# पाली के लालपुरा में मकान की चौखट पर आ धमका 70 किलो का मगरमच्छ, एक घंटे के अभियान में हुआ सुरक्षित रेस्क्यू

> पाली जिले के बाली उपखंड स्थित लालपुरा गांव में भोर के समय एक घर के मुख्य दरवाजे पर 8 फीट लंबा मगरमच्छ पहुंच गया, जिसे वन विभाग और रेस्क्यू दल ने सुरक्षित पकड़कर जवाई बांध में छोड़ दिया।

**Type:** article · **Category:** बिहार · **Published:** 2026-10-06 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/bihar/pali-ke-lalpura-men-makana-ki-chaukhata-para-a-dhamaka-70-kilo-ka-magaramachchha-eka-ghnte-ke-abhiyana-men-hua-surakshita-reskyu-43802 · **Language:** Hindi
**Tags:** पाली समाचार, मगरमच्छ रेस्क्यू, जवाई बांध, बाली उपखंड, वन विभाग राजस्थान, लालपुरा गांव

राजस्थान में पाली जिले के बाली उपखंड क्षेत्र के अंतर्गत इंसानी बस्तियों के नजदीक मगरमच्छों की आवक लगातार बढ़ती जा रही है। हाल ही में क्षेत्र के लालपुरा गांव में तड़के एक सनसनीखेज वाकया देखने को मिला, जब एक रिहायशी मकान के मुख्य द्वार पर 8 फीट लंबा और तकरीबन 70 किलोग्राम वजनी भारी-भरकम मगरमच्छ आ धमका। अचानक घर की चौखट पर इतने विशाल जलीय जीव की मौजूदगी से पूरे मोहल्ले और गांव में हड़कंप मच गया। सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंची बचाव टीम ने करीब एक घंटे के कड़े प्रयास के बाद इस मगरमच्छ को सुरक्षित काबू में कर लिया और बाद में इसे जवाई बांध के इलाके में छोड़ दिया।

## तड़के तीन बजे दरवाजे पर हुई खटपट, बाहर निकलते ही उड़े होश
लालपुरा निवासी मगनाराम मीणा अपने परिवार, पत्नी और बच्चों के साथ घर के भीतर सो रहे थे। भोर में लगभग 3 बजे के आसपास मुख्य दरवाजे पर किसी भारी चीज के जोर-जोर से टकराने की तेज आवाजें आने लगीं। जब मगनाराम ने किसी अनहोनी की आशंका के चलते किवाड़ खोला, तो सामने का नजारा देखकर उनके होश उड़ गए। दहलीज के ठीक बाहर 8 फीट लंबा भीमकाय मगरमच्छ मौजूद था।

मगनाराम ने भारी घबराहट के बीच धैर्य बनाए रखा और परिजनों को सुरक्षित करते हुए तुरंत आसपास के ग्रामीणों के साथ-साथ वन विभाग को इस बात की खबर दी। सूचना मिलते ही वनपाल प्रकाश मीणा हरकत में आए और वाइल्ड एंड स्ट्रीट एनिमल रेस्क्यू टीम को तुरंत मौके के लिए रवाना किया गया।

## एक घंटे चली कड़ी मशक्कत, जवाई बांध में किया गया मुक्त
रेंजर महेंद्र पाल सिंह के दिशा-निर्देशन में रेस्क्यू दल ने लालपुरा पहुंचकर मोर्चा संभाला। इस अभियान में कांतिलाल प्रजापत, गोविंद प्रजापत और दिलीप सेन शामिल थे। दल ने सबसे पहले सुरक्षा घेरा तैयार करते हुए मौके पर जमा ग्रामीणों को सुरक्षित दूरी पर पीछे हटाया, ताकि कोई अनहोनी न हो।

लगभग एक घंटे तक चले योजनाबद्ध और जोखिम भरे अभियान के बाद बचाव कर्मियों ने रस्सियों की मदद से मगरमच्छ के मुंह और पैरों को बांधकर उसे पूरी तरह काबू किया। इसके बाद सुरक्षित तरीके से वाहन में लादकर उसे जवाई बांध के प्राकृतिक जल क्षेत्र में ले जाकर छोड़ दिया गया, जिससे ग्रामीणों ने राहत की सांस ली।

## रिहायशी इलाकों का रुख क्यों कर रहे हैं मगरमच्छ?
बाली क्षेत्र में पानी के प्राकृतिक स्रोतों से निकलकर मगरमच्छों का बस्तियों की ओर रुख करना लगातार आम होता जा रहा है। स्थानीय निवासियों और वन्यजीव विशेषज्ञों ने इस असामान्य हलचल के पीछे मुख्य रूप से गिरते जल स्तर और भोजन के संकट को जिम्मेदार बताया है

- **जल स्तर में निरंतर गिरावट:** जवाई बांध और आसपास के अन्य जलाशयों में पानी का स्तर घटने से मगरमच्छों का प्राकृतिक वास स्थल सिमट रहा है। पर्याप्त जलभराव न होने के कारण ये जीव नमी और नए आश्रय की तलाश में आबादी की तरफ निकल पड़ते हैं।
- **भोजन और शिकार का गंभीर अभाव:** जलस्रोतों में जलीय जीवों और शिकार की कमी के चलते मगरमच्छ भूख मिटाने के लिए बस्तियों का रुख करने को विवश हो रहे हैं।
- **असामान्य खानपान का संकट:** ग्रामीणों का दावा है कि बस्तियों में भटकते हुए मगरमच्छ कई मर्तबा गाय का गोबर खाते भी देखे गए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार शिकार न मिलने की लाचारी में यह जलीय परभक्षी पेट भरने के लिए इस तरह के अस्वाभाविक व्यवहार को अपना रहा है।

ग्रामीण क्षेत्रों में मगरमच्छों की बार-बार दस्तक से दहशत का माहौल बना हुआ है। ग्रामीणों ने मांग उठाई है कि वन्यजीवों के जलस्रोतों में पानी और भोजन की व्यवस्था पर ध्यान दिया जाए, ताकि वे बस्तियों की ओर न भटकें।

## इसका आप पर असर
जलाशयों से निकलकर इंसानी बस्तियों में भटकते मगरमच्छों की घटनाएं ग्रामीणों की रोजमर्रा की सुरक्षा पर सीधा असर डालती हैं।

- **पाली के बाली क्षेत्र में:** रात और तड़के के समय घर के बाहर निकलते समय ग्रामीणों को अत्यधिक सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। किसी भी वन्यजीव के दिखने पर खुद मुकाबला करने के बजाय तुरंत वन विभाग को सूचित करें।
- **ग्रामीण पशुपालकों के लिए:** बाड़ों और खुले आंगनों में बंधे मवेशियों के आसपास निगरानी बढ़ाना जरूरी हो गया है। जलस्रोतों के पास मवेशी चराने जाते वक्त किसानों को विशेष सावधानी रखनी होगी।
- **सुरक्षा निर्देशों का पालन:** गांव की संकरी गलियों में रोशनी का पुख्ता प्रबंध रखें और तड़के दरवाजा खोलते समय सतर्क रहें। अंधेरे में बिना रोशनी के बाहर निकलने से गंभीर दुर्घटना की संभावना बढ़ सकती है।
- **प्रशासनिक मांग:** स्थानीय नागरिकों को वन विभाग से बस्तियों के निकट नियमित गश्त की मांग करनी चाहिए। समय रहते सूचना मिलने से रेस्क्यू दल बड़े जोखिम को टाल सकता है।

## ऐसा क्यों हुआ
जवाई बांध और आसपास के जलस्रोतों में पर्यावरणीय बदलावों के चलते मगरमच्छ बस्तियों की ओर रुख कर रहे हैं।

- **घटता जल स्तर:** जलाशयों में पानी की कमी होने से मगरमच्छों का मूल जलीय आवास प्रभावित हो रहा है। इसके चलते वे जीवित रहने के लिए नमी और नए आश्रय की खोज में बाहर निकलते हैं।
- **भोजन का गंभीर संकट:** पानी के भीतर शिकार और भोजन की अनुपलब्धता ने मगरमच्छों को आबादी वाले इलाकों की ओर खींचने का काम किया है। पेट भरने की मजबूरी के कारण वे बस्तियों के नजदीक आ रहे हैं।
- **असामान्य आहार व्यवहार:** भोजन के अभाव में मगरमच्छों द्वारा गोबर खाने जैसा अस्वाभाविक आचरण देखा गया है, जो इस बात का संकेत है कि वे भुखमरी से जूझ रहे हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. पाली के लालपुरा गांव में किस आकार का मगरमच्छ देखा गया?
लालपुरा गांव में एक मकान के मुख्य द्वार पर 8 फीट लंबा और करीब 70 किलोग्राम वजनी मगरमच्छ देखा गया था।

### 2. मगरमच्छ की मौजूदगी का पता किस समय और कैसे चला?
तड़के करीब 3 बजे मकान मालिक मगनाराम मीणा को दरवाजे पर भारी टकराने की आवाज सुनाई दी, और किवाड़ खोलते ही उन्हें मगरमच्छ दिखा।

### 3. मगरमच्छ को काबू करने के लिए किस टीम ने अभियान चलाया?
रेंजर महेंद्र पाल सिंह के निर्देशन में वाइल्ड एंड स्ट्रीट एनिमल रेस्क्यू टीम के कांतिलाल प्रजापत, गोविंद प्रजापत और दिलीप सेन ने इसे काबू किया।

### 4. रेस्क्यू के बाद मगरमच्छ को कहां ले जाया गया?
लगभग एक घंटे के बचाव अभियान के बाद मगरमच्छ को सुरक्षित तरीके से जवाई बांध के इलाके में छोड़ दिया गया।

### 5. मगरमच्छों के गांवों में भटकने की मुख्य वजह क्या मानी जा रही है?
जलाशयों में पानी का गिरता स्तर और प्राकृतिक शिकार की भारी किल्लत इसके मुख्य कारण बताए गए हैं।

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