मोतिहारी में डिज्नीलैंड मेले के ठेके पर घमासान: 54 लाख का टेंडर इस बार महज 14 लाख में, पूर्व पार्षद ने लगाया बंदरबांट का आरोप पूर्वी चंपारण के मोतिहारी नगर निगम में डिज्नीलैंड मेले का टेंडर पिछली बार 54 लाख रुपये से अधिक में हुआ था, जो इस बार अवधि बढ़ने के बावजूद घटकर लगभग 14 लाख रह गया, पूर्व पार्षद ने मिलीभगत और राजस्व नुकसान का आरोप लगाया है। पूर्वी चंपारण के मोतिहारी में नगर निगम के डिज्नीलैंड मेले के टेंडर ने एक नए विवाद को जन्म दे दिया है। इस पूरे मामले की तुलना चर्चित रिशु श्री टेंडर घोटाले से की जा रही है। सवाल इस बात पर खड़ा हुआ है कि एक ही मेले का ठेका एक साल में जब और लंबी अवधि के लिए दिया गया, तब निगम की झोली में आने वाली रकम पहले के मुकाबले एक चौथाई से भी कम क्यों रह गई। आंकड़ों में छिपा असली पेच विवाद की जड़ दो साल के टेंडर आंकड़ों के बीच का फासला है। पूर्व पार्षद मणि भूषण श्रीवास्तव के मुताबिक साल 2025 में यह मेला 30 दिनों के लिए लगाया गया था और उसका ठेका 54 लाख 25 हजार रुपये में तय हुआ था। इसके उलट इस बार वही मेला पूरे 41 दिनों के लिए आयोजित किया जा रहा है, फिर भी इसका टेंडर सिर्फ 14 लाख 62 हजार 500 रुपये में दे दिया गया। श्रीवास्तव का तर्क सीधा है। जब आयोजन की अवधि 30 दिन से बढ़कर 41 दिन हो गई, तो स्वाभाविक रूप से राजस्व बढ़ना चाहिए था, घटना नहीं चाहिए था। उनके अनुसार यह किसी सामान्य टेंडर प्रक्रिया का नतीजा नहीं लगता और पूरे मामले में पारदर्शिता बेहद जरूरी है। मिलीभगत और बिचौलियों का आरोप पूर्व पार्षद ने साफ शब्दों में आशंका जताई कि इस पूरी प्रक्रिया में अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और कथित बिचौलियों के बीच मिलीभगत हो सकती है। उनका कहना है कि कुछ खास लोगों को फायदा पहुंचाने के मकसद से पूरी टेंडर प्रक्रिया को प्रभावित किया गया, जिसका सीधा खामियाजा नगर निगम को लाखों रुपये के नुकसान के रूप में भुगतना पड़ा। करोड़ों की योजनाओं पर भी सवाल श्रीवास्तव ने इस मुद्दे को सिर्फ एक मेले तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने याद दिलाया कि नगर निगम में केंद्र और राज्य सरकार की करोड़ों रुपये की विकास योजनाएं चल रही हैं। ऐसे में अगर टेंडर प्रक्रिया की निष्पक्षता ही कठघरे में हो, तो यह बेहद गंभीर बात है। उन्होंने आगाह किया कि अगर इस मामले की जांच नहीं होती, तो दूसरी योजनाओं में भी ऐसी ही अनियमितताएं उजागर हो सकती हैं। आयुक्त की चुप्पी से बढ़ी अटकलें दूसरी ओर नगर आयुक्त आशीष कुमार ने इतना जरूर स्वीकार किया कि पूरी प्रक्रिया टेंडर के जरिए ही पूरी की गई है। हालांकि उन्होंने कैमरे के सामने इस मसले पर विस्तार से कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। उनकी इसी चुप्पी ने विवाद को और हवा दे दी है। फिलहाल शहर भर में इस ठेके को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं और लोग टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता पर लगातार सवाल उठा रहे हैं। हालांकि यह भी उतना ही जरूरी है कि अब तक लगाए गए सारे आरोपों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसका आप पर असर • भारत में: स्थानीय निकायों के टेंडर में राजस्व का इतना बड़ा अंतर बताता है कि नागरिक टैक्स से जुड़ी सार्वजनिक नीलामियों पर नजर रखना और जानकारी मांगना जरूरी है। • मोतिहारी में: अगर आरोप सही निकले तो नगर निगम को हुआ लाखों का नुकसान शहर की विकास योजनाओं और सुविधाओं पर सीधा असर डाल सकता है। सवाल-जवाब 1. विवाद किस बात पर है? मोतिहारी नगर निगम के डिज्नीलैंड मेले का टेंडर पिछली बार के मुकाबले बहुत कम कीमत पर दिए जाने पर विवाद खड़ा हुआ है। 2. दोनों साल के टेंडर की रकम कितनी थी? साल 2025 में 30 दिनों के मेले का ठेका 54 लाख 25 हजार रुपये में हुआ था, जबकि इस बार 41 दिनों के लिए वही ठेका सिर्फ 14 लाख 62 हजार 500 रुपये में दिया गया। 3. आरोप किसने लगाए हैं? पूर्व पार्षद मणि भूषण श्रीवास्तव ने अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और कथित बिचौलियों की मिलीभगत का आरोप लगाया है। 4. नगर आयुक्त ने क्या कहा? नगर आयुक्त आशीष कुमार ने माना कि प्रक्रिया टेंडर के जरिए हुई, लेकिन कैमरे के सामने विस्तार से कुछ कहने से इनकार कर दिया। https://trendkia.com/bihar/motihari-men-dijnilainda-mele-ke-theke-para-ghamasana-54-lakha-ka-tendara-isa-ba-1150 TrendKia — Har trend, sabse pehle.