पश्चिम अफ्रीकी देश सेनेगल में फंसे मुजफ्फरपुर के उमाशंकर, दूतावास से मदद और वतन वापसी की गुहार मुजफ्फरपुर के उमाशंकर कुमार सेनेगल की राजधानी डकार में बंधक बनकर रह गए हैं, जहाँ उनसे बिना वेतन दिए 12 घंटे जबरन काम कराया जा रहा है। परिवार की मांग के बाद केंद्रीय मंत्री डॉ. राजभूषण चौधरी ने विदेश मंत्रालय से उनकी सुरक्षित रिहाई और वतन वापसी की अपील की है। बेहतर भविष्य और परिवार का पेट पालने की उम्मीद में पश्चिम अफ्रीकी देश सेनेगल गए बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के रहने वाले उमाशंकर कुमार वहां भीषण प्रताड़ना का शिकार हो गए हैं। डकार स्थित एक हैचरी कंपनी में उन्हें बंधक बनाकर रखा गया है, जहां न केवल उनका पासपोर्ट जब्त कर लिया गया है, बल्कि पिछले चार महीनों से वेतन भी नहीं दिया गया है। पीड़ित से हर रोज 12-12 घंटे जबरन काम कराया जा रहा है और विरोध करने पर गंभीर अंजाम भुगतने की धमकियां दी जा रही हैं। इस अमानवीय व्यवहार से परेशान होकर पीड़ित के परिजनों ने भारत सरकार से उन्हें तुरंत सुरक्षित स्वदेश वापस लाने की गुहार लगाई है। झांसे में लेकर कराया गया कम वेतन का एग्रीमेंट पीड़ित उमाशंकर कुमार मुजफ्फरपुर जिले के कुढ़नी प्रखंड के अंतर्गत आने वाले कोठिया गांव के निवासी हैं। विदेश जाने से पहले वे हरियाणा की एक हैचरी कंपनी में काम करते थे। वहीं पर उनकी मुलाकात नेपाल के एक युवक से हुई, जिसने उन्हें सेनेगल की राजधानी डकार में स्थित 'जय लक्ष्मी एसआरएल' नामक कंपनी में आकर्षक नौकरी का झांसा दिया। युवक ने उन्हें हर महीने 60,000 रुपये मानदेय देने के साथ-साथ रहने और खाने की मुफ्त सुविधा उपलब्ध कराने का वादा किया था। इस सुनहरे अवसर पर भरोसा करके उमाशंकर 17 मई को सेनेगल पहुंचे थे। हालांकि, वहां पहुंचते ही स्थिति बिल्कुल बदल गई। कंपनी प्रबंधन ने उन पर दबाव बनाकर जबरन 30,000 रुपये महीने का एक एग्रीमेंट साइन करवा लिया और उनका पासपोर्ट व वीजा भी छीन लिया। जानकारी के अनुसार, इस कंपनी का मालिक मूल रूप से भारत के उत्तराखंड राज्य का रहने वाला है। चार महीने से नहीं मिला वेतन, परिसर में कैद रहने को मजबूर सेनेगल पहुंचने के बाद से उमाशंकर को अमानवीय परिस्थितियों में रखा जा रहा है। परिजनों के मुताबिक, पिछले चार महीनों से उन्हें एक भी पैसा वेतन नहीं दिया गया है। कंपनी परिसर से बाहर जाने की पूरी तरह मनाही है और उन्हें कैद की स्थिति में रखा गया है। कई बार उन्हें भरपेट भोजन तक नसीब नहीं होता और केवल पाव-रोटी व कोल्ड ड्रिंक पीकर दिन गुजारना पड़ता है। जब भी उमाशंकर अपने काम के बदले वेतन मांगते हैं या भारत वापस लौटने की बात करते हैं, तो कंपनी प्रबंधन उन्हें बुरी तरह प्रताड़ित करता है। उन्हें मारपीट करने, भूखा रखने और स्थानीय जेल भिजवाने की धमकियां दी जाती हैं। फरवरी में बेटी की शादी, तैयारियों पर लगा अड़ंगा उमाशंकर ने अपने घर की कमजोर आर्थिक स्थिति को सुधारने और बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए विदेश जाने का कठिन फैसला लिया था। उनकी पत्नी चांदनी देवी ने बताया कि आगामी फरवरी महीने में उनकी बड़ी बेटी की शादी तय है। घर के मुख्य कमाने वाले सदस्य के विदेश में फंस जाने के कारण शादी की सभी तैयारियां पूरी तरह ठप पड़ गई हैं। चांदनी देवी इस समय बेहद मुश्किल दौर से गुजर रही हैं। वे सिलाई-कढ़ाई का काम करके और लोगों से कर्ज लेकर किसी तरह अपने बच्चों का पेट पाल रही हैं। पति की सलामती और उनकी स्वदेश वापसी को लेकर पूरा परिवार गहरे तनाव में है। केंद्रीय मंत्री ने विदेश मंत्रालय से की कूटनीतिक हस्तक्षेप की मांग मामला सामने आने के बाद स्थानीय सांसद और केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री डॉ. राजभूषण चौधरी ने इस पर संज्ञान लिया है। उन्होंने विदेश मंत्रालय को औपचारिक पत्र भेजकर सेनेगल में फंसे भारतीय नागरिक को बचाने के लिए तुरंत कूटनीतिक कदम उठाने की मांग की है। केंद्रीय मंत्री ने विदेश राज्य मंत्री से सीधी वार्ता कर उमाशंकर की सुरक्षा और उनकी तत्काल वापसी सुनिश्चित करने का आग्रह किया है। इसके साथ ही उन्होंने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर भरोसा दिलाया है कि सेनेगल स्थित भारतीय दूतावास के जरिए उमाशंकर की सुरक्षित वतन वापसी के लिए हर संभव कूटनीतिक प्रयास किए जा रहे हैं। इसका आप पर असर यह घटना विदेश में नौकरी की तलाश करने वाले भारतीय कामगारों के सामने मौजूद गंभीर जोखिमों और फर्जी एजेंटों के खतरों को रेखांकित करती है। • भारत में: खाड़ी और अफ्रीकी देशों में काम करने जाने वाले श्रमिकों को केवल पंजीकृत भर्ती एजेंसियों (ई-माइग्रेट पोर्टल) के माध्यम से ही एग्रीमेंट करना चाहिए। बिना कानूनी दस्तावेज सत्यापित कराए विदेश जाने पर वित्तीय धोखाधड़ी और बंधक बनने का खतरा रहता है। • बिहार में: मुजफ्फरपुर और राज्य के अन्य ग्रामीण क्षेत्रों के निवासियों को अनधिकृत बिचौलियों के झांसे में आने से बचना चाहिए। किसी भी विदेशी नौकरी का प्रस्ताव स्वीकार करने से पहले जिला प्रशासन या विदेश मंत्रालय के मदद केंद्र से पुष्टि जरूर करनी चाहिए। ऐसा क्यों हुआ यह संकट एक अनधिकृत नेटवर्क द्वारा दिए गए झूठे वादों और विदेश पहुंचने के बाद कर्मचारी के अधिकारों के हनन के कारण उत्पन्न हुआ है। • फर्जी वादे: हरियाणा में मिले एक नेपाली बिचौलिए ने 60,000 रुपये वेतन और मुफ्त भोजन-आवास का लालच देकर उमाशंकर को सेनेगल जाने के लिए प्रेरित किया। • दस्तावेजों की जब्ती: 17 मई को सेनेगल पहुंचते ही कंपनी ने पासपोर्ट और वीजा जब्त कर लिया, जिससे पीड़ित कानूनी तौर पर वहां फंस गए। • सख्त शर्तों पर दबाव: प्रबंधन ने दबाव बनाकर 30,000 रुपये के आधे वेतन पर नया एग्रीमेंट कराया और जबरन 12 घंटे काम कराना शुरू कर दिया। सवाल-जवाब 1. सेनेगल में फंसे भारतीय नागरिक का क्या नाम है और वे कहां के रहने वाले हैं? पीड़ित का नाम उमाशंकर कुमार है, जो बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के कुढ़नी प्रखंड स्थित कोठिया गांव के निवासी हैं। 2. उमाशंकर सेनेगल कैसे पहुंचे थे? हरियाणा में काम करने के दौरान उनकी मुलाकात नेपाल के एक युवक से हुई थी, जिसने सेनेगल की 'जय लक्ष्मी एसआरएल' कंपनी में 60,000 रुपये महीने का झांसा दिया था। इसके बाद वे 17 मई को सेनेगल गए थे। 3. सेनेगल में उमाशंकर के साथ क्या-क्या प्रताड़ना हो रही है? वहां उनका पासपोर्ट व वीजा जब्त कर लिया गया है, 4 महीने से वेतन नहीं दिया गया है और रोजाना 12 घंटे जबरन काम कराया जा रहा है। विरोध करने पर मारपीट और जेल भेजने की धमकियां दी जा रही हैं। 4. उनकी वापसी के लिए सरकारी स्तर पर क्या कदम उठाए गए हैं? स्थानीय सांसद और केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. राजभूषण चौधरी ने विदेश मंत्रालय को पत्र लिखकर और विदेश राज्य मंत्री से बात करके दूतावास के जरिए सुरक्षित वापसी की मांग की है। https://trendkia.com/bihar/pashchima-aphriki-desha-senegal-men-phnse-muzaffarpur-ke-uma-shankar-dutavasa-se-madada-aura-vatana-vapasi-ki-guhara-30792 TrendKia — Har trend, sabse pehle.