# मधुबनी का बनकट्टा-दामोदरपुर: 'आदर्श गांव' का तमगा मिला, पर दस साल से ठहरा विकास

> बिहार के मधुबनी जिले के बनकट्टा-दामोदरपुर को 2014 में सांसद हुकुमदेव नारायण यादव ने गोद लिया था और इसे आदर्श ग्राम कहा गया, लेकिन शुरुआती दो साल के बाद यहां विकास कार्य लगभग ठप पड़ गया।

**Type:** article · **Category:** बिहार · **Published:** 2026-06-13 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/bihar/madhubani-ka-banakatta-damodarapura-adarsha-ganva-ka-tamaga-mila-para-dasa-sala--556 · **Language:** Hindi
**Tags:** आदर्श ग्राम योजना, बनकट्टा दामोदरपुर, मधुबनी, हुकुमदेव नारायण यादव, बिहार ग्रामीण विकास, बेनीपट्टी, अशोक कुमार यादव, सांसद आदर्श ग्राम

बिहार के मधुबनी जिले के बेनीपट्टी प्रखंड में बसा बनकट्टा-दामोदरपुर आज भी 'आदर्श ग्राम' के नाम से जाना जाता है। कभी जिले के सबसे पिछड़े गांवों में गिने जाने वाले इस गांव को एक बड़ी योजना के तहत संवारने का सपना दिखाया गया था। दस साल बाद जब इस गांव की जमीनी हकीकत खंगाली गई, तो तस्वीर मिली-जुली निकली — कुछ बदला जरूर, पर जितना वादा था, उसका बड़ा हिस्सा अधूरा रह गया।

## क्या थी वह योजना जिसने जगाई थी उम्मीद
केंद्र सरकार ने अक्टूबर 2014 में एक योजना शुरू की थी, जिसके तहत हर सांसद को अपने इलाके का कोई एक पिछड़ा गांव गोद लेना था और उसे विकसित करना था। मकसद यह था कि शिक्षा व्यवस्था, स्वास्थ्य विभाग, सामाजिक न्याय, पानी और नाले जैसी छोटी-बड़ी हर जरूरत का ध्यान रखते हुए गांव को एक खाका दिया जाए और उसे आत्मनिर्भर बनाया जाए। सीधे शब्दों में कहें तो सांसद को उस गांव को अपने बेटे की तरह पाल-पोसकर खड़ा करना था।

## हुकुमदेव यादव ने गोद लिया, मिला 'आदर्श ग्राम' का नाम
इसी सोच के तहत 2014 में उस समय के सांसद हुकुमदेव नारायण यादव ने बनकट्टा-दामोदरपुर को गोद लिया। चूंकि यह गांव बेहद पिछड़े इलाके में था, इसलिए इसे चुना गया और इसे आदर्श ग्राम की संज्ञा दी गई। तय हुआ था कि 2014 से 2016 तक यानी करीब दो साल में इसकी सूरत बदल दी जाएगी।

## दो साल में हुआ काम, फिर थम गई रफ्तार
गांव और आसपास के लोगों से बातचीत में जो बात उभरकर आई, वह यही थी कि गोद लिए जाने के बाद के शुरुआती दो साल में ही काम हुआ। इस दौरान बनकट्टा-दामोदरपुर में पंचायत भवन बना, स्कूल बने, आंगनबाड़ी केंद्र खुला और कुछ छोटे-मोटे काम हुए। लेकिन इसके बाद बीते करीब दस वर्षों से इस गांव में कोई काम होता नहीं दिख रहा।

## सांसद बदले, पर बुजुर्ग सांसद आज भी दिल में
गांव के करीब दर्जन भर लोगों से बात हुई और सबकी अपनी-अपनी राय थी। कई लोगों ने बताया कि हुकुमदेव नारायण यादव अब इस क्षेत्र के सांसद नहीं हैं और न ही अब यहां आते हैं, फिर भी वे आज तक लोगों के दिल में बसे हैं। वजह यह कि चाहे विकास हो या न हो, वे लोगों से मिलते थे, उनकी तकलीफ को अपना दुख समझकर सहानुभूति जताते और उनके लिए काम करते थे। अब इस क्षेत्र के सांसद उनके बेटे अशोक कुमार यादव हैं, लेकिन ग्रामीणों की शिकायत है कि वे यहां कभी नहीं आते।

## हालात पूरी तरह नहीं बदले, पर थोड़ा सुधार जरूर
मधुबनी जिले का आदर्श ग्राम कहलाने वाला बनकट्टा-दामोदरपुर भले ही उस स्तर तक न पहुंचा हो जितना योजना में सोचा गया था, पर जिस कदर यह अति पिछड़ा था, उस लिहाज से थोड़ा बदलाव जरूर आया है। यहां के लोग अब पढ़ने-लिखने लगे हैं, विद्यालय की स्थिति ठीक है, और पंचायत भवन, नाले तथा तालाब जैसी कुछ चीजें इस मिले-जुले बदलाव की गवाही देती हैं।

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