# नीट विरोध प्रदर्शन में जंतर-मंतर पर पैलेट गन चलाने को सीआरपीएफ की समीक्षा में मिला सही ठहराव

> जंतर-मंतर पर नीट प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल पर सीआरपीएफ की समीक्षा में बताया गया कि कार्रवाई तय मानक संचालन प्रक्रिया के तहत हुई थी। इस झड़प में 47 सुरक्षाकर्मी और 3 से 5 प्रदर्शनकारी घायल हुए थे।

**Type:** article · **Category:** बिहार · **Published:** 2026-07-29 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/bihar/neet-virodha-pradarshana-men-jantar-mantar-para-paileta-gana-chalane-ko-crpf-ki-samiksha-men-mila-sahi-thaharava-11670 · **Language:** Hindi
**Tags:** नीट पेपर लीक, जंतर मंतर प्रदर्शन, सीआरपीएफ समीक्षा, पैलेट गन, रैपिड एक्शन फोर्स, दिल्ली पुलिस

20 जुलाई को जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक के विरोध में हुए प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा बलों की कार्रवाई को लेकर सीआरपीएफ की आंतरिक समीक्षा रिपोर्ट सामने आ गई है। इस जांच के नतीजों में स्पष्ट किया गया है कि दंगा रोधी इकाई रैपिड एक्शन फोर्स द्वारा की गई पूरी कार्रवाई तय मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) और दंगा नियंत्रण नियमों के पूर्ण पालन के तहत हुई थी। समीक्षा में यह भी पुष्टि की गई है कि प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन का इस्तेमाल अचानक या बिना अनुमति के नहीं किया गया था, बल्कि इसके लिए सक्षम प्राधिकारी से बाकायदा लिखित मंजूरी प्राप्त की गई थी। इस रिपोर्ट के साथ ही बल पर लगे अत्यधिक बल प्रयोग के आरोपों का खंडन हुआ है।

## तय मानक प्रक्रियाओं का क्रमबद्ध पालन और बल प्रयोग
सीआरपीएफ की दंगा नियंत्रण शाखा रैपिड एक्शन फोर्स द्वारा की गई कार्रवाई की गहन समीक्षा में यह बात सामने आई है कि जंतर-मंतर पर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए सभी नियमों का कड़ाई से पालन किया गया। सुरक्षा बलों ने स्थिति के अनुसार क्रमबद्ध तरीके से कदम उठाए। सबसे पहले प्रदर्शनकारियों को लाउडस्पीकर के माध्यम से सचेत किया गया और उन्हें शांतिपूर्वक स्थान खाली करने की हिदायत दी गई। जब लाउडस्पीकर की चेतावनी का कोई असर नहीं हुआ, तो भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े गए। इसके बावजूद जब स्थिति नियंत्रित नहीं हुई, तो पुलिस ने लाठीचार्ज का सहारा लिया। अंत में, जब लाठीचार्ज से भी अनियंत्रित भीड़ पर काबू पाना असंभव हो गया, तब अधिकारियों से विधिवत अनुमति लेकर पैलेट गन का सीमित प्रयोग किया गया।

## झड़प का ब्योरा, सुरक्षाकर्मियों को लगी चोटें और हिंसा
जंतर-मंतर पर हुई इस हिंसक झड़प में दोनों पक्षों के लोग प्रभावित हुए। समीक्षा के आंकड़ों के अनुसार, पैलेट लगने की वजह से लगभग 3 से 5 प्रदर्शनकारी घायल हुए। वहीं दूसरी ओर, प्रदर्शन में मौजूद कुछ अराजक तत्वों की ओर से सुरक्षा बलों पर भारी पथराव किया गया और सड़क पर लगी लोहे की रेलिंग उखाड़कर जवानों पर हमला बोला गया। इस भीषण हमले में रैपिड एक्शन फोर्स के 47 जवान गंभीर रूप से घायल हो गए, जिनमें से 6 जवानों के सिर में गहरी चोटें आईं। अधिकारियों का कहना है कि हिंसक भीड़ के हमले से जवानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए बल प्रयोग अनिवार्य हो गया था।

## बीएनएस के तहत कानूनी प्रावधान और लिखित मंजूरी का नियम
20 जुलाई के प्रदर्शन के दौरान बल प्रयोग की अनुमति दिल्ली पुलिस द्वारा कानून और तय एसओपी के तहत दी गई थी। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएस) के कानूनी प्रावधानों के अनुसार, यदि कोई भीड़ गैरकानूनी रूप से एकत्र होती है, तो मौके पर मौजूद कार्यकारी मजिस्ट्रेट स्थिति का आकलन करने के बाद उसे हटाने के लिए बल प्रयोग का आदेश दे सकता है। दिल्ली में यह विधिक अधिकार मुख्य रूप से पुलिस आयुक्त के पास होता है, जिसे आवश्यकता पड़ने पर सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) स्तर के अधिकारियों को सौंपा जा सकता है। नियम यह निर्धारित करता है कि रैपिड एक्शन फोर्स किसी भी प्रदर्शन स्थल पर दंगा रोधी उपकरणों का उपयोग तभी कर सकती है, जब वहां तैनात डीसीपी या एसीपी स्तर का अधिकारी लिखित रूप से आदेश जारी करे। मौखिक आदेश के आधार पर ऐसी कार्रवाई की अनुमति नहीं होती है।

## सुप्रीम कोर्ट में मामला और सीआरपीएफ का रुख
जंतर-मंतर पर हुई कार्रवाई और रैपिड एक्शन फोर्स की भूमिका को लेकर जब सीआरपीएफ के महानिदेशक जीपी सिंह से सवाल पूछा गया, तो उन्होंने स्थिति स्पष्ट की। महानिदेशक जीपी सिंह ने बताया कि यह पूरा मामला वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष विचाराधीन है। उन्होंने कहा कि मामला अदालत में होने के कारण रैपिड एक्शन फोर्स की कार्रवाई से जुड़े सभी तथ्य, साक्ष्य और सीआरपीएफ का आधिकारिक पक्ष सीधे माननीय उच्चतम न्यायालय के सामने प्रस्तुत किया जाएगा।

## इसका आप पर असर
**भारत भर में:** देश भर के प्रदर्शनकारियों और छात्रों के लिए यह स्पष्ट संदेश है कि गैरकानूनी भीड़ पर नियंत्रण के लिए सुरक्षा बल लिखित अनुमति और चरणबद्ध एसओपी का पालन करते हैं।

**दिल्ली में:** जंतर-मंतर और आसपास के संवेदनशील इलाकों में भविष्य के प्रदर्शनों के दौरान सख्त दंगा-रोधी प्रोटोकॉल लागू रहेंगे।

## सवाल-जवाब

### 1. जंतर-मंतर पर पैलेट गन का इस्तेमाल क्यों किया गया?
लाउडस्पीकर से घोषणा, आंसू गैस और लाठीचार्ज के बाद भी जब अनियंत्रित भीड़ काबू में नहीं आई, तब लिखित अनुमति मिलने पर पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया।

### 2. जंतर-मंतर प्रदर्शन में कितने सुरक्षाकर्मी और प्रदर्शनकारी घायल हुए?
इस झड़प में रैपिड एक्शन फोर्स के 47 जवान घायल हुए (जिनमें से 6 के सिर में चोट आई) और 3 से 5 प्रदर्शनकारी घायल हुए।

### 3. दंगा रोधी उपकरण चलाने के लिए किसकी मंजूरी आवश्यक होती है?
रैपिड एक्शन फोर्स केवल मौके पर मौजूद डीसीपी या एसीपी स्तर के अधिकारी की लिखित मंजूरी मिलने के बाद ही दंगा रोधी उपकरणों का उपयोग कर सकती है।

### 4. भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNS) के तहत बल प्रयोग का क्या नियम है?
बीएनएस के तहत गैरकानूनी भीड़ को हटाने के लिए कार्यकारी मजिस्ट्रेट बल प्रयोग का आदेश दे सकता है, जिसका अधिकार दिल्ली में पुलिस आयुक्त या एसीपी स्तर तक के अधिकारियों के पास होता है।

### 5. सीआरपीएफ के महानिदेशक जीपी सिंह ने इस मामले पर क्या कहा?
उन्होंने कहा कि मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, इसलिए रैपिड एक्शन फोर्स की कार्रवाई से जुड़े सभी साक्ष्य और सीआरपीएफ का पक्ष अदालत के सामने रखा जाएगा।

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