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  "type": "article",
  "title": "नेपाल बाढ़ के कारण तिब्बत में फंसे छह कैलाश यात्रियों की वापसी शुरू, विदेश मंत्रालय की निगरानी में रेस्क्यू",
  "summary": "नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के कारण तिब्बत के जिलोंग में फंसे छह भारतीय कैलाश मानसरोवर यात्रियों को सुरक्षित निकालने का काम शुरू कर दिया गया है। दो बीमार महिलाओं की स्थिति को देखते हुए भारतीय दूतावास और विदेश मंत्रालय इस अभियान पर नजर बनाए हुए हैं।",
  "content": "नेपाल और सीमावर्ती क्षेत्रों में अचानक आई भीषण फ्लैश फ्लड के कारण तिब्बत के जिलोंग शहर में फंसे छह भारतीय नागरिकों की सुरक्षित निकासी की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। कैलाश मानसरोवर यात्रा पर निकले ये श्रद्धालु प्राकृतिक आपदा के कारण सीमा पर ही फंस गए थे। अब भारतीय विदेश मंत्रालय और चीन में स्थित भारतीय दूतावास की सीधी देखरेख में इन्हें नेपाल के रास्ते वापस भारत लाने की तैयारी की जा रही है। चीनी अधिकारियों के साथ हुए प्रशासनिक समन्वय के बाद सभी छह यात्री फिलहाल जिलोंग से नेपाल सीमा की ओर बढ़ रहे हैं।\n\nबाढ़ से इमिग्रेशन दफ्तर बहने के कारण ठप हुआ जमीनी मार्ग\nप्राप्त विवरण के अनुसार यह पूरा समूह तिब्बत के जिलोंग शहर स्थित एक होटल में ठहरा हुआ था। ये सभी नागरिक वैध कैलाश मानसरोवर ग्रुप वीजा पर यात्रा कर रहे थे और प्रक्रिया के तहत वापसी की तैयारी में थे। हालांकि नेपाल सीमा पर स्थित इमिग्रेशन कार्यालय अचानक आई विनाशकारी बाढ़ के तेज बहाव में पूरी तरह बह गया। इस घटना के कारण चीन से बाहर निकलने का सामान्य जमीनी मार्ग पूरी तरह बंद हो गया और यात्रियों के सामने संकट खड़ा हो गया।\n\nमार्ग बंद होने और बिगड़ते मौसम को देखते हुए इन भारतीय नागरिकों ने तुरंत मदद की गुहार लगाई थी। 26 अगस्त को भारतीय अधिकारियों के पास भेजे गए एक आपातकालीन अनुरोध में समूह ने चीनी प्रशासन से बातचीत कर तुरंत सहायता दिलाने की मांग की थी। इसके बाद भारतीय कूटनीतिक अधिकारियों ने तत्परता दिखाते हुए चीनी अधिकारियों से संपर्क साधा और निकासी अभियान को हरी झंडी दिलवाई।\n\nहाई एल्टीट्यूड पर ऑक्सीजन की भारी कमी और मेडिकल इमरजेंसी\nफंसे हुए छह भारतीय नागरिकों में से चार लोग महाराष्ट्र के रहने वाले हैं, जबकि दो नागरिक दिल्ली के निवासी हैं। यात्रा के दौरान समूह की दो महिला सदस्यों, स्मिता पवार और योगिनी पाटिल, को मानसरोवर क्षेत्र में अत्यधिक ऊंचाई पर होने के कारण गंभीर हाइपोक्सिया यानी ऑक्सीजन की भारी कमी की समस्या का सामना करना पड़ा। स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद दोनों को तुरंत नीचे जिलोंग शहर लाया गया, जहां उन्हें लगातार ऑक्सीजन सपोर्ट की आवश्यकता पड़ी।\n\nसमूह के सदस्यों और उनके परिजनों ने बताया कि जिलोंग में उपलब्ध स्थानीय चिकित्सा सुविधाएं उनकी गंभीर स्थिति के उपचार के लिए पर्याप्त नहीं थीं। इसी वजह से 26 अगस्त को भेजे गए आपातकालीन संदेश में दोनों महिलाओं की गंभीर मेडिकल स्थिति का हवाला देते हुए जिलोंग से सीधे काठमांडू तक एयरलिफ्ट या हेलीकॉप्टर द्वारा रेस्क्यू करने की मांग की गई थी। फिलहाल उन्हें जमीनी रास्ते से सुरक्षित सीमा तक पहुंचाया जा रहा है।\n\nविदेश मंत्रालय की पहल और अन्य फंसे भारतीयों की सुरक्षा\nयह निकासी अभियान नेपाल और आसपास के इलाकों में आई बाढ़ के कारण पैदा हुए बड़े मानवीय संकट के बीच चलाया जा रहा है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि आपदा से प्रभावित भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और कुशलक्षेम सुनिश्चित करना भारतीय मिशनों की सर्वोच्च प्राथमिकता है। सरकार उन लोगों को प्राथमिकता के आधार पर तत्काल मदद पहुंचा रही है जिन्हें चिकित्सा सहायता की जरूरत है।\n\nविदेश मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक प्राकृतिक आपदा के बाद चीन में करीब 400 भारतीय नागरिक फंसे हुए हैं, जिनसे संपर्क स्थापित कर लिया गया है। भारतीय राजनयिक अधिकारी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और फंसे हुए सभी भारतीयों की सुरक्षित स्वदेश वापसी सुनिश्चित करने के लिए चीनी तथा नेपाली अधिकारियों के साथ निरंतर वार्ता कर रहे हैं।\n\nइसका आप पर असर\nमानसरोवर यात्रा और नेपाल सीमा क्षेत्र में जाने वाले यात्रियों के लिए यह खबर यात्रा सुरक्षा प्रोटोकॉल और आपातकालीन सरकारी सहायता प्रणाली के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है।\n\n• भारत में: विदेश मंत्रालय और दूतावास ने विदेशों में फंसे आपदा प्रभावित भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए विशेष आपातकालीन हेल्पलाइन और ट्रैकिंग तंत्र सक्रिय कर दिया है। इससे संकट में फंसे यात्रियों के रिश्तेदार तुरंत सरकारी मिशनों के जरिए मेडिकल और रेस्क्यू सहायता की मांग कर सकते हैं।\n• तीर्थयात्रियों के लिए: उच्च पर्वतीय क्षेत्रों और मानसरोवर यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं को अब यात्रा के साथ अनिवार्य मेडिकल बीमा और ऑक्सीजन बैकअप साथ रखना होगा। अचानक मौसम बिगड़ने या भूस्खलन होने पर यात्रियों को स्थानीय प्रशासन के दिशा-निर्देशों का तुरंत पालन करना आवश्यक है।\n• नेपाल सीमा यात्रियों के लिए: बाढ़ से सीमावर्ती इमिग्रेशन पोस्ट तबाह होने के कारण नेपाल और चीन के बीच जमीनी रास्ते से आवाजाही फिलहाल बाधित रहेगी। जिन यात्रियों ने इस रूट से यात्रा की योजना बनाई है, उन्हें वैकल्पिक उड़ानों या नए सरकारी एडवाइजरी का इंतजार करना होगा।\n• पहाड़ी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुरक्षा: हाई एल्टीट्यूड पर हाइपोक्सिया या ऑक्सीजन की कमी के शुरुआती संकेत मिलते ही तुरंत निचले इलाकों में आना अनिवार्य है। समय पर मेडिकल सहायता न मिलने पर स्थिति गंभीर हो सकती है, इसलिए यात्रा से पहले प्रॉपर मेडिकल चेकअप कराना जरूरी है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. तिब्बत के जिलोंग में कितने भारतीय नागरिक फंसे थे?\nतिब्बत के जिलोंग शहर में कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए छह भारतीय नागरिक फंसे हुए थे, जिन्हें सुरक्षित निकालने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।\n\n2. फंसे हुए भारतीय यात्री भारत के किन राज्यों के रहने वाले हैं?\nइन छह फंसे हुए भारतीयों में से चार नागरिक महाराष्ट्र के रहने वाले हैं, जबकि दो यात्री दिल्ली के निवासी हैं।\n\n3. कैलाश मानसरोवर यात्रा के दौरान दो महिलाओं की स्वास्थ्य स्थिति क्यों बिगड़ी?\nमानसरोवर में अत्यधिक ऊंचाई के कारण स्मिता पवार और योगिनी पाटिल को गंभीर हाइपोक्सिया यानी ऑक्सीजन की कमी की समस्या हो गई थी, जिसके कारण उन्हें निरंतर ऑक्सीजन सपोर्ट देना पड़ा।\n\n4. यात्री तिब्बत से नेपाल के रास्ते बाहर क्यों नहीं निकल पा रहे थे?\nनेपाल सीमा पर स्थित इमिग्रेशन दफ्तर अचानक आई भीषण बाढ़ में बह गया था, जिससे चीन से बाहर निकलने का जमीनी रास्ता पूरी तरह बंद हो गया था।\n\n5. कुल कितने भारतीय नागरिक बाढ़ के बाद चीन में फंसे हुए हैं?\nविदेश मंत्रालय के अनुसार बाढ़ के बाद चीन में करीब 400 भारतीय नागरिक फंसे हुए हैं, जिनसे भारतीय राजनयिक लगातार संपर्क बनाए हुए हैं।",
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  "category": "बिहार",
  "publishedAt": "2026-08-28",
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    "कैलाश मानसरोवर यात्रा",
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