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  "type": "article",
  "title": "जातीय जनगणना की नई प्रश्नावली पर कांग्रेस, आरजेडी और टीएमसी हमलावर, 10वें प्रश्न को रद्द करने की मांग",
  "summary": "गृह मंत्रालय की 40 सवालों वाली जनगणना प्रश्नावली के 10वें सवाल को लेकर विवाद बढ़ गया है। विपक्ष ने इसे अस्पष्ट बताते हुए प्रश्नावली रद्द करने और सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है।",
  "content": "जातिगत जनगणना के खाके पर केंद्र सरकार और विपक्षी दलों के बीच राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। गृह मंत्रालय द्वारा तैयार की गई 40 सवालों की प्रश्नावली सामने आते ही दिल्ली, पटना और कोलकाता तक विरोध के स्वर मुखर हो गए हैं। इस प्रश्नावली को फिलहाल देश के पहाड़ी राज्यों में आजमाया जा रहा है, जिसे अगले वर्ष की शुरुआत से मैदानी क्षेत्रों और अन्य राज्यों में लागू करने की तैयारी है। हालांकि, कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) समेत पूरा विपक्ष इस पहल के खिलाफ गोलबंद हो गया है। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि यह प्रक्रिया केवल एक औपचारिकता है और आंकड़ों की सही तस्वीर पेश करने के बजाय लीपापोती की कोशिश की जा रही है। इस विवाद के बीच विपक्षी दलों ने मौजूदा प्रश्नावली को तुरंत रद्द करने और एक सर्वदलीय बैठक बुलाने की पुरजोर मांग की है।\n\n10वें प्रश्न की अस्पष्टता और प्रामाणिक आंकड़ों पर सवाल\nप्रश्नावली के 10वें सवाल को लेकर सबसे अधिक आपत्ति जताई जा रही है। गृह मंत्रालय की प्रश्नावली में शामिल यह 10वां प्रश्न सीधे तौर पर नागरिक की जाति से संबंधित है। कांग्रेस और अन्य सहयोगियों का कहना है कि यह सवाल बेहद अस्पष्ट और खुले स्वरूप वाला यानी ओपन एंडेड है। विपक्ष का तर्क है कि जब तक राज्यों द्वारा सत्यापित और प्रामाणिक जातियों की सूची के आधार पर स्पष्ट विकल्प नहीं दिए जाएंगे, तब तक पूरे देश से सटीक और सही आंकड़े जुटाना असंभव होगा। स्पष्ट विकल्पों के अभाव में प्राप्त आंकड़े भ्रामक हो सकते हैं, जिससे नीति निर्माण में बाधा आ सकती है। इसी वजह से इस प्रश्न की संरचना में बदलाव करने या पूरी प्रश्नावली को रद्द करने की मांग की जा रही है।\n\nबिहार और तेलंगाना की वैज्ञानिक पद्धति अपनाने की मांग\nराष्ट्रीय जनता दल ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार के रुख की तीखी आलोचना की है। आरजेडी का कहना है कि केंद्र सरकार को राज्यों द्वारा पूर्व में अर्जित अनुभवों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। बिहार और तेलंगाना जैसे राज्यों में पहले ही काफी व्यवस्थित और साइंटिफिक पद्धति का उपयोग करके जातिगत डेटा एकत्र किया गया है। आरजेडी ने मांग की है कि केंद्र को पूरे देश में उसी सफल कार्यप्रणाली और प्रणाली को लागू करना चाहिए। पार्टी का मानना है कि चूंकि राज्यों के पास प्रमाणित जातिगत आंकड़े पहले से उपलब्ध हैं, इसलिए उनकी स्थापित प्रक्रिया को अपनाकर ही राष्ट्रीय स्तर पर निष्पक्ष और सटीक निष्कर्ष प्राप्त किए जा सकते हैं।\n\nसर्वदलीय बैठक की मांग और एकतरफा फैसले पर एतराज\nनीतिगत फैसलों में आम सहमति की कमी को लेकर भी विपक्ष आक्रामक है। तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी और अन्य वरिष्ठ विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया है कि इतने महत्वपूर्ण और संवेदनशील राष्ट्रीय विषय पर सरकार ने एकतरफा निर्णय थोपा है। नेताओं के अनुसार, इस श्रेणी के बड़े सामाजिक फैसले लेने से पहले किसी भी प्रमुख राजनीतिक दल के साथ कोई चर्चा या परामर्श नहीं किया गया। विपक्षी दलों का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में इतने व्यापक प्रभाव वाले सर्वे से पहले सभी पक्षों की राय लेना आवश्यक था। इसी नाराजगी के चलते विपक्ष ने सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग रखी है ताकि सर्वसम्मति से एक पारदर्शी और स्वीकार्य प्रश्नावली तैयार की जा सके।\n\nइसका आप पर असर\n• भारत में: जातिगत आंकड़ों के आधार पर भविष्य की सामाजिक नीतियों, आरक्षण और कल्याणकारी योजनाओं का ढांचा तय होता है, इसलिए गणना प्रक्रिया की शुद्धता देश भर के नागरिकों को सीधे प्रभावित करती है।\n• बिहार और तेलंगाना जैसे राज्यों में: राज्य स्तर पर पहले से मौजूद प्रामाणिक डेटा और नए प्रस्तावित राष्ट्रीय आंकड़ों में भिन्नता से स्थानीय जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर प्रभाव पड़ सकता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. विपक्ष गृह मंत्रालय की जनगणना प्रश्नावली का विरोध क्यों कर रहा है?\nविपक्ष का आरोप है कि 40 प्रश्नों की सूची में शामिल 10वां सवाल बेहद अस्पष्ट और ओपन एंडेड है, जिससे देश में जातियों का सही और प्रामाणिक आंकड़ा नहीं मिल पाएगा।\n\n2. आरजेडी ने केंद्र सरकार से किस मॉडल को लागू करने की मांग की है?\nआरजेडी ने मांग की है कि केंद्र सरकार बिहार और तेलंगाना में अपनाई गई वैज्ञानिक डेटा संग्रह पद्धति को पूरे देश में लागू करे।\n\n3. वर्तमान में यह 40 सवालों वाली प्रश्नावली कहां आजमाई जा रही है?\nगृह मंत्रालय की यह नई प्रश्नावली फिलहाल देश के पहाड़ी राज्यों में ट्रायल के तौर पर आजमाई जा रही है और अगले साल की शुरुआत से इसे मैदानी क्षेत्रों में लागू करने की योजना है।\n\n4. टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने सरकार के फैसले पर क्या सवाल उठाया है?\nममता बनर्जी और अन्य नेताओं ने आरोप लगाया है कि इतने बड़े नीतिगत फैसले पर सरकार ने किसी भी राजनीतिक दल से चर्चा किए बिना एकतरफा निर्णय थोप दिया है।\n\n5. विपक्षी दलों की मुख्य मांग क्या है?\nविपक्षी दल मौजूदा जनगणना प्रश्नावली को तुरंत रद्द करने और सर्वसम्मति बनाने के लिए एक सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग कर रहे हैं।",
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  "category": "बिहार",
  "publishedAt": "2026-08-26",
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