प्रतिवर्ष 11 अक्टूबर को मनाया जाता है।

### 2. इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस की मुख्य थीम क्या है?
इस वर्ष की थीम बाल विवाह को समाप्त करना और लड़कियों के अधिकारों में निवेश करना है।

### 3. दुनिया भर में हर साल कितनी लड़कियों का बाल विवाह होता है?
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार हर साल 1.2 करोड़ से अधिक लड़कियों की शादी 18 वर्ष की आयु से पहले कर दी जाती है।

### 4. संयुक्त राष्ट्र ने बाल और जबरन विवाह के खिलाफ कौन सा नया अंतरराष्ट्रीय दिवस घोषित किया है?
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने हर साल 27 नवंबर को बाल और जबरन विवाह के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाने का प्रस्ताव पारित किया है।

### 5. संयुक्त राष्ट्र में इस विशेष दिवस की मांग किसने रखी थी?
जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के संस्थापक और बाल अधिकार अधिवक्ता भुवन रिभु ने यह मांग रखी थी।

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