# चुनाव आयोग के खिलाफ धरने के बीच गृह मंत्रालय से बातचीत की अफवाह खारिज, आकाशवाणी भवन पर डटे विपक्षी नेता हिरासत में लिए गए

> कांग्रेस नेताओं के धरने को लेकर गृह मंत्रालय के संपर्क साधने के दावों को आधिकारिक तौर पर पूरी तरह गलत बताया गया है। मुख्य चुनाव आयुक्त से मुलाकात की मांग को लेकर निर्वाचन सदन की ओर मार्च कर रहे विपक्षी नेताओं को पुलिस ने रोककर हिरासत में लिया।

**Type:** article · **Category:** बिहार · **Published:** 2026-10-06 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/bihar/election-commission-ke-khilapha-dharane-ke-bicha-mha-se-batachita-ki-aphavaha-kharija-akashvani-bhavan-para-date-vipakshi-neta-hir-44088 · **Language:** Hindi
**Tags:** राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, चुनाव आयोग, गृह मंत्रालय, आकाशवाणी भवन, किरन रिजिजू, फैक्ट चेक

नई दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्षी दलों के तीखे तेवरों के बीच सोशल मीडिया पर फैली एक चर्चा को आधिकारिक जांच में पूरी तरह बेबुनियाद करार दिया गया है। इंटरनेट पर कुछ पोस्ट्स में दावा किया जा रहा था कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा से सीधे बातचीत की है और उनसे आकाशवाणी भवन के पास चल रहा विरोध प्रदर्शन खत्म करने की अपील की है। प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो की फैक्ट चेक यूनिट ने इन सभी बातों को भ्रामक और मनगढ़ंत बताते हुए साफ किया कि सरकार या मंत्रालय की तरफ से ऐसी कोई पहल नहीं की गई है। इसके साथ ही आम जनता से भी अपील की गई है कि वे अपुष्ट अफवाहों के बहकावे में आने के बजाय केवल प्रामाणिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें।

वायरल संदेशों में यह दावा भी किया जा रहा था कि विपक्षी नेताओं ने बातचीत के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों को दो टूक कह दिया है कि जब तक चुनाव आयुक्तों से सीधे मिलने का समय नहीं मिलता, तब तक यह धरना जारी रहेगा। हालांकि, आधिकारिक जांच एजेंसी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर स्पष्ट संदेश जारी कर साफ कर दिया कि मंत्रालय के संपर्क साधने की खबर झूठी है और इसमें कोई सच्चाई नहीं है।

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## निर्वाचन सदन मार्च रोकने के बाद आकाशवाणी भवन पर धरना
विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक के तमाम दलों ने मतदाता सूचियों के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी एसआईआर के मसले पर चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। विपक्षी सांसदों और नेताओं का कहना है कि वे इस चुनावी प्रक्रिया से जुड़े गंभीर सवालों को चुनाव आयोग के सामने प्रत्यक्ष रूप से उठाना चाहते हैं, लेकिन उन्हें मिलने का अवसर नहीं दिया जा रहा है। इसी मांग को लेकर विपक्षी दलों का एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल संसद परिसर की तरफ से निर्वाचन सदन के लिए पैदल मार्च कर रहा था, लेकिन सुरक्षा बलों ने बैरिकेड लगाकर उन्हें रास्ते में ही रोक दिया।

रास्ता रोके जाने के बाद नाराज विपक्षी सांसद और नेता पास में ही स्थित आकाशवाणी भवन के बाहर सड़क पर बैठकर धरने पर बैठ गए। विपक्ष ने इस पूरे विरोध प्रदर्शन को अपने सेव डेमोक्रेसी अभियान के तहत आयोजित किया था। धरने के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा सहित कई प्रमुख नेताओं को हिरासत में ले लिया। इसके अलावा यूथ कांग्रेस और एनएसयूआई के कई कार्यकर्ताओं व पदाधिकारियों को भी प्रदर्शन स्थल से हिरासत में लिया गया, जिनमें भारतीय युवा कांग्रेस के अध्यक्ष उदय भानु चिब भी शामिल रहे।

## चुनाव आयुक्तों से जवाब मांगने का अधिकार: राहुल गांधी
सड़क पर धरने के दौरान राहुल गांधी ने सरकार और चुनाव आयोग के रवैये पर कड़े सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि विपक्ष के करीब 300 सांसदों को जबरन रोका गया और वहां से हटाया गया, जिसके कारण उन्हें सड़क पर आकर बैठना पड़ा। राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि विपक्षी प्रतिनिधिमंडल का इरादा केवल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और अन्य चुनाव आयुक्तों से शांतिपूर्ण ढंग से मिलकर देशभर में मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण पर जवाब मांगना था।

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि देश के अंदर लोकतांत्रिक संस्थाओं और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया को जानबूझकर कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था पर एकाधिकार जमाने की कोशिशें हो रही हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष केवल संविधान और जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहा है। इसके साथ ही उन्होंने मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों से सवाल किया कि अगर सांसदों को यहां भी बैठने की अनुमति नहीं है, तो वे स्पष्ट बताएं कि देश में ऐसी कौन सी जगह बची है जहां बैठकर वे अपनी आवाज शांतिपूर्ण तरीके से उठा सकते हैं।

## किरन रिजिजू का कांग्रेस के रुख पर पलटवार
दूसरी तरफ, विपक्षी नेताओं के इस विरोध प्रदर्शन पर सरकार की ओर से केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरन रिजिजू ने तीखा जवाब दिया। उन्होंने कांग्रेस और राहुल गांधी के रुख की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि संवैधानिक संस्थाओं को लगातार कठघरे में खड़े करने से न तो लोकतंत्र मजबूत होता है और न ही इससे किसी दल को जनता का समर्थन हासिल हो सकता है।

किरन रिजिजू ने कहा कि चुनाव आयोग और देश की सर्वोच्च अदालत जैसी सम्मानित संस्थाओं को निशाना बनाकर किया जाने वाला यह राजनीतिक आचरण जनता को रास नहीं आने वाला है। उन्होंने विपक्षी नेतृत्व को सलाह दी कि वे इस तरह के रोजमर्रा के राजनीतिक हंगामे को बंद करें और लोगों के बीच जाकर जनसेवा के वास्तविक कार्यों पर अपना ध्यान केंद्रित करें। उनके अनुसार किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में मतदाताओं का भरोसा केवल जनता के बीच रहकर जमीनी काम करने से ही कमाया जा सकता है, संस्थाओं को बदनाम करने से नहीं।

## इसका आप पर असर
संसद मार्ग और आसपास के इलाकों में यातायात और सामान्य आवागमन पर इस बड़े राजनीतिक विरोध प्रदर्शन का सीधा असर देखने को मिला।

- **भारत में:** संसद सत्र और राष्ट्रीय राजनीति के दौरान चुनावी विश्वसनीयता और मतदाता सूची सुधार जैसे मुद्दों पर राजनीतिक बहस तेज हो सकती है। आम नागरिकों को मतदाता सूचियों में अपने नामों की पुष्टि करने और चुनाव आयोग की आधिकारिक सूचनाओं पर नजर रखने की जरूरत बनी रहेगी।
- **नई दिल्ली में:** आकाशवाणी भवन और निर्वाचन सदन की तरफ जाने वाले मध्य दिल्ली के रास्तों पर भारी सुरक्षा व्यवस्था और बैरिकेडिंग से दैनिक आवागमन प्रभावित रहा। कनॉट प्लेस और इंडिया गेट के बीच सफर करने वाले यात्रियों को अतिरिक्त समय लेकर निकलने और डायवर्जन की जानकारी रखने की सलाह दी गई।
- **इंटरनेट उपयोगकर्ताओं के लिए:** सोशल मीडिया पर राजनीतिक घटनाक्रमों से जुड़ी भ्रामक पोस्ट्स को बिना पुष्टि के आगे साझा करने से बचना आवश्यक है। किसी भी संवेदनशील सरकारी फैसले की सत्यता परखने के लिए केवल आधिकारिक सूचना मंचों का सहारा लें।
- **मतदाताओं के लिए:** स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन प्रक्रिया को लेकर चल रहे विवाद के बीच मतदाताओं को अपने बूथ स्तर के अधिकारियों से मतदाता पर्ची व विवरण की जांच कर लेनी चाहिए। इससे आगामी चुनावों में नाम कटने या गलत दर्ज होने की किसी भी समस्या से समय रहते बचा जा सकेगा।

## ऐसा क्यों हुआ
यह पूरा गतिरोध मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण पर विपक्षी दलों की चिंताओं और चुनाव आयोग के अधिकारियों से मिलने की अनुमति न मिलने के कारण पैदा हुआ।

- **सीधा कारण:** विपक्षी दलों का आरोप था कि उन्हें स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी एसआईआर से जुड़े सवालों पर मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों से मिलने का समय नहीं दिया गया। इसी उपेक्षा के विरोध में इंडिया ब्लॉक के सांसदों ने निर्वाचन सदन तक मार्च निकालने का फैसला किया।
- **मार्च रोकने से भड़का धरना:** सुरक्षा बलों द्वारा सांसदों को रास्ते में ही बैरिकेड लगाकर रोक दिए जाने के बाद विपक्षी नेताओं ने वहीं सड़क पर आकाशवाणी भवन के पास धरना शुरू कर दिया। इस धरने के दौरान भ्रामक सूचनाएं फैलने लगीं कि गृह मंत्रालय इस गतिरोध को सुलझाने के लिए सीधे दखल दे रहा है।
- **फैक्ट चेक की आवश्यकता:** सोशल मीडिया पर अनधिकृत अकाउंट्स से सरकारी हस्तक्षेप के मनगढ़ंत दावे किए जाने लगे, जिसके बाद आधिकारिक फैक्ट चेक इकाई को स्थिति स्पष्ट करने के लिए सामने आना पड़ा।

## सवाल-जवाब

### 1. गृह मंत्रालय और कांग्रेस नेताओं के संपर्क को लेकर क्या दावा किया गया था?
सोशल मीडिया पर दावा किया गया था कि गृह मंत्रालय ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से संपर्क कर आकाशवाणी भवन पर जारी धरना खत्म करने को कहा है, जिसे आधिकारिक रूप से फर्जी बताया गया।

### 2. विपक्षी नेता निर्वाचन सदन की ओर मार्च क्यों कर रहे थे?
विपक्षी सांसद देशभर में मतदाता सूचियों के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों से मिलकर सवाल पूछना चाहते थे।

### 3. पुलिस ने आकाशवाणी भवन के बाहर किन प्रमुख नेताओं को हिरासत में लिया?
दिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और भारतीय युवा कांग्रेस के अध्यक्ष उदय भानु चिब समेत कई विपक्षी नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया।

### 4. इस विरोध प्रदर्शन पर केंद्रीय मंत्री किरन रिजिजू ने क्या टिप्पणी की?
किरन रिजिजू ने कहा कि चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट जैसी संवैधानिक संस्थाओं पर बार-बार हमला करने से लोकतंत्र को लाभ नहीं होगा और विपक्ष को जनता की सेवा पर ध्यान देना चाहिए।

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