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  "title": "पटना में बाढ़ का विकराल रूप, बिंद टोली जलमग्न होने से डेढ़ हजार परिवार सड़क पर रहने को विवश",
  "summary": "बिहार की राजधानी पटना के दीघा इलाके में गंगा का पानी घुसने से लगभग पंद्रह सौ परिवार बेघर हो गए हैं। गांधी घाट पर जलस्तर ने वर्ष 2016 का पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया है और राज्य के बारह जिलों में बाढ़ जैसे हालात हैं।",
  "content": "बिहार की राजधानी पटना के कई इलाके इन दिनों बाढ़ की भयंकर विभीषिका झेल रहे हैं। पटना के दीघा स्थित बिंद टोली में गंगा नदी का पानी आवासीय इलाकों में भर जाने के कारण लगभग 1500 परिवार पूरी तरह बेघर हो गए हैं। हालात यह हैं कि ये सभी पीड़ित परिवार अब जेपी गंगा पथ के किनारे पॉलीथिन और त्रिपाल के सहारे टेंट लगाकर गुजर-बसर करने को मजबूर हैं। जानकारी के मुताबिक, वर्ष 2026 में बिहार सरकार ने जेपी सेतु के निर्माण कार्य के चलते इन परिवारों को उनकी पुरानी जमीन के बदले इस जगह पर बसाया था। हालांकि, यह इलाका सड़क की सतह से काफी नीचा है और गंगा नदी के बिल्कुल करीब स्थित है, जिस वजह से जलस्तर में थोड़ी भी बढ़ोतरी होते ही हर साल यहां पानी भर जाता है।\n\n \n\nथर्मोकोल की नाव बनी लाइफलाइन और प्रशासन पर उठे सवाल\n बिंद टोली के अधिकांश घरों के भीतर तक बाढ़ का पानी पहुंच चुका है, जिससे लोगों का कीमती घरेलू सामान और राशन पानी में डूब गया है। स्थानीय निवासी किसी तरह अपना थोड़ा-बहुत बचा हुआ सामान लेकर मुख्य सड़क पर पहुंचे और वहीं तंबू गाड़कर रहने लगे। प्रभावित लोगों का आरोप है कि सरकार की ओर से भोजन की जो व्यवस्था की गई है, वह काफी विलंब से पहुंचता है और खाने की गुणवत्ता भी बेहद खराब है। जिन लोगों के मकान थोड़े ऊंचे स्थान पर बने हैं, उनके घरों के चारों तरफ पानी भरा हुआ है। ऐसे में आवागमन के लिए स्थानीय लोगों ने खुद ही थर्मोकोल के टुकड़ों से देसी जुगाड़ वाली नाव तैयार की है, जिसके सहारे वे लोग किसी तरह मुख्य सड़क तक आ-जा पा रहे हैं।\n\n \n\nगांधी घाट पर गंगा ने तोड़ा पुराना रिकॉर्ड\n पटना के गांधी घाट पर गंगा नदी का जलस्तर बढ़कर 50.57 मीटर के खतरे के निशान को पार कर गया है, जिसने साल 2016 में दर्ज किए गए 50.52 मीटर के पिछले उच्चतम जलस्तर के आंकड़े को पीछे छोड़ दिया है। इस आपदा से पूरे बिहार के 12 जिलों के 70 प्रखंड और कुल 368 पंचायतें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं, जहां दूर-दूर तक बाढ़ का पानी फैला हुआ है। गंगा के अलावा पुनपुन, गंडक, कोसी और बागमती जैसी कई अन्य नदियां भी राज्य में कई जगहों पर लाल निशान यानी खतरे के स्तर से ऊपर बह रही हैं।\n\n \n\nबिहार के कई जिलों में तबाही का मंजर\n लगातार हो रही भारी बारिश के कारण सूबे की प्रमुख नदियां उफान पर हैं और सामान्य जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। पटना जिले में ही पुनपुन नदी का पानी खतरे के स्तर से ऊपर बहने के बाद कई नए इलाकों में फैल गया है। इसके अलावा वैशाली जिले के हाजीपुर में भी गंडक नदी का जलस्तर बढ़ने से कई घनी आबादी वाले आवासीय क्षेत्र जलमग्न हो गए हैं। मुंगेर जिले की बात करें तो वहां गंगा नदी पहले ही खतरे के निशान से 50 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है, जिससे हालात लगातार बद से बदतर होते जा रहे हैं और नदी के बढ़ते पानी के साथ स्थानीय नागरिकों की मुसीबतें भी बढ़ती जा रही हैं।\n\nइसका आप पर असर\nबिहार के कई जिलों में आई इस भयंकर बाढ़ का सीधा असर आम नागरिकों की आजीविका, सुरक्षित आवास और दैनिक आवागमन पर पड़ा है।\n\n• भारत में: देश के अन्य हिस्सों से बिहार के बाढ़ प्रभावित इलाकों की यात्रा करने वाले यात्रियों को सड़क मार्ग बंद होने और परिवहन व्यवस्था चरमराने के कारण भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।\n\n• पटना में: पटना के दीघा और आसपास के निचले इलाकों में रहने वाले नागरिकों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर शरण लेनी पड़ रही है क्योंकि उनके घर पानी में डूब चुके हैं।\n\n• दैनिक जीवन: हजारों विस्थापित परिवारों को भोजन, पेयजल और बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे प्रशासन पर राहत कार्यों में तेजी लाने का दबाव बढ़ गया है।\n\n• यातायात: मुख्य सड़कों के किनारे टेंट लगने और जलभराव के कारण स्थानीय स्तर पर आवाजाही बाधित हुई है, जिससे रोजाना सफर करने वाले लोगों को लंबे रूट का इस्तेमाल करना पड़ रहा है।\n\n• सुरक्षा: उफनती नदियों के किनारे बसे इलाकों में जलस्तर लगातार बढ़ने से जनजीवन और मवेशियों की सुरक्षा पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. पटना के किस इलाके में बाढ़ से सबसे अधिक परिवार बेघर हुए हैं?\nपटना के दीघा स्थित बिंद टोली में गंगा का पानी घुसने से करीब 1500 परिवार बेघर हुए हैं।\n\n2. विस्थापित परिवार वर्तमान में कहां रहने को मजबूर हैं?\nपीड़ित परिवार जेपी गंगा पथ के किनारे टेंट और त्रिपाल लगाकर रहने को मजबूर हैं।\n\n3. गांधी घाट पर गंगा नदी का जलस्तर कितना पहुंच गया है?\nगांधी घाट पर गंगा नदी का जलस्तर 50.57 मीटर तक पहुंच गया है, जो 2016 के रिकॉर्ड से अधिक है।\n\n4. इन परिवारों को दीघा में कब और क्यों बसाया गया था?\nवर्ष 2026 में जेपी सेतु निर्माण के दौरान जमीन के बदले बिहार सरकार ने इन्हें यहां विस्थापित किया था।\n\n5. बाढ़ पीड़ितों के आने-जाने के लिए क्या साधन बन रहा है?\nस्थानीय लोग थर्मोकोल से खुद नाव बनाकर मुख्य सड़क तक आने-जाने का जुगाड़ कर रहे हैं।\n\n6. बिहार के कितने जिलों और प्रखंडों में बाढ़ का पानी फैला है?\nबिहार के 12 जिलों के 70 प्रखंडों और 368 पंचायतों में बाढ़ का पानी फैला हुआ है।\n\n7. गंगा के अलावा कौन सी अन्य नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं?\nगंगा के अलावा पुनपुन, गंडक, कोसी और बागमती नदियां भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं।\n\n8. मुंगेर में गंगा नदी किस स्थिति में बह रही है?\nमुंगेर में गंगा नदी वर्तमान में खतरे के निशान से 50 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है।",
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  "category": "बिहार",
  "publishedAt": "2026-09-07",
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