# गंडक का कहर: हैजलपुर में तटबंध टूटने से नेशनल हाईवे 722 डूबा, सारण के गांवों में भारी तबाही

> बिहार के सारण जिले में गंडक नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने और हैजलपुर में बांध क्षतिग्रस्त होने से कई पंचायतें जलमग्न हो गई हैं। छपरा-मुजफ्फरपुर हाईवे पर पांच फीट तक पानी भरने से यातायात ठप हो गया है और राहत कार्य जारी है।

**Type:** article · **Category:** बिहार · **Published:** 2026-10-03 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/bihar/gandak-ka-kahara-haijalpur-men-tatabndha-tutane-se-national-highway-722-duba-saran-ke-ganvon-men-bhari-tabahi-42341 · **Language:** Hindi
**Tags:** सारण बाढ़, गंडक नदी, नेशनल हाइवे 722, मकेर, हैजलपुर बांध, बिहार बाढ़ आपदा, एनडीआरएफ रेस्क्यू

बिहार के सारण जिले में गंडक नदी के उफान ने भीषण तबाही मचा दी है। बीती रात से नदी के जलस्तर में जिस तीव्र गति से इजाफा हुआ, उसने जिले की कई पंचायतों को अपनी चपेट में ले लिया है। इस जलप्रलय का सबसे गंभीर असर छपरा से मुजफ्फरपुर को जोड़ने वाले नेशनल हाइवे 722 पर देखने को मिल रहा है। मकेर इलाके से गुजरने वाला यह महत्वपूर्ण राजमार्ग लगभग 3 से 4 किलोमीटर के दायरे में पूरी तरह बाढ़ के पानी में समा चुका है। सड़क पर 3 फीट से लेकर 5 फीट तक पानी बह रहा है, जिसके चलते इस मार्ग पर वाहनों का आवागमन पूरी तरह बंद हो गया है।

## नेशनल हाईवे पर जलभराव और फंसे लोग
सड़क पर तेज धारा के साथ पानी भरने से हाईवे के किनारे बसे गांवों और बस्तियों में लोग चारों तरफ से पानी से घिर गए हैं। इलाके में बने घरों में पानी घुस जाने से सामान्य जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। जलमग्न इलाकों से प्रभावित ग्रामीणों को बाहर निकालने के लिए जिला प्रशासन की ओर से NDRF और SDRF की विशेष टीमों को तैनात किया गया है। बचाव दल कई मोटरबोट के जरिए फंसे हुए ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की कोशिश में जुटा है। हालांकि, स्थानीय ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि इस आपदा के विशाल पैमाने को देखते हुए तैनात बचाव दल नाकाफी साबित हो रहे हैं और मौके पर राहत टीमों की तादाद में तत्काल बढ़ोतरी की जानी चाहिए।

## जान जोखिम में डालकर पलायन करने को मजबूर ग्रामीण
धरातल पर स्थिति बेहद विकट बनी हुई है। जिन परिवारों को समय पर प्रशासन की मोटरबोट या नावें उपलब्ध नहीं हो सकीं, वे अपने बच्चों और बुजुर्गों की सलामती के लिए खुद ही गहरे पानी में उतर पड़े। ग्रामीण तेज बहाव और कमर तक भरे पानी के बीच पैदल ही चलकर सुरक्षित ऊंचे ठिकानों की ओर बढ़ते देखे गए। लोग अपने मवेशियों को बचाने के लिए उन्हें भी इसी जलमग्न रास्ते से खींचते हुए ले जा रहे हैं। इसी कठिन परिस्थिति के बीच बचाव में लगे एक पुलिसकर्मी ने अपनी जान की परवाह किए बिना दो छोटे बच्चों को गोद में उठाकर सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया।

## हैजलपुर में बांध टूटने से गहराया संकट
स्थानीय निवासियों के अनुसार, मकेर प्रखंड के हैजलपुर में बांध के क्षतिग्रस्त होने की वजह से पानी तेजी से रिहायशी इलाकों और खेतों में फैल गया। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि इससे पहले वर्ष 2020 में भी नेशनल हाइवे पर बाढ़ का पानी चढ़ा था, लेकिन उस समय मौजूदा हालात जैसी बर्बादी नहीं हुई थी। इस ताजा प्रलय के चलते हजारों परिवार बेघर हो गए हैं और उन्हें अपना घर-बार तथा गृहस्थी छोड़कर केवल जान बचाने के लिए पलायन करना पड़ रहा है। प्रभावित क्षेत्रों में खाने-पीने और सुरक्षित आश्रय को लेकर भारी संकट खड़ा हो गया है।

## इसका आप पर असर
सारण में नेशनल हाइवे 722 के डूबने और गांवों में जलभराव से छपरा और मुजफ्फरपुर के बीच सीधा सड़क संपर्क पूरी तरह ठप हो गया है।

- **भारत में:** उत्तर बिहार से गुजरने वाली अंतरराज्यीय माल ढुलाई और लंबी दूरी के सड़क परिवहन को वैकल्पिक मार्गों से डायवर्ट किया जा रहा है। यात्रियों और मालवाहक वाहनों को इस पूरे कॉरिडोर पर अतिरिक्त समय और यात्रा लागत का सामना करना पड़ेगा।
- **सारण में:** मकेर और आसपास की पंचायतों के हजारों विस्थापित परिवारों के समक्ष भोजन, स्वच्छ पेयजल और सूखे आश्रय की गंभीर समस्या खड़ी हो गई है। एनएच 722 पर 3 से 5 फीट पानी होने से छपरा-मुजफ्फरपुर रूट पर स्थानीय निजी और सार्वजनिक आवागमन पूरी तरह बंद है।
- **प्रभावित ग्रामीणों के लिए:** निचले इलाकों में रहने वाले परिवारों को सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों का रुख करना पड़ रहा है। पशुपालकों के लिए मवेशियों का चारा और उनकी सुरक्षा तत्काल चिंता का विषय बन गई है।
- **यात्रियों के लिए:** छपरा से मुजफ्फरपुर जाने वाले यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे जलस्तर घटने तक इस हाईवे पर जाने से बचें। वैकल्पिक ग्रामीण या राजकीय मार्गों की स्थिति की जानकारी लेकर ही यात्रा शुरू करें।

## ऐसा क्यों हुआ
गंडक नदी के जलस्तर में अप्रत्याशित वृद्धि और मकेर के हैजलपुर में स्थित सुरक्षा तटबंध के टूटने के कारण यह भीषण बाढ़ आई है।

- **तटबंध का टूटना:** मकेर प्रखंड के हैजलपुर में स्थित सुरक्षा बांध के क्षतिग्रस्त होने से नदी का भारी जलप्रवाह सीधे रिहायशी बस्तियों और खेतों की तरफ मुड़ गया। सुरक्षा दीवार के धंसते ही पानी ने कम समय में बड़े भूभाग को अपनी चपेट में ले लिया।
- **गंडक नदी का बढ़ा जलस्तर:** बीती रात से गंडक नदी में जलप्रवाह अचानक अत्यंत तीव्र गति से बढ़ा, जिससे सहायक जलमार्गों और किनारों पर दबाव अत्यधिक बढ़ गया। नदी का पानी किनारों को पार कर मकेर क्षेत्र के नेशनल हाईवे 722 पर चढ़ गया।
- **ऐतिहासिक पृष्ठभूमि:** ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 2020 में भी इस हाईवे पर बाढ़ का पानी जमा हुआ था, लेकिन उस दौरान पानी का फैलाव और तबाही मौजूदा हालात जितनी भयावह नहीं थी। इस बार जलप्रवाह का वेग अधिक होने से नुकसान कई गुना बढ़ गया है।
- **प्रशासनिक कदम:** जलभराव के बाद जिला प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने और फंसे लोगों को निकालने के लिए NDRF और SDRF की कई मोटरबोट्स उतारी हैं। हालांकि, प्रभावित क्षेत्रों के नागरिक राहत अभियानों के दायरे को और बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. सारण जिले में बाढ़ का मुख्य कारण क्या है?
गंडक नदी में बीती रात से जलस्तर का तेजी से बढ़ना और मकेर के हैजलपुर में बांध का क्षतिग्रस्त होना बाढ़ का मुख्य कारण है।

### 2. नेशनल हाइवे 722 का कौन सा हिस्सा बाढ़ से प्रभावित हुआ है?
छपरा से मुजफ्फरपुर जाने वाले नेशनल हाइवे 722 का मकेर से गुजरने वाला 3 से 4 किलोमीटर का हिस्सा 3 से 5 फीट पानी में डूब गया है।

### 3. बाढ़ प्रभावित इलाकों में बचाव कार्य के लिए किन टीमों को लगाया गया है?
जिला प्रशासन ने पानी में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए NDRF और SDRF की टीमों को कई मोटरबोट के साथ तैनात किया है।

### 4. स्थानीय ग्रामीणों की प्रशासन से क्या मांग है?
बाढ़ पीड़ित ग्रामीणों का कहना है कि वर्तमान में तैनात NDRF और SDRF की टीमें आपदा के स्तर के मुकाबले नाकाफी हैं, इसलिए राहत दलों की संख्या बढ़ाई जाए।

### 5. क्या इस इलाके में पहले भी इस तरह की बाढ़ आई थी?
ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 2020 में भी नेशनल हाइवे पर बाढ़ का पानी चढ़ा था, लेकिन उस समय मौजूदा हालात जैसी भारी बर्बादी नहीं हुई थी।

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