# जमीन की जमाबंदी के नाम पर मांगी घूस, धनरूआ में क्लर्क शैलेश कुमार 50 हजार रुपये लेते धरा गया

> पटना जिले के धनरूआ अंचल कार्यालय में निगरानी विभाग ने क्लर्क शैलेश कुमार को खानदानी जमीन की जमाबंदी के एवज में 50,000 रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया।

**Type:** article · **Category:** बिहार · **Published:** 2026-07-07 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/bihar/jamina-ki-jamabndi-ke-nama-para-mangi-ghusa-dhanrua-men-klarka-shailesh-kumar-50-hajara-rupaye-lete-dhara-gaya-5398 · **Language:** Hindi
**Tags:** विजिलेंस, भ्रष्टाचार, पटना, अंचल क्लर्क, रिश्वतखोरी, बिहार भ्रष्टाचार, जमाबंदी घोटाला, सम्राट चौधरी

बिहार में भ्रष्टाचार पर सम्राट चौधरी की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत निगरानी विभाग ने पटना में बड़ी कार्रवाई करते हुए एक अंचल क्लर्क को 50,000 रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया है। पटना के संपतचक अंचल कार्यालय में छापेमारी के दौरान हुई इस गिरफ्तारी के बाद अंचल कार्यालय समेत पूरे प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है।

## क्या है पूरा मामला
बिहार के पटना जिले के धनरूआ अंचल कार्यालय में 6 जुलाई 2026, सोमवार को निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम ने अंचल लिपिक शैलेश कुमार को 50,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए धर दबोचा। आरोप है कि शैलेश कुमार अपनी खानदानी जमीन की जमाबंदी कराने के बदले यह रकम मांग रहा था। शैलेश कुमार पिछले तीन साल से धनरूआ अंचल कार्यालय में लिपिक के पद पर तैनात था। रमनीबीघा गांव के रहने वाले राजकुमार ने इस बाबत निगरानी विभाग में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत की सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद निगरानी विभाग के डीएसपी आसिफ रफीक मेहंदी के नेतृत्व में एक टीम बनाई गई। इस टीम ने सोमवार को अंचल कार्यालय में जाल बिछाया और जैसे ही क्लर्क ने रिश्वत की रकम हाथ में ली, टीम ने उसे गिरफ्तार कर लिया। आरोपी क्लर्क के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है।

जमाबंदी दरअसल जमीन के मालिकाना हक का सरकारी रिकॉर्ड होता है और बिना इसके जमीन से जुड़ा कोई भी सरकारी कागजी काम पूरा नहीं हो पाता। यही वजह है कि आम लोगों को अक्सर अंचल कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ते हैं और वहां रिश्वतखोरी की शिकायतें सामने आती रहती हैं।

## पूछताछ में जुटी निगरानी की टीम
गिरफ्तारी के बाद निगरानी की टीम शैलेश कुमार को अपने साथ पटना स्थित मुख्यालय ले आई, जहां उससे लंबी पूछताछ की जा रही है। विजिलेंस के अधिकारियों के मुताबिक अब यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस घूसखोरी के खेल में अंचल के किसी अन्य वरिष्ठ अधिकारी या खुद अंचलाधिकारी की कोई संलिप्तता तो नहीं है। यानी जांच का दायरा सिर्फ पकड़े गए क्लर्क तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि पूरे कार्यालय के कामकाज पर भी नजर रखी जा रही है।

## लंच के बाद लौटते ही टीम ने दबोचा, दफ्तर में मचा हड़कंप
गिरफ्तारी की खबर फैलते ही कार्यालय में अफरातफरी मच गई और निगरानी की कार्रवाई पूरी होने के बाद पूरे परिसर में सन्नाटा पसर गया। दरअसल अंचल और प्रखंड के सभी कर्मचारी दोपहर का खाना एक ही होटल में खाने जाते हैं। शैलेश कुमार भी भोजन करने के बाद वापस कार्यालय की ओर लौट रहा था, तभी घात लगाकर बैठी निगरानी की टीम ने उसे रंगे हाथों पकड़ लिया। इसके बाद टीम ने अंचलाधिकारी यानी सीओ के कार्यालय की भी जांच की। इस दौरान सीओ कार्यालय का गेट बंद करके करीब 45 मिनट तक अंदर जांच पड़ताल की गई, उसके बाद निगरानी की टीम वहां से रवाना हुई।

## इसका आप पर असर
- **भारत में:** यह मामला दिखाता है कि जमीन से जुड़े सरकारी कामों में कोई कर्मचारी रिश्वत मांगे तो लोग सीधे राज्य के निगरानी विभाग में शिकायत दर्ज करा सकते हैं और दोषी पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
- **पटना में:** धनरूआ अंचल कार्यालय में जमाबंदी कराने के लिए चक्कर काट रहे स्थानीय लोगों को अब उम्मीद है कि विजिलेंस की सख्ती से बिना घूस दिए भी उनका काम हो सकेगा।

## सवाल-जवाब

### 1. क्लर्क शैलेश कुमार को किस मामले में गिरफ्तार किया गया?
उसे अपनी खानदानी जमीन की जमाबंदी कराने के एवज में 50,000 रुपये रिश्वत मांगने और लेने के आरोप में गिरफ्तार किया गया।

### 2. गिरफ्तारी कब और कहां हुई?
6 जुलाई 2026, सोमवार को पटना जिले के धनरूआ अंचल कार्यालय में यह गिरफ्तारी हुई।

### 3. इस मामले की शिकायत किसने की थी?
रमनीबीघा गांव के रहने वाले राजकुमार ने निगरानी विभाग में इसकी शिकायत दर्ज कराई थी।

### 4. कार्रवाई का नेतृत्व किसने किया?
निगरानी विभाग के डीएसपी आसिफ रफीक मेहंदी के नेतृत्व में टीम ने जाल बिछाकर क्लर्क को रंगे हाथों पकड़ा।

### 5. आरोपी पर कौन सा कानून लगाया गया है?
आरोपी क्लर्क शैलेश कुमार के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।

### 6. क्या इस मामले में अन्य अधिकारी भी जांच के दायरे में हैं?
हां, निगरानी अधिकारी यह जांच कर रहे हैं कि इस घूसखोरी में अंचल के किसी अन्य वरिष्ठ अधिकारी या अंचलाधिकारी की भूमिका तो नहीं है।

### 7. शैलेश कुमार कितने समय से इस पद पर था?
वह पिछले तीन साल से धनरूआ अंचल कार्यालय में लिपिक के पद पर कार्यरत था।

### 8. क्लर्क को कैसे रंगे हाथों पकड़ा गया?
दोपहर का खाना खाकर वापस कार्यालय लौटते समय घात लगाए बैठी निगरानी टीम ने उसे रिश्वत की रकम के साथ पकड़ लिया।

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