'ऑपरेशन प्रहार': बिहार पुलिस ने कसा सोशल मीडिया के दुरुपयोग पर शिकंजा, डीपफेक और फर्जी पोस्ट के आरोप में 103 गिरफ्तार बिहार पुलिस की साइबर अपराध एवं सुरक्षा इकाई (सीसीएसयू) ने सोशल मीडिया के दुरुपयोग के खिलाफ 'ऑपरेशन प्रहार' के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए 103 लोगों को गिरफ्तार किया है और हजारों भ्रामक पोस्ट को हटवाया है। बिहार में डिजिटल स्पेस को पूरी तरह से सुरक्षित और उत्तरदायी बनाने के लिए राज्य पुलिस ने एक बेहद बड़ा और कड़ा कदम उठाया है। वर्तमान समय में साइबर अपराध और फेक न्यूज के लगातार बढ़ते मामलों को गंभीरता से लेते हुए, बिहार पुलिस की साइबर अपराध एवं सुरक्षा इकाई (सीसीएसयू) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अपनी पैनी नजर गड़ा दी है। 'ऑपरेशन प्रहार' के विशेष बैनर तले पिछले छह महीनों में एक बहुत ही व्यापक और आक्रामक अभियान चलाया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य भ्रामक जानकारी, समाज में नफरत फैलाने वाली आपत्तिजनक कंटेंट और तकनीक के गलत इस्तेमाल से बने एआई-जनित डीपफेक वीडियो पर पूरी तरह से लगाम लगाना है। इस कड़ी और सिलसिलेवार कार्रवाई के दौरान पुलिस तंत्र ने न सिर्फ हजारों आपत्तिजनक डिजिटल लिंक्स को इंटरनेट से ब्लॉक करवाया है, बल्कि सोशल मीडिया का आपराधिक इस्तेमाल करने वाले 103 आरोपियों को गिरफ्तार कर सीधा जेल की सलाखों के पीछे भी भेजा है। हजारों यूआरएल और फर्जी अकाउंट्स पर गिरी गाज इंटरनेट की दुनिया में छिपकर नफरत फैलाने वाले और फर्जी खबरें प्रसारित करने वाले संगठित गिरोहों के खिलाफ सीसीएसयू ने डेटा आधारित बहुत ही सख्त कार्रवाई की है। पुलिस विभाग द्वारा जारी किए गए नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, बीते छह महीनों के भीतर फेसबुक, एक्स (पहले ट्विटर), इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे प्रमुख अंतरराष्ट्रीय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को कुल 692 लीगल नोटिस भेजे गए हैं। इन प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल असामाजिक तत्वों द्वारा बहुत ही सुनियोजित और संगठित तरीके से अफवाहें फैलाने के लिए किया जा रहा था। पुलिस की त्वरित और तकनीकी तत्परता की बदौलत इंटरनेट जगत से 1320 ऐसे यूआरएल पूरी तरह से हटा दिए गए हैं, जिनमें समाज को भड़काने वाली आपत्तिजनक सामग्री मौजूद थी। इसके अलावा, अपनी असली पहचान छिपाकर समाज में वैमनस्य और भ्रम फैलाने के मकसद से बनाए गए 529 फर्जी और आपत्तिजनक सोशल मीडिया अकाउंट्स को हमेशा के लिए स्थायी रूप से डिलीट करवा दिया गया है। इसी अवधि के दौरान 475 अलग-अलग मामलों में आधिकारिक तौर पर एफआईआर दर्ज की गई है। दर्ज मुकदमों का यह आंकड़ा साफ तौर पर यह दर्शाता है कि पुलिस अब केवल डिजिटल चेतावनी देकर नहीं रुक रही है, बल्कि जमीन पर उतरकर सीधे और कठोर कानूनी कार्रवाई कर रही है। सीसीएसयू की 24 घंटे लगातार डिजिटल निगरानी अपराधियों की धरपकड़ की यह पूरी कार्रवाई बिहार पुलिस के विशेष अभियान 'ऑपरेशन प्रहार' का एक बेहद अहम और सक्रिय हिस्सा है। सीसीएसयू के आईजी रंजीत कुमार मिश्रा ने इस तंत्र की कार्यप्रणाली के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए बताया है कि साइबर सुरक्षा इकाई अब सप्ताह के सातों दिन और 24 घंटे सक्रिय रहकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की सतत निगरानी कर रही है। इस लगातार चलने वाली निगरानी का मुख्य फोकस उन संवेदनशील मामलों पर है जो सीधे तौर पर राज्य की कानून-व्यवस्था और समाज की शांति को अचानक से भंग कर सकते हैं। महिलाओं और छोटी बच्चियों को निशाना बनाकर किए जाने वाले साइबर अपराधों को राज्य पुलिस ने अपनी सर्वोच्च और पहली प्राथमिकता में रखा है। इसके साथ ही, अत्याधुनिक डिजिटल तकनीकों का दुरुपयोग कर बनाए गए एआई-जनरेटेड कंटेंट और किसी की छवि खराब करने वाले डीप फेक वीडियो को तेजी से ट्रैक करने के लिए खास सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया जा रहा है। भ्रामक सूचनाओं के जरिए सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वाले पोस्ट और सार्वजनिक व्यवस्था में खलल डालने वाली किसी भी सामग्री को तुरंत प्रभाव से रोकने के लिए पुलिस की तकनीकी टीमों को विशेष रूप से चौबीसों घंटे हाई अलर्ट मोड पर रखा गया है। संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान और सख्त कानून आज के आधुनिक दौर में सोशल मीडिया का इस्तेमाल सिर्फ आम लोगों को ही नहीं, बल्कि न्यायपालिका और अन्य प्रमुख संस्थाओं पर भी निशाना साधने के लिए होने लगा है। आईजी रंजीत मिश्रा ने बिल्कुल स्पष्ट किया कि संवैधानिक पदों पर बैठे महत्वपूर्ण व्यक्तियों, जजों, न्यायिक प्रक्रिया और अन्य सार्वजनिक उपक्रमों के खिलाफ की जाने वाली आपत्तिजनक टिप्पणियों को पुलिस विभाग कतई हल्के में नहीं ले रहा है। ऐसे किसी भी पोस्ट का बहुत ही बारीकी से गहन तकनीकी विश्लेषण किया जाता है, ताकि भ्रामक जाल के पीछे बैठे असली अपराधी तक जल्द से जल्द पहुंचा जा सके। तकनीकी सुराग मिलने और दोषियों की पहचान साबित होने पर उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस-2023), सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम-2000 (आईटी एक्ट) और अन्य संबंधित अत्यंत गंभीर कानूनी प्रावधानों के तहत मामला दर्ज कर जेल भेजा जा रहा है। पुलिस प्रशासन यह सुनिश्चित कर रहा है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म की गुमनामी का इस्तेमाल देश के लोकतांत्रिक ढांचे और उसकी संस्थाओं की छवि खराब करने के लिए हरगिज न किया जा सके। अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर जीरो टॉलरेंस डिजिटल युग में बड़ी संख्या में लोग सोशल मीडिया का इस्तेमाल अपनी अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर करते हैं, लेकिन पुलिस का यह बिल्कुल स्पष्ट मानना है कि इस आजादी के नाम पर देश का कानून तोड़ना किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं होगा। आईजी रंजीत मिश्रा ने आम जनता से बहुत ही सख्त लहजे में अपील की है कि वे सोशल मीडिया का उपयोग बेहद जिम्मेदारी और समझदारी के साथ करें। उन्होंने जोर देकर कहा कि बिहार पुलिस सोशल मीडिया के किसी भी प्रकार के दुरुपयोग पर 'जीरो टॉलरेंस' यानी पूर्ण असहिष्णुता की नीति पर मजबूती से काम कर रही है। हाल के कुछ वर्षों में महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाले गंदे वीडियो और सांप्रदायिक अफवाहों का ग्राफ बहुत तेजी से बढ़ा है, जिसमें कई असामाजिक तत्व और संगठित आपराधिक गिरोह शामिल पाए गए हैं। पुलिस ने राज्य के सभी नागरिकों से आग्रह किया है कि यदि उन्हें इंटरनेट पर कहीं भी कोई संदिग्ध, भ्रामक, महिला-विरोधी या नफरत फैलाने वाला पोस्ट नजर आता है, तो वे तुरंत अपने नजदीकी साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराएं या पुलिस के आधिकारिक हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क करें। कानून-व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के लिए ऐसी कड़ी और त्वरित कार्रवाइयां आने वाले समय में भी निर्बाध रूप से जारी रहेंगी। इसका आप पर असर • भारत में: यह कार्रवाई दर्शाती है कि डीपफेक और सोशल मीडिया पर फेक न्यूज फैलाने वालों पर अब आईटी एक्ट और नए बीएनएस कानूनों के तहत सख्त जेल की सजा हो सकती है। • बिहार में: राज्य के नागरिकों को अब इंटरनेट पर भ्रामक सूचनाएं या महिलाओं के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट दिखने पर सीधे साइबर थाने में शिकायत करने की विशेष सुविधा और पुलिस का सक्रिय समर्थन मिल रहा है। सवाल-जवाब 1. बिहार पुलिस के 'ऑपरेशन प्रहार' का मुख्य उद्देश्य क्या है? इस ऑपरेशन का मुख्य उद्देश्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर फेक न्यूज, आपत्तिजनक पोस्ट, एआई-जनित डीपफेक वीडियो और सांप्रदायिक वैमनस्य फैलाने वाली सामग्री पर पूरी तरह से रोक लगाना है। 2. इस अभियान के तहत अब तक कितने लोगों की गिरफ्तारी हुई है? पिछले छह महीनों में चलाए गए इस विशेष अभियान के तहत सोशल मीडिया का दुरुपयोग करने वाले कुल 103 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। 3. सीसीएसयू ने किन प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को नोटिस भेजे हैं? सीसीएसयू ने फेसबुक, एक्स (ट्विटर), इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स को आपत्तिजनक कंटेंट हटाने के लिए कुल 692 लीगल नोटिस जारी किए हैं। 4. पुलिस किन कानूनों के तहत इन अपराधों में एफआईआर दर्ज कर रही है? साइबर पुलिस तकनीकी जांच के बाद दोषियों के खिलाफ मुख्य रूप से भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस-2023) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम-2000 (आईटी एक्ट) की गंभीर धाराओं के तहत मामले दर्ज कर रही है। https://trendkia.com/bihar/operation-prahar-bihar-police-ne-kasa-soshala-midiya-ke-durupayoga-para-shiknja-dipapheka-aura-pharji-posta-ke-aropa-men-103-girap-8945 TrendKia — Har trend, sabse pehle.