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  "title": "ग्रीन पटाखों में बैरियम के इस्तेमाल पर केंद्र के दो बोर्ड भिड़े, अब सुप्रीम कोर्ट करेगा अंतिम फैसला",
  "summary": "ग्रीन पटाखों में बैरियम नाइट्रेट के इस्तेमाल को लेकर सीपीसीबी और नीरी के बीच विवाद गहरा गया है। पर्यावरण मंत्रालय ने इस मामले पर फैसला अब सुप्रीम कोर्ट पर छोड़ दिया है।",
  "content": "दिवाली से ठीक पहले कम प्रदूषण फैलाने वाले ग्रीन पटाखों के व्यावसायिक उत्पादन को लेकर दो प्रमुख सरकारी संस्थान आमने-सामने आ गए हैं। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) और राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-नीरी) के बीच ग्रीन पटाखों में बैरियम नाइट्रेट के इस्तेमाल पर गंभीर मतभेद पैदा हो गए हैं। इस विवाद के बीच केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने खुद कोई अंतिम फैसला लेने के बजाय पूरे मामले की गेंद सुप्रीम कोर्ट के पाले में डाल दी है। अब सर्वोच्च अदालत तय करेगी कि देश में बैरियम युक्त ग्रीन पटाखों का निर्माण और बिक्री जारी रहेगी या इस पर पूर्ण पाबंदी लगेगी।\n\nसीपीसीबी और सीएसआईआर-नीरी के बीच क्यों छिड़ा विवाद\nग्रीन पटाखों को पारंपरिक आतिशबाजी के सुरक्षित विकल्प के रूप में विकसित किया गया था। केंद्र सरकार ने सीएसआईआर-नीरी को ऐसे पटाखे तैयार करने का जिम्मा सौंपा था, जो हवा में 50 प्रतिशत से अधिक प्रदूषण को कम कर सकें। नीरी ने अपनी शोध रिपोर्ट में दावा किया कि उसके नए फॉर्मूलेशन से वायु प्रदूषण में 40 से 60 प्रतिशत तक की गिरावट आती है। इसमें PM10 और PM2.5 के हानिकारक कणों के उत्सर्जन को 45 से 60 प्रतिशत तक घटाने का दावा शामिल था। नीरी ने फूलदान, स्पार्कलर, चक्कर, पेंसिल, ट्विंकलिंग स्टार और उनके हाइब्रिड जैसे प्रकाश उत्सर्जित करने वाले पटाखों के व्यावसायिक निर्माण की सिफारिश की थी। इसके साथ ही, शीर्ष अदालत द्वारा प्रतिबंधित लड़ी या जॉइन्ड क्रैकर्स के निर्माण को भी इस आधार पर मंजूरी देने की बात कही गई कि उनसे कण उत्सर्जन में करीब 30 प्रतिशत और ठोस कचरे में 32 प्रतिशत तक की कमी देखी गई है।\n\nउद्योग का रुख और पीईएसओ का अनापत्ति प्रमाण पत्र\nनीरी के इस वैज्ञानिक फॉर्मूलेशन के आधार पर तमिलनाडु फायरवर्क्स एंड अमोरसेज मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (टैनफामा) ने पटाखों में बैरियम साल्ट और बैरियम नाइट्रेट की मात्रा को कम करके अन्य ऑक्सीडाइजर के साथ नए उत्पाद तैयार किए। इसके बाद पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव्स सेफ्टी ऑर्गनाइजेशन (पीईएसओ) ने इन नए फॉर्मूलेशन को अपनी सहमति देते हुए अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी कर दिया। इस मंजूरी के चलते पिछले कुछ वर्षों में ये ग्रीन पटाखे बाजार में धड़ल्ले से बिकने लगे और लोगों ने त्योहारों पर इनका इस्तेमाल भी किया। हालांकि, अब सीपीसीबी के कड़े रुख ने उद्योग और आम लोगों दोनों के सामने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।\n\nसुप्रीम कोर्ट के 2018 के आदेश के उल्लंघन का तर्क\nसीपीसीबी ने इस पूरी व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाते हुए बैरियम नाइट्रेट के इस्तेमाल पर कड़ा ऐतराज जताया है। बोर्ड का स्पष्ट कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने 23 अक्टूबर 2018 को जारी अपने ऐतिहासिक आदेश में पटाखों में बैरियम साल्ट के इस्तेमाल पर पूरी तरह से रोक लगा दी थी। ऐसे में किसी भी फॉर्मूलेशन में बैरियम यौगिक की मात्रा भले ही कम कर दी गई हो, लेकिन उसका उपयोग जारी रखना अदालत के आदेश का स्पष्ट उल्लंघन है। इसके अलावा सीपीसीबी का यह भी मानना है कि नीरी ने अपने परीक्षणों में PM10 और PM2.5 के उत्सर्जन में कमी का जो दावा किया है, उसकी तुलना पूरी तरह से बैरियम-रहित पटाखों या अन्य बेहतर कम-उत्सर्जन वाले पटाखों से नहीं की गई है। इस वजह से ग्रीन पटाखों से प्रदूषण कम होने का नीरी का दावा अधूरा और अनिर्णायक साबित होता है।\n\nपर्यावरण मंत्रालय ने दाखिल किया हलफनामा\nदोनों स्वायत्त संस्थाओं के विपरीत और विरोधाभासी रुख को देखते हुए केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने खुद फैसला सुनाने से पीछे हटने का रास्ता चुना है। मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट में एक विस्तृत हलफनामा दायर करके पूरी स्थिति स्पष्ट की है। मंत्रालय ने अदालत से अनुरोध किया है कि ग्रीन पटाखों के व्यावसायिक उत्पादन और उनकी बिक्री की इजाजत पर अंतिम निर्णय सर्वोच्च अदालत ही करे। इस हलफनामे के बाद अब सभी की निगाहें सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई पर टिक गई हैं, जिससे तय होगा कि आगामी दिवाली पर देशवासी ग्रीन पटाखे चला सकेंगे या नहीं।\n\nइसका आप पर असर\n• भारत भर में: सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला देश में त्योहारों के दौरान पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल की कानूनी स्थिति तय करेगा।\n• तमिलनाडु में: शिवकासी के पटाखा निर्माण उद्योग और लाखों श्रमिकों की आजीविका पर इसका सीधा असर पड़ेगा यदि बैरियम युक्त पटाखों पर रोक लगाई जाती है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. सीपीसीबी और सीएसआईआर-नीरी के बीच विवाद की मुख्य वजह क्या है?\nमुख्य विवाद ग्रीन पटाखों में बैरियम नाइट्रेट के इस्तेमाल को लेकर है, जिसे सीपीसीबी हानिकारक प्रदूषण फैलाने वाला तत्व मानता है जबकि नीरी ने इसके सीमित उपयोग को मंजूरी दी थी।\n\n2. सुप्रीम कोर्ट ने बैरियम साल्ट पर कब प्रतिबंध लगाया था?\nसुप्रीम कोर्ट ने 23 अक्टूबर 2018 को जारी अपने आदेश में पटाखों में बैरियम साल्ट के इस्तेमाल पर स्पष्ट प्रतिबंध लगाया था।\n\n3. सीएसआईआर-नीरी ने ग्रीन पटाखों को लेकर क्या दावा किया था?\nनीरी ने दावा किया था कि नए फॉर्मूलेशन से वायु प्रदूषण में 40 से 60 प्रतिशत और PM10 व PM2.5 के उत्सर्जन में 45 से 60 प्रतिशत तक की कमी आती है।\n\n4. सीपीसीबी ने नीरी की रिपोर्ट पर क्या आपत्ति उठाई है?\nसीपीसीबी का कहना है कि नीरी ने उत्सर्जन में कमी की तुलना बैरियम-रहित ग्रीन पटाखों से नहीं की, जिससे उनका दावा अधूरा और अनिर्णायक रह जाता है।\n\n5. इस मामले में पर्यावरण मंत्रालय का क्या रुख है?\nकेंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर व्यावसायिक उत्पादन पर अंतिम निर्णय अदालत पर ही छोड़ दिया है।",
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  "category": "बिहार",
  "publishedAt": "2026-07-27",
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