लखीमपुर खीरी में उफान पर शारदा नदी, कटान से निगल गई एकड़ भर हरी धान की फसल लखीमपुर खीरी जिले में पहाड़ी और मैदानी इलाकों की भारी बारिश से शारदा नदी का जलस्तर बढ़ गया है। गोला और निघासन तहसील में तेजी से हो रहे कटान के कारण किसानों की तीन एकड़ धान की लहलहाती फसल जलमग्न हो गई है। उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों में हो रही लगातार रुक-रुककर भारी बारिश के कारण नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ता जा रहा है। उफनती शारदा नदी के जलस्तर में वृद्धि होने के साथ ही तटीय इलाकों में मिट्टी के कटान की रफ्तार भी अत्यधिक तेज हो चुकी है। उपजाऊ कृषि योग्य भूमि का लगातार नदी में समाना स्थानीय किसानों के लिए इस समय सबसे बड़ी चिंता का विषय बन गया है। रोजाना खेतों का बड़ा हिस्सा नदी की तेज धारा में विलीन हो रहा है, जिससे किसानों की वर्षों की मेहनत पर पानी फिर रहा है और उनके समक्ष गहरा आर्थिक संकट मंडराने लगा है। गोला से निघासन तहसील तक शारदा नदी का भयंकर तांडव शारदा नदी का यह भयावह कटान गोला तहसील क्षेत्र से लेकर निघासन तहसील क्षेत्र तक फैले विशाल कृषि इलाकों में लगातार जारी है। नदी की प्रचंड धारा खेतों की जमीन को अपने आगोश में ले रही है और कई स्थानों पर तो देखते ही देखते उपजाऊ खेत का विशाल टुकड़ा जलमग्न होकर कट जा रहा है। प्रभावित किसानों का स्पष्ट कहना है कि यदि शासन और प्रशासन द्वारा समय रहते कटान को रोकने के ठोस उपाय नहीं किए गए और यह सिलसिला इसी प्रकार जारी रहा, तो आने वाले दिनों में क्षेत्र की स्थिति और भी ज्यादा भयावह हो सकती है। कर्ज लेकर तैयार की गई खरीफ फसलों पर मंडराया तबाही का साया किसानों ने मौजूदा खरीफ सीजन में धान समेत कई अन्य फसलों की बुआई और रोपाई में अपनी दिन-रात की पूरी मेहनत लगा दी थी। खेत को तैयार करने से लेकर बीज खरीदने, खाद डालने, सिंचाई करने और मजदूरों की मजदूरी देने तक किसानों ने बड़ी राशि खर्च की थी। गाँव के कई किसानों ने तो फसल तैयार करने के लिए कर्ज तक ले रखा था। उन्हें पूरी उम्मीद थी कि जब फसल अच्छी होगी तो उससे प्राप्त आमदनी से घर-परिवार के दैनिक खर्च पूरे होंगे, बच्चों की पढ़ाई-लिखाई का प्रबंध होगा और पुराने कर्जों की समय पर अदायगी की जा सकेगी। लेकिन शारदा नदी के कहर ने किसानों की इन तमाम आशाओं को ध्वस्त कर दिया है। फसल पकने से एक महीना पहले तीन एकड़ खेत नदी में समाया इस तबाही की अपनी आपबीती बताते हुए स्थानीय किसान कैलाश कुमार ने कहा कि उनकी तीन एकड़ में फैली धान की फसल पूरी तरह नदी की धारा में समा गई है। कैलाश कुमार के अनुसार जब उन्होंने अपने खेतों में धान की रोपाई की थी, उस समय नदी किनारे से काफी दूर बह रही थी। परंतु बाद में जैसे-जैसे नदी का जलस्तर कम और ज्यादा हुआ, वैसे-वैसे कटान की गति तेज होती चली गई। खेतों में खड़ी धान की यह फसल महज एक महीने के भीतर पककर कटाई के लिए पूरी तरह तैयार हो जाती, किंतु उग्र कटान के कारण पूरी फसल जलसमाधि ले चुकी है। जिन खेतों में कुछ समय पहले तक हरी-भरी फसलें लहलहा रही थीं, वहाँ अब केवल शारदा नदी का तेज बहाव दिखाई दे रहा है। इसका आप पर असर शारदा नदी के तटवर्ती क्षेत्रों में भू-कटाव के कारण किसानों की आजीविका और स्थानीय धान की आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ा है। • भारत में: प्रमुख नदियों के तटवर्ती क्षेत्रों में बाढ़ और कटान से धान उत्पादन घटने की आशंका बनती है, जिससे स्थानीय अनाज बाजारों में आपूर्ति शृंखला प्रभावित हो सकती है। • उत्तर प्रदेश में: तटीय जिलों के प्रशासनिक अधिकारियों पर कटान-रोधी सुरक्षा उपाय मजबूत करने और त्वरित फसल मुआवजा बाँटने की जिम्मेदारी बढ़ेगी। • लखीमपुर खीरी में: गोला और निघासन तहसील के प्रभावित किसानों की खरीफ सीजन की पूंजी डूबने से उन पर महाजनों के कर्ज और बच्चों की शिक्षा का आर्थिक दबाव बढ़ गया है। • किसानों के लिए व्यावहारिक कदम: प्रभावित किसान तत्काल अपनी क्षतिग्रस्त भूमि और फसल का ब्योरा स्थानीय तहसील कार्यालय में दर्ज करवाएं ताकि राज्य आपदा राहत कोष के तहत सहायता प्राप्त की जा सके। सवाल-जवाब 1. लखीमपुर खीरी में किन तहसीलों में शारदा नदी का कटान हो रहा है? लखीमपुर खीरी जिले की गोला तहसील से लेकर निघासन तहसील क्षेत्र तक शारदा नदी का कटान तेजी से जारी है। 2. नदी कटान का मुख्य कारण क्या है? पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण शारदा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा है, जिससे कटान तेज हो गया है। 3. किसानों को सबसे ज्यादा नुकसान किस फसल का हुआ है? किसानों को सबसे ज्यादा नुकसान खरीफ सीजन की हरी-भरी धान की फसल का हुआ है, जो नदी में समा रही है। 4. किसान कैलाश कुमार की कितनी फसल नदी में डूब गई? किसान कैलाश कुमार की तीन एकड़ में लगी धान की पूरी फसल कटान के कारण शारदा नदी में समा गई। 5. डूबी हुई धान की फसल कितने समय में पककर तैयार होने वाली थी? कटान में डूबने वाली धान की फसल महज 1 महीने बाद पककर कटाई के लिए पूरी तरह तैयार होने वाली थी। https://trendkia.com/bihar/lakhimpur-kheri-men-uphana-para-sharda-nadi-katana-se-nigala-gai-ekara-bhara-hari-dhana-ki-phasala-26174 TrendKia — Har trend, sabse pehle.