जहानाबाद में मिला थाईलैंड का दुर्लभ आम, एक फल का वज़न करीब 4 किलो जहानाबाद जिले की एक नर्सरी में थाईलैंड से मंगाई गई आम की खास किस्म पहुंची है, जिसका एक फल कटहल जैसा दिखता है और करीब 3.5 से 4 किलोग्राम तक वजन का होता है। बिहार के जहानाबाद जिले की एक निजी नर्सरी में आम की एक ऐसी प्रजाति पहुंची है, जिसे देखकर लोग हैरान रह जाते हैं। इस आम का साइज कटहल जितना बड़ा है और एक फल का वजन करीब 3.5 से 4 किलोग्राम तक होता है। थाईलैंड से मंगाई गई इस किस्म को थाई 4KG मैंगो के नाम से जाना जाता है, और अब यह जहानाबाद के कई घरों तक भी पहुंच चुकी है। थाईलैंड से मंगाई गई खास किस्म जहानाबाद के कनौदी इलाके में एक निजी नर्सरी चलाने वाले सत्येंद्र नारायण सिंह हमेशा कुछ नया और अलग पौधा अपनी नर्सरी में लेकर आते हैं। इस बार उन्होंने विदेश से आम की जो किस्म मंगाई है, उसका नाम सुनकर ही लोगों को यकीन नहीं होता। यह प्रजाति थाई 4KG मैंगो कहलाती है और इसकी खासियत इसका वजन है। आमतौर पर आम कुछ सौ ग्राम के होते हैं, लेकिन इस किस्म का एक फल औसतन 3.5 से 4 किलोग्राम तक का निकलता है। सत्येंद्र नारायण बताते हैं कि यह बेहद दुर्लभ और अलग किस्म की विदेशी प्रजाति है, इसी वजह से उन्होंने इसे खासतौर पर मंगवाकर जहानाबाद की अपनी नर्सरी में लगाया। कटहल जैसा आकार, कस्टमर्स का रिस्पॉन्स भी अच्छा इस आम की सबसे अलग पहचान इसका आकार है, जो सामान्य आम की तरह नहीं बल्कि कटहल जैसा नजर आता है। शुरुआत में जब यह प्रजाति नर्सरी में आई तो लोगों को इस पर यकीन करना मुश्किल हो रहा था, लेकिन जैसे ही इसकी जानकारी फैली, ग्राहकों की दिलचस्पी बढ़ने लगी। अब इस प्रजाति के पौधे कुछ घरों तक भी पहुंच चुके हैं और ग्राहकों की तरफ से अब तक अच्छा रिव्यू मिल रहा है। इससे पहले बिहार में जर्दालु और दीघा मालदा आम की चर्चा सबसे ज्यादा होती रही है, क्योंकि इनके स्वाद के दीवाने राज्यभर में मौजूद हैं। लेकिन थाई 4KG मैंगो अपने आकार और वजन की वजह से अब इन दोनों किस्मों से अलग पहचान बना रहा है। 10 साल से नर्सरी चला रहे हैं सत्येंद्र नारायण सत्येंद्र नारायण सिंह पिछले 10 साल से पौधों की नर्सरी चला रहे हैं और उनके पास फूल और फल की कई प्रजातियां मौजूद हैं। वो बताते हैं कि नर्सरी शुरू करने के पीछे सोच यही थी कि कुछ अलग किया जाए। इसी सोच के साथ उन्होंने पौधों की नर्सरी की शुरुआत की। साथ ही उनका मकसद पर्यावरण को बढ़ावा देना भी रहा है, ताकि बिहार हरा भरा बना रहे। इसी उद्देश्य के तहत उन्होंने ऐसे पौधे बाहर से मंगवाने शुरू किए, जो बहुत कम लोगों के पास मिलते हैं। इसी कड़ी में उन्होंने थाई 4KG मैंगो किस्म को भी जहानाबाद पहुंचाया, जो दुर्लभ प्रजाति के पौधों के शौकीन लोगों के लिए बेहतरीन विकल्प माना जा रहा है। बारिश के मौसम में क्यों की जाती है आम की रोपाई आम को देश का राष्ट्रीय फल माना जाता है और इसका स्वाद हर उम्र के लोगों को पसंद आता है। भले ही आम का सीजन अब खत्म हो चुका हो, लेकिन पौधे लगाने के लिहाज से बरसात का मौसम सबसे सही माना जाता है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक इस मौसम में लगाए गए पौधों के जीवित रहने की संभावना ज्यादा रहती है, क्योंकि मिट्टी में नमी बनी रहती है और जड़ों को आसानी से मजबूती मिलती है। यही वजह है कि जहानाबाद की इस नर्सरी में थाई 4KG मैंगो जैसी दुर्लभ किस्मों की रोपाई के लिए भी बरसात के मौसम को सबसे उपयुक्त समय बताया जा रहा है। इसका आप पर असर • भारत में: बागवानी के शौकीनों और किसानों के लिए यह जानकारी काम की है कि बरसात का मौसम आम समेत कई फलदार पौधों की रोपाई के लिए सबसे मुफीद माना जाता है। • जहानाबाद में: स्थानीय लोगों के पास अब थाई 4KG मैंगो जैसी दुर्लभ किस्म का पौधा या फल हासिल करने का मौका है, जो अब तक शहर में उपलब्ध नहीं था। सवाल-जवाब 1. थाई 4KG मैंगो का एक फल कितने वजन का होता है? इस किस्म के एक आम का वजन करीब 3.5 से 4 किलोग्राम तक होता है। 2. यह आम किस देश से मंगाया गया है? यह दुर्लभ किस्म थाईलैंड से जहानाबाद की नर्सरी में लाई गई है। 3. यह नर्सरी कहां स्थित है और इसे कौन चलाता है? यह निजी नर्सरी जहानाबाद के कनौदी इलाके में है, जिसे सत्येंद्र नारायण सिंह चलाते हैं। 4. आम की रोपाई के लिए सबसे सही मौसम कौन सा माना जाता है? एक्सपर्ट्स के मुताबिक बरसात का मौसम पौधों की रोपाई के लिए सबसे उपयुक्त होता है, क्योंकि इससे पेड़ के जीवित रहने की संभावना बढ़ जाती है। 5. बिहार में अब तक कौन-सी आम की किस्में सबसे ज्यादा मशहूर रही हैं? बिहार में जर्दालु और दीघा मालदा आम की सबसे ज्यादा चर्चा होती रही है। 6. सत्येंद्र नारायण सिंह कब से नर्सरी चला रहे हैं? वो पिछले 10 साल से पौधों की नर्सरी चला रहे हैं। https://trendkia.com/bihar/jahanabad-men-mila-thailand-ka-durlabha-ama-eka-phala-ka-vazana-kariba-4-kilo-13899 TrendKia — Har trend, sabse pehle.